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Showing posts from March, 2020

भारत

      वैश्विक महामारी ने यूरोपियन इकोनामिक सिस्टम व भारत में प्रचलित आदिकाल से स्थापित जाति व्यवस्था की पूरी पोल खोल करके रख दी।   जब हजारों हजार लोग सर पर गठरी और बॉक्स ला दे बड़े-बड़े महानगरों से आहें भरते अपने गांव की तरफ पलायन कर रहे थे।इस करुण दशा के लिए ब्रिटिशर्स ने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स की सिद्धांतों को आगे बढ़ाते हुए हमारी आदिकाल से प्रचलित इस सहजीवन की प्राकृतिक और श्रेष्ठ व्यवस्था को तहस-नहस करके हमें रोड पर ला दिया दिया।घृणा द्वेष और वैमनस्य के बीजों को डालकर तोड़ो और राज करो की नीति पर आज भी यह मॉडल भारत को बर्बाद कर रहा है और भारत के लोगों का आनंद और उत्सव को छीन कर दुख निराशा और हताशा के जीवन में डूबा रहा है आप फिल्म का यह गाना याद करें   हमरी न मानों रंगरेजवा से पूँछो : कहाँ मर बिला गयी रंगरेज जाति हमरी न मानों रंगरेजवा से पूँछो जिसने गुलाबी रंग दीना दुपट्टा मेरा : कहाँ बिला गया वो रंगरेज ? How The Fluid Indian "Jaat Pratha" was changed into Alien / European Rigid Caste System : Part- 3 "मॉडर्न caste सिस्टम एक सनकी रेसिस्ट ब्रिटिश ऑफीसर ...

करोना इलाज में एलोपैथिक चिकित्सा के साथ भारतीय चिकित्सा पद्धति कोअनदेखा नहीं किया जा सकता

          अब इतना तो स्पष्ट हो चुका है कि कोरोना का विषाणु सम्पर्क से फैलता है, इक्यूबेशन काल 14 दिन नहीं 4 दिन है, यह पहले से प्रकृति में है। सबसे महत्व की बात है कि इसका आवरण मेद (फैट) से बना है और भीतर इसका आर.ऐन.ए. सुरक्षित है। पिछले वर्षों के प्राप्त आँकड़ों के अनुसार इसकी मृत्युदर 0.1% रही है। इन्फ्ल्यूएंजा जैसे रोगों से इटली में हर साल लगभग 20,000 लोग मरते हैं। इस वर्ष भी यह दर इसी के आसपास रहेगी। अमेरीका में हर वर्ष ऐसे रोगों से औसतन 60,000 लोग मरते हैं। इस वर्ष भी मृत्यदर इतनी ही रहनी है। कोरोना नामक इस विषाणु से संसार में लोग पहले भी ग्रसित होते थे। फिर कोरोना का इतना भय क्यों है? इसपर विचार करने की आवश्यकता है। इस आशंका को नकारा नहीं जासकता कि पड़ौसी देश चीन ने "जैविक हथियार" के रूप में इसका प्रयोग किया हो। अतः आतंकित हुए बिना इससे बचाव के उपाय किये जाने चाहियें। सरकार के साथ हमें पूरा सहयोग करना चाहिये। यह रोग निश्चित रूप से असाध्य नहीं, मारक नहीं है। हमारे अनेक वर्षों के अनुभवों के अनुसार कोरोना से मृत्यु का प्रमु...

कोरोना अंत नहीं, आरम्भ है , एक नए युद्ध का जिसमें आपकी हार निश्चित है

          तो भैया कर ली तरक्की , जीत लिए देश , कर ली औद्योगिक क्रान्ति कमा लिए पेट्रो डॉलर , बना लिए मॉल्टी नेशनल कारपोरेशन , कर लिया जिहाद , बन गए सुपर पावर या अब भी कुछ बाकी है ? एक सूक्ष्म से परजीवी ने आपको घुटनों पर ला दिया ? न एटम बम काम आ रहे न पेट्रो रिफाइनारी ? आपका सारा विकास एक छोटे से जीवाणु से सामना नहीं कर पा रहा ?? क्या हुआ , निकल गयी हेकड़ी ?? बस इतना ही कमाया था इतने वर्षों में ? कि एक छोटे से जीव ने घरो में कैद कर दिया ??? मध्य युग में पूरे यूरोप पे राज करने वाला रोम ( इटली ) नष्ट होने के कगार पे आ गया , मध्य पूर्व को अपने कदमो से रोदने वाला ओस्मानिया साम्राज्य ( ईरान , टर्की ) अब घुटनो पर हैं , जिनके साम्राज्य का सूर्य कभी अस्त नहीं होता था , उस ब्रिटिश साम्राज्य के वारिश बर्मिंघम पैलेस में कैद हैं , जो स्वयं को आधुनिक युग की सबसे बड़ी शक्ति समझते थे , उस रूस के बॉर्डर सील हैं , जिनके एक इशारे पर दुनिया क नक़्शे बदल जाते हैं , जो पूरी दुनिया के अघोषित चौधरी हैं , उस अमेरिका में लॉक डाउन हैं और जो आने वाले समय में सबको निग...

चीन का बुहान शहर ही क्यों प्रभावित हुआ जबकि चिटी चमगादर पूरे देश में खाया जाता है

टिक टिक कौन तेरी मौत !! ये केवल एक डायलॉग नही है , बल्कि चीन ने पूरे विश्व पर दस्तक दी है , मैं कांस्पिरेसी थ्योरी कभी नही लिखता न मुझे विश्वास होता है , पर आज मैं बस कुछ महत्वपूर्ण बिंदु रख रहा जो कहीं न कहीं मन में शक पैदा कर रहें हैं , मैं नकारता हूँ हर तरह की कांस्पिरेसी थ्योरीज को पर इस बार मेरा मन कुछ अलग दिशा में जा रहा , इसको कुछ ऐसे समझिए चीन का वुहान शहर जो हुबई प्रांत की राजधानी है , 2018 में ही china daily ने ट्वीट किया और कहा यहाँ एशिया की सबसे बड़ी वायरोलॉजी बैंक है जहाँ 1500 से अधिक वायरस स्ट्रेन सरंक्षित किये गए हैं । सबसे पहले नवम्बर 2019 में यहाँ आउटब्रेक हुआ , चीन ने छुपा लिया और उन डॉक्टरों के खिलाफ कारवाई की जिन्होंने इसका पता लगाया था । चमगादड़ का सूप तो पूरे चीन में पिया जाता है , एपीसेन्टर वुहान ही क्यों हुआ ? और अगर ये जानवरो से आया तो जानवरों पर इसका कोई असर क्यों नही है और अब तक ये भी नही पता है ये किस तरह के खान पान से फैला ? क्या ये बहुत बड़ी बात है पता करना ? दुनिया भर में बायोलॉजिकल वेपन बनाने पे बैन है पर हर सुपरपावर देश ये करता है , अमेर...

एक परिवार जिसने पूरी दुनिया को गुलाम बना रखा है

                 विश्व को गुलाम बनाने के लिए एक नई विश्व व्यवस्था जिसे कुछ लोग न्यू वर्ल्ड ऑर्डर के रूप में जानते हैं               क्या🌐 दुनिया राॅथस्चाइल्ड की गुलाम है?🤔:-       जी हां ठीक सुना आपने हम सभी और यह पूरी दुनिया आज राॅथस्चाइल्ड नाम के परिवार के कब्जे में है। कैसे चलिए आपको पहले राॅथस्चाइल्ड से मिलावाता हूं। कौन है ये राॅथस्चाइल्ड फैमिली और कैसे आज पूरी दुनिया इसके कब्जे में है।                                                 राॅथ्सचाइल्ड वंश (Rothschild family)एक विश्वप्रसिद्ध व्यापारिक वंश है जिसने १७६० के दशक में बैंक का कारोबार स्थापित किया जो काफी फला-फूला। जर्म...

करोना नरभछियों का पर्दाफाश भारतीय संस्कृत को सिद्धि मिली

अभी तक ऐसा कोई प्रूफ नही मिला जो ये सिद्ध करता हो कि #COVID_19 वायरस जो वुहान से शुरू हुआ हो वो चमगादड़ या सांप से मनुष्य में आया हो। लेकिन एक भारतीय वैज्ञानिक ने इसमें पाया कि ये सार्स वायरस में एड्स का वायरस आर्टिफिशियल तरीके से म्युटेट किया गया है। सार्स को कनाडा की लैब से चोरी करके वुहान में मॉडिफाई किया गया। इसमें एक हार्वर्ड का टॉप नैनोबायोकेमिस्ट भी इन्वॉल्व था जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अभी जयपुर के तीन मरीज जो ठीक हुए उन्हें anti-HIV, लोपिनाविर और रिटोनाविर और फ्लू की दवा के कॉम्बिनेशन दिए। थाईलैंड ने भी इसी दवा से ठीक होने की बात बताई। इससे साबित हो रहा है कि लैब में बनाया गया एक वायरस है जो बायोलॉजिकल वेपन के लिए था और गलती से लीक हुआ। लेकिन चीन व अमेरिका के प्रभाव से UN इस पर कुछ नही बोल रहा है। चीन का साथी रूस उसे बचाने के लिए अमेरिका की साज़िस बता रहा है। और वामपंथियों को ये थ्योरी ज्यादा अच्छी लग रही है। क्योंकि उन्हें वामपंथ को बचाना है। इसलिए कभी फार्मा कंपनियों की साज़िस बताते है और कभी चमगादड़ को दोष देते है और कभी किसीको । लेकिन चीन का दोष एक बार भी...

हिन्दू सबसे बड़ी गलती तब करतें है जब इन क्रिप्टो-क्रिश्चियन्स को वामी, कम्युनिस्ट, मार्क्सिस्ट, सेक्युलरवादी बोलतें है

     यह क्रिप्टो क्रिस्चियन क्या है  है? इसके हजारों उदाहरण दे सकता हूं। ग्रीक भाषा मे क्रिप्टो शब्द का अर्थ हुआ छुपा हुआ या गुप्त; क्रिप्टो-क्रिस्चियन (crypto-christi an) का अर्थ हुआ गुप्त-ईसाई। इसमें महत्वपूर्ण बात ये है कि क्रिप्टो-क्रिस्चियन कोई गाली या नकारात्मक शब्द नहीं हैं। क्रिप्टो-क्रिस्चियानिटी ईसाई धर्म की एक संस्थागत प्रैक्टिस है। क्रिप्टो-क्रिस्चियनिटी के मूल सिद्धांत के अंर्तगत क्रिस्चियन जिस देश मे अल्पसंख्यक होतें है वहाँ वे दिखावे के तौर पर तो उस देश के ईश्वर की पूजा करते है, वहाँ का धर्म, रिवाज़ मानतें हैं जो कि उनका छद्मावरण होता है, पर वास्तव में अंदर से वे ईसाई होते हैं और निरंतर ईसाई धर्म का प्रसार करते रहतें है। जिस तरह इस्लाम का प्रचार तलवार के बल पर हुआ है वैसे ही ईसाईयत का प्रचार 2 निम्नलिखित बुनियादी सिद्धांतों पर हुआ है. 1) Defiling other Gods यानी दूसरे धर्म के ईश्वर, प्रतीकों की गरिमा भंग करो। 2) Soul Harvesting यानी दूसरे की कमजोरियों, दुखों, मजबूरियों का फायदा उठाओ। क्रिप्टो-क्रिश्चियन्स स्थानीय छद्मावरण में रहते ...

भारत ने वह आविष्कार भुलाया जिसने पूरी दुनिया और आधुनिक विज्ञान को दिशा दीया

     हमारे भारतीय ऋषि-मुनियों और वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे आविष्कार किए और सिद्धांत गढ़े हैं कि जिनके बल पर ही आज के आध ‍ ुनिक विज्ञान और दुनिया का चेहरा बदल गया है। सोचिए 0 (शून्य) नहीं होता तो क्या हम गणित की कल्पना कर सकते थे? दशमलव (.) नहीं होता तो क्या होता? इसी तरह भारत ने कई मूल आविष्कार और सिद्धांतों की रचना की। आइए जानते हैं, उनमें से खास 10 आविष्कार जिन्होंने बदल दी दुनिया। अगले पन्ने पर पहला आविष्कार... 1● विमान : इतिहास की किताबों और स्कूलों के कोर्स में पढ़ाया जाता है कि विमान का आविष्कार राइट ब्रदर्स ने किया, लेकिन यह गलत है। हाँ, यह ठीक है कि आज के आधुनिक विमान की शुरुआत ओरविल और विल्बुर राइट बंधुओं ने 1903 में की थी। लेकिन उनसे हजारों वर्ष पूर्व ऋषि भारद्वाज ने विमानशास्त्र लिखा था जिसमें हवाई जहाज बनाने की तकनीक का वर्णन मिलता है। चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में महर्षि भारद्वाज द्वारा लिखित ‘वैमानिक शास्त्र’ में एक उड़ने वाले यंत्र ‘विमान’ के कई प्रकारों का वर्णन किया गया था तथा हवाई युद्ध के कई नियम व प्रकार बताए गए थे। ‘गोधा’ ऐसा...

होली रंगोत्सव के साथ गुरुकुल में प्रवेशउत्सव, अब इंतजार की घड़ियां खत्म

  अंधकार को क्यों धिक्कारें। है अच्छा है एक दीप जलाएं।। गुरुकुल में प्रवेश का इंतजार खत्म रंगोत्सव के साथ प्रवेशउत्सव भी होली के रंग, आनंद और उत्सव शुभ अवसर पर आपको यह सूचना देते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि गुरुकुलों की श्रृंखला जो अंग्रेजों द्वारा तोड़ी गई थी उसे पुनः स्थापित करने की एक संकल्प से अब सिद्धि प्राप्त करने की शुरूआत पहले ही तमिलनाडु आंध्र कर्नाटक महाराष्ट्र गुजरात राजस्थान मैं चुकी है अभी आने वाले समय में ऐसे सैकड़ों गुरुकुलों की एक श्रृंखला शुरू होने जा रही है अभी तत्काल में तंजावूर तमिलनाडु , साबर्ण गुरुकुल गोरखपुर यूपी,भोपाल मध्य प्रदेश, गुड़गांव हरियाणा, वलसाड गुजरात, नवप्रभात गुरुकुल  नुआपाली बरगढ़ उड़ीसा और नरसिंहपुर मध्यप्रदेश में अपने बच्चों का गुरुकुल में प्रवेश हेतु केवल कुछ सीटें उपलब्ध है जैसा कि आप जानते हैं जो गुरुकुल चल रहे हैं पहले से उसमें 200 से लेकर हजार तक की वेटिंग चल रही है अभी जो गुरुकुल में संभावना है उसकी सूची ऊपर दी गई है यदि कोई हिन्दू भाई, अपने पुत्र को नरसिंहपुर मध्य प्रदेश के ओम अष्टांग जीवन दर्शन गुरुकुलम् में पढ़ाना च...

छत्रपति संभाजी महाराज का वह बलिदान जिससे भारत अपने धर्म को बचा पाया

छत्रपति संभाजी राजे महाराज. विदेशी पुर्तगालियों को हमेशा उनकी औकात में रखने वाले सम्भाजी को धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बन गए हिन्दुओं का शुद्धिकरण कर उन्हें फिर से स्वधर्म में शामिल करने वाले, एक ऐसे राजा जिन्होंने एक स्वतंत्र विभाग की ही स्थापना इस उद्देश्य हेतु की थी. जन्म - 14 मई सन 1657 ई. राज्याभिषेक पर्व - 16 जनवरी सन 1681 ई. बलिदान पर्व - 11 मार्च सन 1689 ई. हिन्दुस्थान में हिंदवी स्वराज एवं हिन्दू पातशाही की गौरवपूर्ण स्थापना करने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के जयेष्ठ पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज का जन्म 14 मई सन 1657 ई. को पुरंदर गढ पर हुआ. छत्रपति संभाजी के जीवन को यदि चार पंक्तियों में संजोया जाए तो यही कहा जाएगा कि - "देश धरम पर मिटने वाला, शेर शिवा का छावा था, महा पराक्रमी परम प्रतापी, एक ही शंभू राजा था." संभाजी महाराज का जीवन एवं उनकी वीरता ऐसी थी कि उनका नाम लेते ही औरंगजेब के साथ तमाम मुगल सेना थर्राने लगती थी. संभाजी के घोड़े की टाप सुनते ही मुगल सैनिकों के हाथों से अस्त्र-शस्त्र छूटकर गिरने लगते थे. यही कारण था कि छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद भी संभ...

न दवा बनी ना इलाज पर कंपनियां मालामाल यह करोना का कमाल

     करोना वायरस का आतंक पूरे दुनिया में एक दहशत और डर के साए में जीने को अभिशप्त समाज एक तरफ दूसरी तरफ समाज के नराधम राक्षस इसे एक मौका पाकर समाज की डकैती  डालकर अपनी तिजोरी भरने में जुटे हुए हैं बहुत सारे लोग केवल यहां तक तो सोच पा रहे हैं पर इसके आगे भी एक वृहद षड्यंत्र है जो शायद लोगों को अभी उस एंगल या उस दृष्टि से देखने का संपूर्ण दृष्टि सामान्य समाज में भी नहीं दिख रहा है यह दहशत हर चार-पांच साल में बनाया जाता है या तैयार किया जाता है जब संपूर्ण समाज लूट जाता है तब यह दहशत समाप्त हो जाता है एक बनावटी दहशत है मीडिया houses  Who एवं कारपोरेट multinational company की मिली भगत से यह दहशत का धंधा खूब फल फूल रहा है ।    इस बार इन कंपनियों ने अपना एक्शन प्लान बदल दिया है  पहले यह कंपनियां अपना दवा तैयार कर लेती थी फिर मीडिया के माध्यम से इसे फैलाती थी  यानी तुंही ने दर्द दिया हे तुंही दवा दोगे इस पैटर्न पर काम करती थी और दवा पेटेंट भी कराती थी दोनों काम साथ साथ चलता था और दबा के माध्यम से इसे केवल लूटती थी  ...