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चीन का बुहान शहर ही क्यों प्रभावित हुआ जबकि चिटी चमगादर पूरे देश में खाया जाता है

टिक टिक कौन तेरी मौत !! ये केवल एक डायलॉग नही है , बल्कि चीन ने पूरे विश्व पर दस्तक दी है , मैं कांस्पिरेसी थ्योरी कभी नही लिखता न मुझे विश्वास होता है , पर आज मैं बस कुछ महत्वपूर्ण बिंदु रख रहा जो कहीं न कहीं मन में शक पैदा कर रहें हैं , मैं नकारता हूँ हर तरह की कांस्पिरेसी थ्योरीज को पर इस बार मेरा मन कुछ अलग दिशा में जा रहा , इसको कुछ ऐसे समझिए चीन का वुहान शहर जो हुबई प्रांत की राजधानी है , 2018 में ही china daily ने ट्वीट किया और कहा यहाँ एशिया की सबसे बड़ी वायरोलॉजी बैंक है जहाँ 1500 से अधिक वायरस स्ट्रेन सरंक्षित किये गए हैं । सबसे पहले नवम्बर 2019 में यहाँ आउटब्रेक हुआ , चीन ने छुपा लिया और उन डॉक्टरों के खिलाफ कारवाई की जिन्होंने इसका पता लगाया था । चमगादड़ का सूप तो पूरे चीन में पिया जाता है , एपीसेन्टर वुहान ही क्यों हुआ ? और अगर ये जानवरो से आया तो जानवरों पर इसका कोई असर क्यों नही है और अब तक ये भी नही पता है ये किस तरह के खान पान से फैला ? क्या ये बहुत बड़ी बात है पता करना ? दुनिया भर में बायोलॉजिकल वेपन बनाने पे बैन है पर हर सुपरपावर देश ये करता है , अमेरिका भी, रूस भी और चीन भी , शायद भारत भी । चीन और यूरोप का बहुत अधिक आवागमन है , उतना एयर ट्रैफिक भारत चीन का नही है , कुछ लोग कह रहे कि सरकार ने वुहान से भारतीय नागरिकों को लायी और अन्य देशों से भी इसीलिए ऐसा हुआ ऐसा नही है वो भी अपने ही हैं जो वहाँ हैं , उनको निकालना हमारा धर्म है , वो लावारिस या अनाथ नही हैं , उनके साथ उनका देश तो रहेगा ही , यहाँ उनका परिवार है घर है , माँ बाप हैं , ऐसे डर के अपने ही लोगो को छोड़ देना कायरता होती है । अपने यहाँ वायरस यूरोप और मिडिल ईस्ट से आया , क्योंकि भारत का एयर ट्रैफिक सबसे अधिक अमेरिका यूरोप मिडिल ईस्ट से है । लोगो ने खुद को आइसोलेट नही किया और भारत मे भी वायरस फैल गया , सरकार की गाइडलाइन्स को किसी ने फॉलो ही नही किया । जब तक वायरस अमेरिका नही पहुँचा ट्रम्प इसको फ्लू बताते रहे , इंग्लैंड ने herd immunity का चरस बो दिया और मार्च के महीने में भी उनके एयरपोर्ट्स पे कोई चेक नही था , इटली ने चाइनीज़ लोगो को गले लगा कर रेसिजम के ख़िलाफ़ लड़ाईं शुरू की , बड़ी बड़ी बातें और आदर्श केवल सुनने में अच्छे लगते हैं , उनको फॉलो करके मानवता का भला कभी नही हो सकता , क्योंकि मानव हिंसक पशु होता है , जब जब महामारी आती है मनुष्य की मनुष्यता मर जाती है , आजादी के पहले बंगाल में जब महामारी हुई थी , हड्डियों को पीस कर आटे में मिला कर बेचा गया था । अभी हाल में ही एक पूरी फैक्ट्री ही सीज हुई जहाँ नकली सैनिटाइजर बन रहा था , आप महामारी के बारे में कुछ नही जानते । इसकी भयावहता अगर आप देख लें अगर आप जिंदा बचे तो पूरी जिंदगी डिस्टर्ब रहेंगे , नींद नही आएगी । जब वायरस अमेरिका पहुँचा , तो ट्रम्प में इसे चायनीज वायरस कहा , जिसके बाद चीन ने अमेरिकी पत्रकारों को देश से निकाल दिया । क्या ट्रम्प पागल है जो उसने इसे चायनीज वायरस कहा , कहीं न कहीं उनकी खूफिया एजेंसियों को इस बात की भनक लगी होगी । और फिर चीन का ऐसा व्यवहार चोर की दाढ़ी में तिनका ही है । चीन के एक उद्योगपति ने मदद की घोषणा की , सभी साउथ एशिया के देश उसमे सम्मलित थे सिवाय भारत के , जबकि इसी भारत ने चीन में कई टन मेडिकल सप्लाइज भेजी थीं । आप सोचिए चीन के यहाँ outbreak हुआ 81000 लोग संक्रमित हुए 3270 लोगो की मौत हुई , वहीं इटली में 59138 केस अब तक हुए हैं और 5476 मौतें हो गयी मौतों का आंकड़ा इटली में बहुत अधिक है , US में 35000 केस अब तक है और करीब 500 लोगो की मौत हुई है , मुझे नही पता भारत मे क्या होगा , कौन सी तबाही आएगी या हम कैसे लड़ेंगे कैसे जीतेंगे पर इतना कन्फर्म है , अगला हफ्ता हमारी किस्मत लिख देगा हमारे भाग्य में मौत का नँगा नाच है या हम इससे बच निकलते है ये आने वाले दिनों में ही कन्फर्म होगा । मुझे ये वायरस प्राकृतिक नही लगता , ये केवल मानवों में फैलता है और इतना तेज फैलता है जितना अन्य कोई नही , इतनी ताकत इस वायरस ने कैसे अर्जित की ? और तो और अगर ये प्राकृतिक होता तो जहाँ फैलता वही तक सीमित होता पर ये तो पूरे विश्व के जलवायु में जीवित है और न जीवित है बल्कि तबाही मचा रहा । हवा में भी यह जीवित रहता है घण्टो , आज ही WHO की रिपोर्ट है , कोई भी विकसित देश इससे निजात नही पा रहा , चीन में।पिछले 5 दिनों से कोई केस नही है , आज ही चीन के एक रेस्टोरेंट पर पोस्टर लगा " Congratulations on the epidemic in the US ! We wish the epidemic in dwarf Japan will last forever and ever " इतनी जहरीली सोच , सोचिए किसने ये पोस्टर लगाया होगा ? इस बात को भी अगर जाने दे कि ये किसी लोकल सिरफिरे का काम हो सकता है तो ग्लोबल टाइम्स का वो ट्वीट देखिये जिसमे वो कह रहे वायरस का स्ट्रेन इटली में नवम्बर में ही मिलना शुरू हो गया था , जहाँ लोगो ने निमोनिया की शिकायत की थी , इटली आज रो रहा है पूरे देश मे आपातकाल है , जिस देश मे एक व्यक्ति मर जाए तो बवाल हो जाता है वहाँ हजारों लोग रोज मर रहें और ग्लोबल टाइम्स क्या करता है ? वो प्रोपोगेंडा में लगा हुआ है , क्यों ? क्योंकि चोर की दाढ़ी में तिनका । भारत सरकार को चाहिए शहर के शहर सैनेटाइज हों , कर्फ्यू हो , आप बिलकुल अपने घरों से न निकलिए एक बार ये सब हो जाए तो चीन की जवाबदेही दुनिया को तय करनी होगी हमारी मीडिया और पोलिटिकल लीडरशिप को इसे चायनीज/वुहान वायरस कहना शुरू कर देना चाहिए । इन सारी बातों को भी इग्नोर कर दिया जाय तो भी इतने रहस्यमयी वायरस के फैलने के बाद चीन ने जानकारी छुपाई और इसे विश्व त्रासदी बना दिया अमेरिका से लेकर यूरोप तक , भारत तक हर दरवाजे पर मौत का ख़ौफ़ लिख दिया । साभार शिव

अब आप इस मौत के खौफ से बाहर आइए भारतीय पद्धति का के आधार से अपना बचाव करें    *अचूक आयुर्वेदिक उपचार जो कोरोना वायरस को जड़ से समाप्त कर देगा* इस समय सभी देश प्रभावित है कोरोना वायरस से लेकिन इस उपचार से गागर में सागर भर सकता है हमे पूर्ण विश्वास है। एक बार  संक्रमित व्यक्ति को इसका सेवन अवश्य कराएं।
1- *11 नग छोटी पीपल (पिप्पली)*
2- *21 नग तुलसी की पत्ती*
3- *10 ग्राम सफ़ेद सौंठ*
4- *5 ग्राम गिलोयसत*
इन सभी चीजो को चूर्ण बना के 300 ग्राम पानी में तब तक खौलने दे जब तक पानी की मात्रा 100 ग्राम तक न बचे। तदुपरांत उसको गुनगुना गर्म तक ठंडा होने दे। उसके बाद पी लेवे,ये सिर्फ एक खुराक दवा बनाने की quantity बताई है इसी प्रकार आपको सिर्फ 3 खुराक दवा का उपयोग करना है सुबह,दोपहर,शाम
*दवा उपयोग करने की विधि*
1- सुबह सूरज निकलने के व् नास्ता करने के 1 घंटे बाद
2 दोपहर में खाने के एक घंटे पहले या खाने के एक घंटे बाद
3-शाम को सूरज अस्त होने से खाने के एक घण्टे पहले ले सकते है। क्योकि सूरज अस्त होने के बाद संक्रमण वायरस सक्रीय रहते है जिससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभावी असर नही होगा।
लेकिन उपरोक्त बताये गए सही उपचार से हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जायेगी जिससे सारे संक्रमण वायरस के वैक्टीरिया एक से डेढ़ घण्टे में समाप्त होना शुरू हो जाएंगे दूसरे दिन ही व्यक्ति 70,80% स्वयं स्वस्थ हो महसूस करेगा
ध्यान रहे हमारे सनातनधर्म में ऋषि मुनियों  पूर्वजो द्वारा कहा गया है सूरज के सूर्यास्त से पहले या अस्त होने के बाद खाया गया भोज्य दूषित हो जाता है इसका वैज्ञानिक कारण ये है की सूरज की अल्ट्रासोनिक किरणों के प्रभाव में रहने पर हमारे शरीर के वैक्टीरिया वायरस या संक्रमण नष्ट हो जाते है
वही सूर्य अस्त होने के से वायरस संक्रमण अधिक प्रभावी होते है यही कारण है की सूर्य के अस्त या सूर्यास्त के पहले खाये गए भोज्य को दूषित कहा गया है। अजय कर्मयोगी 7984113987

Comments

Hindi devnagri in bold script very easy to read.Please post in same size letters.Thanks for awakening Indians.

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