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अव्यवहारिक अंग्रेजी कैलेंडर और अंग्रेजी गुलामी मानसिकता से आजादी के तिहत्तर साल के बाद भी क्यों नहीं निकल सकते

  अव्यवहारिक अभारतीय कॉल गणना से इन कथित आजादी के 73 साल बाद भी क्यों नहीं बाहर निकल पा रहे हैं। इसी का विश्लेषण और समग्र चिंतन आपके सामने रखने का प्रयास किया है जो शायद आपको इस गुलामी मानसिकता से बाहर निकलने में सहयोगी बने  “वर्ष" शब्द में एक भ्रम व एक तथ्य अन्तर्निहित है। तथ्य — ऋतुएँ एक निश्चित क्रम से आती हैं जिससे वर्ष नामक एक चक्र बनता है जिसका मान निर्धारित है। इस चक्र में आधारभूत 4 बिन्दु हैं अर्थात् इस चक्र के आरम्भ के 4 विकल्प हैं — 1. सबसे बड़ा दिन (इसी दिन से वर्ष/वर्षा का आरम्भ मनाया जाता था क्योंकि भारत“वर्ष" कृषिप्रधान था) 2. शरद् में दिन-रात की अवधि समान (कालान्तर में इसी दिन से वर्ष का आरम्भ मनाया जाने लगा क्योंकि यह पितृविसर्जन के निकटवर्ती था) 3. सबसे छोटा दिन (केरल आदि कुछ दक्षिणी प्रदेशों को छोड़कर इस दिन से कभी भी सम्पूर्ण भारतवर्ष में वर्ष का आरम्भ नहीं मनाया गया) 4. वसन्त में दिन-रात की अवधि समान (वैष्णवों व योरोपवासियों के प्रभाव से इस दिन से वर्ष का आरम्भ मनाया जाने लगा) भ्रम — एक वर्ष (ऋतुचक्र) में पृथ्वी सूर्य का एक परिक्रमण पूर्ण कर लेती है। पूर्...

शाहआलम, बहादुरशाह जफर अंतिम मुगल सल्तनत केवल लाल किले तक सिमटी थी पर चरणचाटू इतिहासकारों का कमाल आज लुटियन दिल्ली के रोड अंग्रेजों और मुगलों के महिमा में चार चांद लगा रहे हैं

मुगलिया सन्तनत में सबसे अधिक समय तक राज करने वाले बादशाहों में अकबर (50 वर्ष), औरँगजेब (49 वर्ष) के बाद शाह आलम (द्वितीय) का नाम आता है जिसने 1760 से 1806 तक लगभग 47 साल राज किया। शाह आलम अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर का दादा था। इतने लंबे समय तक राज करने वाले बादशाह के बारे में हम इतना कम इसलिए जानते हैं क्योंकि इसकी बादशाहत आज के दिल्ली क्षेत्र (पालम तक) से ज्यादा नहीं थी। देश पर अंग्रेज कब्जा कर चुके थे, या करते जा रहे थे। [बहादुर शाह जफर की सल्तनत लाल किले तक सीमित थी!] मुगलों के पतन की यह इंतिहा थी कि एक लुटेरे गुलाम हैदर ने 1788 में दिल्ली पर हमला कर उसे लूट लिया था। न केवल लूटा, बल्कि बादशाह शाह आलम को अपने हाथों अंधा बनाया। यह भी कम था, उसने तो बादशाह के बेटे, होने वाले बादशाह और बहादुर शाह जफर के अब्बा अकबर शाह द्वितीय(शासनकाल 1806-1837) को अपने सामने घुँघरू पहनाकर नचवाया। गद्दी की कितनी कीमत थी यह इसी से पता चलता है कि गुलाम हैदर ने उस अंधे बादशाह को सल्तनत चलाने के लिए जिंदा छोड़ दिया। लूटने आया था, लूट कर चला गया। इस लूट में बादशाह का दुर्लभ पुस्तकालय भी था। भारत के पहले ग...

बौद्धिक षड्यंत्रकारीयों में खलबली, सनातन धर्म की ऐतिहासिक आधार से

  आखिर कितना प्राचीन है हिन्दू धर्म...... आइये जानते हैं । कुछ लोग हिन्दू संस्कृति की शुरुआत को सिंधु घाटी की सभ्यता से जोड़कर देखते हैं। जो गलत है। वास्तव में संस्कृत और कई प्राचीन भाषाओं के इतिहास के तथ्यों के अनुसार प्राचीन भारत में सनातन धर्म के इतिहास की शुरुआत ईसा से लगभग 13 हजार पूर्व हुई थी अर्थात आज से 15 हजार वर्ष पूर्व। इस पर विज्ञान ने भी शोध किया और वह भी इसे सच मानता है। जीवन का विकास भी सर्वप्रथम भारतीय दक्षिण प्रायद्वीप में नर्मदा नदी के तट पर हुआ, जो विश्व की सर्वप्रथम नदी है। यहां पूरे विश्व में डायनासोरों के सबसे प्राचीन अंडे एवं जीवाश्म प्राप्त हुए हैं। संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है तथा समस्त भारतीय भाषाओं की जननी है। ‘संस्कृत’ का शाब्दिक अर्थ है ‘परिपूर्ण भाषा’। संस्कृत से पहले दुनिया छोटी-छोटी, टूटी-फूटी बोलियों में बंटी थी जिनका कोई व्याकरण नहीं था और जिनका कोई भाषा कोष भी नहीं था। भाषा को लिपियों में लिखने का प्रचलन भारत में ही शुरू हुआ। भारत से इसे सुमेरियन, बेबीलोनीयन और यूनानी लोगों ने सीखा। ब्राह्मी और देवनागरी लिपियों से ही दुनियाभर की अन्य लिपि...

गरूण का क्या रहस्य है? क्यों हिन्दू में उनको विशेष महत्व दिया जाता है

  # गरुड़_देव के ये आठ रहस्य पढ़कर आप रह जायेंगे आश्चर्यचकित!!!!!!!! # गरूड़_भगवान के बारे में सभी जानते होंगे। यह भगवान विष्णु का वाहन हैं। भगवान गरूड़ को विनायक, गरुत्मत्, तार्क्ष्य, वैनतेय, नागान्तक, विष्णुरथ, खगेश्वर, सुपर्ण और पन्नगाशन नाम से भी जाना जाता है। गरूड़ हिन्दू धर्म के साथ ही बौद्ध धर्म में भी महत्वपूर्ण पक्षी माना गया है। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार गरूड़ को सुपर्ण (अच्छे पंख वाला) कहा गया है। जातक कथाओं में भी गरूड़ के बारे में कई कहानियां हैं। माना जाता है कि # गरूड़ की एक ऐसी प्रजाति थी, जो बुद्धिमान मानी जाती थी और उसका काम संदेश और व्यक्तियों को इधर से उधर ले जाना होता था। कहते हैं कि यह इतना विशालकाय पक्षी होता था जो कि अपनी चोंच से हाथी को उठाकर उड़ जाता था। गरूढ़ जैसे ही दो पक्षी # रामायण_काल में भी थे जिन्हें # जटायु और # सम्पाती कहा जाता था। ये दोनों भी दंडकारण्य क्षेत्र में रहते विचरण करते रहते थे। इनके लिए दूरियों का कोई महत्व नहीं था। स्थानीय मान्यता के मुताबिक दंडकारण्य के आकाश में ही रावण और जटायु का युद्ध हुआ था और जटायु के कुछ अंग द...

बिपिन चंद्र पाल आजादी के नायक याद है आपको लाल बाल पाल

  देश के आजादी के नायक विपिनचंद्र पाल के जयंती पर शत शत नमन... भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाली लाल-बाल-पाल की तिकड़ी को तो हम सभी जानते ही हैं। इस तिकड़ी ने अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिए थे। ये तीन पूरे नाम थे लाला लाजपत राय ‘लाल’, बाल गंगाधर तिलक ‘बाल’ और बिपिन चंद्र पाल ‘पाल’। भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में इन क्रांतिकारियों के नाम सुनहरे अक्षरों में लिखे गए हैं। इस तिकड़ी में से एक बिपिन चंद्र पाल का आज 7 नवंबर को जन्म दिन है। आइए जानते हैं देश के इस महान क्रांतिकारी, समाजसुधारक, शिक्षाविद और सिद्धांतवादी के जीवन से जुड़ी कुछ बातें। बिपिन चंद्र पाल का जन्म 7 नवम्बर, 1858 को सिलहट, जिला हबीबगंज (वर्तमान में बांग्लादेश) में हुआ था। उनके पिता का नाम रामचंद्र और माता का नाम नारयाणीदेवी था। उस समय में क्योंकि फारसी भाषा का प्रचलन था, उनकी आारंभिक शिक्षा घर पर ही फारसी भाषा में हुई। बाद में उच्च शिक्षा के लिए उन्हें कलकत्ता भेजा गया जहां उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज में एडमिशन लिया पर, किन्ही वजहों से ग्रेजुएट होने से पहले ही उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी और कलकत्ता क...

विदेशी राक्षसों के निशाने पर भारतीय सनातन व्यवस्था

रामकृष्ण मठ में जीसस की आरती और 56 भोग जैसे कुछ का भोग लगाया जा रहा है। रामकृष्ण मिशन अब हिंदुओं को खोखला - सेकुलर-नपुंसक-मानसिक विकलांग बनाने के मिशन पर है - इसकी फंडिंग जेहादी-क्रुसेड़ी कर रहे हैं इसलिए ये जीसस को भगवान और मोहम्मद को मेसेंजर सिद्ध करने के लिए किताबें छाप चुके हैं। इसी पाखंड के अंत करने के लिए सनातन परिवार  का गठन किया गया है जो गाँव -गाँव, घर घर पहुंचकर विद्यार्थी/युवाओं को वैदिक ज्ञान-विज्ञान-गणित और सनातन के मूलभूत सिद्धांतों की शिक्षा के लिए गाँव गाँव में कक्षाओं का संचालन प्रारम्भ कर रहा है । विशुद्ध ज्ञान से युक्त ये युवा ही इन पाखंडियों के पाखंड का अंत कर विशुद्ध सनातन की स्थापना करेगें। विवेकानन्द विनय   जय सनातन ।। जय श्रीराम ।। *भारत में मिशनरी संगठनों के धर्मांतरण अभियान में निशाने पर दलित-आदिवासी* धर्मांतरण में लिप्त 13 गैर सरकारी संगठनों की विदेशी फंडिंग के लाइसेंस निलंबित किए जाने के गृह मंत्रालय के फैसले के बाद संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन सांसद संजय सेठ की ओर से जिस तरह झारखंड में आदिवासियों के धर्मांतरण का मसला उठाया गय...

कितनी खतरनाक है यह फल पकाने की विधि