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शाहआलम, बहादुरशाह जफर अंतिम मुगल सल्तनत केवल लाल किले तक सिमटी थी पर चरणचाटू इतिहासकारों का कमाल आज लुटियन दिल्ली के रोड अंग्रेजों और मुगलों के महिमा में चार चांद लगा रहे हैं



मुगलिया सन्तनत में सबसे अधिक समय तक राज करने वाले बादशाहों में अकबर (50 वर्ष), औरँगजेब (49 वर्ष) के बाद शाह आलम (द्वितीय) का नाम आता है जिसने 1760 से 1806 तक लगभग 47 साल राज किया। शाह आलम अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर का दादा था। इतने लंबे समय तक राज करने वाले बादशाह के बारे में हम इतना कम इसलिए जानते हैं क्योंकि इसकी बादशाहत आज के दिल्ली क्षेत्र (पालम तक) से ज्यादा नहीं थी। देश पर अंग्रेज कब्जा कर चुके थे, या करते जा रहे थे। [बहादुर शाह जफर की सल्तनत लाल किले तक सीमित थी!] मुगलों के पतन की यह इंतिहा थी कि एक लुटेरे गुलाम हैदर ने 1788 में दिल्ली पर हमला कर उसे लूट लिया था। न केवल लूटा, बल्कि बादशाह शाह आलम को अपने हाथों अंधा बनाया। यह भी कम था, उसने तो बादशाह के बेटे, होने वाले बादशाह और बहादुर शाह जफर के अब्बा अकबर शाह द्वितीय(शासनकाल 1806-1837) को अपने सामने घुँघरू पहनाकर नचवाया। गद्दी की कितनी कीमत थी यह इसी से पता चलता है कि गुलाम हैदर ने उस अंधे बादशाह को सल्तनत चलाने के लिए जिंदा छोड़ दिया। लूटने आया था, लूट कर चला गया। इस लूट में बादशाह का दुर्लभ पुस्तकालय भी था। भारत के पहले गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स (1773 - 1785) का सिफारिशी खत लेकर विलियम पामर बादशाह के पास एक खास किताब की नकल लेने गया था। बादशाह ने रंज और गुस्से में बताया कि दुष्ट गुलाम हैदर ने उनकी बहुतेरी किताबों को लूटकर लखनऊ (अवध) के नवाब को बेच दिया। उन किताबों के साथ वह किताब भी थी जो विलियम को चाहिए थी, उस किताब के जाने का रंज सबसे ज्यादा था। जिसके पास किताब थी, जिसने लूटा, जिसने खरीदा और जो उस किताब की नकल बनाना चाहता था, वे सब गैर-हिन्दू थे। यह वही किताब थी जिसे आम हिन्दू अपने घर में रखना तक नहीं चाहता। "महाभारत" ------------ अजीत 19 नवम्बर 18 ◆◆◆◆ शाह आलम का असली नाम अली गौहर था... जैसा कि अधिकतर मुगल शासक होते थे शाह आलम भी एक कामुक व्यक्ति था और वह विकृत मानसिकता का भी था... गुलाम क़ादिर रोहिल्ला जब दस वर्ष का था तब शाह आलम ने कैद कर लिया था और उसके मासूमियत पर फिदा होकर गुलाम क़ादिर का लिंग कटवा दिया.... और अपनी विकृत मानसिकता के साथ उस बच्चे पर कई वर्षों तक लैंगिक अत्याचार करता रहा.... फिर गुलाम क़ादिर को मौका मिला और उसने अपना बदला लिया और उसने शाह आलम की आँखे फोड़ दिया और उसके बच्चों का रेप भी करवाया। ◆◆◆◆ सन 1788 मुगल सल्तनत के आखिरी सुल्तानों में एक शाह आलम पर रोहिल्ला सरदार गुलाम क़ादिर ने आक्रमण कर दिया। शाह आलम का तो अपनी राजधानी पर भी नियंत्रण नही था वह तो मराठों की मदद से दिल्ली की गद्दी पर बैठा था और उसे मराठो की ओर से सालाना पन्द्रह हज़ार की पेंशन मिलती थी। सालों पहले सिक्खों की मदद से जब रोहिल्ला सरदार गुलाम क़ादिर के पिता ने शाह आलम से बगावत की थी उस समय बगावत खत्म करने के बाद शाह आलम ने तब आठ वर्ष के क़ादिर को अपना गुलाम बना लिया और नपुंसक बना दिया। इस बालक की सुंदरता पर मुग्ध शाह आलम अक्सर इस बच्चे को औरतों के कपड़े पहना कर नचवाते कुछ अन्य इतिहासकारों ने इस बालक को उबनाह से पीड़ित बताया (an itching in his behind) ये रोहिल्ला बालक शाह आलम का लौंडा बना दिया गया। (लौंडा मतलब क्या होता है ये आप खुद गूगल करे!) अपने इन अपमानों का बदला रोहिल्ला सरदार ने 1788 में दिल्ली में आक्रमण कर के लिया... इस युद्ध में सिक्खों ने फिर रोहिल्ला सरदार की मदद की थी। लाल किले पर कब्जा करने के बाद गुलाम क़ादिर ने मुगल सुल्तान को खजाने के लिये तड़पाना शुरू कर दिया। सुल्तान को लड़कों पोतों को चीथड़ों में बाँध कर घुमाया गया, शहजादी का बलात्कार कर दिया गया, यहाँ तक कि पुराने सुल्तान की बेगम मल्लिकाये जमानी को नँगा कर धूप में फेंक दिया गया। इस क्रूरता की खबर पाकर मराठा सरदार महाड़ जी सिंदिया ने दिल्ली पर कूच कर दिया, गुलाम क़ादिर ने दिल्ली से भागने से पहले शाह आलम को खुद अपने हाथों से अंधा कर दिया। मराठा सेनाओं ने क़ादिर को मथुरा में घेर लिया उसके हाथ पैर आँखे सब काट दिये गये और उसकी आँखें निकाल कर शाह आलम को भेंट के तौर पर भेज दी गयी। मूल लेख - विलियम डेल डिम्पल चित्र में शाह आलम रॉबर्ट क्लाइव को बंगाल की दीवानी देते हुये –

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