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आजादी की कीमत ऐसे चुकाई है... .........नीरा आर्य की आत्मकथा से......... बारी और पेटी अफसरों की जिस्म की भूख शांत करने का ठेका भी कैदी औरतों ने ही लिया था, हरामी पिल्लों के घर में शायद माँ-बहन थी ही नहीं...अगर कोई ऐसा करने से मना करती तो उसे फाँसी तक भी लटका दिया जाता था या फिर शर्मगाह में लाल मिर्च भरवा दी जाती। अगर कोई महिला कैदी उनकी जिस्म की भूख शांत करने का विरोध करने के लिए पत्थर आदि उठा लेती, तो जिस पत्थर को वह उठाती (मारने के लिए हथियार तो थे ही नहीं, इसलिए बहुधा आस-पास पड़े हुए पत्थरों के टुकड़ों से ही पीड़िताएँ अपना बचाव कर सकती थीं। यदि विरोध करते समय पास पड़े कोई औजार कुल्हाड़ी, फावड़ा आदि हाथ में उठा लिया,) उसे तौला जाता और अपराधन से कह दिया जाता कि यदि इतना भारी पत्थर (1 पौंड से अधिक) तुमने मार दिया होता, तो दूसरा तो मर ही गया होता। यह तो उसका सौभाग्य था कि तुम मार न पाई और उसके प्राण बच गए। बस, उस पत्थर के वजन पर ही कानून की इतिश्री हो जाती और मारने की इच्छा करनेवाली फाँसी पर लटका दी जाती थी। कुछ औरतों को जंगल से सूखी लकड़ी, शहद आदि लाने का काम दिया जाता था, यदि कोई औरत भागने...

बैंक माफियाओं का षड्यंत बचत की संस्कृति मैं RBI की भूमिका और अर्थब्यवस्था कि मजबूत आधार

    भारतीय में करेन्सी गिनने की मशीन आयी, ये मशीन नक़ली नोट अलग कर देती थी। भारत में करेन्सी पेपर सप्लाई ब्रिटेन की डे ला रु कम्पनी करती थी, तो नोट गिनने की मशीन भी डे ला रु देती थी, ये ही कम्पनी पाकिस्तान को भी पेपर देती थी, नक़ली नोट नेपाल के रास्ते भारत आते थे, बोला जाता था पाकिस्तान भेजता है, फिर नेपाल से कंधार कांड होता है, डे ला रु का मालिक उस प्लेन में बैठा होता है, जिस को करेन्सी किंग बोला जाता था। https://youtu.be/AzsQoOsDt1Y ख़ैर आज ब्रिटेन ने कम्पनी को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया, तब कोंग्रेस सरकार ने भी इसको ब्लैक लिस्ट में डाल दिया था। नक़ली नोट कौन भेजता था ये राज राज ही रहेगा, पेपर इंक छपाई की मशीन सब इस ब्रिटिश-स्विस कम्पनी से आता था तो नक़ली नोट छाटने की मशीन भी इस ही कम्पनी से आती थी। जिस में नक़ली नोट निकलते ही नहीं थे। मोदी जी ने नोट बदली नहीं की होती तो आज भी अरबों के नक़ली नोट चलन में होते। ********* फ़रवरी 19 को भारत में गिनती के कोरोना मरीज मिले, सब टेस्ट से पता चलता था की कोरोना पॉज़िटिव है, जिस के लिए कोरोना टेस्ट किट आयात की गयी, मार्च महीने तक भी 50-60...
मेरे परम मित्र पूर्ण सहयोगी एवं राष्ट्रीय क्रांतिकारी युवा संत श्री अध्वरेशानंद जी महाराज की हत्या संघ कार्यालय सिरोही में चाकू घोप कर किया गया है प्रस्तुत लेख हरीश गुप्ता जी के सौजन्य से..........   अपने बच्चे को तो चूमना है भले ही बीच मे बहती नाक क्यों न आती हो? स्वामी अध्वरेशानंद जी की हत्या यदि किसी मुस्लिम या ईसाई ने की होती तो पूरे देश के समाचार पत्रों में सुर्खियां बनी होतीं। परन्तु यदि हत्या कोई संघ का प्रचारक कर दे तो उसे दिल्ली के किसी समाचार पत्र में भी स्थान नही मिलेगा, और स्थानीय अखबारों में भी तथ्यो को घुमाकर दिखाया जाएगा। संघ जिला प्रचारक द्वारा हिन्दू महासभा के स्वामी अध्वरेशानन्द सरस्वती जी की नृशंस हत्या पर ऐसा ही हो रहा है। जिसकी हत्या हुई उसकी गर्दन में छुरा घोंप कर गर्दन काट दी गई उसके बाद शासन और प्रशासन मिलकर यह दिखा रहे हैं कि जिसकी गर्दन कटी उसके हाथ मे छुरा था... क्या यह संभव है? जिसकी गर्दन कट रही हो वह अपनी पीड़ा कर कारण गर्दन को पकड़ेगा त्वरित गति से... उसके हाथ मे जो भी होगा वह हाथ से छूट जाएगा। परन्तु जैसा कि पहली line में कहा गया है यहां वही बात हो ...
हम उत्तर भारतीय समझते हैं कि #धनतेरस में #धन का मतलब #सम्पत्ति से है ... और हमलोग सोना-चांदी खरीदने बाजार निकल पड़ते हैं .. #धनतेरस का अर्थ है #धन्वंतरि_दिवसम् ... जो 5 नवम्बर 2018 को है .. #धन्वंतरि आयुर्वेद के देवता हैं । धन्वंतरि दिवस को घर में जो फालतू का सामान इकट्ठा किया हुआ है उसे हटा देना चाहिये ... यह मानसिक स्वास्थ्य के लिये आवश्यक है ... क्या आप भी अनावश्यक वस्तुओं के संग्रहकर्ता हैं और उन्हें हटाने का ख़याल आते ही चिंतित महसूस करने लगते हैं ? जरा सोचिये, अपने घर की कितनी जगह और कमरों को आपने कचरे की टोकरी बना रखा है ... बिस्तर के नीचे झाँक कर देखिये , वहाँ सिर्फ कचरा और कूड़ा मिलेगा । सोचिये, इन वस्तुओं (वार्डरोब और ट्रंक में पड़े कपड़े-लत्ते, टूटे फूटे सामान, बर्तन-भांडे आदि) का कितना प्रतिशत आप आगामी 3 वर्षों में उपयोग कर पाएंगे ? कभी सुन्दर और उपयोगी लगनेवाले अपने घर को आपने कचराखाना बना रखा है , और अनावश्यक चिंताओं से ग्रसित रहते हैं आप अपने दोस्तों को घर बुलाने में शर्म महसूस करते हैं । घर में खुशी और प्रेम का अभाव होता है। अतः धनतेरस को घर का फालतू , अनावश्यक समान हटा...
सरदार की आम की टोकरी दोनों विश्वयुध्ध के दौरान विश्व की जनता का असंतोष, गुस्सा बढते देख बेंकर माफिया यहुदियों ने दुनिया पर राज करने का अपना पैंतरा बदला । उन के प्यादे अंग्रेज, डच, फ्रेंच जहां भी गुलाम देशों में राज करते वो सब देशों की जनता के लिये दुश्मन बन गये थे । उन को वापस खिंच लिया और जुठी आजादी के बहाने अपने स्थानिक प्यादों को बैठा दिये । भारत में भी यही हुआ । उनके प्यादे अंग्रेज जनता में अप्रिय हो गये थे तो कोइ चंद्र शेखर आजद या भगत सिंह ब्रिगेड उनको मार भगाये और भारत को सचमुच आजाद करा ले इस से पहले अपने प्यादे कोंग्रेसियों को भारत की लगाम देना जरूरी था । आजादी का श्रेय भले कोंग्रेस ने ले लिया लेकिन जाननेवाले जानते हैं की ना भारत आजाद है और ना कोंग्रेस के कारण ये आधी अधुरी आजादी मिली है । भारत के साथ दूसरे २० देश इस तरह ही आजाद हुए थे । उन देशों में ना कोइ गांधी था ना कोइ नेहरु और ना कोइ आजादीकी लडाई चली थी । तो इन गांधियों को सर पे बैठाने की कोइ जरूरत नही थी ।   १९४७ में जब भारत को जनता की नजरों में आजाद किया गया था तो माउंट बेटन और सरदार पटेल के बीच मजाक होता...
राम कथा के दर्शन थाई लैंड से भारत के बाहर थाईलेंड में आज भी संवैधानिक रूप में राम राज्य है l वहां भगवान राम के छोटे पुत्र कुश के वंशज सम्राट “भूमिबल अतुल्य तेज ” राज्य कर रहे हैं , जिन्हें नौवां राम कहा जाता है l* *भगवान राम का संक्षिप्त इतिहास* वाल्मीकि रामायण एक धार्मिक ग्रन्थ होने के साथ एक ऐतिहासिक ग्रन्थ भी है , क्योंकि महर्षि वाल्मीकि राम के समकालीन थे, रामायण के बालकाण्ड के सर्ग, 70 / 71 और 73 में राम और उनके तीनों भाइयों के विवाह का वर्णन है, जिसका सारांश है। मिथिला के राजा सीरध्वज थे, जिन्हें लोग विदेह भी कहते थे उनकी पत्नी का नाम सुनेत्रा ( सुनयना ) था, जिनकी पुत्री सीता जी थीं, जिनका विवाह राम से हुआ था l राजा जनक के कुशध्वज नामके भाई थे l इनकी राजधानी सांकाश्य नगर थी जो इक्षुमती नदी के किनारे थी l इन्होंने अपनी बेटी उर्मिला लक्षमण से, मांडवी भरत से, और श्रुतिकीति का विवाह शत्रुघ्न से करा दी थी l केशव दास रचित ”रामचन्द्रिका“ पृष्ठ 354 (प्रकाशन संवत 1715) के अनुसार, राम और सीता के पुत्र लव और कुश, लक्ष्मण और उर्मिला के पुत्र अंगद और चन्द्रकेतु , भरत और मांडवी के प...

नवरात्रि में शक्ति जागरण करने का यह सर्वोत्तम काल माना जाता है

   आओ मनाते हैं #नवरात्रि _____________________________ शक्ति उपासना के लिये नवरात्रि का त्यौहार भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व मे जहाँ भी हमारे #हिन्दू भाई-बहन हैं... उन सब जगहों पर वो अपनी अपनी व्यवस्था के अनुसार मनाते हैं... शक्ति उपासना का सर्वश्रेष्ठ समय है नवरात्रि... का काल...जो आश्विन और चैत्र के समय पड़ता है इस समय का #वातावरण बहुत अनुकूल होता है... ना सर्दी का प्रभाव अधिक होता है...और गर्मी तो लगभग समाप्त सी हो जाती है.. सुरम्य वातावरण #ध्यान साधना और शक्ति उपासना के लिये सर्वोत्तम है... यदि आप शारीरिक शक्ति की बात करें तो यह काल व्यायाम आदि के लिये भी सर्वश्रेष्ठ काल है.. शरीर मे #ऊर्जा और उत्साह खूब होता है... यह जो आश्विन और चैत्र का काल होता है इस समय सूर्य अपने दक्षिणी गोलार्ध से  उत्तरी गोलार्ध मे #प्रवेश करता है... इन दोनों सन्धियों के बीच रोग के आक्रमण की सम्भावना भी अधिक होती है... इसीलिए #कार्तिक के अन्तिम आठ दिन वह #अगहन के प्रथम आठ दिनो को आचार्यों ने यमदंष्ट्रा .. यमराज की दाढ़ कहा है इन दिनो पित्त,ज्वर के रोग प्रकुपित न हो... उससे ब...