Skip to main content

बैंक माफियाओं का षड्यंत बचत की संस्कृति मैं RBI की भूमिका और अर्थब्यवस्था कि मजबूत आधार

 


 


भारतीय में करेन्सी गिनने की मशीन आयी, ये मशीन नक़ली नोट अलग कर देती थी। भारत में करेन्सी पेपर सप्लाई ब्रिटेन की डे ला रु कम्पनी करती थी, तो नोट गिनने की मशीन भी डे ला रु देती थी, ये ही कम्पनी पाकिस्तान को भी पेपर देती थी, नक़ली नोट नेपाल के रास्ते भारत आते थे, बोला जाता था पाकिस्तान भेजता है, फिर नेपाल से कंधार कांड होता है, डे ला रु का मालिक उस प्लेन में बैठा होता है, जिस को करेन्सी किंग बोला जाता था।

https://youtu.be/AzsQoOsDt1Y
ख़ैर आज ब्रिटेन ने कम्पनी को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया, तब कोंग्रेस सरकार ने भी इसको ब्लैक लिस्ट में डाल दिया था। नक़ली नोट कौन भेजता था ये राज राज ही रहेगा, पेपर इंक छपाई की मशीन सब इस ब्रिटिश-स्विस कम्पनी से आता था तो नक़ली नोट छाटने की मशीन भी इस ही कम्पनी से आती थी। जिस में नक़ली नोट निकलते ही नहीं थे।

मोदी जी ने नोट बदली नहीं की होती तो आज भी अरबों के नक़ली नोट चलन में होते।
*********
फ़रवरी 19 को भारत में गिनती के कोरोना मरीज मिले, सब टेस्ट से पता चलता था की कोरोना पॉज़िटिव है, जिस के लिए कोरोना टेस्ट किट आयात की गयी, मार्च महीने तक भी 50-60 या 80 मरीज थे, मगर इस को महामारी घोषित कर दिया, कोई ऐसी बड़ी आपदा नहीं आयी थी मगर कुछ व्यापारी आपदा में अवसर तलाश रहे थे।
किसी को नहीं पता था की ये महामारी फैलेगी, या रुक जाएगी। रोकने का प्लान तो था नहीं, फैलाना था, फैलेगा कैसे टेस्ट टेस्ट टेस्ट से, टेस्ट के लिए किट चाहिए, भर भर कर आयात की गयी, फिर मार्च महीने में जब मुश्किल से 80 केस होंगे, तब पुणे की एक कम्पनी मायलैब ने सीरम इंस्टीट्यूट के साथ आत्मनिर्भर अभियान के तहत टेस्टिंग किट तैयार की जिस को केंद्रीय औषधि मानक को भेजा गया और प्रडक्शन शुरू कर दिया। फिर शुरू हुआ टेस्ट टेस्ट टेस्ट।
ये कुछ वैसा ही हुआ जैसा करेन्सी कांड में हुआ। “दर्द भी तुम दवा भी तुम” सीरम इंस्टीट्यूट विश्व की सब ज़्यादा वैक्सीन बनने वाली कम्पनी बनी। टेस्ट किट भी और अब वैक्सीन भी .......... ये पूनावाला भगवान है।
इस भगवान की बनाई कोविड़शील्ड को आक्स्फ़र्ड यूनिवर्सिटी ने AstraZeneca के साथ मिल कर बनाया है। जिस का कॉपी पेस्ट सिरम कर रहा है। ये बिलकुल वैसा ही है जैसा ब्रिटिश डे ला रु कम्पनी। दर्द भी तुम दवा भी तुम। तुम बड़े दयालु हो कृपालु हो।
इन टेस्ट किट की मदद से 20 करोड़ टेस्ट हुए, 1 करोड़ कोरोना पॉज़िटिव हुए, जिस में से एक लाख मर गए। बाक़ी सब रिकवर हो गए। अगर ये आँकड़े सच हैं तब भी 140 करोड़ में केवल 1 लाख लोग मरे 1 साल में।
अब डर की कोई बात नहीं अब कोई नहीं मरेगा क्यूँ दर्द की दवा आ गयी। दया का सागर।
हर वैक्सीन को लगाने के बाद थोड़ा बहुत साइड इफ़ेक्ट होता है, गाँठ बन जाना, सिर दर्द, दाने निकलना, बुखार आना, ये सब लक्षण हैं की वैक्सीन असर कर रही है। वैक्सीन लगाने से कोई तुरंत नपुंसक नहीं होता, तुरंत कैन्सर नहीं होगा तुरंत मौत के मुँह में नहीं जाएगा।
अफ़वाहों से बचे,
साइड इफ़ेक्ट होगा मगर 5-6 साल बाद होगा। क्या असर होगा ये भगवान जाने। कैन्सर होगा या नपुंसकता या डीएनए रिप्रोग्रामिंग। ख़ैर बच्चे तो टेस्ट ट्यूब से पैदा होंगे, कैन्सर का इलाज सस्ता होगा घर घर में होगा। एक ही लक्ष्य इनका डीएनए नष्ट करना भारत का, सप्त ऋषियों का डीएनए ख़त्म होना चाहिए कि नहीं चाहिए। बाकी विदेशी कंपनी
ब्रुक बॉंड रेड लेवल की चाय पियो।



बचत
कुटुंब के सदस्य फालतू खर्च ना करे और धनकी बचत ना करने दे इसलिए बडेबुढे हमेशां पैसे की कमि का
राग आलापते थे और बचत के पैसे को छुपाकर रखते थे । कोइ बडा प्रसंग, कोइ आर्थिक संकट, कोइ बडी बिमारी के समय वही बचत काम में आती थी और आती है ।
.
देश की रिजर्व बेन्क भी बचत करती है, जीसे रिजर्व मनी कहा जाता है । बेन्क बचत को छुपाती नही है इसलिए फालतू खर्च करनेवाली सरकार की बूरी नजर पडी है । जनता के कॅश घन पर बूरी नजर थी तो नोटबंदी से जनता का पैसा बेन्कों में डलवा दिया । जनता के घन से डकार भी नही खाई कि अब रिजर्व बेन्क के पिछे पडी है और उस बचत को उडाना चाहती है । रिजर्वमनी देश की जनता की अमानत है उसे सरकार अपने मित्र व्यापारियं को देना चाहती है । तीन लाख करोड की यह बचत देश के संकट समय के लिए है, कोइ युध्ध या कोइ बडे असली आर्थिक संकट संकट के लिए है सरकार सर्जित आथिक संकट के लिए नही। बेन्क का नाम ही रिजर्व है मतलब सामान्य संजोंगों में रिजर्व फंड को उंगली भी नही लगाई जा सकती है । सरकार अगर यह कबूल करती है कि आर्थिक संकट है तो इस संकट का पूरा दोष खूद सरकार पर आ जाता है, इसलिए कबूल तो नही करेगी और विकास का गाना गाए जाएगी  । 
.
सरकार जुठी है, छोटे कारोबारियों को खूद खतम करवाती सरकार कहती है छोटे कारोबारियों को लोन दिलानी है । हकिकत में बडे मगरमच्छों को लोन देना है । और ऐसे मगरमच्छ जो लोन का रूपिया सिधे विदेश पहुंचा दे जो भारत में वापस कभी ना आए ।

अगर लोन का रूपिया भारत में ही रहता है तो देसी लोगों को लोन देने में परेशानी नही होनी चाहिए, चाहे कितने भी लेनेवाले हो और चाहे कितनी भी बडी रकम हो । लोन लेनेवाला थैला भरके पैसा नही ले जाता है । वो पैसा बेन्क में ही रहता है । वो उठाता भी है, चेक या कॅश से तो वो अन्य को चुकाने के लिए । अन्य भी पैसे अधिक हो घर में नही बेक में ही रखते हैं । लोने देने पर बेन्कनिंग सिस्टम से रुपए गायग नही होते है । घुम कर रुपिए बापस बेन्क में ही आते हैं । विदेश घुमने चला जाए तो उसके वापस आने की गेरंटी नही है, स्विस बेन्क या अन्य चोर देश की बेन्क में बस जाएगा ग्रीनकार्ड लेकर ।

Popular posts from this blog

उच्च प्रतिभा के धनी और गणित के विद्वानों के लिए ही यह पोस्ट भारत की गौरवशाली अतीत का

      गणित के विभिन्न क्षेत्रों में भारत का योगदान प्राचीनकाल तथा मध्यकाल के भारतीय गणितज्ञों द्वारा गणित के क्षेत्र में किये गये कुछ प्रमुख योगदान नीचे दिये गये हैं- आंकगणित : दाशमिक प्रणाली (Decimal system), ऋण संख्याएँ (Negative numbers) (ब्रह्मगुप्त देखें), शून्य (हिन्दू अंक प्रणाली देखें), द्विक संख्या प्रणाली (Binary numeral system), स्थानीय मान पर आधारित संख्या आधुनिक संख्या निरूपण, फ्लोटिंग पॉइंट संख्याएँ (केरलीय गणित सम्प्रदाय देखें), संख्या सिद्धान्त , अनन्त (Infinity) (यजुर्वेद देखें), टांसफाइनाइट संख्याएँ (Transfinite numbers), अपरिमेय संख्याएँ (शुल्बसूत्र देखें) भूमिति अर्थात भूमि मापन का शास्त्र : वर्गमूल (see Bakhshali approximation), Cube roots (see Mahavira), Pythagorean triples (see Sulba Sutras; Baudhayana and Apastamba state the Pythagorean theorem without proof), Transformation (see Panini), Pascal's triangle (see Pingala) बीजगणित: Quadratic equations (see Sulba Sutras, Aryabhata, and Brahmagupta), Cubic equations and Quartic equations (b...

bhu के संस्थापक मदन मोहन मालवीय की आत्मा क्यों कराह रही है

    प्रश्न यह है कि फिरोज कोई, ऐसे थोड़े झोला उठाकर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में प्रवेश कर दिया है उसके लिए बकायदा नियम कानून और यहां के बुद्धिजीवियों के और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सारे मापदंडों को पूर्ण करते हुए वह यहां तक पहुंचा है। प्रश्न यह है कि यह ऐसा नियम कानून और मापदंड स्थापित करने वाले कौन हैं जो भारत की अस्मिता को समाप्त करना चाह रहे हैं जो भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना चाह रहे हैं हालांकि गलती तो उसी समय हो गई थी जब अपनी गुरुकुल व्यवस्था का त्याग करके और अंग्रेजों की आधुनिक शिक्षा के माध्यम से एक बड़ा संस्थान बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी बनाई गई है उसी समय इस सनातन परंपरा के नष्ट होने का बीज डाल दिया गया था यह तो अब उसके फलअश्रुति हैं हम लोग केवल परिणाम पर छाती कूटते हैं कारण और निवारण पर कोई ध्यान नहीं रहता है  बोय पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय कहीं यही हालत राम मंदिर निर्माण का भी ना हो इसलिए सजगता आज से ही जरूरी है और श्रेष्ठ परंपरा के वाहक तेजस्वी पुरुष चयन अगर हो पाता है तू ही विश्व गुरु भारत के संकल्पना साकार हो सकती है नहीं तो अपने अपने पा...

Newziland,Britain apply Sanskrit teaching for smartness

   जब हमारे श्रेष्ठ भारत का नाम कहीं बदनाम होता है।क्या बतायें जब शिक्षित वेश्यावृत्ति करता है बस ह्रदय दुखता है।क्योंकि कुछ ही दसक पहले हमारे यहां7लाख 32हजार गुरूकुल हुआ करते थे।समस्त संसार की मानव जाति हमसे ही सीखती थी कि शिक्षा क्या होती है।और अब हम अपनी मानसिकता से इतना विकृत हो चुके हैं कि क्या बतायें कुछ कहते नहीं बनता।पर इतना जरूर कहूंगा हमारे भारत की मूल गुरुकुल शिक्षा ही सभी समस्याओं  से   मुक्त करती है व मानव को महामानव बनाती थी। एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान     विश्व हिन्दी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता उत्पन्न करना तथा हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करना है. अजय कर्मयोगी: https://m.youtube.com/watch?v=JixMEQ2kehU   , https://m.youtube.com/watch?v=JseQIWhJ7xk  , https://m.youtube.com/watch?v=JixMEQ2kehU  ,  https://m.youtube.com/watch?v=IFmv2YFApQk                 ...