Skip to main content

Posts

रक्षाबंधन के नाम पर सेक्युलर घोटाला !! बचपन में हमें अपने पाठयक्रम में पढ़ाया जाता रहा है कि रक्षाबंधन के त्योहार पर बहने अपने भाई को राखी बांध कर उनकी लम्बी आयु की कामना करती है। रक्षा बंधन का सबसे प्रचलित उदहारण चित्तोड़ की रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूँ का दिया जाता है। कहा जाता है कि जब गुजरात के शासक बहादुर शाह ने चित्तोड़ पर हमला किया तब  चित्तोड़ की रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूँ को पत्र लिख कर सहायता करने का निवेदन किया। पत्र के साथ रानी ने भाई समझ कर राखी भी भेजी थी। हुमायूँ रानी की रक्षा के लिए आया मगर तब तक देर हो चुकी थी। रानी ने जौहर कर आत्महत्या कर ली थी। इस इतिहास को हिन्दू-मुस्लिम एकता  के तौर पर पढ़ाया जाता हैं। अब सेक्युलर खोटाला पढ़िए हमारे देश का इतिहास सेक्युलर इतिहासकारों ने लिखा है। भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम थे। जिन्हें साम्यवादी विचारधारा के नेहरू ने सख्त हिदायत देकर यह कहा था कि जो भी इतिहास पाठयक्रम में शामिल किया जाये उस इतिहास में यह न पढ़ाया जाये कि मुस्लिम हमलावरों ने हिन्दू मंदिरों को तोड़ा, हिन्दुओं को जबरन धर्मान्तर...
#इनफार्मेशन_टेररिज्म का  पूरा विश्व शिकार हुवा: 15वीं शदी में यूरोप के राजसत्ताओं ने यूरोपीय दस्युवो को ईसाइयत के फैलाव और विश्व के गैर ईसाइयों के जर जोरू जमीन पर कब्जा करने के लिए स्टेट स्पॉन्सर्ड टेररिज्म को विस्तार दिय्या। 1492 में कोलूम्बस अमेरिका पहुंचा और 1498 में वास्कोडिगामा भारत। तय यह हुवा था कि लूट के माल में बीस प्रतिशत इन दस्युओं को मिलेगा साथ मे कब्जा की गई भूमि का गोवेर्नेरशिप भी। अमेरिका ऑस्ट्रेलिया आदि पर कब्जा पिछले कुछ शताब्दियों का इतिहास है। कालांतर में तय यह भी हुवा कि जिन देशों का कोई इतिहास नहीं है, उनके बारे में मनमाना इतिहास लिखा जाए। और जिन देशों का इतिहास हो उसकी मनमानी व्याख्या कर ईसाइयत के फैलाव का आधार पैदा किया जाय। भारत दूसरी कैटेगरी में आता है। उन्होंने अपने तथाकथित नई दुनिया में किये गए अपने अत्याचार और अनुभव को #आर्यन नाम से एक फिक्शन लिखा और उसको वैश्विक स्तर पर फैलाया। इसके पीछे राजनीतिक और धार्मिक कारण यह था - कि वे अपने लूटतंत्र को कोई नई घटना न बताकर पुरानी घटना की पुनरावृत्ति सिद्ध किया। दूसरे वे अपनी रिश्तेदारी यहूदियों से खत्म करन...
अगर पैर धुलवाने वाले यही लोग ब्राह्मण होते तो सारी मिडिया और तथाकथित भीमटे  बहुत सारे दलित हित चिंतक और तथाकथित बुद्धिजीवी टुट पडते ब्राह्मणों का दलितों पर अत्याचार शोषण न जाने और क्या क्या लेकिन यहाँ सब गुंगे हो गये है क्योकि ये ईसाई मशीनरी है    पर क्या आपकी भी मशीनरी वही है यदि नहीं तो आप क्यों खामोश और मौन होकर कलम तोड़ दिए हैं
   हरियाणा में हुक्का पीने की परंपरा बहुत हावी रही है एक ओर हुक्का-पानी सम्मान और आतिथ्य का विषय रहा है दूसरी तरफ किसी का सामाजिक बहिष्कार करना हो तो सबसे पहला संकट उसके हुक्के-पाणी पर ही आता रहा है यानि हुक्का-पाणी बंद हुक्के के समर्थक उसे हरियाणा की विरासत परंपरा और संस्कृति और यहाँ तक कि पंचतत्व के प्रतिनिधि तक मानते हैं कुछ समर्पित समर्थको की तो यहां तक हालत हो गई है कि तड़कै तड़कै हुक्का न पिया तो कब्ज भी नहीं टूटती किसी सच्चाई की पुष्टि के लिए संदिग्ध व्यक्ति को हुक्के पर हाथ रखकर शपथ दिलाई जाती है, जो सर्वमान्य होती है। इसलिए इसे न्यायिक आस्था ⚖के रूप में माना जाता है। अभी हरियाणा सरकार ने हुक्के मुक्त गांवो को सम्मानित करने की पहल की है #नोट :- ब्रांडेड सिगरेटों पर बात करने की सरकारों की औकात भी नहीं है क्योंकि उनको तथाकथित भारीभरकम tax जो मिलता है योग्यता मापने का पैमाना भी है हुक्का हुक्के का देसी तंबाकू बड़ी मेहनत से तैयार किया जाता है। तंबाकू के पौधे को सुखाकर कूटा जाता है और उसमें गुड़ या गुड़ से बनी लाट डाली जाती है, जिससे उसमें निकोटीन का प्रभाव ...
जहाँ कृषि होती है वहाँ एक संस्कृति अपने आप पनपती है। उत्तम कृषि याने उत्तम संस्कृति और सभ्यता। एक उत्तम संस्कृति तो एक उत्तम जीवन शैली और उत्तम ज्ञान का उद्भव। और जहाँ ये सब कुछ का समावेश हो वहाँ अपने को बचाने की कला का भी विकास होना स्वाभाविक। भारत कृषि प्रधान देश है। सभी मौसम चक्र हैं यहाँ। तो निश्चित ही यहाँ कृषि के साथ-साथ उत्तम सभ्यताओं का विकास होना लाजमी है।कोई आश्चर्य की बात नहीं। और यहीं से संस्कृति का विकास हुआ। और जब उत्तम संस्कृति हो तो बाहरियों का आकर्षण का केंद्र होना स्वाभाविक है जो अब तक भी बना हुआ है। इससे पहले बहुत बार बहुत जगह इस बात की चर्चा हो चुकी है कि रामायण और महाभारत युद्ध के बाद जो हारे हुए सैनिक थे वे कहाँ गए ? सभी मत एक समान है कि वे पश्चिम की ओर कूच कर गए। और विशेष कर ईरान के आगे पश्चिम की ओर। अपन युद्ध को क्या बोलते है ? 'समर' ! यही न ? तो दो बड़े 'महासमर' हुए .. एक रामायण का महासमर और दूसरा महाभारत का 'महासमर'! और जो 'समर' को छोड़ गए मने हार गए वे 'समरछोड़' हुए। एक देखिये जरा .. Samar = Sumar = Sumer = Sume...
मरक्यूरी याने पारा। एटॉमिक नम्बर -80 निरूपण - Hg इसका मैक्सिमम यूज आप थरमामीटर में देखते होंगे। इसको तो एक जहर के रूप में देखा जाता है। इसका वैपर अगर आपने सूंघ लिया तो मौत के पूरे चांसेज है। एक खिस्सा सुनाते है.. मार्को पोलो का नाम तो सुने होंगे.. ये अपने विश्व भ्रमण के लिए जाने जाते है।.. ये केरल के मालाबार तट पे सन 1293 ई में आये। इन्होंने यहाँ 'सिद्ध रसायनशास्त्र(Alchemy)' को जरा करीब से जाना। इन्होंने यहाँ 'योगी सिद्धों' से भेंट की जिनकी उम्र 150 से 200 वर्ष तक मे थी। .. इनकी इतनी उम्र सीमा से वो जरा अचंभित हुआ। सिद्धों के पास इनऑर्गेनिक सब्सटेंस को नैनो सब्सटेंस में कन्वर्ट कराने की विधि थी जो ह्यूमन सेल द्वारा आसानी से अवशोषित कर लिया जाता था। Mercury, Irridium और Rhodium का प्रयोग सिद्ध दवाइयों में बहुत अधिक मात्रा में होता था। नॉर्मल मरक्यूरी जहर है लेकिन जब इसको प्योरिफाई और प्रोसेस्ड किया जाता है तो ये किसी अमृत से कम नहीं है। इनका उपयोग केवल बीमारियों के इलाज के लिए ही नहीं वरन जवानी को बरकरार रखने के लिए भी किया जाता था। मरक्यूरी और इस ग्रुप के एल...
प्राचीन भारत मे शिक्षा का महत्व - भारत गुरूकुलों का देश था जातकों में जिस प्रथम विश्वविद्यालय कि चर्चा है वह है " तक्षशिला " तक्षशिला कि स्थापना भगवान राम के भाई भरत के पुत्र तक्ष ने कि थी वाल्मीकि रामायण में इसकी चर्चा है ऋग्वेद में भी तक्षशिला कि चर्चा है । तक्षशिला विश्वविद्यालय में देश विदेश के 10 हजार विद्यार्थी पढ़ते थे वैसे तो यहां सभी तरह की शिक्षा दी जाती थी लेकिन यह विश्वविद्यालय शस्त्र विद्या और राजनीति शास्त्र के लिये प्रसिद्ध था । आचार्य चाणक्य यहां शिक्षा ग्रहण किये और यही राजनीतिक शास्त्र के आचार्य हो गये भारत के 16 महाजनपदों के राजपुत्र यही शिक्षा ग्रहण करते थे जिन महान राजाओं की चर्चा है जो यहां शिक्षा ग्रहण किये उनकी संख्या सीमितजातक में 103 दी गई है जिसमे प्रसेनजित , शल्य , लिक्ष्वी , काशीनरेश , मगध आदि के नाम है प्रसिद्ध डाकू अंगुलिमाल भी यही शिक्षा ग्रहण किया था बात स्प्ष्ट है इस विश्वविद्यालय में सभी वर्णों के लोग समान शिक्षा ग्रहण करते थे । शिक्षा भारत के लिये कितना महत्व रखती थी यह विषय है ? महाजनपदों में राजा के बाद पद महामंत्री का हो...