जहाँ कृषि होती है वहाँ एक संस्कृति अपने आप पनपती है। उत्तम कृषि याने उत्तम संस्कृति और सभ्यता। एक उत्तम संस्कृति तो एक उत्तम जीवन शैली और उत्तम ज्ञान का उद्भव। और जहाँ ये सब कुछ का समावेश हो वहाँ अपने को बचाने की कला का भी विकास होना स्वाभाविक।
भारत कृषि प्रधान देश है। सभी मौसम चक्र हैं यहाँ। तो निश्चित ही यहाँ कृषि के साथ-साथ उत्तम सभ्यताओं का विकास होना लाजमी है।कोई आश्चर्य की बात नहीं। और यहीं से संस्कृति का विकास हुआ। और जब उत्तम संस्कृति हो तो बाहरियों का आकर्षण का केंद्र होना स्वाभाविक है जो अब तक भी बना हुआ है।
इससे पहले बहुत बार बहुत जगह इस बात की चर्चा हो चुकी है कि रामायण और महाभारत युद्ध के बाद जो हारे हुए सैनिक थे वे कहाँ गए ? सभी मत एक समान है कि वे पश्चिम की ओर कूच कर गए। और विशेष कर ईरान के आगे पश्चिम की ओर।
अपन युद्ध को क्या बोलते है ?
'समर' ! यही न ? तो दो बड़े 'महासमर' हुए .. एक रामायण का महासमर और दूसरा महाभारत का 'महासमर'! और जो 'समर' को छोड़ गए मने हार गए वे 'समरछोड़' हुए।
एक देखिये जरा ..
Samar = Sumar = Sumer = Sumerian !
याने
समर = सुमर = सुमेर = सुमेरियन ।
याने जो यहाँ से समर के मैदान से भागे वे 'सुमेर' के मैदान में जा बसे। यूफ्रेट्स और टिगरिस नदी के बीचों बीच। और सुमेरियन सभ्यता सिंधु और रामायण,महाभारत कालीन से ही जोड़ के देखते।
और यहाँ भी इन्होंने वही कुछ डेवलप किया जो इसने अपने पुराने भूमि को छोड़ते वक़्त सीखा था और जीया था।
चलिये ये सब बाद में अपने आप जुड़ जाएंगे।
भगवान मुरुगन के तीन चार नामों की चर्चा हम कर चुके हैं। दो तीन और नाम भी जोड़ देते हैं इसमें..
Murugan, Kumar, Kumaran, Kartikey, Kandhan, Velan, Kathir,Kathirvelan.
अब आते हैं मुद्दे पे।
अब्राहमिक रिलीजन में कितने प्रोफेट्स हुए हैं ? कुरान जवाब देता है कि एक लाख चौबीस हजार.. 1,24,000 प्रोफेट्स बोले तो मैसेंजर ऑफ गॉड बोले तो अल्लाह के दूत।
इन एक लाख चौबीस हजार प्रोफेट्स में मालूम है कौन प्रोफेट इमोर्टल है बोले तो अमर ?? बहुतों को मालूम नहीं। यहाँ तक कि बहुत से जोल्हेलुइया को भी नहीं मालूम। इनमें से एक प्रोफेट अमर है। और उनका नाम है "अल-ख़िदर" (Al-Khidr)! मने कि हज़रत अल-ख़िदर (खिद्र)!
Khidr का अरेबिक में मतलब होता है 'हरा' बोले तो 'ग्रीन'! और ये 'हरे मानुष' या 'ग्रीन मेन' के नाम से जाने जाते हैं। इन्होंने कोई 'हरा पेय' पीया था जिसके चलते ये अमर हो गए। ये एग्जेक्टली थे कहाँ के ये कुरान भी ठीक से नहीं बताता और न अब्राहमिक रिलिजनों के अन्य किताब। कुरान इस बात का जरूर जिक्र करता है (सूरा-18, आयात 65-82, अल-कहफ़(Al-Kahf)) में जिसमें हजरत मूसा बोले तो Moses (मोसेस, मोजेज) ग्रीन मेन बोले तो अल-ख़िदर से मिलते हैं। और जहाँ ये मिलते हैं वो दो समुद्रों(Two Sea) का मिलन स्थान होता है। और ये जगह कौन सी है कहाँ है ये कोई अब्राहमिक किताब नहीं बताता है। अमेजिन न ?!!
चलिये इसी में आगे जोड़ते है..
एक बार गॉड मूसा से पूछते है कि 'बताओ मूसा इस पृथ्वी में सबसे ज्यादा ज्ञानवान कौन है?'
तो मूसा धपाक से जवाब देता है 'मेरे अलावा और कौन प्रभु? मैं ही हूँ!' .. ऐसा वो इसलिए बोलता है कि जब खुद गॉड उनसे मुखातिब होते हैं और बात करते हैं तो भला उनसे ज्यादा और कौन ज्ञानवान और बुद्धिमान हो सकता है! सो अपना नाम ही बतला देता है।.. तो गॉड बोलते है 'ये तुम्हारा अहम है और भूल भी! तुमसे भी ज्ञानवान आदमी है इस जगत में .. और तुम्हें उनसे बहुत कुछ सीखने की जरूरत भी है!'
तब मूसा कहता है "प्रभु! अगर ऐसा कोई है तो मैं उनसे जरूर मिलना चाहूँगा और उनसे ज्ञान भी प्राप्त करना चाहूंगा!"
तब गॉड मूसा को एक मछली पे सवार करते हैं और रवाना करते हैं और बोलते हैं कि ये मछली दो सागरों के मिलन स्थान के एक टापू पे रुकेगी और वो ज्ञानवान पुरूष तुमको वहीं मिलेंगे। .. मूसा उस स्थान पे आते हैं और अल-ख़िदर से मिलते हैं। चूंकि मूसा जरा घमंडी और अहम टाइप का इंसान होता है तो अल-ख़िदर कहते हैं कि "तुम मेरे शिष्य बनने लाइक नही हो.. तुममें धैर्य और संयम नहीं है.. जब तक इसपे काबू नहीं करोगे तब तक मैं तुम्हें कुछ ज्ञान नहीं दे सकता.. ज्ञान प्राप्त करने के लिए इनपे काबू होना आवश्यक है!"
तो मूसा कहता है "नहीं गुरुवर! मैं यहाँ इतनी दूर आपसे ज्ञान प्राप्त करने आया हूँ.. मैं आपको वचन देता हूँ कि मैं धैर्य और संयम दोनों को काबू में रखूँगा!"
तब अल-ख़िदर कहते हैं "ठीक है! .. फिलहाल तुम मेरे साथ रहो.. लेकिन मैं क्या करता हूँ,क्यों करता हूँ,किसलिये करता हूँ ये कभी मेरे से पूछना मत.. ये तुम्हारी धैर्य और संयम की परीक्षा होगी!"
तब मूसा सहमत होता है और आगे बात चलती है.. मूसा और अल-ख़िदर के बीच तीन बड़े वाक्या होते हैं जिसे सभी अब्राहमिक वाले बड़े चांव के साथ सुनाते हैं जिसे आप गूगल और यूट्यूब में भी सुन सकते हैं।
फिलहाल इतना काफी है हजरत मूसा और अल-ख़िदर के साथ हुए मुलाकात का किस्सा!
अब आते हैं मेन पॉइंट पे।
जैसा कि पहले ही बता चुके कि भगवान मुरुगन जंगल को जलाकर कृषि मैदान बनाते हैं और कृषि की शुरुआत करते हैं। सबसे पहले शकरकंद और विभिन्न प्रकार के मिलेट्स उपजाते हैं। .. विवाह वल्ली माता या कुमारी माता या कार्तिकेयनी माता से करते हैं। जो भगवान मुरुगन की ही रचना होती है। इनका हर जगह कलर 'हरा' ही देखे हैं और कृषि की प्रतीक होती है।
मुरुगन स्वामी का नाम Kathir (कदिर), Kathirvelan(कदिरवेलन) और कंदन (Kandhan) भी है।
Kathir = का मतलब होता है मिलेट्स।
और चूंकि इसकी खेती स्वयं मुरुगन करते हैं तो इनका नाम कदिर या कदिरवेलन भी होता है। शकरकंद की खेती करते हैं तो शकरकंद भी Kumara या कुमरा कहलाता है और इससे भी मुरुगन का नाम होता है। न्यूजीलैंड में जो शकरकंद का उदाहरण दिया था वो यही था।
श्रीलंका में एक स्थान है 'Kathirkamam'! और यहाँ मंदिर भी है भगवान मुरुगन को समर्पित जो खेती के टाइम से ही है।
Kathir का मतलब होता है मिलेट्स
और Kamam का मतलब होता है गांव।
याने जिस जगह Kathir की खेती पहले पहल हुई वो गांव कहलाया कदिरकामम!
अब इसमें इंटरेस्टिंग बात क्या है कि इस कदिरकामम के मुरुगन मंदिर से मात्र 300 मीटर की दूरी पे एक मस्जिद है। मालूम है वो मस्जिद किसकी है सो ? वो मस्जिद है हज़रत अल-ख़िदर की। वेरी इंटरेस्टिंग न !!!!
और ये वही जगह होता है जहाँ मूसा अल-ख़िदर से मिलते हैं और ज्ञान प्राप्त करते हैं और ज्ञान प्राप्त करने के बाद 'तोराह' की रचना करते हैं।
दो समुद्रों के मिलन स्थान का जिक्र न तोराह करता है और न कुरान। जबकि ये वो स्थान हैं जहाँ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी मिलती है। और ये वो स्थान हैं जहाँ पहले-पहल खेती की शुरुआत हुई। और माता पच्चीअम्मा जो हमेशा ही हरे रंग में ही दिखाई देती वो मुरुगन की ही कृति थी।
अब आगे की बात..
ईरान के 'कुम' शहर के अल-ख़िदर के मस्जिद की बात बता चुका हूं.. ये 3,000 साल पुराना है.. मने इस्लाम से डेढ़ हजार साल पहले। इसी प्रकार इजराइल के 'कुमरन' गुफाओं के बारे में भी बता चुका।
इसके अलावे उज्बेकिस्तान के समरकंद में अल-ख़िदर का मस्जिद है। अब समरकंद नाम भी देखिये।
समर .. मतलब ऊपर ही बता चुके और 'कंद' या 'कंदन' मने मुरुगन!! और अल-ख़िदर का कनेक्शन भगवान मुरुगन से देख ही रहे हैं।
इसके अलावे अल-ख़िदर का मस्जिद इराक के मोसुल शहर में भी है जिसको कि ISIS वालों ने ढाह दिया है। और एक मस्जिद तुर्की के समंडग में भी है।
हदीस अल-ख़िदर के बारे में कहता है कि अल-ख़िदर नाम इनका इसलिए पड़ा कि इन्होंने एक बेजान बंजर भूमि को हरियाली में तब्दील कर दिया सब्जियों को उगा कर। (Al-Khidr was so called because he sat over a barren white land, it turned with Vegetation!)
मने इधर भी इस बात की पुष्टि होती है कि ये कृषि के प्रतीक थे। और वो जिस चीज की खेती की बात कर रहे हैं वो Kathir याने मिलेट्स की बात कर रहे जिसके चलते इनका नाम अपभ्रंश हो के कदिर से ख़िदर हो गया।
अल-ख़िदर हमेशा हरे वस्त्रों में ही दिखाई देंगे व एक मछली पे सवार हुए। ये मछली किस चीज का प्रतीक है ? क्यों ये मछली पे सवार हुए दिखाई देते हैं?? शायद कोई जोल्हेलुइया बता पाए!!.. चलिये बताते है.. कदिरकामम जो जगह है श्रीलंका में वो फिशिंग के लिए भी जाना जाता है। और कृषि के साथ-साथ फिशिंग की भी शुरुआत हुई। और ये मछली उसी कृषि की ही प्रतीक है।.. माता मीनाक्षी का मतलब इसी से है .. मीन मने मछली।
जैसा कि बता चुके कि माता वल्ली वीनस मने शुक्र से संबंध रखती है और इनका कलर हरा है। और दक्षिण में शुक्रवार का दिन माता वल्ली और मुरुगन स्वामी को ही समर्पित रहता है और ये दिन बहुत ही पवित्र माना जाता है।
अब समझ में आ रहा कि जोल्हेलुइया जो खुद को मूसा की औलाद याने मुसलमान कहते हैं का फेवरेट कलर ग्रीन याने हरा क्यों है और पवित्र दिन शुक्रवार क्यों!?.. चोरकट कहीं के।
ये अमरता का सिद्धांत आपको भारत के बाहर कहीं नहीं मिलेगा.. लेकिन एक लाख चौबीस हजार नबियों में एक अमर नबी यही अल-ख़िदर है। .. अमृत पीने वाले अमर हो गए और ये कोई हरा-पेय पीये जिससे कि ये अमर हो गए। अमेजिन न!!
संकलन अजय कर्मयोगी।
भारत कृषि प्रधान देश है। सभी मौसम चक्र हैं यहाँ। तो निश्चित ही यहाँ कृषि के साथ-साथ उत्तम सभ्यताओं का विकास होना लाजमी है।कोई आश्चर्य की बात नहीं। और यहीं से संस्कृति का विकास हुआ। और जब उत्तम संस्कृति हो तो बाहरियों का आकर्षण का केंद्र होना स्वाभाविक है जो अब तक भी बना हुआ है।
इससे पहले बहुत बार बहुत जगह इस बात की चर्चा हो चुकी है कि रामायण और महाभारत युद्ध के बाद जो हारे हुए सैनिक थे वे कहाँ गए ? सभी मत एक समान है कि वे पश्चिम की ओर कूच कर गए। और विशेष कर ईरान के आगे पश्चिम की ओर।
अपन युद्ध को क्या बोलते है ?
'समर' ! यही न ? तो दो बड़े 'महासमर' हुए .. एक रामायण का महासमर और दूसरा महाभारत का 'महासमर'! और जो 'समर' को छोड़ गए मने हार गए वे 'समरछोड़' हुए।
एक देखिये जरा ..
Samar = Sumar = Sumer = Sumerian !
याने
समर = सुमर = सुमेर = सुमेरियन ।
याने जो यहाँ से समर के मैदान से भागे वे 'सुमेर' के मैदान में जा बसे। यूफ्रेट्स और टिगरिस नदी के बीचों बीच। और सुमेरियन सभ्यता सिंधु और रामायण,महाभारत कालीन से ही जोड़ के देखते।
और यहाँ भी इन्होंने वही कुछ डेवलप किया जो इसने अपने पुराने भूमि को छोड़ते वक़्त सीखा था और जीया था।
चलिये ये सब बाद में अपने आप जुड़ जाएंगे।
भगवान मुरुगन के तीन चार नामों की चर्चा हम कर चुके हैं। दो तीन और नाम भी जोड़ देते हैं इसमें..
Murugan, Kumar, Kumaran, Kartikey, Kandhan, Velan, Kathir,Kathirvelan.
अब आते हैं मुद्दे पे।
अब्राहमिक रिलीजन में कितने प्रोफेट्स हुए हैं ? कुरान जवाब देता है कि एक लाख चौबीस हजार.. 1,24,000 प्रोफेट्स बोले तो मैसेंजर ऑफ गॉड बोले तो अल्लाह के दूत।
इन एक लाख चौबीस हजार प्रोफेट्स में मालूम है कौन प्रोफेट इमोर्टल है बोले तो अमर ?? बहुतों को मालूम नहीं। यहाँ तक कि बहुत से जोल्हेलुइया को भी नहीं मालूम। इनमें से एक प्रोफेट अमर है। और उनका नाम है "अल-ख़िदर" (Al-Khidr)! मने कि हज़रत अल-ख़िदर (खिद्र)!
Khidr का अरेबिक में मतलब होता है 'हरा' बोले तो 'ग्रीन'! और ये 'हरे मानुष' या 'ग्रीन मेन' के नाम से जाने जाते हैं। इन्होंने कोई 'हरा पेय' पीया था जिसके चलते ये अमर हो गए। ये एग्जेक्टली थे कहाँ के ये कुरान भी ठीक से नहीं बताता और न अब्राहमिक रिलिजनों के अन्य किताब। कुरान इस बात का जरूर जिक्र करता है (सूरा-18, आयात 65-82, अल-कहफ़(Al-Kahf)) में जिसमें हजरत मूसा बोले तो Moses (मोसेस, मोजेज) ग्रीन मेन बोले तो अल-ख़िदर से मिलते हैं। और जहाँ ये मिलते हैं वो दो समुद्रों(Two Sea) का मिलन स्थान होता है। और ये जगह कौन सी है कहाँ है ये कोई अब्राहमिक किताब नहीं बताता है। अमेजिन न ?!!
चलिये इसी में आगे जोड़ते है..
एक बार गॉड मूसा से पूछते है कि 'बताओ मूसा इस पृथ्वी में सबसे ज्यादा ज्ञानवान कौन है?'
तो मूसा धपाक से जवाब देता है 'मेरे अलावा और कौन प्रभु? मैं ही हूँ!' .. ऐसा वो इसलिए बोलता है कि जब खुद गॉड उनसे मुखातिब होते हैं और बात करते हैं तो भला उनसे ज्यादा और कौन ज्ञानवान और बुद्धिमान हो सकता है! सो अपना नाम ही बतला देता है।.. तो गॉड बोलते है 'ये तुम्हारा अहम है और भूल भी! तुमसे भी ज्ञानवान आदमी है इस जगत में .. और तुम्हें उनसे बहुत कुछ सीखने की जरूरत भी है!'
तब मूसा कहता है "प्रभु! अगर ऐसा कोई है तो मैं उनसे जरूर मिलना चाहूँगा और उनसे ज्ञान भी प्राप्त करना चाहूंगा!"
तब गॉड मूसा को एक मछली पे सवार करते हैं और रवाना करते हैं और बोलते हैं कि ये मछली दो सागरों के मिलन स्थान के एक टापू पे रुकेगी और वो ज्ञानवान पुरूष तुमको वहीं मिलेंगे। .. मूसा उस स्थान पे आते हैं और अल-ख़िदर से मिलते हैं। चूंकि मूसा जरा घमंडी और अहम टाइप का इंसान होता है तो अल-ख़िदर कहते हैं कि "तुम मेरे शिष्य बनने लाइक नही हो.. तुममें धैर्य और संयम नहीं है.. जब तक इसपे काबू नहीं करोगे तब तक मैं तुम्हें कुछ ज्ञान नहीं दे सकता.. ज्ञान प्राप्त करने के लिए इनपे काबू होना आवश्यक है!"
तो मूसा कहता है "नहीं गुरुवर! मैं यहाँ इतनी दूर आपसे ज्ञान प्राप्त करने आया हूँ.. मैं आपको वचन देता हूँ कि मैं धैर्य और संयम दोनों को काबू में रखूँगा!"
तब अल-ख़िदर कहते हैं "ठीक है! .. फिलहाल तुम मेरे साथ रहो.. लेकिन मैं क्या करता हूँ,क्यों करता हूँ,किसलिये करता हूँ ये कभी मेरे से पूछना मत.. ये तुम्हारी धैर्य और संयम की परीक्षा होगी!"
तब मूसा सहमत होता है और आगे बात चलती है.. मूसा और अल-ख़िदर के बीच तीन बड़े वाक्या होते हैं जिसे सभी अब्राहमिक वाले बड़े चांव के साथ सुनाते हैं जिसे आप गूगल और यूट्यूब में भी सुन सकते हैं।
फिलहाल इतना काफी है हजरत मूसा और अल-ख़िदर के साथ हुए मुलाकात का किस्सा!
अब आते हैं मेन पॉइंट पे।
जैसा कि पहले ही बता चुके कि भगवान मुरुगन जंगल को जलाकर कृषि मैदान बनाते हैं और कृषि की शुरुआत करते हैं। सबसे पहले शकरकंद और विभिन्न प्रकार के मिलेट्स उपजाते हैं। .. विवाह वल्ली माता या कुमारी माता या कार्तिकेयनी माता से करते हैं। जो भगवान मुरुगन की ही रचना होती है। इनका हर जगह कलर 'हरा' ही देखे हैं और कृषि की प्रतीक होती है।
मुरुगन स्वामी का नाम Kathir (कदिर), Kathirvelan(कदिरवेलन) और कंदन (Kandhan) भी है।
Kathir = का मतलब होता है मिलेट्स।
और चूंकि इसकी खेती स्वयं मुरुगन करते हैं तो इनका नाम कदिर या कदिरवेलन भी होता है। शकरकंद की खेती करते हैं तो शकरकंद भी Kumara या कुमरा कहलाता है और इससे भी मुरुगन का नाम होता है। न्यूजीलैंड में जो शकरकंद का उदाहरण दिया था वो यही था।
श्रीलंका में एक स्थान है 'Kathirkamam'! और यहाँ मंदिर भी है भगवान मुरुगन को समर्पित जो खेती के टाइम से ही है।
Kathir का मतलब होता है मिलेट्स
और Kamam का मतलब होता है गांव।
याने जिस जगह Kathir की खेती पहले पहल हुई वो गांव कहलाया कदिरकामम!
अब इसमें इंटरेस्टिंग बात क्या है कि इस कदिरकामम के मुरुगन मंदिर से मात्र 300 मीटर की दूरी पे एक मस्जिद है। मालूम है वो मस्जिद किसकी है सो ? वो मस्जिद है हज़रत अल-ख़िदर की। वेरी इंटरेस्टिंग न !!!!
और ये वही जगह होता है जहाँ मूसा अल-ख़िदर से मिलते हैं और ज्ञान प्राप्त करते हैं और ज्ञान प्राप्त करने के बाद 'तोराह' की रचना करते हैं।
दो समुद्रों के मिलन स्थान का जिक्र न तोराह करता है और न कुरान। जबकि ये वो स्थान हैं जहाँ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी मिलती है। और ये वो स्थान हैं जहाँ पहले-पहल खेती की शुरुआत हुई। और माता पच्चीअम्मा जो हमेशा ही हरे रंग में ही दिखाई देती वो मुरुगन की ही कृति थी।
अब आगे की बात..
ईरान के 'कुम' शहर के अल-ख़िदर के मस्जिद की बात बता चुका हूं.. ये 3,000 साल पुराना है.. मने इस्लाम से डेढ़ हजार साल पहले। इसी प्रकार इजराइल के 'कुमरन' गुफाओं के बारे में भी बता चुका।
इसके अलावे उज्बेकिस्तान के समरकंद में अल-ख़िदर का मस्जिद है। अब समरकंद नाम भी देखिये।
समर .. मतलब ऊपर ही बता चुके और 'कंद' या 'कंदन' मने मुरुगन!! और अल-ख़िदर का कनेक्शन भगवान मुरुगन से देख ही रहे हैं।
इसके अलावे अल-ख़िदर का मस्जिद इराक के मोसुल शहर में भी है जिसको कि ISIS वालों ने ढाह दिया है। और एक मस्जिद तुर्की के समंडग में भी है।
हदीस अल-ख़िदर के बारे में कहता है कि अल-ख़िदर नाम इनका इसलिए पड़ा कि इन्होंने एक बेजान बंजर भूमि को हरियाली में तब्दील कर दिया सब्जियों को उगा कर। (Al-Khidr was so called because he sat over a barren white land, it turned with Vegetation!)
मने इधर भी इस बात की पुष्टि होती है कि ये कृषि के प्रतीक थे। और वो जिस चीज की खेती की बात कर रहे हैं वो Kathir याने मिलेट्स की बात कर रहे जिसके चलते इनका नाम अपभ्रंश हो के कदिर से ख़िदर हो गया।
अल-ख़िदर हमेशा हरे वस्त्रों में ही दिखाई देंगे व एक मछली पे सवार हुए। ये मछली किस चीज का प्रतीक है ? क्यों ये मछली पे सवार हुए दिखाई देते हैं?? शायद कोई जोल्हेलुइया बता पाए!!.. चलिये बताते है.. कदिरकामम जो जगह है श्रीलंका में वो फिशिंग के लिए भी जाना जाता है। और कृषि के साथ-साथ फिशिंग की भी शुरुआत हुई। और ये मछली उसी कृषि की ही प्रतीक है।.. माता मीनाक्षी का मतलब इसी से है .. मीन मने मछली।
जैसा कि बता चुके कि माता वल्ली वीनस मने शुक्र से संबंध रखती है और इनका कलर हरा है। और दक्षिण में शुक्रवार का दिन माता वल्ली और मुरुगन स्वामी को ही समर्पित रहता है और ये दिन बहुत ही पवित्र माना जाता है।
अब समझ में आ रहा कि जोल्हेलुइया जो खुद को मूसा की औलाद याने मुसलमान कहते हैं का फेवरेट कलर ग्रीन याने हरा क्यों है और पवित्र दिन शुक्रवार क्यों!?.. चोरकट कहीं के।
ये अमरता का सिद्धांत आपको भारत के बाहर कहीं नहीं मिलेगा.. लेकिन एक लाख चौबीस हजार नबियों में एक अमर नबी यही अल-ख़िदर है। .. अमृत पीने वाले अमर हो गए और ये कोई हरा-पेय पीये जिससे कि ये अमर हो गए। अमेजिन न!!
संकलन अजय कर्मयोगी।

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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद