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बखशाली पाण्डुलिपि : भारतीय गणित का कोहिनूर बखशाली पाण्डुलिपि विश्व की प्राचीनतम पांडुलिपियों में से एक है. जैसे रत्नों में रत्न कोहिनूर है वैसे ही विश्व की अभूतपूर्व कृतियों में बखशाली पाण्डुलिपि का स्थान है. कोहिनूर और बखशाली पाण्डुलिपि में समानता है कि दोनों ही भारत की अमूल्य धरोहर हैं और दोनों ही इस समय इंग्लैंड में हैं. लेकिन विडंबना है कि जहाँ कोहिनूर के बारे में तो अमूमन हर भारतीय जानता है वहीँ बखशाली पाण्डुलिपि से शायद ही कभी कोई परिचित मिलता है . बखशाली पाण्डुलिपि आज ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की बोद्लिएँ पुस्तकालय (Bodlein library) की शोभा बढ़ा रही है[५ ]. बखशाली पाण्डुलिपि में निहित सूत्र भारत की गणितीय सोच की गहराई का एक मुखर प्रमाण है . बखशाली पाण्डुलिपि करीब १३५ साल पहले सन १८८० में ब्रिटिश भारत में पेशावर (आज के समय में पाकिस्तान में स्थित) के पास किसी किसान को मिली थी. यह लगभग ७० भोजपत्रों का संग्रह था. भोजपत्र पत्थरों से बनाये हुए एक बक्शे में सुरक्षित रखे हुए थे. कई भोजपत्र निकालने की प्रक्रिया में भी नष्ट हो गए. एक पुलिस निरीक्षक मियाँ अन्वुद्दीन ने इसे लाहौर ...
हर दिन पावन *खुदीराम बोस ( जन्म: 3 दिसंबर, 1889; मृत्यु : 11 अगस्त, 1908)* मात्र 19 साल की उम्र में हिन्दुस्तान की आज़ादी के लिये फाँसी पर चढ़ने वाले क्रांतिकारी थे। भारतीय स्वाधीनता संग्राम का इतिहास क्रांतिकारियों के सैकड़ों साहसिक कारनामों से भरा पड़ा है। ऐसे ही क्रांतिकारियों की सूची में एक नाम खुदीराम बोस का है। 👉 जीवन परिचय खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर, 1889 ई. को बंगाल में मिदनापुर ज़िले के हबीबपुर गाँव में त्रैलोक्य नाथ बोस के यहाँ हुआ था। खुदीराम बोस जब बहुत छोटे थे, तभी उनके माता-पिता का निधन हो गया था। उनकी बड़ी बहन ने उनका लालन-पालन किया था। सन 1905 में बंगाल का विभाजन होने के बाद खुदीराम बोस देश के मुक्ति आंदोलन में कूद पड़े थे। सत्येन बोस के नेतृत्व में खुदीराम बोस ने अपना क्रांतिकारी जीवन शुरू किया था। 👉 अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ खुदीराम बोस राजनीतिक गतिविधियों में स्कूल के दिनों से ही भाग लेने लगे थे। उन दिनों अंग्रेज़ों से छोटे-छोटे हिन्दुस्तानी स्कूली बच्चे भी नफ़रत किया करते थे। वे जलसे जलूसों में शामिल होते थे तथा अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद के ख...
ब्रह्मचर्य  - वीर्य रक्षण  - योग-साधना"। ----------------------- 1. वीर्य  के  बारें  में  जानकारी  - आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य के शरीर में सात धातु होते हैं- जिनमें अन्तिम धातु वीर्य (शुक्र) है। वीर्य ही मानव शरीर का सारतत्व है।  40 बूंद रक्त से 1 बूंद वीर्य होता है।  एक बार के वीर्य स्खलन से लगभग 15 ग्राम वीर्य का नाश होता है । जिस प्रकार पूरे गन्ने में शर्करा व्याप्त रहता है उसी प्रकार वीर्य पूरे शरीर में सूक्ष्म रूप से व्याप्त रहता है। सर्व अवस्थाओं में मन, वचन और कर्म तीनों से मैथुन का सदैव त्याग हो, उसे ब्रह्मचर्य कहते है ।। -------------------------- 2. वीर्य  को पानी  की  तरह   रोज बहा देने से नुकसान   - शरीर के अन्दर विद्यमान ‘वीर्य’ ही जीवन शक्ति का भण्डार है। शारीरिक एवं मानसिक दुराचर तथा प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक मैथुन से इसका क्षरण होता है। कामुक चिंतन से भी इसका नुकसान होता है। मैथून के द्वारा पूरे शरीर में मंथन चलता है और शरीर का सार तत्व कुछ ही समय में बाहर आ जाता है।  रस निका...
-भूगर्भजल का पता लगाने के लिए , कुछ विद्वान निष्णात ‘Y’ आकार की लकड़ी की शाखा हाथ मे रखकर जलभडार बताते है । [][][] वर्ष 499 मे जन्मे’ ‘ वराहमिहिर ‘जो खगोलशास्त्री उपरांत ज्योतिष शास्त्र के प्रखर विज्ञानी भी थे । उन्होने भूगर्भ जल के पत्ता लगाने का अनेक उपायो का मार्गदर्शन दिया है । (1) पूर्व दिशा मे जाबून के वृक्ष के निकट दीमक के ढेर होते दिखाई देते है तो दाहिनी दिशा मे 11 फिट मे पानी का जलभंडार हो सकता है । (2) सूके प्रदेश मे बेरनी के वृक्ष के पास पलाश का वृक्ष हो तो उसकी पश्चिम दिशा मे 16 से 17 फीट मे भूगर्भजल प्राप्त होता है । (3) किसी वृक्ष के नीचे मेढक का निवास हो एक फिट के पास 20-25 फीट की गहराई मे जलभंडार हो सकता है / वराहमिहिर ने अनेक ज्ञानवर्धक बाते का निर्देश किया है । ____________________________________ >>>>>>>>>>>>>>वर्ष 1980 मे गुजरात मे भयंकर अकाल पड़ा था पेयजल की समस्या अति विकट बनी थी तब भूगर्भजल का पत्ता लगाने के लिए जलविज्ञानी आए थे , जहां तहां अनुमानतः खोद कार्य करवाया किन्तु जल उपलब्ध नहीं हुआ । परिणाम स्वरूप जलविज्ञा...

श्राद्ध का ऐतिहासिक महत्व पितृ पक्ष मैं तर्पण दान परंपरा का शास्त्री विधान

*श्रद्धा से श्राद्ध शब्द बना है। श्रद्धा पूर्वक किए हुए कार्य को श्राद्ध कहते हैं।* सत्कार्यों के लिए सत्पुरुषों के लिए सद्भाव के लिए अंदर की कृतज्ञता  की भावना रखना ही श्रद्धा कहलाता है। *उपकारी तत्वों के प्रति आदर प्रकट करना जिन्होंने अपने को किसी प्रकार लाभ पहुंचाया है, उनके लिए कृतज्ञ होना श्रद्धालुओं का आवश्यक कर्तव्य है।* ऐसी श्रद्धा ही धर्म का मेरुदंड है इस श्रद्धा को हटा दिया जाए तो धर्म के सारी महत्ता नष्ट हो जाएगी और वह एक निः सत्व पुछ मात्र बनकर रह जाएगा। *श्रद्धा ही धर्म का एक अंग है इसलिए श्राद्ध उसका धार्मिक कृत्य है* इस प्रकार जीवन में जो भी कार्य श्रृद्धा पूर्वक किते जाते हैं।वे ही श्रेष्ठ फल प्रदान करते हैं।   https://ajaykarmyogi.blogspot.com/2017/11/blog-post_26.html?m=1 पर अब्राहिमिक संस्कृतियों के दरिंदे हमारे आस्था और श्रद्धा विश्वास पर अनेक घात कर रहे हैं हमें इससे अलग करने का षड्यंत्र जो पिछले हजार साल से चल रहा अपने पूर्वजों का अतुलनीय योगदान का यह एक पक्ष है हे परम आदरणीय एवं पूज्यनींय पूर्वजों हम आपको नमन करते हैं सात सौ साल के इस्लामिक हैव...
Manchester Univ. Confirms: This is How Isaac Newton Stole Concept of Gravity from a Hindu Gurukul A little known school of scholars in south India discovered one of the founding principles of modern mathematics hundreds of years before Isaac Newton according to this new finding by Manchester University. Many would not believe how christian missionaries also helped in transporting this Information to Britian in 15th Century. Dr George verghese Joseph from The University of Manchester says the ‘Kerala School’ identified the ‘infinite series’- one of the basic components of calculus – in about 1350. The discovery is currently and wrongly attributed in books to Sir Isaac Newton and Gottfried Leibnitz at the end of the seventeenth centuries. The team from the Universities of Manchester and Exeter reveal the Kerala School also discovered what amounted to the Pi series and used it to calculate Pi correct to 9, 10 and later 17 decimal places. And there is strong circ...
*भारतीय संस्कृति पर षड्यंत्र* *_क्या महिला सशक्तिकरण के नाम पर सन्नी लियोन जैसी स्त्रियां समाज का आइना होंगी ?_* वर्तमान की भारतीय राजनीति में एक कौम अपनी पराजय और विफलता को बर्दास्त नहीं कर पा रही है ........ इसीलिए एक मनोवैज्ञानिक वर्चस्व हिंदुओं पर स्थापित करने के  षड्यंत्र रचे जा रहे है और यह षड्यंत्र कभी फिल्मों के माध्यम से कभी सरकारी संस्थाओं के माध्यम से और कभी भारत के मीडिया के माध्यम से, यहाँ यह समझने की आवश्यकता है कि......हर षड्यंत्र हिंदुओं की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक अस्मिता को नष्ट करने के लक्ष्य से हो रहा है अब भी  चुप रहे तो आने वाले समय एक एक करके हिन्दू धर्म की परम्पराओं, ग्रंथों और सोलह संस्कारों को फिल्मों, टीवी सीरियल और मीडिया के माध्यम से नष्ट किया जाएगा। तब तक बहुत देर हो चुकी होगी .....!! विश्व सुंदरी प्रतियोगिता में जीतकर कोई देश का गौरव नहीं बढ़ता और ना ही कोई देशहित होता है‌। कुछ लोग गीता-बबीता फोगट और इस प्रतियोगिता की विजेताओं की ड्रेस को एक जैसा बता रहे हैं ,  ऐसे मानसिक विकलांग कहाँ जाये ...... विश्व सुन्दरी औरत की देह दर्श...