बखशाली पाण्डुलिपि : भारतीय गणित का कोहिनूर बखशाली पाण्डुलिपि विश्व की प्राचीनतम पांडुलिपियों में से एक है. जैसे रत्नों में रत्न कोहिनूर है वैसे ही विश्व की अभूतपूर्व कृतियों में बखशाली पाण्डुलिपि का स्थान है. कोहिनूर और बखशाली पाण्डुलिपि में समानता है कि दोनों ही भारत की अमूल्य धरोहर हैं और दोनों ही इस समय इंग्लैंड में हैं. लेकिन विडंबना है कि जहाँ कोहिनूर के बारे में तो अमूमन हर भारतीय जानता है वहीँ बखशाली पाण्डुलिपि से शायद ही कभी कोई परिचित मिलता है . बखशाली पाण्डुलिपि आज ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की बोद्लिएँ पुस्तकालय (Bodlein library) की शोभा बढ़ा रही है[५ ]. बखशाली पाण्डुलिपि में निहित सूत्र भारत की गणितीय सोच की गहराई का एक मुखर प्रमाण है . बखशाली पाण्डुलिपि करीब १३५ साल पहले सन १८८० में ब्रिटिश भारत में पेशावर (आज के समय में पाकिस्तान में स्थित) के पास किसी किसान को मिली थी. यह लगभग ७० भोजपत्रों का संग्रह था. भोजपत्र पत्थरों से बनाये हुए एक बक्शे में सुरक्षित रखे हुए थे. कई भोजपत्र निकालने की प्रक्रिया में भी नष्ट हो गए. एक पुलिस निरीक्षक मियाँ अन्वुद्दीन ने इसे लाहौर ...
Ajay karmyogi अजय कर्मयोगी शिक्षा स्वास्थ्य संस्कार और गौ संस्कृति साबरमती अहमदाबाद परंपरा ज्ञान चरित्र स्वदेशी सुखी वैभवशाली व पूर्ण समाधान हेतु gurukul व्यवस्था से सर्वहितकारी व्यवस्था का निर्माण