-भूगर्भजल का पता लगाने के लिए , कुछ विद्वान निष्णात ‘Y’ आकार की लकड़ी की शाखा हाथ मे रखकर जलभडार बताते है ।
[][][] वर्ष 499 मे जन्मे’ ‘ वराहमिहिर ‘जो खगोलशास्त्री उपरांत ज्योतिष शास्त्र के प्रखर विज्ञानी भी थे । उन्होने भूगर्भ जल के पत्ता लगाने का अनेक उपायो का मार्गदर्शन दिया है ।
(1) पूर्व दिशा मे जाबून के वृक्ष के निकट दीमक के ढेर होते दिखाई देते है तो दाहिनी दिशा मे 11 फिट मे पानी का जलभंडार हो सकता है ।
(2) सूके प्रदेश मे बेरनी के वृक्ष के पास पलाश का वृक्ष हो तो उसकी पश्चिम दिशा मे 16 से 17 फीट मे भूगर्भजल प्राप्त होता है ।
(3) किसी वृक्ष के नीचे मेढक का निवास हो एक फिट के पास 20-25 फीट की गहराई मे जलभंडार हो सकता है / वराहमिहिर ने अनेक ज्ञानवर्धक बाते का निर्देश किया है । ____________________________________
>>>>>>>>>>>>>>वर्ष 1980 मे गुजरात मे भयंकर अकाल पड़ा था पेयजल की समस्या अति विकट बनी थी तब भूगर्भजल का पत्ता लगाने के लिए जलविज्ञानी आए थे , जहां तहां अनुमानतः खोद कार्य करवाया किन्तु जल उपलब्ध नहीं हुआ । परिणाम स्वरूप जलविज्ञानियों ने *वराहमिहिर बृहद संहिता* “ ग्रंथ का आधार लेकर अनेक स्थानो पर खोद कार्य करवाया था तब मधुर , जल का विपुल जलभंडार प्राप्त हुआ था ।
[][][] वर्ष 499 मे जन्मे’ ‘ वराहमिहिर ‘जो खगोलशास्त्री उपरांत ज्योतिष शास्त्र के प्रखर विज्ञानी भी थे । उन्होने भूगर्भ जल के पत्ता लगाने का अनेक उपायो का मार्गदर्शन दिया है ।
(1) पूर्व दिशा मे जाबून के वृक्ष के निकट दीमक के ढेर होते दिखाई देते है तो दाहिनी दिशा मे 11 फिट मे पानी का जलभंडार हो सकता है ।
(2) सूके प्रदेश मे बेरनी के वृक्ष के पास पलाश का वृक्ष हो तो उसकी पश्चिम दिशा मे 16 से 17 फीट मे भूगर्भजल प्राप्त होता है ।
(3) किसी वृक्ष के नीचे मेढक का निवास हो एक फिट के पास 20-25 फीट की गहराई मे जलभंडार हो सकता है / वराहमिहिर ने अनेक ज्ञानवर्धक बाते का निर्देश किया है । ____________________________________
>>>>>>>>>>>>>>वर्ष 1980 मे गुजरात मे भयंकर अकाल पड़ा था पेयजल की समस्या अति विकट बनी थी तब भूगर्भजल का पत्ता लगाने के लिए जलविज्ञानी आए थे , जहां तहां अनुमानतः खोद कार्य करवाया किन्तु जल उपलब्ध नहीं हुआ । परिणाम स्वरूप जलविज्ञानियों ने *वराहमिहिर बृहद संहिता* “ ग्रंथ का आधार लेकर अनेक स्थानो पर खोद कार्य करवाया था तब मधुर , जल का विपुल जलभंडार प्राप्त हुआ था ।
