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🙏  *।।वन्दे मातरम्।।*  🙏   🚩 *100% FDI, GST, विमुद्रीकरण और अब Cashless society! cashless system आर्थिक गुलामी का अंतिम चरण है।* *सबके लिये बैंक खाता अनिवार्य होगा, आधार लिंक के साथ। सारी transaction online अर्थात cashless होगी, सब्जी से लेकर मोटरसाईकिल तक सबकी खरीदारी debit/credit card या freecharge, paytm, jio money जैसी e-wallet से होगी। जो कि आधार से लिंक होगा। आपकी हर खरीदारी का हिसाब रखा जाएगा, आधार कार्ड मे दिए गए आपके biometric data के द्वारा। Driving License से bank account तक सबकुछ आधार से लिंक होगा।* *यदि कोई सरकार के किसी गलत फैसले के विरूद्ध, विरोध प्रदर्शन करना चाहे तो उसका driving license, bank account, debit card सब सील कर दिया जाएगा, और बंदा कुछ भी नहीं उखाड़ पाएगा उल्टा घर मे भुखमरी आ जावेगी। अर्थात सरकार के हर सही गलत फैसले को गुलामों कि भाँति सर झुका कर मानना पड़ेगा।* *पहले बैंक में पैसा रखने पर बैंक ब्याज देती थी, पर अब बैंक, पैसे रखने के अलग से चार्ज वसुलेगी। क्योंकि अब बैंको मे पैसा रखना हमारी मजबूरी होगी।* *पहले, वस्तु/सेवा के मुल्य ...
भारत के ऋषि मुनियो ने लाखो - लाखो वर्ष एक -एक वृक्ष और पौधे पर गहन अनुसंधान किया और फिर उस पर धार्मिक और वैज्ञानिकता की मौहर लगा कर आम भारतीयो और पृथ्वी वासियो को उसके गुणो का लाभ दिलाया ऐसे ही पवित्र और वैज्ञानिक गुणो वाला एक वृक्ष है "आवला " आवले के वृक्ष मे दैवीय शक्तियों का वास होता है रोगो से लड़ने की अनुपम शक्ति के कारण ही इस वृक्ष को अमर फल का नाम भी प्रदान किया गया चिक्तिसा परामर्श हेतु हमसे संपर्क करने वालो में सर्वाधिक संख्या उन रोगियों की होती है जो उदर रोगों से पीड़ित होते है - जैसे अपच,भूख न लगना, गैस, एसिडिटी और सबसे मुख्य रोग कब्ज़ | अनियमित दिनचर्या और अनुचित आहार-विहार के अलावा मानसिक तनाव, नाना प्रकार के कारणवश होने वाली चिंता का सीधा प्रभाव नींद और पाचन संस्थान पर पड़ता है और व्यक्ति अनिद्रा तथा अपच का शिकार हो जाता है और इस स्थिति का निश्चित परिणाम होता है कब्ज़ होना | कब्ज़ कई व्याधियों की जड़ होती है जिसमे बवासीर, वात प्रकोप, एसिडिटी, गैस और जोड़ों का दर्द आदि व्याधियां कब्ज़ के ही देन होती है | तो आज मैं चर्चा करने जा रहे है जिसमे सारे रोगों को दूर करन...
भारतीयता के प्रखर प्रवक्ता भाई राजीव दीक्षित जी को समर्पित जानिये मैक्स मुलर ने भारतीय ग्रंथो के साथ क्या क्या किया ! मित्रो बहुत कम लोग जानते है की हमारी बहुत सी धार्मिक किताबें,शास्त्र और इतिहास के साथ अंग्रेज़ो ने बहुत छेड़खानी करी है ! आपको सुन कर हैरानी होगी भारत मे एक मूल प्रति है मनुसमृति की जो हजारो वर्षो से आई है और एक मनुस्मृति अंग्रेज़ो ने लिखवाई है ! और अंग्रेज़ो ने इसको लिखवाने मे मैक्स मुलर की मदद ली थी मैक्स मुलर एक जर्मन विद्वान था जिसको संस्कृति बहुत अच्छे से आती थी उसको कहा गया की तुम भारत के शास्त्रो को पढ़ो और पढ़ कर हमको बताओ की उनमे क्या है फिर जरूरत पढ़ने पर इसमे फेरबदल करेंगे ! तब मैक्स मुलर ने मनुस्मृति का अनुवाद किया पहले जर्मन मे किया फिर अँग्रेजी मे किया तब अंग्रेज़ो को समझ आया की मनुस्मृति तो भारत की न्यायव्यवस्था की सबसे बड़ी पुस्तक है और भारत की न्याय व्यवस्था का आधार है ! तो उन्होने मनुसमृति मे ऐसे विक्षेप डलवा दिये ताकि भारत वासियो को भ्रमाया जा सके और उनको गलत रास्ते पर चलाया जा सके ! उनको मनुस्मृति के प्रति बहुत ज्यादा नीचाई की भावना पैदा हो इस तरह के ...
एक् ग़लतफ़हमी का पूरा विश्व शिकार था कि पश्चमी देश शुरू से ही धनाढ्य रहा है। और हमको ये बताया गया है कि भारत एक आध्यात्मिक और धर्म प्रधान देश था लेकिन अर्थ प्रधान देश कभी भी नहीं था । जबकि 2000 सालो से ज्यादा वर्षों तक भारत विश्व कि एक सबसे बड़ी अर्थशक्ति थी , ये नई रेसेयरचेस से पता चल रहा है । भारत सोने की चिड़िया नहीं , मैनुफेक्चुरिंग की बहुत बड़ी अर्थ शक्ति थी । ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------         इस ग़लतफ़हमी को एक बेल्जियन इकोनॉमिस्ट ने तोडा । उसका नाम था पाल बैरोच । 80 के दशक में ,जिसके रिसर्च को पॉल कैनेडी ने अपनी ने अपनी पुस्तक "The Rise and fall of great Powers" उद्धृत किया। बरोच ने कहा कि झूठ है।पूर्व में पश्चिमी देश धनी नहीं गरीब थे। बल्कि सत्य इसके विपरीत है धनी देश पूर्व में थे औपनिवेश के पूर्व।      एक इतिहासकार हैं Jack Goldstone George Mason University के जिन्होंने 2009 में हायर एजुकेशन में चलने वाली एक बुक लिखी The Rise of the West in World Histo...
कैलाश पर्वत का रहस्य क्या है? इसे दुनिया का सबसे बड़ा रहस्यमयी पर्वत माना जाता है। यहां अच्छी आत्माएं ही रह सकती हैं। इसे अप्राकृतिक शक्तियों का केंद्र माना जाता है। यह पर्वत पिरामिडनुमा आकार का है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती का केंद्र है। यह एक ऐसा भी केंद्र है जिसे एक्सिस मुंडी कहा जाता है। एक्सिस मुंडी अर्थात दुनिया की नाभि या आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र। यह आकाश और पृथ्वी के बीच संबंध का एक बिंदु है, जहां दसों दिशाएं मिल जाती हैं। रशिया के वैज्ञानिकों अनुसार एक्सिस मुंडी वह स्थान है, जहां अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है और आप उन शक्तियों के साथ संपर्क कर सकते हैं। कैलाश पर्वत की संरचना कम्पास के चार दिक् बिंदुओं के सामान है और एकांत स्थान पर स्थित है, जहां कोई भी बड़ा पर्वत नहीं है। कैलाश पर्वत पर चढ़ना निषिद्ध है, पर 11वीं सदी में एक तिब्बती बौद्ध योगी मिलारेपा ने इस पर चढ़ाई की थी। रशिया के वैज्ञानिकों की यह रिपोर्ट 'यूएनस्पेशियल' मैग्जीन के 2004 के जनवरी अंक में प्रकाशित हुई थी। कैलाश पर्वत चार महान नदियों के स्रोतों से घिरा है- सिंध, ब...

गोपाष्गोटमी के दिन गौ गोपाल गौपालन से सर्वोन्नति का राजमार्ग

*🌹सर्वोन्नति का राजमार्ग : गोपालन*🌹 *(गोपाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं  https://youtu.be/2bRukzmmjys 🌹वर्ष में जिस दिन गायों की पूजा-अर्चना आदि की जाती है वह दिन भारत में ‘गोपाष्टमी’ के नाम से मनाया जाता है । जहाँ गायें पाली-पोसी जाती हैं, उस स्थान को गोवर्धन कहा जाता है । *🌹गोपाष्टमी का इतिहास*🌹 🌹गोपाष्टमी महोत्सव गोवर्धन पर्वत से जुड़ा उत्सव है । गोवर्धन पर्वत को द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक गाय व सभी गोप-गोपियों की रक्षा के लिए अपनी एक अंगुली पर धारण किया था । गोवर्धन पर्वत को धारण करते समय गोप-गोपिकाओं ने अपनी-अपनी लाठियों का भी टेका दे रखा था, जिसका उन्हें अहंकार हो गया कि हम लोग ही गोवर्धन को धारण किये हुए हैं । उनके अहं को दूर करने के लिए भगवान ने अपनी अंगुली थोड़ी तिरछी की तो पर्वत नीचे आने लगा । तब सभीने एक साथ शरणागति की पुकार लगायी और भगवान ने पर्वत को फिर से थाम लिया । 🌹उधर देवराज इन्द्र को भी अहंकार था कि मेरे प्रलयकारी मेघों की प्रचंड बौछारों को मानव श्रीकृष्ण नहीं झेल पायेंगे परंतु जब लगातार सात दिन तक प्रल...
*गाय व भारत की दुर्दशा का सच* गाय व बछड़ों के दो मुख्य दुश्मन है । पहला टैक्टर दूसरा दूध की डेरियाँ । डेरियों ने जबसे फैट युक्त दूध लेना शुरू किया तबसे गाय हांसिये पर आ गयी । इन सबके पीछे मुख्य कारण है मनुष्य का लालच और आलस्यपन । सरकार कभी भी आजतक इन सत्तर वर्षों में गरीब व उपेक्षित को देखकर बजट नहीं बनाती है , सरकार हमेशा उद्योगपति , शहरीकरण , और उच्चवर्ग को देखकर ही बजट बनाती है , क्योंकि यही उनके आय का स्रोत हैं । यदि सारी गौचर भूमि भी खाली करा दी जाये तो भी 40 % से अधिक गौ-वंश नहीं बचने वाला है । पहले किसान गाय को इसलिए पालता था कि उसे सिर्फ एक समय का ही चारा खिलाना पड़ता था , आज भूसा को टैक्टर के द्वारा खेतों में उड़ा दिया जाता है , फिर 10 -15 रुपये किलो का भूसा कौन खिलाना चाह रहा है , वह भी उन गायों को जो दूध नहीं देती या कम देती हैं या जिनका मूल्य कम है । सरकार ने मनरेगा , नरेगा के द्वारा जबसे मजदूरों की मजदूरी देनी शुरू की है जिसमें मजदूर और प्रधान की पूरी सांठ-गांठ होती है इसलिए मजदर मंहगे हो गये, नरेगा या मनरेगा में काम कुछ नहीं होता सिर्फ कागज पर काम होता है , और कम...