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अनेक अलोकिक चमत्कारिक शक्ति के विशेषताओं से युक्त ब्रम्ह कमल

 



प्रकृत्ति से जुड़ी हर चीज बहुत खूबसूरत है, चाहे वो नदियां हों या तालाब, फूल हों या पेड़-पौधे, ये सभी ना सिर्फ आकर्षक हैं बल्कि कई ऐसे गुणों से लैस भी हैं जो मानव हित के काम आते हैं। इनमें से कुछ तो पूरी तरह दैवीय शक्ति वाले माने जाते हैं। अनेक अलोकिक चमत्कारिक शक्ति के विशेषताओं से युक्त ब्रम्ह कमल एक पवित्र फूल है।


कुछ शोध के मुताबिक वैद्य लोगो का ऐसा कहना है, की इसकी पंखुड़ियों से टपकने वाली बुँदे अमृत के समान होता है। इसके अलावा यह फूल कई बिमारियों में भी लाभदायक होता है। आज हम इससे जुड़ी कई बातो के बारे जमीन जानेगे। जैसे की ब्रह्म कमल कब खिलता है, इसे किस देवता को चढ़ाया जाता है। ब्रह्म कमल का पौधा कैसे लगाये और इसका पौधा कहाँ मिलेगा। इससे जुड़ी और भी कई रोचक जानकारियां आपको मिलने वाली है। तो चलिए जानते है, ब्रह्म कमल की विशेषता के बारे में –
ब्रह्म कमल एक प्रकार का फूल होता है, जिसका वानस्पतिक नाम : Saussurea Obvallata है। इसकी 24 प्रजातियां उत्तराखंड राज्य में मिलती है, इसे उत्तराखंड में कौल पद्म नाम से भी जाना जाता है, कुछ किवदंतियों के अनुसार ऐसा भी माना जाता है, की इस फूल का नाम सृष्टि के देवता ब्रह्मा के नाम पर पड़ा है।
इसके अलावा ब्रह्म कमल की पुरे संसार में लगभग 210 प्रजातियां पाई जाती है। यह फूल पुरे साल में सिर्फ एक बार रात के समय खिलता है। कभी कभी यह खिलने में एक साल से ज्यादा का समय भी लगा देता है। कुछ लोगो का एक सवाल होता है, की ब्रह्म कमल कब खिलता है? आपको बता दें की ब्रह्म कमल साल में एक बार रात के समय जुलाई और सितंबर के बीच में खिलता है।
ब्रह्म कमल का उपयोग आयुर्वेद में एक जड़ी बूटी के रूप में किया जाता है। इसका जड़ से लेकर फूल तक सभी अंगो को उपयोग में लाया जाता है। ब्रह्म कमल किस राज्य का राजकीय पुष्प है, आपको बता दे की ब्रह्म कमल का फूल उत्तराखंड राज्य का राजकीय पुष्प है। भारत में यह फूल बहुत पवित्र माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस फूल को सुख समृद्धि और धन का प्रतिक माना जाता है। जिस घर में ब्रह्म कमल का पौधा लगाया जाता है, वजहें पर हमेशा सुख शांति बनी रहती है।
ब्रह्म कमल का रंग सफ़ेद होता है, यह सुन्दर और आकर्षक फूल चन्द्रमा की रौशनी में खिलता है। सूर्यास्त के बाद यह खिलना शुरू होता है। ब्रह्म कमल के फूल को पूरा खिलने में लगभग दो से तीन घंटे का समय लगता है। और यह पूरी रात खिला रहता है। ब्रह्म कमल के फूल के लिए ऐसा भी माना जाता है, की अगर ब्रह्म कमल के फूल को खिलते हुए देख कर कोई भी मनोकामना मांगी जाए, तो वह पूरी हो जाती है।


ब्रह्म कमल का पौधा कहां मिलता है? ब्रह्म कमल के पौधे सबसे ज्यादा उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्रों में उगते है। जिनमे पिंडारी ग्लेशियर, फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब, और तुंगनाथ प्रमुख है। केदारनाथ में ब्रह्म कमल के फूल को चढ़ाया जाता है।
इस फूल का जब खिलने का मौसम आता है, तो स्थानीय लोग ब्रह्म कमल को तोड़कर मंदिरो तक पहुंचाते है। इस फूल की बिक्री पर प्रतिबन्ध होने के बाबजूद भी इसे तीर्थयात्रियों को बेचा जाता है। वतमान में ब्रह्मकमल ख़त्म होने की कगार पर है, क्योकिं जैसे ही इसके फूल खिलते है, तुरंत तोड़ लिए जाते है। जिससे की फूलों से बीज नहीं बन पाते है। इस प्रकार इसकी प्रजातियां ख़त्म होने की कगार पर है।
ब्रह्म कमल को तोड़ने के नियम
ब्रह्म कमल माँ नंदा देवी को सबसे प्रिय पुष्प है। इसलिए ब्रह्म पुष्प को नंदा अष्टमी के दिन तोड़ा जाता है। इसके अलावा ब्रह्म कमल को तोड़ने के और भी कई सख्त नियम होते है, जिनका पालन करना बहुत जरुरी है। इस फूल का जीवनकाल लगभग 5 से 6 महीने होता है। इस फूल का उल्लेख भारतीय महाकाव्य महाभारत में भी मिलता है। इसकी मादक सुगंध की वजह से द्रोपदी इस पुष्प को पाने के लिए व्याकुल हो गयी थी।
ब्रह्म कमल की अपनी एक कहानी भी है। जिसके अनुसार ऐसा माना जाता है, की जब हिमालय क्षेत्र में आए थे, तो उन्होंने भगवान् शिव को एक हजार ब्रह्मकमल चढ़ाये थे, लेकिन इसमें से एक पुष्प कम था। तब विष्णु भगवान ने पुष्प के रुप भगवान् शिव को अपनी एक आँख समर्पित की थी। उस समय से भगवान् शिव को कमलेश्वर के नाम से और विष्णु भगवान को नाम कमल नयन के नाम से जाना जाता है।
ब्रह्म कमल का पौधा कैसे लगाये
ब्रह्म कमल के पौधे को लगाना बहुत आसान है। इस पौधे को लगाने के लिए आपको इसकी एक पत्ती लेनी पड़ती है।ब्रह्म कमल लगाने के लिए आपको सबसे पहले मिटटी को तैयार करना है। इसके लिए आपको 50 प्रतिशत सामान्य मिटटी और 50 प्रतिशत गोबर की पुरानी खाद को मिलकर तैयार कर लेना है।इसके बाद आपको ब्रह्म कमल की पत्ती Leaves को लगभग तीन से चार इंच की गहराई में लगाना है।ब्रह्म कमल को लगाने के बाद गमले में भरपूर मात्रा में पानी डाल दें।इसके बाद गमले को किसी ऐसे स्थान पर रख दें, जहाँ पर सूरज की रौशनी सीधी ना आती हो।क्योकिं ब्रह्म कमल को ज्यादा गर्मी पसंद नहीं होती है। यह ठन्डे स्थान पर बहुत अच्छी तरह से बढ़वार करता है।लगभग एक महीने में सभी पत्तियों से जड़े निकलना शुरू हो जाएँगी।जब पौधे बड़े हो जाएँ, तो इन्हे सिर्फ इतना पानी दे की सिर्फ नमी बनी रहे। क्योकिं इन्हे पानी की बहुत कम आवश्यकता होती है।
How to Grow Brahma Kamal
ब्रह्म कमल पौधे की देखभाल कैसे करें
ब्रह्म कमल के पौधे को ज्यादा देखभाल करने की आवश्यकता नहीं होती है।अगर इसके पौधे की पत्तियों पर कीड़े लग जाते है, तो ऐसे में आपको कोई भी कीटनाशक दवाई का उपयोग करना चाहिये।इस पौधे को धुप ज्यादा पसंद नहीं होती है, इसे हमेशा छाया वाले स्थान पर रखे।ब्रह्मकमल को पानी की भी ज्यादा आवश्यकता नहीं होती है। जरुरत के अनुसार ही पानी डालें।इस पौधे को ज्यादा फर्टीलिज़ेर की भी आवश्यकता नहीं होती है। आप एक साल में दो बार गोबर की खाद पौधे की जड़ में डाल सकते है।
ब्रह्म कमल कहाँ पाया जाता है?
ब्रह्म कमल भारत के उत्तराखंड राज्य में 3000-5000 मीटर की ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी पुरे भारत में लगभग 61 प्रजातियां पायी जाती है। जिसमे से 58 प्रजातियां हिमालय में होती है।
ब्रह्म कमल की विशेषता क्या है?
भारतीय हिमालयी क्षेत्र में कई प्रकार के दुर्लभ पेड़ पौधे उपलब्ध है। जिनमे एक ब्रह्म कमल भी शामिल है। ब्रह्मकमल हिन्दू देवता ब्रह्मा के नाम से सम्बंधित है, इसलिए इसे ‘हिमालयी फूलों का राजा’ माना जाता है।
ब्रह्म कमल किस राज्य का राजकीय पुष्प है?
ब्रह्म कमल उत्तराखंड का राजकीय पुष्प है।
ब्रह्मकमल एक साल में कितनी बार खिलता है?
ब्रह्मकमल एक साल में एक बार खिलता है। यह फूल रात में खिलता है।
Note – यह पोस्ट ब्रह्म कमल के फूल पर आधारित थी। जिसमे आपको इससे सम्बंधित सभी जानकारियां प्रदान की गयी है। आपको यह पोस्ट Brahma Kamal कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं। अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी, तो कृपया अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें

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