आज कन्यादान नही होता बुढ़िया दान होता है
क्या_यह_अजीब_नहीं_कि_बालविवाह_का_हौव्वा_केवल_इस_तर्क_पर_आधारित_है_कि_गर्भधारण_के_लिए_उनका_शरीर_तैयार नही है ।सम्पन्न घरों की लड़कियां बहुत ज्यादा पोर्न देखती है। वे हर समय यौन उन्माद में जीती है।श्रम विहीन जीवन और अच्छे खानपान से वे जल्दी जवान होती है। उनके पास अपना एक अलग कमरा होता है। वे पेरेंट्स द्वारा तैयार किया एक सेक्सबम हैं जो जरा सी चिंगारी मिलते ही कभी भी फूट सकता है।
इसके विपरीत परम्परागत हिन्दू परिवारों में ऐसा नहीं होता था। लड़कियों को कई व्रत करने पड़ते थे। उत्तेजक आहार नहीं दिया जाता था। थोड़ी जवान होते ही विवाह या गौना हो जाता था। विवाह पूर्व श्रृंगार, अच्छे कपड़े आदि केवल नैमित्तिक ही थे। सरस लोकगीत और रामचरितमानस में निपुणता अनिवार्य थी।
माता, सास या जिठानी का पहरा था।
आज की स्कूल शिक्षा इतनी उबाऊ और फालतू है कि घण्टों तक बिना कुछ किये क्लासरूम में बैठना पड़ता है। एनर्जी का उपयोग जैसे सिलाई, नृत्य, खेल, कला आदि को फालतू समझा जाता है।
खाली समय में लड़के लड़कियां सेक्स फंतासी में खो जाते हैं। क्या यह अजीब नहीं कि बालविवाह का हौव्वा केवल इस तर्क पर आधारित है कि गर्भधारण के लिए उनका शरीर तैयार नहीं है,,,, उधर गर्भनिरोधक के सहारे खुलकर विवाह पूर्व सेक्स की भी वकालत की जाती है। आज भी कई विवाहित लड़कियां कॉलेज जाती हैं, गर्भनिरोधकों के सहारे वह इस झंझट से भी मुक्त रहती है।
बॉयफ्रेंड की बजाय #बॉयहसबैंड ज्यादा प्रभावी है। 13 वर्ष की लड़की तीस बरस की होने तक कैसे इंतजार करेगी??
--अपनी परम्परा को रूढ़िवादी बताकर ही इस को बंद किया ह
अन्यथा कन्यादान की अवस्था तो यही है।आज कन्यादान नही होता बुढ़िया दान होता है।।
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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद