Skip to main content

जन्मजात बच्चों को दानवों से बचाने यानी गर्भ संंरक्षण का उपाय

    


 

गर्भवती स्त्री के लिए नियम-संयम

*हम सबका अनुभव है कि अब से 20 -25 साल पहले तक 1% प्रसव (delivery) ऑपरेशन से होते थे। जब से गर्भवती महिलाओं में गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाने का प्रचलन बढ़ा है, 70% प्रसव ऑपरेशन से होने लगे हैं। आँकड़ें कहते हैं कि पूरे देश में केवल 7% प्रसव ऑपरेशन से होते हैं। वास्तव में आज भी केवल 10% गर्भवती महिलाएँ ही गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाती है, उनमें से 70% पूरे देश की महिलाओं का 7% ही होता है।*
स्वाभाविक है कि या तो गायेकोलॉजिस्ट अज्ञानी है या इसके पीछे कोई भयानक षड्यंत्र है। पहले अज्ञान की बात-
*गायनेकोलॉजिस्ट का अज्ञान –*          https://youtu.be/k8i0_lqRNU8

हमारे यहाँ की अनपढ़ से अनपढ़ महिला भी जानती है कि गर्म आहार से गर्भस्राव (miscarriage) हो सकता है;
इसलिए गर्भवती को गुड़, तला भोजन, गर्म मसाला, पपीता, लहसुन, बैंगन, दही आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। लेकिन जैसे ही कोई गर्भवती महिला डॉक्टर के पास जाती है, वे उसे आयरन और कैल्शियम की कमी बताकर आइरन-कैल्शियम देना शुरु कर देती हैं। *आइरन-कैल्शियम दोनों ही बहुत गर्म होते हैं।*
परिणाम-गर्भाशय का मुँह खुलना - खून गिरना -
डॉक्टर द्वारा बेड रेस्ट की सलाह बेड रेस्ट से शरीर में सूजन – सूजन से सामान्य प्रसव में दिक्कत – अंत में ऑपरेशन की नौबत।
दूसरी ओर आज पैदा होते ही बच्चों को पीलिया (jaundice) हो रहा है या उनके हार्ट के वॉल्व में छेद होता है
सामान्यतः 10 से 15 वर्ष पित्त विकृत रहने के बाद हार्ट के वॉल्व में छेद होता है।
बच्चे ऑटिस्टिक डिस्लेकसिक हो रहे हैं या 2-3 वर्ष के होते ही चश्मा लगाने लग गये हैं।
ये सब *गर्म औषधियों के सेवन कराने का ही परिणाम है।* इन सबसे गर्भाशय को भी बहुत नुकसान होता है। इसी का परिणाम है कि आज गर्भाशय की बीमारियों की और उनसे मुक्ति के लिए गर्भाशय निकलवाने की बाढ़ सी आ गई है।
*गायनेकोलॉजिस्ट का षड्यंत्र –*

एक स्वाभाविक प्रसव में कोई विशेष कमाई नहीं होती, लेकिन सीजेरियन डिलीवरी में कितनी कमाई होती है यह किसी से छिपा नहीं है।

*ज्योतिष का दुरुपयोग –*
कुछ गायनेकोलॉजिस्ट तो सीजेरियन डिलीवरी के लिए ज्योतिष के ज्ञान का दुरुपयोग करती हैं, वे कहती हैं, "देखो! तुम्हारी डिलीवरी का दिन बड़ा अशुभ है, उस दिन हुई संतान में कई दोष होंगे; लेकिन उसके चार-पाँच दिन पहले बड़ा शुभ दिन है, उस दिन होनेवाली संतान बड़ी गुणी होगी। गुणी संतान चाहिए तो कराओ ऑपरेशन!"
*संस्कारित बच्चे के जन्म के लिए गर्भाधान के दौरान शुभ मुहूर्त देखना होता है, जब गर्भाधान ही महूर्त के अनुसार नहीं होता है तो प्रसव के लिए कृत्रिम मुहूर्त रचने से क्या लाभ होगा?*
सीजेरीयन डिलीवरी के लिए कैची (scissor) का उपयोग किया जाता है, कैची लोहे की होती है, लोहे में शनि का वास होता है। अभी जो बच्चा धरती पर आया नहीं और उस पर शनि की दृष्टि पड़ गई, उस बच्चे का क्या भविष्य होगा?
*आइरन-कैल्शियम*
गायनेकोलॉजिस्ट कहती है कि आइरन-कैल्शियम की कमी दूर नहीं करेंगे, तो बहुत सी समस्याएँ खड़ी हो जायेगी। बात बिल्कुल सही है, लेकिन यदि उनको वास्तव में यह चिंता है तो उनका एसोसिएशन यह प्रचार अभियान क्यों नहीं चलाता कि स्त्रियाँ तभी गर्भ धारण करें जब उनके शरीर में आइरन-कैल्शियम की कमी न हो? गर्भधारण करने के बाद ही वो क्यों जागती हैं? जबकि आप जानती हैं कि गर्भवती के लिए आइरन-कैल्शियम हानिकारक है। ऐसी स्थिती ही क्यों आने देती हैं, जहाँ एक ओर कुआँ और दूसरी ओर खाई हो?
*आयरन कैल्सियम की कमी को दूर करने का उपाय-*
जब आइरन कैल्शियम की कमी हो, तब शरीर में बढ़ रहे वात-पित्त को नियंत्रित करें। सूखेपन (वात) के कारण शरीर, भोजन से कैल्शियम अवशोषित (absorb) नहीं कर पाता है। जबर्दस्ती कैल्शियम के लिए *चूने* का सेवन कराने पर, यह किडनी या पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) में पथरी, आँख में मोतियाबिंद, हड्डियों की विकृति या हृदय की धड़कन को तेज करने का काम कर सकता है। *दूध में गाय का घी डालकर पीने से दूध का कैल्शियम सुपाच्य हो जाता है साथ ही चूने के पानी के सेवन से यह समस्या खत्म हो सकती है।*
*चूना लेने की विधि*—
पान वालों के पास मिलने वाले चूने की ट्यूब को एक लीटर पानी में डालकर अच्छी तरह मिलायें, एक-दो घंटे बाद उस जल को निथारकर (leach) काँच की बोतल में रख ले, *शेष चूना फेंक दें,*
दिन में तीन बार दो-दो चम्मच पानी, फल के रस या दाल आदि में मिलाकर ले लें।
पित्त के बढ़ने से खून का लौहतत्त्व (iron) नष्ट होने लगता है। दूध में घी लेने से पित्त कम होता है। गाय का दूध लोहे की कढ़ाई में धीमे-धीमे गर्म करने पर दूध में लौहतत्त्व की मात्रा बढ़ जाती है।
सब्जी हमेशा लोहे की कढ़ाई में बनानी चाहिए इससे आयरन की मात्रा बढ़ती है, non-stick या अल्मुनियम के बर्तनों में भोजन न पकाएं
*सावधानी:*
1. दूध गाय का ही हो क्योंकि अन्य दूध को अधिक देर तक गर्म करने से उनके तत्त्व नष्ट हो जाते हैं।
2. लोहे के गर्म तवे या लोहे की कढ़ाई में पानी डालने से भी पानी आइरन युक्त हो जाता है, लेकिन वह पानी पित्त को बढ़ाता है। ]
*अनार के रस से भी आइरन प्राप्त किया जा सकता है।*
रात को अनार के दानों को लोहे की कढ़ाई में मसलकर कपड़े से ढककर रख दें। सुबह इसे छानकर पी लें।

इन उपायों को करने से किसी स्त्री में कभी खून, कैल्सियम की कमी नही हो सकती न ही सिजेरियन डिलिवरी की नौबत आयेगी

Comments

Popular posts from this blog

उच्च प्रतिभा के धनी और गणित के विद्वानों के लिए ही यह पोस्ट भारत की गौरवशाली अतीत का

      गणित के विभिन्न क्षेत्रों में भारत का योगदान प्राचीनकाल तथा मध्यकाल के भारतीय गणितज्ञों द्वारा गणित के क्षेत्र में किये गये कुछ प्रमुख योगदान नीचे दिये गये हैं- आंकगणित : दाशमिक प्रणाली (Decimal system), ऋण संख्याएँ (Negative numbers) (ब्रह्मगुप्त देखें), शून्य (हिन्दू अंक प्रणाली देखें), द्विक संख्या प्रणाली (Binary numeral system), स्थानीय मान पर आधारित संख्या आधुनिक संख्या निरूपण, फ्लोटिंग पॉइंट संख्याएँ (केरलीय गणित सम्प्रदाय देखें), संख्या सिद्धान्त , अनन्त (Infinity) (यजुर्वेद देखें), टांसफाइनाइट संख्याएँ (Transfinite numbers), अपरिमेय संख्याएँ (शुल्बसूत्र देखें) भूमिति अर्थात भूमि मापन का शास्त्र : वर्गमूल (see Bakhshali approximation), Cube roots (see Mahavira), Pythagorean triples (see Sulba Sutras; Baudhayana and Apastamba state the Pythagorean theorem without proof), Transformation (see Panini), Pascal's triangle (see Pingala) बीजगणित: Quadratic equations (see Sulba Sutras, Aryabhata, and Brahmagupta), Cubic equations and Quartic equations (b...

NASA के scientist की गणना गलत हो सकता हैं पर खगोल शास्त्र व ज्योतिष शास्त्र की नहीं

    आप कभी कल्पना करके देखना आपका दिमाग़ चकरा जाएगा कि 1000 वर्ष पूर्व और 1000 वर्ष बाद कौन सी तारीख को ,  कितने बज कर कितने बजे तक ( घड़ी , पल , विपल )  कैसा सूर्यग्रहण या चन्द्र ग्रहण लगेगा या होगा , यह हमारा ज्योतिष विज्ञान बिना किसी अरबों खरबों का संयत्र उपयोग में लाये हुए बता देता है ! क्या कभी नोटिस किया है आपने ???? इसका अर्थ क्या है ??? इसका अर्थ यह है कि हमारे ऋषि मुनियों , वेदज्ञ , सनातन धर्म में पहले से यह पता था कि चन्द्रमा , पृथ्वी , सूर्य इत्यादि का व्यास ( Diameter ) क्या है ? उनकी घूर्णन गति क्या है ??  ( Velocity ऑफ़ Rotation ) क्या है ? उनकी revolution velocity और time क्या है ? पृथ्वी से सूर्य की दूरी , सूर्य से चन्द्र की दूरी , चन्द्र की पृथ्वी से दूरी कितनी है ?? इन सबका specific gravity , velocity , magnitude , circumference , diameter , radius , specific velocity , gravitational energy , pull कितना है ?? इतनी सटीक गणना होती है कि एक बार NASA के scientist ग़लती कर सकते हैं seconds की लेकिन ज्योतिष विज्ञान नहीं ! वो तो बस हम लोगों को हमारे...

bhu के संस्थापक मदन मोहन मालवीय की आत्मा क्यों कराह रही है

    प्रश्न यह है कि फिरोज कोई, ऐसे थोड़े झोला उठाकर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में प्रवेश कर दिया है उसके लिए बकायदा नियम कानून और यहां के बुद्धिजीवियों के और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सारे मापदंडों को पूर्ण करते हुए वह यहां तक पहुंचा है। प्रश्न यह है कि यह ऐसा नियम कानून और मापदंड स्थापित करने वाले कौन हैं जो भारत की अस्मिता को समाप्त करना चाह रहे हैं जो भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना चाह रहे हैं हालांकि गलती तो उसी समय हो गई थी जब अपनी गुरुकुल व्यवस्था का त्याग करके और अंग्रेजों की आधुनिक शिक्षा के माध्यम से एक बड़ा संस्थान बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी बनाई गई है उसी समय इस सनातन परंपरा के नष्ट होने का बीज डाल दिया गया था यह तो अब उसके फलअश्रुति हैं हम लोग केवल परिणाम पर छाती कूटते हैं कारण और निवारण पर कोई ध्यान नहीं रहता है  बोय पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय कहीं यही हालत राम मंदिर निर्माण का भी ना हो इसलिए सजगता आज से ही जरूरी है और श्रेष्ठ परंपरा के वाहक तेजस्वी पुरुष चयन अगर हो पाता है तू ही विश्व गुरु भारत के संकल्पना साकार हो सकती है नहीं तो अपने अपने पा...