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कान्वेंट शब्द पर गर्व नहीं शर्म करें... अगर गर्व करना तो सनातन वैदिक परंपरा पर करें

https://drive.google.com/file/d/13ECZx1WBbnZm4e5ttomfblazXDxN15fO/vie?usp=drivesdk 








  RED Alert : Sex Education Conspiracy in Bharat busted in 2007
2007 से आरंभ होने वाले सत्र से तत्कालीन देशद्रोही पार्टी कांग्रेस की मंदमोहन सरकार द्वारा यौन शिक्षा अर्थात सेक्स एजुकेशन को सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम में आधिकारिक मान्यता देकर लागू करवाना लगभग तय हो चुका था। जिसके लिए किताबें छपकर तैयार थी और शिक्षकों की ट्रेनिंग भी शुरू हो चुकी थी। यह षड्यंत्र तब यदि रोका न जाता तो देश का परमाणु बम गिरने से भी अधिक हानि हो जाती।
लेकिन अब उसी को आगे बढ़ाते हुए इसको Adolescence Education के नाम से इस विकृत शिक्षा को स्कूलों में लागू  करने का प्रयास किया जायेगा  इसे किसी भी प्रकार से सफल नही होने देना है।
इस पुस्तक में इस विषय से जुड़े हर प्रश्न का बहुत सुंदर उत्तर दिया गया है। एक ही प्रति थी  अतः इसकी ईबुक बनाकर भेज रहे है स्वयं भी पढ़े और अधिक से अधिक प्रेषित करें। और माता पिताओ द्वारा स्कूलों में इसका ज़ोरदार विरोध करना होगा।
_/\_वन्दे मातरम्
पुस्तक डाउनलोड करे
https://drive.google.com/file/d/13ECZx1WBbnZm4e5ttomfblazXDxN15fO/view?usp=drivesdk

कान्वेंट शब्द पर गर्व न करें... अगर ग्रव करना ही है, तो हमारी अपनी विरासत भारतीय वेदिक गुरुकुल परंपरा पर करें और कान्वेंट का सच  समझें :-*

‘काँन्वेंट’ !  सब से  पहले तो  यह  जानना आवश्यक है  कि, ये शब्द आखिर आया कहाँ से है, तो आइये प्रकाश डालते हैं।

ब्रिटेन  में  एक  कानून था, *" लिव इन रिलेशनशिप "* बिना किसी वैवाहिक संबंध के एक लड़का और एक लड़की का साथ में रहना,  तो इस प्रक्रिया के अनुसार  संतान भी  पैदा हो जाती थी  तो उन संतानों  को किसी  चर्च में  छोड़  दिया जाता था।

अब ब्रिटेन की सरकार के सामने यह गम्भीर समस्या हुई कि इन बच्चों का क्या किया जाए तब वहाँ की सरकार ने  काँन्वेंट खोले *अर्थात्  जो बच्चे अनाथ होने के साथ-साथ नाजायज हैं , उनके  लिए  ये  काँन्वेंट बने।*

उन अनाथ और नाजायज बच्चों को रिश्तों का एहसास कराने के लिए उन्होंने अनाथालयो में एक फादर एक मदर एक सिस्टर की नियुक्ति कर दी क्योंकि ना तो उन बच्चों का कोई जायज बाप है ना ही माँ है। तो काँन्वेन्ट बना नाजायज बच्चों के लिए जायज।
इंग्लैंड में पहला काँन्वेंट स्कूल सन्  1609 के आसपास एक चर्च में खोला गया था जिसके ऐतिहासिक तथ्य भी मौजूद हैं और *भारत में पहला काँन्वेंट स्कूल कलकत्ता में सन् 1842 में खोला गया था।* परंतु तब हम गुलाम थे और आज तो लाखों की संख्या में काँन्वेंट स्कूल चल रहे हैं।

जब कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया, उस समय इसे ‘फ्री स्कूल’ कहा जाता था, *इसी कानून के तहत भारत में*
कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के ज़माने की यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं।

*मैकाले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर  चिट्ठी है। उसमें वो लिखता है कि :-*
“इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे। इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा। इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा। इनको अपनी परम्पराओं के बारे में   भी  कुछ पता नहीं होगा।

*इनको  अपने  मुहावरे  ही नहीं मालूम  होंगे, जब ऐसे बच्चे  होंगे  इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी।”* उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है, अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रुवाब पड़ेगा।
*अरे ! हम  तो खुद में  हीन हो गए हैं। जिसे अपनी भाषा बोलने में  शर्म  हो, दूसरों पर  क्या असर  पड़ेगा ?*

*लोगों का तर्क है कि “अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है”।*
*दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में ही बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है?*  शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईसा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। *ईसा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी।*
अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी। समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी।

भारत देश में अब भारतीयों की मूर्खता देखिए…  जिनके जायज माँ बाप भाई बहन सब हैं, वो काँन्वेन्ट में जाते है तो क्या हुआ  एक बाप घर पर है और दूसरा काँन्वेन्ट में  जिसे फादर कहते हैं। आज जिसे देखो  काँन्वेंट खोल रहा है जैसे- *"बजरंग बली काँन्वेन्ट स्कूल", माँ भगवती काँन्वेन्ट स्कूल"।*  अब इन मूर्खो को  कौन समझाए कि,  भईया माँ भगवती  या बजरंग बली का काँन्वेन्ट से क्या लेना देना?

दुर्भाग्य  की बात  यह है कि,  जिन चीजों का हमने त्याग किया अंग्रेजो ने वो सभी चीज़ों  को पोषित और संचित किया   फिर भी  हम  सबने उनकी त्यागी हुई गुलाम सोच को आत्मसात कर  गर्वित होने  का  दुस्साहस  किया।

*आइए  आगे से  जब भी  हमसे   कोई  आश्रय  कॉन्वैंट स्कूल की बात  कहेगा या करेगा  तो  उसे उपरोक्त तथ्यों से परिचित अवश्य कराएंगे।*
धन्यवादl

गुरुकुल परंपरा में ही हमारी जड़ें हैं, और हमें हमारी मूल की ओर ही लौटना होगा तभी हमारा व हमारी आने वाली पीढ़ी का उद्धार संभव है।
हमारी गुरुकुल परंपरा ही विश्व की श्रेष्ठतम शिक्षा प्रणाली हैं। जिसके प्रमाण आज भी तक्षशीला व नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष के रूप में विद्यमान हैं

।।हमारी संस्कृति ही हमारी विरासत है।।

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