Skip to main content

सनातन लोकसंस्कृति के आर्थिक मॉडल को फिर से अपनाइए। बेरोजगारी, पलायन और स्लम से मुक्ति पाइए

  

लोकसंस्कृति की शिक्षा व्यवस्था आज मुसलमानों ने अपना कर आपके हर रोजगार पर कब्जा कर लिया और आप लोग ब्राह्मणों और अंग्रेजों की मिली जुली शिक्षा व्यवस्था अपना कर बेरोजगारों की फौज खङी कर दी। लोकसंस्कृति की शिक्षा व्यवस्था क्या थी? लोकसंस्कृति की शिक्षा व्यवस्था थी की जितना आपके काम, आपके व्यापार, आपके व्यवसाय एवं विस्तार के लिए भाषा, विज्ञान और हिसाब किताब के ज्ञान की जरुरत है वो पोथी से प्राप्त कर लिजिए। इतिहास, समाज और संस्कृति का ज्ञान परम्पराओं, लोक कथाओं, पारिवारिक संस्कार, लोकगीत, लोकाचार के माध्यम से पा लिजिए और अन्ततः कोई एक काम ठीक से करना सीख लिजिए। यदि आप कोई अलग सा काम सीखने मे भी अयोग्य हैं तो भी कोई बात नहीं। जो काम आपके दादे परदादे करते आये हैं उसे आप बचपन से देखते देखते संस्कार की तरह सीख लेंगे। यदि आपको गैर उत्पादक विषयों अर्थात ब्राह्मण शिक्षा व्यवस्था के विषयों जैसे अध्यात्म, दर्शन, इतिहास, समाज विज्ञान, साहित्य, भाषा, शोध आदि मे विशेष रुची है तो अपनी रुची के अनुसार ही उसका अध्ययन करिये वरना मत करिये। यह भी याद रखिये की ब्राह्मण चूँकि गैर उत्पादक विषयों पर अपना जीवन समर्पित करते थे इसीलिए उन्हें खाने, पीने, जीने रहने और बसने मे समस्या न हो इसीलिए समाज ने उनको भीक्षा देने, उनका पालन करने और उनको बसाने तक की व्यवस्था दी। आज हर आदमी सीना ताने M.A., B.A., B.Sc., M.Sc. करके घूम रहा। कोई हिन्दी से पोस्ट ग्रेजुएट है, तो कोई दर्शन से, कोई गणित से, तो कोई विज्ञान से। लेकिन 20-22 साल के शिक्षा के इस आर्थिक और समय के इनपुट के बाद आदमी जब विश्वविद्यालय से निकलता है तो उसके हाथ मे एक डिग्री तो होता है लेकिन वह ऐसा कोई काम नही कर सकता जिससे समाज जीवन की कोई आवश्यकता पुरी होती हो, सिवाय इस आवश्यकता के की वह फिर अपने जैसे गैर हुनरमन्द लोगों की नयी फौज तैयार कर सके। ऐसे लोगों को समाज जीवन का एक भी काम जैसे घर बनाना, कपड़े बनाना, औजार बनाना, सडक बनाना, खेती करना, पशुपालन करना, टीवी बनाना, मोबाइल बनाना, मशीन चलाना, इलेक्ट्रानिक सामान बनाना, गाड़ी बनाना, व्यापार करना, दवा बनाना आदि अनेकानेक कामों मे से कोई एक भी नही आता। इनके हाथ मे कागज का एक टुकड़ा होता है जिसके आधार पर वह नौकर बनने के प्रयास मे लग जाते हैं। मुझे तो आज़ तक यह समझ नही आता है की सरकार इतने कालेज क्युं खोले जा रही है? क्या जरुरत है इतने हिन्दी, इतिहास, दर्शन, विज्ञान के पोस्टग्रेजुएट की?? ग्रेजुएट और पोस्ट्ग्रेजएट कराना ही है तो एसी रिपेयरिंग और सर्विसींग की कराओ, तबला हारमोनियम बजाने की कराओ, गाड़ी रिपेयरिंग और सर्विसींग की कराओ, फाल्स सिलिंग और वायरिङ्ग की कराओ, बाल काटने और ब्युटी पार्लर की कराओ। सरकार काम कर रही है उल्टा। जो वास्तविक काम है उसके लिये 1-2 महिने का कोर्स और बेकार के सुकुमार विलास के विषयों के लिये 2-3 साल का कोर्स। मुस्लिम ईकोनामी माडल को बहुत बारीकी से देखिये। क्लास 8-10 तक पढ़ाई ताकी हिसाब किताब और व्यापार विस्तार के लिये जितना आवश्यक ज्ञान है वह हासिल कर लेते हैं, तब तक यह भी पता चल जाता है की यह आगे पढ़ने योग्य है भी की नही? यदि औसत या कमजोर है तो तुरंत पढ़ाई बन्द और कोई एक काम सीख लेते हैं जिसमे थोडे से हुनर की आवश्यकता होती है और कमाई अच्छी हो। आज हर हुनरमन्द काम उनके पास है और आपके हाथ मे एक कागज का टुकड़ा। अन्ततः उस कागज के टुकडे के बल पर कोई नौकरी मिल जाय तो ठीक वरना आप किसी काम के नही। अन्त मे आप बम्बई और दिल्ली जाकर ड्राइवरी सीखते है या फिर लोहा पीटते हैं। इसलिये लोकसंस्कृति के आर्थिक मॉडल को फिर से अपनाइए। बेरोजगारी, पलायन और स्लम से मुक्ति पाइए

Comments

D. S. said…
इसके लिये आपको दिल्ली जाना होगा। प्रधानमंत्री जी से शिक्षा मन्त्री से मिलना होगा।

Popular posts from this blog

उच्च प्रतिभा के धनी और गणित के विद्वानों के लिए ही यह पोस्ट भारत की गौरवशाली अतीत का

      गणित के विभिन्न क्षेत्रों में भारत का योगदान प्राचीनकाल तथा मध्यकाल के भारतीय गणितज्ञों द्वारा गणित के क्षेत्र में किये गये कुछ प्रमुख योगदान नीचे दिये गये हैं- आंकगणित : दाशमिक प्रणाली (Decimal system), ऋण संख्याएँ (Negative numbers) (ब्रह्मगुप्त देखें), शून्य (हिन्दू अंक प्रणाली देखें), द्विक संख्या प्रणाली (Binary numeral system), स्थानीय मान पर आधारित संख्या आधुनिक संख्या निरूपण, फ्लोटिंग पॉइंट संख्याएँ (केरलीय गणित सम्प्रदाय देखें), संख्या सिद्धान्त , अनन्त (Infinity) (यजुर्वेद देखें), टांसफाइनाइट संख्याएँ (Transfinite numbers), अपरिमेय संख्याएँ (शुल्बसूत्र देखें) भूमिति अर्थात भूमि मापन का शास्त्र : वर्गमूल (see Bakhshali approximation), Cube roots (see Mahavira), Pythagorean triples (see Sulba Sutras; Baudhayana and Apastamba state the Pythagorean theorem without proof), Transformation (see Panini), Pascal's triangle (see Pingala) बीजगणित: Quadratic equations (see Sulba Sutras, Aryabhata, and Brahmagupta), Cubic equations and Quartic equations (b...

bhu के संस्थापक मदन मोहन मालवीय की आत्मा क्यों कराह रही है

    प्रश्न यह है कि फिरोज कोई, ऐसे थोड़े झोला उठाकर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में प्रवेश कर दिया है उसके लिए बकायदा नियम कानून और यहां के बुद्धिजीवियों के और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सारे मापदंडों को पूर्ण करते हुए वह यहां तक पहुंचा है। प्रश्न यह है कि यह ऐसा नियम कानून और मापदंड स्थापित करने वाले कौन हैं जो भारत की अस्मिता को समाप्त करना चाह रहे हैं जो भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना चाह रहे हैं हालांकि गलती तो उसी समय हो गई थी जब अपनी गुरुकुल व्यवस्था का त्याग करके और अंग्रेजों की आधुनिक शिक्षा के माध्यम से एक बड़ा संस्थान बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी बनाई गई है उसी समय इस सनातन परंपरा के नष्ट होने का बीज डाल दिया गया था यह तो अब उसके फलअश्रुति हैं हम लोग केवल परिणाम पर छाती कूटते हैं कारण और निवारण पर कोई ध्यान नहीं रहता है  बोय पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय कहीं यही हालत राम मंदिर निर्माण का भी ना हो इसलिए सजगता आज से ही जरूरी है और श्रेष्ठ परंपरा के वाहक तेजस्वी पुरुष चयन अगर हो पाता है तू ही विश्व गुरु भारत के संकल्पना साकार हो सकती है नहीं तो अपने अपने पा...

Newziland,Britain apply Sanskrit teaching for smartness

   जब हमारे श्रेष्ठ भारत का नाम कहीं बदनाम होता है।क्या बतायें जब शिक्षित वेश्यावृत्ति करता है बस ह्रदय दुखता है।क्योंकि कुछ ही दसक पहले हमारे यहां7लाख 32हजार गुरूकुल हुआ करते थे।समस्त संसार की मानव जाति हमसे ही सीखती थी कि शिक्षा क्या होती है।और अब हम अपनी मानसिकता से इतना विकृत हो चुके हैं कि क्या बतायें कुछ कहते नहीं बनता।पर इतना जरूर कहूंगा हमारे भारत की मूल गुरुकुल शिक्षा ही सभी समस्याओं  से   मुक्त करती है व मानव को महामानव बनाती थी। एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान     विश्व हिन्दी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता उत्पन्न करना तथा हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करना है. अजय कर्मयोगी: https://m.youtube.com/watch?v=JixMEQ2kehU   , https://m.youtube.com/watch?v=JseQIWhJ7xk  , https://m.youtube.com/watch?v=JixMEQ2kehU  ,  https://m.youtube.com/watch?v=IFmv2YFApQk                 ...