अंग्रेजो
के आने से पहले यहाँ कोई आयुर्वेदिक कंपनी नही थी। लेकिन हर बाजार में
पंसारी की दुकान थी। हर गाँव मे आयुर्वेद के जानकार वैद्य थे। जो खुद अपने
पास जड़ी बूटियां उगाते थे। जो कम पड़ता था वो दुकान से लाते थे। क्योंकि कुछ
जड़ी बूटियां ऐसी थी जो सिर्फ पहाड़ी क्षेत्रों में ही मिलती थी। वैद्य खुद
जड़ी बूटियों के माध्यम से दवाई बनाते थे। किसी भी कंपनी का उत्पाद नही खिला
रहे थे। फिर आये अंग्रेज फिर शुरू डाक्टर बनाने का खेल । दवाई बनाने का
लाइसेंस दवाई बेचने का लाइसेंस । फिर अंग्रेजो ने बनाया हॉस्पिटल फिर
अंग्रेजो ने बनाया फार्मासिस्ट। फिर अंग्रेजो ने बनाया बीमारी जांच करने की
मशीन खून पिसाब चेक करने लेकर हर चीज़ चेक करने की मशीन एक्सरे
अल्ट्रासाउंड, MRI, citiscan बड़े बड़े लैब चलाने के लाइसेंस फिर शुरू हुआ
आपरेशन का दौर। फिर शुरू हुआ नई नई बीमारी का नामकरण फिर मनाया गया बड़ी बड़ी
बीमारी का बीमारी दिवस जैसे कैंसर दिवस ,एड्स दिवस, टीबी दिवस मेलरिया
दिवस पोलियो दिवस। अब पूरी दुनिया मे लाखो करोड़ का कारोबार बीमारी को ठीक
करने के नाम पर चल रहा है। शेयर मार्केट शेयर बिक रहे है। हमारा वैद्य न
किसी से मनमाना धन लेता था न ही किसी का शोषण करता था। नाड़ी पकड़ते ही हर
बीमारी को जान लेता था। इंसान लेकर जानवर तक सबका ईलाज वही करता था। अब
इंसान और जानवर के अलग अलग डाक्टर। फिर डॉक्टरों के अंदर अलग अलग रोग के
स्पेसलिस्ट फिर अलग उम्र के लिये अलग अलग स्पेसलिस्ट। महिला रोग विशेषज्ञ,
बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नाक कान आँख रोग विशेषज्ञ और तमाम
तरह अनेको विशेषज्ञ दिन रात जनता की सेवा करने के लिये देश विदेश भटक रहे
है। अपने आप को भी बीमारी से नही बचा पा रहे है। तमाम ऐसे डाक्टरों को
जानता हूँ खुद बड़ी बड़ी बीमारी से लड़ रहे है। अब आप खुद फैसला करे डाक्टर की
सेवा लेनी है या वैद्य की। वैसे आजकल नकली वैद्य की भी कोई कमी नही है। जो
अंग्रेजी डॉक्टरों की तरह ही जनता को लूटने में लगे हुये है। इसलिए इसका
सबसे अच्छा उपाय ये है कि अपना खानपान ठीक रखे। मौसम के अनुसार ही फल
सब्जियों अनाज दूध का सेवन करे। इसको भी समझने में अगर आप को दिक्कत हो तो
राजीव भाई को यूट्यूब पर जरूर सुने। #देशी_आंदोलन देशी अपनाओ देश बचाओ
एक देसी तरीका बालों के समस्या के लिए
हल
शुद्ध सरसों का तेल बालों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का सबसे बड़ा स्रोत है । इसलिये हमारे ऋषि मुनियों ने सिर में शुद्ध सरसों के तेल लगाने का अविष्कार किया । इसी कारण हमारे पूर्वजों के बाल 60 -70 साल की आयु तक भी काले रहते थे । मेरी माता जी की बाल 60 साल तक भी काले थे क्योंकि उन्होंने हमेशा सरसों के तेल ही सिर में लगाया । दूसरी तरफ मेरे बाल 30 साल की आयु तक अच्छे भले थे । फिर मैंने GARNIER की Advertisement देखी और मॉडर्न बनने की सोची । दो साल में ही मेरे बाल गार्नियर की कृपा से झड़ने लगे और सफेद हो गए । जब मुझे पता चला तो देर हो चुकी थी । इसके बाद मैंने कंपनियों के शैम्पू और खुश्बू तेल के स्थान पर घर का शैम्पू और सरसों के तेल का प्रयोग शुरू कर दिया और अपने बाल बचाने में कामयाब रहा । जिसने अपने बाल जल्द सफेद करने हैं या गंजा होना है वह आज ही कंपनियों के क्लीनिकली proven शैम्पू और तेल का प्रयोग करें ।
शद्ध सरसों का तेल वह है जो आपकी आंखों के सामने निकला है । कंपनियों के तेल में मिलावट और केमिकल होतें हैं इनसे बचें । केवल चमकदार पैकिंग और हेमामालिनी की फ़ोटो के चक्कर में मत पड़ें ।
आप आसानी से घर में आयुर्वेदिक शैंपू बना सकते हैं। उसके लिए आपको चाहिए सिर्फ 💯 ग्राम आंवला, 200 ग्राम रीठा, 300 ग्राम शिकाकाई। इनको अलग अलग करके पीस लेना है । ध्यान रहे आंवला, रीठा और शिकाकाई साबुत ही लेने हैं ।अगर आप बाजार से इसे पिसे हुए आंवला रीठा और शिकाकाई लोगे ,तो उनमें पक्का मिलावट होगी । अब इन तीनों पिसे हुए आंवला रीठा और शिकाकाई को मिलाकर रख लेना है । अब अब इस मिश्रण में से जितना शैंपू आपको 1 सप्ताह के लिए चाहिए उतना मिश्रण लेकर पर्याप्त मात्रा में पानी में भिगोकर रख लेना। 1 दिन भिगोने के बाद इसHomemadee Shampoo को कुछ समय के लिये लोहे की कढ़ाई में उबाल लें फिर ठण्डा होने पर छान सकते है ।
प्रकृति की रक्षा करें प्रकृति आप की रक्षा करेगी ।

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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद