Skip to main content

भारतीय संस्कृति का पुनः उदय, इंडोनेशिया में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी और ऊंची गरुड़ पे विराजमान विष्णु की मूर्ति का स्थापना

   विश्व की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति होगी विष्णु गरुण केनकाना की
__________________________________________
आगामी अगस्त में संपूर्ण विश्व के हिन्दुओं के लिए गर्व और हर्ष व्यक्त करने का महान अवसर आ रहा है। इंडोनेशिया में पिछले 25 साल से बन रही गरुड़-विष्णु की मूर्ति स्थापित होने जा रही है। इसके बाद विश्व के सबसे ऊँचे धार्मिक प्रतीकों में हिंदुत्व का प्रतीक दूसरे नंबर पर आसीन हो जाएगा। 393 फ़ीट ऊँची ये मूर्ति स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी से 90 फ़ीट ऊँची होगी। विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति चीन में है। बुद्ध की ये मूर्ति 420 फ़ीट ऊँची है।
1979 में इंडोनेशिया के मूर्तिकार ने एक स्वप्न देखा था। मूर्तिकार बप्पा न्यूमन नुआर्ता इंडोनेशिया में हिन्दू प्रतीक की विशालकाय मूर्ति बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले कम्पनी स्थापित की। मूर्ति की डिजाइन पर अथक परिश्रम किया। धन जुटाने के लिए देशभर की यात्रा की। मूर्ति तांबा और पीतल की बनाई जानी थी इसलिए धन की बहुत आवश्यकता थी। 1994 में काम शुरू हुआ। कई बार धन की कमी के कारण काम बीच-बीच में महीनों रुका रहता लेकिन न्यूमन की इच्छाशक्ति बड़ी प्रबल थी। वे नहीं रुके। लगभग एक दशक बाद दुनिया न्यूमन और उनके इस स्वप्न को बिसरा चुकी थी।
विष्णु की मूर्ति स्थापित करने के पीछे विचार ये था कि इंडोनेशिया के सबसे प्राचीन धर्म और संस्कृति को वहां के शिल्प में ढाला जाए। इंडोनेशिया में यूँ तो बुद्धिज्म और इस्लाम धर्म के अनुयायी भी रहते हैं लेकिन हिन्दू धर्म तो प्राचीन काल से यहाँ प्रचलित रहा है। जिस बाली द्वीप में इस मूर्ति को स्थापित किया जा रहा है, वहां की 83 प्रतिशत जनसँख्या हिन्दू धर्म का पालन कर रही है। इस मूर्ति को लेकर वहां की सरकार बहुत उत्साहित है। जाहिर है मूर्ति स्थापित होने के बाद विश्वभर के पर्यटक कला के इस नायाब नमूने को देखने आया करेंगे और विदेशी आय में भी बढ़ोतरी होगी। गरुड़ विष्णु केनकाना मूर्ति को इंडोनेशिया सरकार ने देश की प्रतिनिधि कृति का दर्जा दे दिया है।
गरुड़ विष्णु केनकाना कल्चरल पार्क में इस मूर्ति को स्थापित किया जा रहा है। इस पर पिछले पच्चीस साल में लगभग सौ मिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। पहले गरुड़ की मूर्ति बनाई गई। मूर्ति के ऊपर विष्णु को विराजित करने के लिए एक आसन बनाया जा रहा है। साठ मीटर चौड़े इस आसन पर विष्णु विराजमान होंगे। लिबर्टी की मूर्ति के मुकाबले ये मूर्ति अधिक चौड़ी है। गरुड़ के पंख ही साठ मीटर के बनाए गए हैं। इसे इस तरह बनाया गया है कि अगले सौ साल में भी इसकी चमक और मजबूती बरक़रार रह सके। इसके अलावा एक ‘विंड टनल टेस्ट’ भी करवाया गया। इससे पता चला कि तूफानी हवाओं को ये मूर्ति झेल सकेगी या नही
मूर्ति बनाने के लिए चार हज़ार टन तांबा, पीतल और स्टील का उपयोग किया गया है। इसे मजबूती देने के लिए कांक्रीट की परत लगाई गई है। मूर्ति जावा में तैयार की गई और उसे एक हज़ार किमी दूर ट्रकों पर लादकर ले जाया गया था। इस समय मूर्ति की स्थापना का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। बारिश व्यवधान डाल रही है लेकिन स्थापना का काम अपने निर्णायक चरण में पहुँच गया है।
बप्पा न्यूमन नुआर्ता को उनके इस महान कार्य के लिए भले ही विश्व के किसी और देश ने नहीं सराहा हो लेकिन भारत ने उनके पच्चीस साल के परिश्रम के लिए उनका सम्मान किया है। इस साल जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पुरस्कार वितरित कर रहे थे तो एक नाम न्यूमन का भी था। उन्हें भारत के गरिमामयी सम्मान ‘पद्मश्री’ से नवाज़ा गया। भारत ने उनके इस कार्य के लिए उन्हें पहले ही सम्मानित कर दिया है।F
हमारे स्वाधीनता दिवस के ठीक दो दिन बाद इंडोनेशिया का स्वाधीनता दिवस आएगा। नब्बे प्रतिशत सम्भावना है कि 17 अगस्त को विष्णु अपने गरुड़ पर आसीन हो जाएंगे। इंडोनेशिया का आजादी दिवस भारत के लिए भी गर्व और प्रसन्नता के पल लेकर आ रहा है। बप्पा न्यूमन नुआर्ता का पच्चीस साल पुराना सपना सच होने जा रहा है। हम भारतीय हिन्दू इस पर ख़ुशी जताने के साथ ये सोच सकते हैं कि एक छोटा सा देश आर्थिक आघात और विश्वव्यापी मंदी झेलते हुए विश्व की दूसरी सबसे ऊँची मूर्ति बना लेता है। और उस मूर्ति के द्वारा वह विष्णु को हिन्दू प्रतीक के रूप में स्थापित करता है। क्या इस प्रयास को सराहा नहीं जाना चाहिए।
बाली, गरुड़ विष्णु, गरुड़ विष्णु केनकाना मूर्ति, विष्णु की सबसे बड़ी मूर्ति इंडोनेशिया, न्यमन नुआर्ता, मूर्ति, विष्णु

Comments

Popular posts from this blog

उच्च प्रतिभा के धनी और गणित के विद्वानों के लिए ही यह पोस्ट भारत की गौरवशाली अतीत का

      गणित के विभिन्न क्षेत्रों में भारत का योगदान प्राचीनकाल तथा मध्यकाल के भारतीय गणितज्ञों द्वारा गणित के क्षेत्र में किये गये कुछ प्रमुख योगदान नीचे दिये गये हैं- आंकगणित : दाशमिक प्रणाली (Decimal system), ऋण संख्याएँ (Negative numbers) (ब्रह्मगुप्त देखें), शून्य (हिन्दू अंक प्रणाली देखें), द्विक संख्या प्रणाली (Binary numeral system), स्थानीय मान पर आधारित संख्या आधुनिक संख्या निरूपण, फ्लोटिंग पॉइंट संख्याएँ (केरलीय गणित सम्प्रदाय देखें), संख्या सिद्धान्त , अनन्त (Infinity) (यजुर्वेद देखें), टांसफाइनाइट संख्याएँ (Transfinite numbers), अपरिमेय संख्याएँ (शुल्बसूत्र देखें) भूमिति अर्थात भूमि मापन का शास्त्र : वर्गमूल (see Bakhshali approximation), Cube roots (see Mahavira), Pythagorean triples (see Sulba Sutras; Baudhayana and Apastamba state the Pythagorean theorem without proof), Transformation (see Panini), Pascal's triangle (see Pingala) बीजगणित: Quadratic equations (see Sulba Sutras, Aryabhata, and Brahmagupta), Cubic equations and Quartic equations (b...

bhu के संस्थापक मदन मोहन मालवीय की आत्मा क्यों कराह रही है

    प्रश्न यह है कि फिरोज कोई, ऐसे थोड़े झोला उठाकर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में प्रवेश कर दिया है उसके लिए बकायदा नियम कानून और यहां के बुद्धिजीवियों के और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सारे मापदंडों को पूर्ण करते हुए वह यहां तक पहुंचा है। प्रश्न यह है कि यह ऐसा नियम कानून और मापदंड स्थापित करने वाले कौन हैं जो भारत की अस्मिता को समाप्त करना चाह रहे हैं जो भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना चाह रहे हैं हालांकि गलती तो उसी समय हो गई थी जब अपनी गुरुकुल व्यवस्था का त्याग करके और अंग्रेजों की आधुनिक शिक्षा के माध्यम से एक बड़ा संस्थान बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी बनाई गई है उसी समय इस सनातन परंपरा के नष्ट होने का बीज डाल दिया गया था यह तो अब उसके फलअश्रुति हैं हम लोग केवल परिणाम पर छाती कूटते हैं कारण और निवारण पर कोई ध्यान नहीं रहता है  बोय पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय कहीं यही हालत राम मंदिर निर्माण का भी ना हो इसलिए सजगता आज से ही जरूरी है और श्रेष्ठ परंपरा के वाहक तेजस्वी पुरुष चयन अगर हो पाता है तू ही विश्व गुरु भारत के संकल्पना साकार हो सकती है नहीं तो अपने अपने पा...

Newziland,Britain apply Sanskrit teaching for smartness

   जब हमारे श्रेष्ठ भारत का नाम कहीं बदनाम होता है।क्या बतायें जब शिक्षित वेश्यावृत्ति करता है बस ह्रदय दुखता है।क्योंकि कुछ ही दसक पहले हमारे यहां7लाख 32हजार गुरूकुल हुआ करते थे।समस्त संसार की मानव जाति हमसे ही सीखती थी कि शिक्षा क्या होती है।और अब हम अपनी मानसिकता से इतना विकृत हो चुके हैं कि क्या बतायें कुछ कहते नहीं बनता।पर इतना जरूर कहूंगा हमारे भारत की मूल गुरुकुल शिक्षा ही सभी समस्याओं  से   मुक्त करती है व मानव को महामानव बनाती थी। एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान     विश्व हिन्दी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता उत्पन्न करना तथा हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करना है. अजय कर्मयोगी: https://m.youtube.com/watch?v=JixMEQ2kehU   , https://m.youtube.com/watch?v=JseQIWhJ7xk  , https://m.youtube.com/watch?v=JixMEQ2kehU  ,  https://m.youtube.com/watch?v=IFmv2YFApQk                 ...