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यह शैतान लोग मधुमक्खियों सहित सभी प्राणियों को क्यों मारना चाहते हैं


  






 
मधुमक्खीयों को खत्म करने के पिछे विदेशी षडयंत्र। कृपया लेख को पूरा पढें 🙏🙏_________- मधुमक्खीयों की देशवासियों के लिए कितनी जरूरत है वो आप सब जानते हो। वो चाहे फसलों में परपरागण के लिए हो या शहद से हमारे स्वास्थ्य के रूप में या किसी भी दूसरे प्रत्यक्ष /परोक्ष रूप में।। लेकिन इन मधुमक्खीयों को एक अमेरिकी कंपनी Monsanto कंपनी द्वारा खत्म करने की पूरी कोशिश है जिसमें दूसरी छोटी विदेशी कंपनी बायर, सिजेंटा, ड्यूपोंट आदि भी शामिल हैं ये Monsanto कपंनी सन 1901 से भारत में अपना व्यापार करती है इस कंपनी ने GMOS नामक एक तकनीक विकसित की है। GMOS का मतलब है - Genetic Modifaid of Seeds. हिंदी में समझे तो अर्थ ये है कि बीजों के जींनस के साथ जानवरों के जींनस को मिलाना। उन कीटों के डीएनए को बीज के डीएनए के साथ मिलाया जाएगा जो बहुत अधिक जहरीले हैं जैसे बाजरा बीज के डीएनए के साथ किसी जहरीले सांप के विशेष जहरी जींसस को मिलाना। इससे ये होगा कि जब मधुमक्खी उस बाजरे की फसल से पराग या थोड़ा बहुत नैक्टर लाएगी तो उस जहर का उस पर धीमा लेकिन खतरनाक असर होगा और धीरे धीरे मधुमक्खीयां खत्म होती जाएगी और वो अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे। ऐसे डीएनए की आपस में मैचिंग करने के पिछे इनका कुतर्क है कि पैदावार कम होती है इसको हम ऐसे बढ़ाएंगे। बीटी नरमा के बीज को पेस्टीसाइड के साथ मिलाकर तैयार किया गया है उसके परिणाम आप सबके सामने है ही।। बीटीनरमा की फसल पर मक्खीयां मरने का नुकसान होगा ही चाहे उस पर कीटनाशक का छिड़काव हो या ना हो लेकिन मजे की बात ये है कि ये कंपनियां ऐसे काम अपने देश में नहीं कर सकती।।।। जैसे कोक पेप्सी में जितना अधिक जहर यहां मिलाते हैं अपने देश में नहीं मिला सकते। कोलगेट को बैगर चेतावनी लिखे नहीं बेच सकते कि इससे कैंसर होता है। जैसे हमारे पजांब के लोगों को रिफाइंड, यूरिया, डीएपी का जहरीला खाना खिला खिलाकर अप्रत्यक्ष रूप कैंसर किया गया और अब पूरे देश में फैला हुआ है ठीक उसी तरह अब हमारी मधुमक्खीयों को प्रत्यक्ष रूप से खत्म किया जाएगा। इन जानकारीयों का कुछ हिस्सा मैंने अमर शहीद श्री राजीव दीक्षित जी के पीडीएफ फाइल से और कुछ दूसरे स्रोतों से प्राप्त किया है। इतनी विस्फोटक बातें पढकर आप तो यही सोचेंगे ना कि हमें क्या है हमारी तो उम्र कट ही जाएगी। या सोचेंगे जो हो रहा है वो अच्छा ही हो रहा है आगे होगा वो और भी अच्छा होगा। और अगर यही सब आजादी के पूर्व क्रांतिकारियों ने सोचा होता तो क्या होता?? लेकिन उन पाखंडी संतो ने ये सब सुनाते हुए हमें ये नहीं सुनाया कि श्री कृष्ण ने ये सब बातें अर्जुन को तब कही थी जब अर्जुन कह रहे थे कि इन कौरवों को मैं क्यों मारू क्योंकि ये सब तो मेरे ही भाई बंधु है तब श्रीकृष्ण ने उपरोक्त वाक्य कहा था कि ये कौरव अधर्मी है इनको मारो। मतलब ये मर रहे हैं तो अच्छा ही और मरेंगे तो और भी अच्छा होगा तुम व्यर्थ क्यों चिंता कर रहे हो। कुछ साथी सोचेंगे कि मैंने कुछ ज्यादा ही लिख दिया है तो उनसे माफी चाहुंगा।। वन्देंमातरम

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