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80 टन के पत्थर को चढ़ाने की प्राचीन सनातन कला कौशल ने आज के पढ़े लिखे आधुनिक इंजीनियरों को दी चुनौती


   क्या कोई इस मिस्ट्री को सुलझा सकता है ...?? तंजौर मंदिर के रहस्य: टॉप पर कैप पत्थर है। तंजौर मंदिर के शीर्ष पर टोपी के पत्थर का वजन 80 टन है। कैप स्टोन के बारे में मुख्य उद्गार यह है कि तंजौर मंदिर के निर्माणकर्ता कैसे आए और तंजौर मंदिर में गोपुरम के शीर्ष पर टोपी का पत्थर रखने में सक्षम कैसे हुए। इन कार्यों को करने के लिए उन दिनों में कोई क्रैन या कोई चीज का उच्च उपयोग नहीं किया गया था। केवल एक चीज जो हाथियों की मदद ले सकते थे। तंजौर बड़े मंदिर की विशाल टोपी इस तरहसे बनाई गई है कि तंजौर के मंदिर गोपुरम का मैदान जमीन पर नहीं गिरेगा। यह बस अपने जगह पर ही गिर सकती है। इस विशेष योजना और निर्माण के प्रकार के बारे में ज्ञान होना एक आसान काम नहीं है ...। मैं इसी लिए कहता रहता हूँ दुनिया जब नंगी पेड़ पत्ते लपेट कर रहती थी और जानवर मारकर खाती थी तब हमारे ऋषियों मुनियो ने वेदों की रचना कर दी थी... और इंजीनियर तो कल बने हैं पर सनातन के कला कौशल ने सदियो पहले भव्य भारत का निर्माण कर दिया था, गर्व करो कि हम सनातनी हैं और इस भारत भूमि पर जन्मे हैं। अतुल्य भारत ●●● अद्भुत है यह मन्दिर और कला तो ऐसी कि सुपर डुपर आधुनिक इन्जिनियर सोचते रहे,, आज भी इतनी ऊँचाई पर इस 80टन के पत्थर को ले जाना बहुत बड़ा कार्य है और तब कैसे गया होगा लोगो के लिए चैलेन्ज है! दुनिया को विभिन्न कलाओं से परिपक्व करने वाले हमारे पूर्वज ही थे! ●●● इस मंदिर की यह भी विशेषता है कि इस मंदिर के गुंबद की परछाईं मंदिर की उस परिधि पर ही रहती है परिक्रमा मार्ग में नहीं आती। इसके आसपास 101 नंदी शिवलिंग स्थापित हैं जहाँ हवन होता है।
 

Comments

D. S. said…
यह तो अखंड सत्य है कि भारत महान था, विश्व गुरु था और भविष्य में भी संभवतया महान विश्वगुरु बन सकेगा। आज की भारत की स्तिथी ऐसी है कि गरीबी, भ्रष्टाचार, झूट, फरेब, अज्ञान, इत्यादि अनैतिक बातों से मनुष्य घिरा हुआ है। जो मेरे विचार से गुरुकुल पद्धति की शिक्षा, विद्या, तथा आत्मस्वाभिमान से ही सही होना, पुनः महान होना संभव है।

विश्व मे कही भी शायद बलात्कार कर महिला को जलाया या मारा नहीं जाता हैं। हाँ विश्व में शायद अमेरिका में ही शिक्षालयों में विद्यालयों में एक विद्यार्थी बंदूक लाकर कुछ विद्यार्थियों को मार देताहै। जो अबगी तकबगरत में नही हूआ।

क्या हम पश्चिमी शिक्षा, संस्कृति, संस्कार न अपना कर हमारी भ्रातित संस्कृति, संस्कार नही अपन्स सकटे?? क्या हम पूर्ण रूपेण स्वदेशी वस्तुएं, शिक्षा, भाषा, पौशाक, इत्यादि नही अपना सकते ? क्या कारण हमे रोक रहे है यदि हमारी मानसिकता, इच्छाशक्ति और सौच नहीं तो ??

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