Skip to main content

कूका आंदोलन गौ भक्ति का अद्भुत बलिदानी इतिहास

   

इतिहास के बिना आपका भविष्य अंधकार में है  यह बात  अब  बहुत सारे लोगों को समझ में आने लगी है
ये वो जंग थी जिसको तथाकथित इतिहासकारों और नकली कलमकारों ने लिखना तो दूर संज्ञान लेना भी उचित नहीं समझा . उनकी चाटुकारिता यकीनन आड़े आ रही थी .. कूका विद्रोह आज के समय में शायद ही ज्यादा लोग बता पायें लेकिन ये थी वो जंग जो देश और धर्म दोनों को ध्यान में रख कर लड़ी गई थी .. बहुत छोटी सी संख्या ले कर सरदारों ने इस जंग में हिला कर रख दिया था खुद को अजेय समझने वाले अंग्रेजो को और मजबूर कर दिया था उन्हें पीछे हटने पर . आईये जानते हैं कि आखिर क्या था वो कूका विद्रोह जिन्हें हिला कर रख दिया था ब्रिटिश सत्ता को लेकिन उसके बाद भी नहीं पाया भारत के इतिहास में उचित मान और सम्मान .. जब देश में आये थे तो उनको यह नहीं पता था कि भारत में बहादुर लोग भी धर्म और जाति के आधार पर जाने जाते हैं. पहले अंग्रेजों को यह लगता था कि राजपूत लोग ही सेना में होते हैं और वह देश के लिए लड़ते हैं. अब इंग्लैंड में तो सेना के अन्दर होना, मात्र धन कमाने का एक साधन था लेकिन भारत में ऐसा नहीं था. सतगुरु राम सिंह ने विश्व में पहली बार शांतिमय आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए सहयोग संवेदनशील आंदोलन का आगाज किया। जब अंग्रेजों ने धर्म के नाम पर लोगों को लड़ने व गुलामी का अहसास करवाने के लिए पंजाब में जगह-जगह गौ वध के लिए बूचड़खाने खोले, तब नामधारी सिखों ने इसका बड़ा विरोध किया व सौ नामधारी सिखों ने आज ही के दिन अर्थात 15 जून 1871 को अमृतसर व 15 जुलाई 1871 को रायकोट बूचड़खाने पर धावा बोल कर गायों को मुक्त करवाया। इस बगावत के जुर्म में 5 अगस्त 1871 को तीन नामधारी सिक्खों को रायकोट, 15 दिसम्बर 1871 को चार नामधारी सिखों को अमृतसर व दो नाम धारी सिखों को 26 नवम्बर 1871 को लुधियाना में बट के वृक्ष से बांधकर सरेआम फांसी देकर शहीद कर दिया गया। भारत के सैनिक सेना में होते थे तो वह देश और देश भूमि के लिए लड़ रहे होते थे. इनके लिए यह काम रोजगार नहीं था बल्कि यह तो देश सेवा होती थी. ऐसा ही एक बार पंजाब में उस समय हुआ था जब एक आन्दोलन जो पहले धार्मिक था, वह राजनैतिक विद्रोह में तब्दील हो जाता है और अंग्रेजों की बैंड बजा देता है. अधिकतर लोगों ने कूका आन्दोलन सुना भी नहीं होगा लेकिन यह आन्दोलन एक बड़ा विद्रोह था, आजादी का प्रथम विद्रोह था, जिसका अंत शहीदों के साथ हुआ था.आजादी का प्रथम विद्रोह का शंखनाद करने वाले सतगुरु राम सिंह जी के आंदोलन से अंग्रेज कितने भयभीत थे, यह इस बात से प्रमाणित होता है कि सर्वप्रथम अमरीका के खतरनाक एवं हिंसक विद्रोहियों के लिए प्रयोग किया गया शब्द कूक्स, नामधारियों के लिए प्रयोग किया गया. जापान के विद्रोहियों को कूकाई एवं अब असमी एवं नागा विद्रोहियों के लिए कूकी शब्द का प्रयोग किया जाता है. अंग्रेजी रिकार्ड में नामधारी स्वतंत्रता संग्रामियों को कूका लिखा गया. इसीलिए इतिहास में इस आंदोलन का नाम पड़ा “कूका आन्दोलन”. कई जगह ऐसा बोला गया है कि ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने देश में जब सभी जगह अपना अधिकार जमा लिया था तो पंजाब सबसे आखिर राज्य था जहाँ कम्पनी पहुंची थी. 1760 में राजनैतिक सफलता के बाद कम्पनी ने देश का इसाईकरण करने का अपना लक्ष्य बनाया था. 19 वी शताब्दी के मध्य तक भारत के लोगों को इसाई बनाने का काम व्यक्तिगत और संस्थागत हो गया था. लोगों को इसाई बनाने काम तेजी से हो रहा था. एक बार कूका आन्दोलन के लोगों को यह पता चला कि कुछ अंग्रेज हिन्दुओं के सामने ही गाय काटने के लिए ले जा रहे हैं तो कुछ ही गिनती के लोगों ने अंग्रेजों की पूरी बटालियन को मिट्टी में मिला दिया था. सर्वप्रथम 5 अगस्त, 1863 को सियालकोट (वर्तमान में पाकिस्तान) के डिप्टी कमिश्नर की रपट से ब्रिटिश उच्च अधिकारियों को सारा सच पता चल पाया था. बाबा राम सिंह अभी तक पंजाब में धर्म के अन्दर सुधार की मांग कर रहे थे. लेकिन रिपोर्ट में बताया गया था कि बाबा राम सिंह आजादी के लिए लड़ रहे हैं. हर नामधारी संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा. लुधियाना के डी.आई.जी. मैकेन्ड्रयू एवं अम्बाला के कमिश्नर जे.डब्ल्यू मैकनाब ने अपनी 4 नवम्बर, 1867 की रपट में “कूका आन्दोलन” को ब्रिटिश सल्तनत के लिए सबसे बड़ा खतरा बताकर तत्काल सत गुरु राम सिंह जी सहित सभी सहयोगियों को गिरफ्तार करने एवं नामधारी जत्थेबंदी को गैरकानूनी घोषित करने की सिफारिश की. वैसे कुछ इतिहास की पुस्तकें बोलती हैं कि जब बाबा के 150 अनुयायी अंग्रेजों से आखरी टक्कर लेने के लिए बढ़ रहे थे तो इनको रोकने की कोशिश बाबा ने की थी लेकिन इन 150 लोगों के पीछे 5 हजार जानें ना जाएँ इसलिए बाबा ने अलग से विद्रोह करने की अनुमति दी थी. सन् 1870 तक कूका आन्दोलन एक बड़े विद्रोह का रूप ले चुका था. अंग्रेज अब नामधारी कूका के लोगों से डरने लगे थे. इन लोगों का सिर्फ और सिर्फ एक मकसद था और वह था आजादी. ब्रिटिश हुकूमत के साथ टकराव होने लगा था. गोहत्या का सख्त विरोध होने लगा था. तब अंग्रेजों ने इस विद्रोह को खत्म करने की थान ली थी. कई नामधारियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई. अमृतसर के सत्र न्यायाधीश मेजर डब्ल्यू डेविस ने 30 जुलाई, 1871 को चार नामधारियों को “सरेआम फांसी” की सजा सुनाई. 15 अगस्त, 1871 को अमृतसर के रामबाग स्थित वटवृक्ष से लटकाकर चारों को फांसी दी गई. 5 अगस्त, 1871 को रायकोट में मंगल सिंह, मस्तान सिंह एवं गुरमुख सिंह को सरेआम फांसी दी गई. 26 नवम्बर, 1871 को लुधियाना सेन्ट्रल जेल के बाहर सूबेदार ज्ञान सिंह, रतन सिंह एवं वतन सिंह को फांसी दी गई. बंगाल रेगुलेशन एक्ट, 1818 का पहली बार 54 वर्ष बाद भारत मां के इन्हीं नामधारी सपूतों के विरुद्ध प्रयोग किया गया. बिना मुकदमा चलाये 65 क्रांतिकारियों को तोपों से उड़ा दिया गया एवं एक बारह वर्षीय बालक बिशन सिंह को तलवार से काट डाला गया. बाद में गुरु राम सिंह जी को रंगून (बर्मा) एवं उसके बाद मरगोई के बीहड़ जंगलों में नजरबंद रखा गया था. आज कूका विद्रोह में राष्ट्र और धर्म को बचते हुए सदा सदा के लिए अमर हुए सभी वीर बलिदानी सरदारों को बारम्बार नमन और वंदन है और उनकी गौरवगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प है

Comments

Popular posts from this blog

उच्च प्रतिभा के धनी और गणित के विद्वानों के लिए ही यह पोस्ट भारत की गौरवशाली अतीत का

      गणित के विभिन्न क्षेत्रों में भारत का योगदान प्राचीनकाल तथा मध्यकाल के भारतीय गणितज्ञों द्वारा गणित के क्षेत्र में किये गये कुछ प्रमुख योगदान नीचे दिये गये हैं- आंकगणित : दाशमिक प्रणाली (Decimal system), ऋण संख्याएँ (Negative numbers) (ब्रह्मगुप्त देखें), शून्य (हिन्दू अंक प्रणाली देखें), द्विक संख्या प्रणाली (Binary numeral system), स्थानीय मान पर आधारित संख्या आधुनिक संख्या निरूपण, फ्लोटिंग पॉइंट संख्याएँ (केरलीय गणित सम्प्रदाय देखें), संख्या सिद्धान्त , अनन्त (Infinity) (यजुर्वेद देखें), टांसफाइनाइट संख्याएँ (Transfinite numbers), अपरिमेय संख्याएँ (शुल्बसूत्र देखें) भूमिति अर्थात भूमि मापन का शास्त्र : वर्गमूल (see Bakhshali approximation), Cube roots (see Mahavira), Pythagorean triples (see Sulba Sutras; Baudhayana and Apastamba state the Pythagorean theorem without proof), Transformation (see Panini), Pascal's triangle (see Pingala) बीजगणित: Quadratic equations (see Sulba Sutras, Aryabhata, and Brahmagupta), Cubic equations and Quartic equations (b...

bhu के संस्थापक मदन मोहन मालवीय की आत्मा क्यों कराह रही है

    प्रश्न यह है कि फिरोज कोई, ऐसे थोड़े झोला उठाकर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में प्रवेश कर दिया है उसके लिए बकायदा नियम कानून और यहां के बुद्धिजीवियों के और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सारे मापदंडों को पूर्ण करते हुए वह यहां तक पहुंचा है। प्रश्न यह है कि यह ऐसा नियम कानून और मापदंड स्थापित करने वाले कौन हैं जो भारत की अस्मिता को समाप्त करना चाह रहे हैं जो भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना चाह रहे हैं हालांकि गलती तो उसी समय हो गई थी जब अपनी गुरुकुल व्यवस्था का त्याग करके और अंग्रेजों की आधुनिक शिक्षा के माध्यम से एक बड़ा संस्थान बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी बनाई गई है उसी समय इस सनातन परंपरा के नष्ट होने का बीज डाल दिया गया था यह तो अब उसके फलअश्रुति हैं हम लोग केवल परिणाम पर छाती कूटते हैं कारण और निवारण पर कोई ध्यान नहीं रहता है  बोय पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय कहीं यही हालत राम मंदिर निर्माण का भी ना हो इसलिए सजगता आज से ही जरूरी है और श्रेष्ठ परंपरा के वाहक तेजस्वी पुरुष चयन अगर हो पाता है तू ही विश्व गुरु भारत के संकल्पना साकार हो सकती है नहीं तो अपने अपने पा...

NASA के scientist की गणना गलत हो सकता हैं पर खगोल शास्त्र व ज्योतिष शास्त्र की नहीं

    आप कभी कल्पना करके देखना आपका दिमाग़ चकरा जाएगा कि 1000 वर्ष पूर्व और 1000 वर्ष बाद कौन सी तारीख को ,  कितने बज कर कितने बजे तक ( घड़ी , पल , विपल )  कैसा सूर्यग्रहण या चन्द्र ग्रहण लगेगा या होगा , यह हमारा ज्योतिष विज्ञान बिना किसी अरबों खरबों का संयत्र उपयोग में लाये हुए बता देता है ! क्या कभी नोटिस किया है आपने ???? इसका अर्थ क्या है ??? इसका अर्थ यह है कि हमारे ऋषि मुनियों , वेदज्ञ , सनातन धर्म में पहले से यह पता था कि चन्द्रमा , पृथ्वी , सूर्य इत्यादि का व्यास ( Diameter ) क्या है ? उनकी घूर्णन गति क्या है ??  ( Velocity ऑफ़ Rotation ) क्या है ? उनकी revolution velocity और time क्या है ? पृथ्वी से सूर्य की दूरी , सूर्य से चन्द्र की दूरी , चन्द्र की पृथ्वी से दूरी कितनी है ?? इन सबका specific gravity , velocity , magnitude , circumference , diameter , radius , specific velocity , gravitational energy , pull कितना है ?? इतनी सटीक गणना होती है कि एक बार NASA के scientist ग़लती कर सकते हैं seconds की लेकिन ज्योतिष विज्ञान नहीं ! वो तो बस हम लोगों को हमारे...