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11 जून क्या आपको याद है



.11 जून आ रहा है ..क्या आपको याद है ??
..जीवन की आपाधापी में ..11 जून ..महान क्रांतिकारी देशभक्त ' राम प्रसाद " बिस्मिल " का जन्म दिन " .है .' .हम शर्मिंदा हैं ' ..हम सभी का कर्तव्य है की देश पर अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले इन महान सपूतों को अपने दिल और दिमाग में जिन्दा रखें ..ताकि देश इन अंधेरों में इनकी यादो की मशालों के सहारे अपना रास्ता खोज सके ....
पिता श्री मुरली धर और माँ श्रीमती मूलमती देवी के घर 11 जून 1897 को शाहजहाँपुर में जन्मे " बिस्मिल "
के क्रन्तिकारी जीवन का आरम्भ प्रसिद्द क्रांतिकारी गेंदालाल दीक्षित के सानिध्य में हुवा..प्रसिद्द ' मैनपुरी षड्यंत्र केस ' से प्रारंभ हुवा इनका क्रांति जीवन ' काकोरी काण्ड ' के साथ गोरखपुर जेल में 19 दिसम्बर 1927 में क्रूर ब्रितानी हुकूमत से लड़ते हुवे ..फांसी का फंदा चूम ..समाप्त हुवा ..यद्दपि इन्होने अपना नश्वर शरीर भले ही 19 दिसंबर 1927 को त्याग दिया किन्तु देशभक्त युवाओं के दिलों में यह आज भी जीवित हैं ,,
.. ' हिन्दू - मुस्लिम ' एकजुटता की मिसाल इनके साथी ' अशफाक़उल्ला खान ' की कुर्बानियों की मुख्य प्रेरणा ' राम प्रसाद बिस्मिल ही थे ..महान क्रन्तिकारी और ' हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन ' के कुशल संघठनकर्ता के साथ बिस्मिल उच्च कोटि के साहित्यिक भी थे ..अमेरिका का स्वाधीनता संग्राम , बोल्शेविक की करतूतें ..क्रांति काव्यांजलि आदि अनेकों प्रसिद्द रचनाओं की रचना भी की थी ..' पीला परचा ' जो की संघठन का संविधान था का सम्पूर्ण भारत में एक साथ बंटना आपकी योग्यता का सीधा प्रमाण है " जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने की मांग " भी उक्त घोषणापत्र में शामिल थी ..
काकोरी के अमर शहीद राम प्रसाद ' बिस्मिल ' उच्चकोटि के शायर भी थे ..उनके कुछ नगमात ..उनकी याद में ....
सरफरोशाने - वतन फिर देख लो मकतल में है ..
मुल्क पे कुर्बान हो जाने अरमान के दिल में है ...
तेग है जालिम की यारों .! और गला मजलूम का ..
देख लेंगे हौसला कितना दिले कातिल में है ...
शोरे - महशर बावफा है ..मारिका है धूम का ..
वलवले- जोशे -शहादत हर रागे बिस्मिल में है ...
...जान की बाजी लगाने वाले बिस्मिल औ अशफाक ने अपने लहू से जो नगमात लिखे ...आज इश्क -माशूक की शायरी की भीड़ में वे गुम होते जा रहे हैं ...देश की बेबसी और तंगदिली की एक वाजिब और बड़ी वजह ये भी है ...सहमत हैं ...आइये हम सब एकजुट होकर ..हुब्बे -वतनी क इन पैगम्बरों के रास्तों पर चलने की कोशिस करें ...भले ही लड़खड़ाते हुए ..आमीन
...शुभ संध्या ,, जयहिंद .!!!!

Comments

D. S. said…
यही मानव जीव एक दूसरे से प्रेम द्वारा बंधा रहे, अपने हिन्दू मुस्लिम धर्मों में न बट कर, मात्र राष्ट् प्रेम, भक्ति भाव मे रहै।

यह तभी संभव है जब हम सही शिक्षा प्राप्त कर, प्रदान कराने के इच्छुक सज्जनों को एक साथ जोड़ पूरे देश मे गुरूकुल पद्धति से नैतिक शिक्षा आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान कराने के इच्छुक सज्जन आगे आकर इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग देंगे। धन्यवाद ।शुभकामनायें ।

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