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आतंकी हाफिज सईद आतंकवादी घोषित होने से भारत की अर्थव्यवस्था को भारी खतरा


     एक तरफ हाफिज सईद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित होने के बाद भारत में एक उत्सव का माहौल बना है वहीं दूसरी तरफ पीछे से एक ऐसा वार किया गया कि भारत की अर्थव्यवस्था एक बार पुनः विचारणीय स्थिति में आने जा रही है क्योंकि इरान से डायरेक्ट लेन-देन से हमारे यहां तेल की सप्लाई बिना डालर के अपनी मुद्रा में कर सकते थे जो आज से प्रतिबंधित हो गया है यह एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा है आगे पढ़कर अपना विचार प्रस्तुत करें अजय कर्मयोगी

अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत अब तेहरान से तेल नहीं खरीद पाएगा. इससे भारत पर व्यापक असर पड़ेगा. इस प्रतिबंध के पालन में मसूद अजहर भी एक फैक्टर है. इसके अलावा भारत को क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?

अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों से आठ देशों को छूट दी थी. लेकिन अब वॉशिंगटन ने इस रियायत को आगे ना बढ़ाने का फैसला किया है. साल 2015 में ईरान के साथ हुए एक ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अमेरिका बाहर निकल गया. इसके चलते अमेरिका ने नवंबर, 2018 में ईरान द्वारा किए जाने वाले तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया. अमेरिका का कहना था कि वो ईरान के तेल निर्यात को शून्य पर लेकर आना चाहता है जिससे तेहरान को आर्थिक नुकसान हो. हालांकि ईरान के आठ बड़े आयातकों चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, तुर्की, इटली और ग्रीस को तेल आयात छह महीने तक जारी रखने की छूट दी. यह छूट 1 मई, 2019 तक थी. अमेरिका ने कहा कि ये देश बड़ी मात्रा में ईरान से तेल खरीदते हैं इसलिए इन्हें एक साथ तेल खरीदने से मना नहीं किया जा सकता लेकिन छह महीने में इनको भी ईरान से तेल आयात शून्य करना होगा. अमेरिका का कहना है कि ईरान को बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम बंद करना होगा. साथ ही सीरिया, यमन और दूसरे देशों के उग्रवादी समूहों को सहायता देनी भी बंद करनी होगी.

ईरान का कहना है कि अमेरिका ऐसा कर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है. वो इन प्रतिबंधों को नहीं मानेंगे और ये अमेरिका के साथ एक आर्थिक युद्ध जैसा होगा.
भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा

भारत की तेल की कुल जरुरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा होता है. इसके अलावा प्राकृतिक गैस की 40 प्रतिशत जरूरतें भी आयात से पूरी होती हैं. वित्त वर्ष 2018-19 में भारत ने ईरान से 2.35 करोड़ टन तेल आयात किया था जो भारत के कुल तेल आयात 22.04 करोड़ टन का लगभग दस प्रतिशत था. 2018-19 में ईरान भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल निर्यातक था. इसके अलावा ईरान तेल व्यापार में भारत को बहुत सारी सहूलियतें देता है. ईरान भारत को 60 डे क्रेडिट यानी 60 दिन तक भुगतान करने की छूट, मुफ्त बीमा और मुफ्त डिलीवरी की सुविधा देता है. भारत ईरान को पूरा भुगतान अंतररराष्ट्रीय मुद्रा डॉलर में ना करके रुपये में करता है. इसलिए भारत को ईरान से व्यापार के लिए विदेशी मुद्रा जुटाने की आवश्यकता नहीं होती.
    

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