Skip to main content

जिन्होंने पाकिस्तान बनवाई वह स्वयं पाकिस्तान नहीं गए इसका कारण क्या है


मोहम्मद इस्माइल मुस्लिम लीग के मद्रास प्रांत के बड़े नेता थे। 1946 के चुनाव में प्रांत अध्यक्ष रहते उन्होंन जिन्ना को मद्रास की सभी मुस्लिम रिजर्व 28 सीटें जिताकर दी थी ताकि जिन्ना अलग इस्लामिक देश पाकिस्तान बना सके। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बन गया लेकिन आपने आज तक एक भी मद्रासी मूल का पाकिस्तानी नहीं देखा होगा।

क्योंकि जिन मोहम्मद इस्माइल ने 1946 में जिन्ना को मद्रास में विजय दिलाई वो ना तो खुद पाकिस्तान गए ना उनके कहने पर जिन्ना को वोट देने वाला उनका कोई समर्थक।

तो अब सवाल ये है कि पाकिस्तान बनवाने के बाद मोहम्मद इस्माइल ने भारत में रह कर क्या किया। मोहम्मद इस्माइल ने 1948 में एक नई पार्टी बनाई और उसका नाम रखा ऑल इंडिया मुस्लिम लीग और भारत को ही पाकिस्तान बनाने के काम में जुट गए।

और जिस कांग्रेस के खिलाफ 1940 के दशक में वो जिन्ना के नेतृत्व में लड़ रहे थे आज उसी कांग्रेस के साथ मिलकर केरल में चुनाव लड़ते हैं। साल 1996 में जिन्ना के साथ मिलकर पाकिस्तान बनवाने वाले मोहम्मद इस्माइल के सम्मान में भारत सरकार डाक टिकट जारी किया। देश को विभाजित करने वालों का ऐसा सम्मान विश्व के किसी और देश ने नहीं किया होगा।

कल जो पार्टी जिन्ना को जीताकर पाकिस्तान बनाना चाहती थी आज वो ही पार्टी राहुल गांधी को वायनाड से जीताकर पीएम बनाना चाहती है।

और हमें क्या बताया गया

केरल सबसे पढ़ा लिखा राज्य है इसलिए लोग इतने समझदार हैं कि आज तक सांप्रदायिक पार्टी बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत पाई।

ये किसी ने नहीं बताया कि पढ़-लिख कर लिबरल बनने का शौक एक ही कम्युनिटी को है दूसरे तो आज भी लीग बनाकर बैठे है किसी जिन्ना के इंतजार में...

पोस्ट साभार :-- मीडिया माफिया

Comments

Unknown said…
बहुत ही सही कह रहे हैं आप हिन्दू की आंखे अब खुल रही है जय श्री राम
बहुत ही विचारशील जानकारी🔥🔥🔥🚩🕉️

Popular posts from this blog

उच्च प्रतिभा के धनी और गणित के विद्वानों के लिए ही यह पोस्ट भारत की गौरवशाली अतीत का

      गणित के विभिन्न क्षेत्रों में भारत का योगदान प्राचीनकाल तथा मध्यकाल के भारतीय गणितज्ञों द्वारा गणित के क्षेत्र में किये गये कुछ प्रमुख योगदान नीचे दिये गये हैं- आंकगणित : दाशमिक प्रणाली (Decimal system), ऋण संख्याएँ (Negative numbers) (ब्रह्मगुप्त देखें), शून्य (हिन्दू अंक प्रणाली देखें), द्विक संख्या प्रणाली (Binary numeral system), स्थानीय मान पर आधारित संख्या आधुनिक संख्या निरूपण, फ्लोटिंग पॉइंट संख्याएँ (केरलीय गणित सम्प्रदाय देखें), संख्या सिद्धान्त , अनन्त (Infinity) (यजुर्वेद देखें), टांसफाइनाइट संख्याएँ (Transfinite numbers), अपरिमेय संख्याएँ (शुल्बसूत्र देखें) भूमिति अर्थात भूमि मापन का शास्त्र : वर्गमूल (see Bakhshali approximation), Cube roots (see Mahavira), Pythagorean triples (see Sulba Sutras; Baudhayana and Apastamba state the Pythagorean theorem without proof), Transformation (see Panini), Pascal's triangle (see Pingala) बीजगणित: Quadratic equations (see Sulba Sutras, Aryabhata, and Brahmagupta), Cubic equations and Quartic equations (b...

bhu के संस्थापक मदन मोहन मालवीय की आत्मा क्यों कराह रही है

    प्रश्न यह है कि फिरोज कोई, ऐसे थोड़े झोला उठाकर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में प्रवेश कर दिया है उसके लिए बकायदा नियम कानून और यहां के बुद्धिजीवियों के और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सारे मापदंडों को पूर्ण करते हुए वह यहां तक पहुंचा है। प्रश्न यह है कि यह ऐसा नियम कानून और मापदंड स्थापित करने वाले कौन हैं जो भारत की अस्मिता को समाप्त करना चाह रहे हैं जो भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना चाह रहे हैं हालांकि गलती तो उसी समय हो गई थी जब अपनी गुरुकुल व्यवस्था का त्याग करके और अंग्रेजों की आधुनिक शिक्षा के माध्यम से एक बड़ा संस्थान बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी बनाई गई है उसी समय इस सनातन परंपरा के नष्ट होने का बीज डाल दिया गया था यह तो अब उसके फलअश्रुति हैं हम लोग केवल परिणाम पर छाती कूटते हैं कारण और निवारण पर कोई ध्यान नहीं रहता है  बोय पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय कहीं यही हालत राम मंदिर निर्माण का भी ना हो इसलिए सजगता आज से ही जरूरी है और श्रेष्ठ परंपरा के वाहक तेजस्वी पुरुष चयन अगर हो पाता है तू ही विश्व गुरु भारत के संकल्पना साकार हो सकती है नहीं तो अपने अपने पा...

NASA के scientist की गणना गलत हो सकता हैं पर खगोल शास्त्र व ज्योतिष शास्त्र की नहीं

    आप कभी कल्पना करके देखना आपका दिमाग़ चकरा जाएगा कि 1000 वर्ष पूर्व और 1000 वर्ष बाद कौन सी तारीख को ,  कितने बज कर कितने बजे तक ( घड़ी , पल , विपल )  कैसा सूर्यग्रहण या चन्द्र ग्रहण लगेगा या होगा , यह हमारा ज्योतिष विज्ञान बिना किसी अरबों खरबों का संयत्र उपयोग में लाये हुए बता देता है ! क्या कभी नोटिस किया है आपने ???? इसका अर्थ क्या है ??? इसका अर्थ यह है कि हमारे ऋषि मुनियों , वेदज्ञ , सनातन धर्म में पहले से यह पता था कि चन्द्रमा , पृथ्वी , सूर्य इत्यादि का व्यास ( Diameter ) क्या है ? उनकी घूर्णन गति क्या है ??  ( Velocity ऑफ़ Rotation ) क्या है ? उनकी revolution velocity और time क्या है ? पृथ्वी से सूर्य की दूरी , सूर्य से चन्द्र की दूरी , चन्द्र की पृथ्वी से दूरी कितनी है ?? इन सबका specific gravity , velocity , magnitude , circumference , diameter , radius , specific velocity , gravitational energy , pull कितना है ?? इतनी सटीक गणना होती है कि एक बार NASA के scientist ग़लती कर सकते हैं seconds की लेकिन ज्योतिष विज्ञान नहीं ! वो तो बस हम लोगों को हमारे...