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न्यूयॉर्क
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक न्यू यॉर्क में दुनिया का पहला 'हस्तमैथुन बूथ' खोला गया है। कंपनी ने इसकी डिजाइन मेल सेक्स टॉय की शक्ल में तैयार की है। इस बूथ को खोलने के पीछे तर्क दिया गया है कि दिन में पुरुषों को तनावमुक्त होने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है। इस हस्तमैथुन बूथ का नाम 'गाईफाई बूथ' है। यहां एक कुर्सी और एक लैपटॉप हैं। लैपटॉप पर लोग इस निजी पल में कुछ देख भी सकते हैं।

पहला बूथ मैनहटन में खुला है। हालांकि यह अपने आप में वैध नहीं है। इस तरह के बूथ से अमेरिका में सार्वजनिक शिष्टता का उल्लंघन होता है। इसे खोलने के पीछे का दिमाग 'हॉट ऑक्टपस' के फाउंडर ऐडम लेवी का है। उन्होंने द मिरर से कहा, 'इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि 9 से शाम पांच बजे तक की जॉब तनावपूर्ण होती है। यह दिमाग और देह दोनों के लिए तनावपूर्ण है। इस स्थिति को खासकर कभी न थमने वाली सिटी मैनहटन में लोग महसूस भी करते हैं।'

ऐडम लेवी ने कहा, 'हम सभी एक नया समाधान की तरफ देख रहे हैं। हम हर दिन के जीवन को संतुलित करना चाहते हैं। हमें ऐसा लगेगा कि गाईफाई बूथ में हमने कुछ अलग और नया किया है। मुझे उम्मीद है कि सिटी के लोग इसे इंजॉय करेंगे। हमने वही बनाया है जो लोग चाहते थे। इसे लोग बिना कोई शुल्क के इस्तेमाल कर सकेंगे। यह उन लोगों के लिए बहुत जरूरी है जो अपना फोकस काम पर रखना चाहते हैं। हम समय-समय पर बात करते रहे हैं कि डेस्क से ब्रेक का फायदा हम कैसे उठा सकते हैं।'

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जी हां,आजादी के नाम पर यही होनेवाला । पूरी दुनिया में फैले दानव धनमाफिया के प्यादे आजादी के नाम पर, समाज को बदल दो के सुत्र के साथ इस तरह की गंदगी हर देश में फैलनेवाले है । भारत में भी समाज और देश के गद्दार इस तरह की गंदगी फैलायेन्गे । दानवों का शुभ टार्गेट तो युनि के केमपस होन्गे । जीनयु जैसी युनि, जहां धनमाफियांओ के धन पर गद्दार पल रहे हैं, प्रथम बीडा वही उठायेन्गे ।

आदमी का मानवीपन मिटाकर उसमें जंगलीपन भर देना है । आदमी के हाथ से हथियार छीनकर इस तरह के काम में लगा देना है । २०४६ के बाद जब धन माफिया ये बोल देन्गे की अब भारत-अमरिका सहित सभी देशों की आजादी खतम, पूरी धरती पर हम धनमाफियाओं का राज हो गया है, साम्यवादी विश्व सरकार ! तब बीना हथियार मुठमार जनता क्या करेगी ? आज भले लाल सलामवालों की लाल हो गयी है लेकिन वही शैतान सभ्य जनता को मुठमार जनता बनाकर जनता की ही लाल करने की योजना बना रहे हैं


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