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यह एक पत्ता आपको 80 सालों तक बीमार नहीं होने देगा ! स्वस्थ रहना है तो एक बार जरूर देखें

क्या आप एक ऐसी जड़ी बूटी की खोज कर रहे हैं जो कि आपकी अधिकांश स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करे? तो आपके लिए गिलोय से बेहतर दूसरा कोई विकल्प नहीं हो सकता है। यह आपको एक बड़ी संख्या में लाभ प्रदान करता है और इसके कुछ लाभों को निश्चित रूप से आपको अपनी जीवन शैली में अपनाना चाहिए।

गिलोय की पहचान

गिलोय आयुर्वेद में मौजूद सबसे महत्वपूर्ण जड़ी बूटियों में से एक है। यह भारतीय टीनोस्पोरा (Indian Tinospora) या गुदुची (Guduchi) के रूप में जाना जाता है। गिलोय को अक्सर अमृता बुलाया जाता है, यह अमृत के लिए भारतीय नाम है। यह विभिन्न प्रकार के प्रयोजनों और रोगों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। हो सकता है आपने गिलोय की बेल देखी हो लेकिन जानकारी के अभाव में गिलोय की पहचान नहीं कर पाए हों। गिलोय का पौधा एक बेल के रूप में होता है और इसकी पत्त‍ियां पान के पत्ते की तरह होती हैं। जैसा की हमने पहले ही बताया है कि गिलोय के औषधीय गुण कई प्रकार की बीमारियों को ठीक करने में उपयोग किए जाते हैं। गिलोय के कुछ महत्वपूर्ण फायदे हम नीचे बताने जा रहे हैं।

गिलोय के प्रयोग से बढ़ाएं इम्यूनिटी

गिलोय का पहला और सबसे महत्वपूर्ण लाभ है – रोगों से लड़ने की क्षमता देना। गिलोय में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो कि स्वास्थ्य में सुधार लाते हैं और खतरनाक रोगों से लड़ते हैं। गिलोय दोनों गुर्दे और जिगर से विषाक्त पदार्थों को दूर करता है और मुक्त कण (free radicals) को भी बाहर निकालता है। इन सब के अलावा, गिलोय बैक्टीरिया, मूत्र मार्ग में संक्रमण और जिगर की बीमारियों से भी लड़ता है जो अनेक रोगो का कारण बनते हैं। नियमित रूप से गिलोय जूस का सेवन करने से रोगों से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है।

गिलोय के फायदे डेंगू के उपचार में

गिलोय का एक अन्य लाभ यह है कि यह लंबे समय से चले आ रहे ज्वर और रोगों का इलाज करता है। क्योंकि यह प्रकृति में ज्वरनाशक है, तो यह जीवन को खतरे में डालने वाली बीमारियों के संकेतो और लक्षणों को कम कर करता है। यह आपके रक्त में प्लेटलेट्स की गिनती को बढ़ाता है और डेंगू बुखार के लक्षण को भी दूर करता है। गिलोय के साथ तुलसी के पत्ते प्लेटलेट की गिनती को बढ़ाते हैं और डेंगू से लड़ते हैं। गिलोय के अर्क और शहद को एक साथ मिलाकर पीना मलेरिया में उपयोगी होता है। बुखार के लिए 90% आयुर्वेदिक दवाओं में गिलोय का उपयोग एक अनिवार्य घटक के रूप में होता है।

गिलोय के औषधीय गुण पाचन बनाएं बेहतर

गिलोय आपके पाचन तंत्र की देखभाल कर सकता है। आधा ग्राम गिलोय पाउडर को कुछ आंवला के साथ नियमित रूप से लें। अच्छे परिणामों को प्राप्त करने के लिए, गिलोय का रस छाछ के साथ भी लिया जा सकता है। यह उपाय बवासीर से पीड़ित रोगियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। संक्षेप में, गिलोय दिमाग को आराम देता है और अपच को रोकता है।

गिलोय के उपयोग से मधुमेह करें नियंत्रित

अगर आप मधुमेह से पीड़ित हैं, तो गिलोय निश्चित रूप से आपके लिए प्रभावी होगा। गिलोय एक हाइपोग्लिसीमिक एजेंट के रूप में कार्य करता है। यह रक्तचाप और लिपिड के स्तर को कम कर सकता है। यह टाइप 2 मधुमेह के इलाज को बहुत आसान बनाता है। मधुमेह रोगियों को नियमित रूप से रक्त शर्करा के उच्च स्तर को कम करने के लिए गिलोय का जूस पीना चाहिए।

गिलोय का सेवन करें मस्तिष्क के टॉनिक के रूप में

गिलोय भी एक अडाप्टोजेनिक (adaptogenic) जड़ी बूटी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, यह दोनों मानसिक तनाव और चिंता को कम करता है। एक उत्कृष्ट स्वास्थ्य टॉनिक बनाने के लिए, गिलोय अक्सर अन्य जड़ी बूटियों के साथ मिश्रित किया जाता है। यह स्मृति को बढ़ावा देने और आपका काम पर ध्यान लगाने में मदद करता है। यह मस्तिष्क से सभी विषाक्त पदार्थों को भी साफ कर सकता है। गिलोय की जड़ और फूल से तैयार 5 ml गिलोय के रस का नियमित सेवन एक उत्कृष्ट मस्तिष्क टॉनिक के रूप में समझा जाता है। गिलोय को अक्सर एक बुढ़ापा विरोधी जड़ी बूटी बुलाया जाता है।

गिलोय रस के फायदे हैं दमा के इलाज में

अस्थमा के कारण छाती में जकड़न, सांस की तकलीफ, खाँसी, घरघराहट आदि होती है। ऐसी हालत के लिए इलाज मुश्किल हो जाता है। हालांकि, कुछ आसान उपायो से अस्थमा के लक्षणों को कम किया जा सकता है। उनमें से एक उपाय है – गिलोय। यह अक्सर अस्थमा के रोगियों के इलाज के लिए विशेषज्ञों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय का रस दमा के इलाज में उपयोगी है। नीम और आंवला के साथ मिला इसका मिश्रण इसे और अधिक प्रभावी बनाता है।

गिलोय जूस के फायदे आँखों के लिए

गिलोय नेत्र विकारों के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह आंखों की रोशनी बढ़ा देता है और चश्मे के बिना बेहतर देखने में मदद करता है। भारत के कुछ भागों में लोग गिलोय को आंखों पर उपयोग करते हैं। आप गिलोय को पानी में उबालें, उसको ठंडा करें और फिर आँखों की पलकों पर लगाएं। आपको निश्चित रूप से एक परिवर्तन दिखाई देगा।

गिलोय के नुकसान – Giloy ke Nuksan in Hindi

यदि आप मधुमेह की दवाई ले रहे हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह के इस जड़ी बूटी का सेवन नहीं करना चाहिए। गिलोय कब्ज और कम रक्त शर्करा की समस्या भी पैदा कर सकता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसके इस्तेमाल के लिए अपने वैद्य की सलाह लेनी चाहिए। अजय कर्मयोगी

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