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ATM और बैंकों में कैश की कमी के क्या हैं बड़े कारण
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लोगों का डर सही है । बेन्क फैल हो चुके है । अभी सेंकडो नीरव मोदी बेंकों की एक्जाम लेने लाईन लगा के खडे हैं, ये परिक्षक बेन्कों को फैल करते जा रहे हैं । फैल को पास करने के लिए जनता के पैसे को काममें लेना है । जनता को ही परिक्षक बनाना है । जनता नामका परिक्षक बेन्कों को पेपर लिखने में ज्यादा टाईम देगा, भूल सुधारने का मौका देगा, गलत जवाब के भी मार्क दे देगा और बेन्कों को पास कर देगा ।
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( पिछले १२-१३ दिन में जनता द्वारा बेन्कों से अचानक अरबों रुपए उठा लिए गये हैं । क्या ये बात सच है? जनताने ही उठाए हैं? या जनता के नाम कोइ मोर कला कर गया है? या नोटबंदी नंबर-२ है? )
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देश के कई राज्यों में कैश की किल्लत की खबरें आने के बाद सरकार हरकत में आ चुकी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली, आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग और एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने कैश की कमी के कई कारण गिनाए। आइए जानते हैं कि क्यों ATM सूखे हैं और बैंक खाली...
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प्रस्तावित फाइनैंस रेजॉलूशन ऐंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (FRDI) बिल, 2017 की वजह से अफवाह उड़ी कि इस बिल के कानून का रूप ले लेने पर बैंकों में जमा किया पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा। सरकार की ओर से इसका खंडन करने के बावजूद लोग एटीएम से पैसे निकालने दौड़ पड़े।
( जनता को भूलने की बिमारी है, इस कानून को भूल चुकी है । अगर ये कारण होता तो जनता इस तरह के मेसेज की बौछार करती, "मैने अपना कॅश निकाल लिया है, आप भी अपने पैसे की सलामति चाहते हो तो निकाल लो"।)
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पंजाब नैशनल बैंक की मुंबई शाखा से नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों के लिए अवैध तरीके से जारी लेटर्स ऑफ अंडरस्टैंडिंग (LoU) की जानकारी सामने आने एवं कई अन्य कंपनियों के लोन वापस नहीं किए जाने की खबरों से भी लोगों के मन में डर पैदा हुआ कि बैंकिंग सिस्टम फेल हो रहा है। बैंकों से भरोसा उठने की वजह से लोग कैश डिपॉजिट करने से बचने लगे और पहले से जमा रकम भी निकालने लगे। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इसी डर से लोग पैसे निकालने लगे।
( लोगों का डर सही है । बेन्क फैल हो चुके है । अभी सेंकडो नीरव मोदी बेंकों की एक्जाम लेने लाईन लगा के खडे हैं, ये परिक्षक बेन्कों को फैल करते जा रहे हैं । फैल को पास करने के लिए जनता के पैसे को काममें लेना है । जनता को ही परिक्षक बनाना है । जनता नामका परिक्षक बेन्कों को पेपर लिखने में ज्यादा टाईम देगा, भूल सुधारने का मौका देगा, गलत जवाब के भी मार्क दे देगा और बेन्कों को पास कर देगा । )
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एक सवाल के जवाब में आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने माना कि 2000 रुपये के नोटों की कमी आई है, लेकिन फिर से काला धन जमा होने की आशंका खारिज कर दी। उन्होंने कहा, 'अभी सिस्टम में 2000 रुपये के 6 लाख 70 हजार करोड़ नोट हैं। यह संख्या पर्याप्त से ज्यादा है। हमें भी पता है कि 2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन में घटे हैं। इसकी कोई जांच तो नहीं कराई है। लेकिन, अनुमान यह है कि बड़े नोट जमा करने में आसानी होती है। इसलिए लोग बचत की रकम 2000 रुपये के नोटों में ही जमा कर रहे हैं।'
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( अकबर के साले मानसिह ने राणा प्रताप को कहा था की तेरा भामाशा करोड पति कैसे बन गया आप जरा देख लो । राणाने जवाब दिया था कि मैं अपने नागरिक के धन की इर्षा नही करता बल्कि मेरे नागरिक धनवान हो तो मेरे लिए वो गर्व की बात है ।
अब यहां गर्व की बात छोडो, आदमी कुछ लाख की अपनी बचत भी करता है तो उसे कालेधनवाला समज लिया जाता है । गरीब और कामचोरों, निठल्ले और वामपंथीयों की इर्षाग्नि तो जलती ही है साथ में सरकार भी अपने नागरिक के धन की इर्षा करती है और हर तरिका अपनाती है जीस से नागरिकों की बचत को हडप लिया जाए । )
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एटीएम खाली होने का एक कारण बैंक जमा में वृद्धि दर में गिरावट भी है। वित्त वर्ष 2017-18 में बैंक डिपॉजिट ग्रोथ घटकर 6.7% पर आ गई जो साल 2016-17 के दौरान 15.3% रही थी। इसके उलट बैंकों से पैसे ज्यादा निकले। वित्त वर्ष 2016-17 में बैंक क्रेडिट में 8.2% की वृद्धि दर्ज की गई थी जो 2017-18 में बढ़कर 10.3 प्रतिशत रही।
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( नेगेटिव डिपोजिट ग्रोथ - जब धंधे ही चौपट कर दिए है तो जनता कैसे कमाई करे, अपनी बचत कैसे बेन्क में रख्खे ! घर बैठे खाने के दिन आ गए हैं तो बेन्क में रही अपनी बचत को ही निकालेन्गे ना ! )
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एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि अचानक नोटों की कमी का कारण किसानों को भुगतान की रकम बढ़ना भी है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह कोई नई बात नहीं है। एक विभाग इस तरह के मामलों पर नजर रखता है।
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( आहा हा, जाणे उंधा पडी ग्या किसानोने मदद करीनेे...)
गर्ग ने कुछ हिस्सों में नोटों की कमी को कमोबेश स्थानीय प्रबंधन से उपजी समस्या करार दिया। उन्होंने बताया, 'देश में 4 हजार करंसी चेस्ट हैं। वहीं पैसे आते हैं, रखे जाते हैं और वहां से वितरित होते हैं। इसलिए, हर चेस्ट की मॉनिटरिंग हो रही है। जिस चेस्ट में कैश की कमी हो रही होगी, वहां पर्याप्त कैश पहुंचाया जाएगा।'
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( ये पबंधन समस्या ही तो है नोटबंदी का खूफिया साधन...)

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