Skip to main content


ATM और बैंकों में कैश की कमी के क्या हैं बड़े कारण
-------------------------------------
लोगों का डर सही है । बेन्क फैल हो चुके है । अभी सेंकडो नीरव मोदी बेंकों की एक्जाम लेने लाईन लगा के खडे हैं, ये परिक्षक बेन्कों को फैल करते जा रहे हैं । फैल को पास करने के लिए जनता के पैसे को काममें लेना है । जनता को ही परिक्षक बनाना है । जनता नामका परिक्षक बेन्कों को पेपर लिखने में ज्यादा टाईम देगा, भूल सुधारने का मौका देगा, गलत जवाब के भी मार्क दे देगा और बेन्कों को पास कर देगा ।
--------------------------------
( पिछले १२-१३ दिन में जनता द्वारा बेन्कों से अचानक अरबों रुपए उठा लिए गये हैं । क्या ये बात सच है? जनताने ही उठाए हैं? या जनता के नाम कोइ मोर कला कर गया है? या नोटबंदी नंबर-२ है? )
.
देश के कई राज्यों में कैश की किल्लत की खबरें आने के बाद सरकार हरकत में आ चुकी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली, आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग और एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने कैश की कमी के कई कारण गिनाए। आइए जानते हैं कि क्यों ATM सूखे हैं और बैंक खाली...
.
प्रस्तावित फाइनैंस रेजॉलूशन ऐंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (FRDI) बिल, 2017 की वजह से अफवाह उड़ी कि इस बिल के कानून का रूप ले लेने पर बैंकों में जमा किया पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा। सरकार की ओर से इसका खंडन करने के बावजूद लोग एटीएम से पैसे निकालने दौड़ पड़े।
( जनता को भूलने की बिमारी है, इस कानून को भूल चुकी है । अगर ये कारण होता तो जनता इस तरह के मेसेज की बौछार करती, "मैने अपना कॅश निकाल लिया है, आप भी अपने पैसे की सलामति चाहते हो तो निकाल लो"।)
.
पंजाब नैशनल बैंक की मुंबई शाखा से नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों के लिए अवैध तरीके से जारी लेटर्स ऑफ अंडरस्टैंडिंग (LoU) की जानकारी सामने आने एवं कई अन्य कंपनियों के लोन वापस नहीं किए जाने की खबरों से भी लोगों के मन में डर पैदा हुआ कि बैंकिंग सिस्टम फेल हो रहा है। बैंकों से भरोसा उठने की वजह से लोग कैश डिपॉजिट करने से बचने लगे और पहले से जमा रकम भी निकालने लगे। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इसी डर से लोग पैसे निकालने लगे।
( लोगों का डर सही है । बेन्क फैल हो चुके है । अभी सेंकडो नीरव मोदी बेंकों की एक्जाम लेने लाईन लगा के खडे हैं, ये परिक्षक बेन्कों को फैल करते जा रहे हैं । फैल को पास करने के लिए जनता के पैसे को काममें लेना है । जनता को ही परिक्षक बनाना है । जनता नामका परिक्षक बेन्कों को पेपर लिखने में ज्यादा टाईम देगा, भूल सुधारने का मौका देगा, गलत जवाब के भी मार्क दे देगा और बेन्कों को पास कर देगा । )
.
एक सवाल के जवाब में आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने माना कि 2000 रुपये के नोटों की कमी आई है, लेकिन फिर से काला धन जमा होने की आशंका खारिज कर दी। उन्होंने कहा, 'अभी सिस्टम में 2000 रुपये के 6 लाख 70 हजार करोड़ नोट हैं। यह संख्या पर्याप्त से ज्यादा है। हमें भी पता है कि 2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन में घटे हैं। इसकी कोई जांच तो नहीं कराई है। लेकिन, अनुमान यह है कि बड़े नोट जमा करने में आसानी होती है। इसलिए लोग बचत की रकम 2000 रुपये के नोटों में ही जमा कर रहे हैं।'
.
( अकबर के साले मानसिह ने राणा प्रताप को कहा था की तेरा भामाशा करोड पति कैसे बन गया आप जरा देख लो । राणाने जवाब दिया था कि मैं अपने नागरिक के धन की इर्षा नही करता बल्कि मेरे नागरिक धनवान हो तो मेरे लिए वो गर्व की बात है ।
अब यहां गर्व की बात छोडो, आदमी कुछ लाख की अपनी बचत भी करता है तो उसे कालेधनवाला समज लिया जाता है । गरीब और कामचोरों, निठल्ले और वामपंथीयों की इर्षाग्नि तो जलती ही है साथ में सरकार भी अपने नागरिक के धन की इर्षा करती है और हर तरिका अपनाती है जीस से नागरिकों की बचत को हडप लिया जाए । )
.
एटीएम खाली होने का एक कारण बैंक जमा में वृद्धि दर में गिरावट भी है। वित्त वर्ष 2017-18 में बैंक डिपॉजिट ग्रोथ घटकर 6.7% पर आ गई जो साल 2016-17 के दौरान 15.3% रही थी। इसके उलट बैंकों से पैसे ज्यादा निकले। वित्त वर्ष 2016-17 में बैंक क्रेडिट में 8.2% की वृद्धि दर्ज की गई थी जो 2017-18 में बढ़कर 10.3 प्रतिशत रही।
.
( नेगेटिव डिपोजिट ग्रोथ - जब धंधे ही चौपट कर दिए है तो जनता कैसे कमाई करे, अपनी बचत कैसे बेन्क में रख्खे ! घर बैठे खाने के दिन आ गए हैं तो बेन्क में रही अपनी बचत को ही निकालेन्गे ना ! )
.
एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि अचानक नोटों की कमी का कारण किसानों को भुगतान की रकम बढ़ना भी है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह कोई नई बात नहीं है। एक विभाग इस तरह के मामलों पर नजर रखता है।
.
( आहा हा, जाणे उंधा पडी ग्या किसानोने मदद करीनेे...)
गर्ग ने कुछ हिस्सों में नोटों की कमी को कमोबेश स्थानीय प्रबंधन से उपजी समस्या करार दिया। उन्होंने बताया, 'देश में 4 हजार करंसी चेस्ट हैं। वहीं पैसे आते हैं, रखे जाते हैं और वहां से वितरित होते हैं। इसलिए, हर चेस्ट की मॉनिटरिंग हो रही है। जिस चेस्ट में कैश की कमी हो रही होगी, वहां पर्याप्त कैश पहुंचाया जाएगा।'
.
( ये पबंधन समस्या ही तो है नोटबंदी का खूफिया साधन...)

Comments

Popular posts from this blog

उच्च प्रतिभा के धनी और गणित के विद्वानों के लिए ही यह पोस्ट भारत की गौरवशाली अतीत का

      गणित के विभिन्न क्षेत्रों में भारत का योगदान प्राचीनकाल तथा मध्यकाल के भारतीय गणितज्ञों द्वारा गणित के क्षेत्र में किये गये कुछ प्रमुख योगदान नीचे दिये गये हैं- आंकगणित : दाशमिक प्रणाली (Decimal system), ऋण संख्याएँ (Negative numbers) (ब्रह्मगुप्त देखें), शून्य (हिन्दू अंक प्रणाली देखें), द्विक संख्या प्रणाली (Binary numeral system), स्थानीय मान पर आधारित संख्या आधुनिक संख्या निरूपण, फ्लोटिंग पॉइंट संख्याएँ (केरलीय गणित सम्प्रदाय देखें), संख्या सिद्धान्त , अनन्त (Infinity) (यजुर्वेद देखें), टांसफाइनाइट संख्याएँ (Transfinite numbers), अपरिमेय संख्याएँ (शुल्बसूत्र देखें) भूमिति अर्थात भूमि मापन का शास्त्र : वर्गमूल (see Bakhshali approximation), Cube roots (see Mahavira), Pythagorean triples (see Sulba Sutras; Baudhayana and Apastamba state the Pythagorean theorem without proof), Transformation (see Panini), Pascal's triangle (see Pingala) बीजगणित: Quadratic equations (see Sulba Sutras, Aryabhata, and Brahmagupta), Cubic equations and Quartic equations (b...

bhu के संस्थापक मदन मोहन मालवीय की आत्मा क्यों कराह रही है

    प्रश्न यह है कि फिरोज कोई, ऐसे थोड़े झोला उठाकर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में प्रवेश कर दिया है उसके लिए बकायदा नियम कानून और यहां के बुद्धिजीवियों के और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सारे मापदंडों को पूर्ण करते हुए वह यहां तक पहुंचा है। प्रश्न यह है कि यह ऐसा नियम कानून और मापदंड स्थापित करने वाले कौन हैं जो भारत की अस्मिता को समाप्त करना चाह रहे हैं जो भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना चाह रहे हैं हालांकि गलती तो उसी समय हो गई थी जब अपनी गुरुकुल व्यवस्था का त्याग करके और अंग्रेजों की आधुनिक शिक्षा के माध्यम से एक बड़ा संस्थान बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी बनाई गई है उसी समय इस सनातन परंपरा के नष्ट होने का बीज डाल दिया गया था यह तो अब उसके फलअश्रुति हैं हम लोग केवल परिणाम पर छाती कूटते हैं कारण और निवारण पर कोई ध्यान नहीं रहता है  बोय पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय कहीं यही हालत राम मंदिर निर्माण का भी ना हो इसलिए सजगता आज से ही जरूरी है और श्रेष्ठ परंपरा के वाहक तेजस्वी पुरुष चयन अगर हो पाता है तू ही विश्व गुरु भारत के संकल्पना साकार हो सकती है नहीं तो अपने अपने पा...

Newziland,Britain apply Sanskrit teaching for smartness

   जब हमारे श्रेष्ठ भारत का नाम कहीं बदनाम होता है।क्या बतायें जब शिक्षित वेश्यावृत्ति करता है बस ह्रदय दुखता है।क्योंकि कुछ ही दसक पहले हमारे यहां7लाख 32हजार गुरूकुल हुआ करते थे।समस्त संसार की मानव जाति हमसे ही सीखती थी कि शिक्षा क्या होती है।और अब हम अपनी मानसिकता से इतना विकृत हो चुके हैं कि क्या बतायें कुछ कहते नहीं बनता।पर इतना जरूर कहूंगा हमारे भारत की मूल गुरुकुल शिक्षा ही सभी समस्याओं  से   मुक्त करती है व मानव को महामानव बनाती थी। एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान     विश्व हिन्दी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता उत्पन्न करना तथा हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करना है. अजय कर्मयोगी: https://m.youtube.com/watch?v=JixMEQ2kehU   , https://m.youtube.com/watch?v=JseQIWhJ7xk  , https://m.youtube.com/watch?v=JixMEQ2kehU  ,  https://m.youtube.com/watch?v=IFmv2YFApQk                 ...