#क्रिप्टो_क्रिस्चियन_क्या_है....?अजय कर्मयोगी
भारत की जनता में ये क्रिप्टो-क्रिस्चियन छुपे हुए आस्तीन
के सांप है जो भारत की संस्कृति तथा हिंदुओं के लिये एक अनदेखा खतरा है जिनका मूल उद्देश्य भारत को तथा
इसकी हिन्दू संस्कृति को धीरे धीरे नष्ट करना है..
ग्रीक भाषा मे क्रिप्टो शब्द का अर्थ हुआ छुपा हुआ या
गुप्त क्रिप्टो-क्रिस्चियन का अर्थ हुआ गुप्त ईसाई।इसमें महत्वपूर्ण बात ये है कि क्रिप्टो-क्रिस्चियन कोई गाली या नकारात्मक शब्द नहीं हैं। क्रिप्टो-क्रिस्चियानिटी ईसाई
धर्म की एक संस्थागत प्रैक्टिस है।क्रिप्टो क्रिस्चियनिटी के
मूल सिद्धांत के अंर्तगत क्रिस्चियन जिस देश मे रहतें है
वहाँ वे दिखावे के तौर पर तो उस देश के ईश्वर की पूजा
करते है,वहाँ का धर्म मानतें हैं जो कि उनका छद्मावरण
होता है,पर वास्तव में अंदर से वे ईसाई होते हैं और
निरंतर ईसाई धर्म का प्रचार करते रहतें है..
क्रिप्टो-क्रिस्चियन का सबसे पहला उदाहरण रोमन
सामाज्य में मिलता है जब ईसाईयत ने शुरुवाती दौर में
रोम में अपने पैर रखे थे। तत्काल महान रोमन सम्राट
ट्रॉजन ने ईसाईयत को रोमन संस्कृति के लिए खतरा
समझा और जितने रोमन ईसाई बने थे उनके सामने
प्रस्ताव रखा कि या तो वे ईसाईयत छोड़ें या मृत्यु-दंड
भुगतें। रोमन ईसाईयों ने मृत्यु-दंड से बचने के लिए
ईसाई धर्म छोड़ने का नाटक किया और उसके बाद ऊपर
से वे रोमन देवी देवताओं की पूजा करते रहे,पर अंदर से ईसाईयत को मानते थे। जिस तरह मुसलमान 5-10 प्रतिशत होते हैं होतें है तब उस देश के कानून को मनातें है पर जब 20-30 प्रतिशत होतें हैं तब शरीअत की मांग शुरू होती है, दंगे होतें है। आबादी और अधिक बढ़ने पर गैर-मुसलमानों
की ethnic cleansing शुरू हो जाती है।
पर,क्रिप्टो-क्रिस्चियन,मुसलमानों जैसी हिंसा नहीं करते।
जब क्रिप्टो-क्रिस्चियन 1 प्रतिशत से कम होते है तब वह
उस देश के ईश्वर को अपना कर अपना काम करते रहतें है जैसा कि और जब अधिक संख्या में हो जातें तो उन्ही देवी-देवताओं का अपमान करने लगतें हैं। Hollywood की मशहूर फिल्म Agora(2009) हर हिन्दू को देखनी चाहिए। इसमें दिखाया है कि जब क्रिप्टो-क्रिस्चियन रोम में संख्या में अधिक हुए तब उन्होंने रोमन देवी-देवताओं का अपमान करना शुरू कर दिया। वर्तमान में भारत मे भी क्रिप्टो-क्रिस्चियन ने पकड़ बनानी शुरू की तो यहाँ भी हिन्दू देवी देवताओं,ब्राह्मणों को गाली देने का काम शुरू कर दिया। मतलब, जो काम यूरोप में 2000 साल पहले हुआ वह
भारत मे आज हो रहा है। हाल में प्रोफेसर केदार मंडल
द्वारा देवी दुर्गा को वेश्या कहा जो कि दूसरी सदी के रोम
की याद दिलाता है...
क्रिप्टो-क्रिस्चियन के बहुत से उदाहरण हैं पर सबसे रोचक उदाहरण जापान से है। मिशनिरियों का तथाकथित-संत ज़ेवियर जो भारत आया था वह 1550 में धर्मान्तरण के
लिए जापान गया और उसने कई बौद्धों को ईसाई बनाया। 1643 में जापान के राष्ट्रवादी राजा शोगुन(Shogun) ने ईसाई धर्म का प्रचार जापान की सामाजिक एकता के लिए खतरा समझा। शोगुन ने बल का प्रयोग किया और कई
चर्चो को तोड़ा गया; जीसस-मैरी की मूर्तियां जब्त करके
तोड़ दी गईं बाईबल समेत ईसाई धर्म की कई किताबें खुलेआम जलायीं गईं। जितने जापानियों ने ईसाई धर्म
अपना लिया था उनको प्रताड़ित किया गया,उनकी
बलपूर्वक बुद्ध धर्म मे घर वापसी कराई गई। जिन्होंने मना किया,उनके सर काट दिए गए। कई ईसाईयों ने बौद्ध धर्म
मे घर वापसी का नाटक किया और क्रिप्टो-क्रिस्चियन बने
रहे। जापान में इन क्रिप्टो-क्रिस्चियन को
"काकूरे-क्रिस्चियन" कहा गया...
काकूरे-क्रिस्चियन ने बौद्धों के डर से ईसाई धर्म से संबधित कोई भी किताब रखनी बन्द कर दी। जीसस और मैरी की
पूजा करने के लिए इन्होंने प्रार्थना बनायी जो सुनने में बौद्ध मंत्र लगती पर इसमें बाइबल के शब्द होते थे। ये ईसाई प्रार्थनाएँ काकूरे-क्रिस्चियनों ने एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी मौखिक रूप से हस्तांतरित करनी शुरू कर दी। 1550 से
ले कर अगले 400 सालों तक काकूरे-क्रिस्चियन बुद्ध धर्म
के छद्मावरण में रहे। 20वी शताब्दी में जब जापान औद्योगिकीकरण की तरफ बढ़ा और बौद्धों के धार्मिक कट्टरवाद में कमी आई तो इन काकूरे-क्रिस्चियन बौद्ध
धर्म के मुखौटे से बाहर निकल अपनी ईसाई
पहचान उजागर की...
भारत मे ऐसे बहुत से काकूरे-क्रिस्चियन हैं जो सेक्युलरवाद, वामपंथ और बौद्ध धर्म का मुखौटा पहन कर हमारे बीच हैं। भारत मे ईसाई आबादी आधिकारिक रूप से 2 करोड़ है
और अचंभे की बात नहीं होगी अगर भारत मे 10 करोड़
ईसाई निकलें। अकेले पंजाब में अनुमानित ईसाई आबादी
10 प्रतिशत से ऊपर है। पंजाब के कई ईसाई,सिख धर्म के छद्मावरण में है, पगड़ी पहनतें है,दाड़ी,कृपाण,कड़ा भी
पहनतें हैं पर सिख धर्म को मानते हैं पर ये सभी
गुप्त-ईसाई हैं...
बहुत से क्रिप्टो-क्रिस्चियन आरक्षण लेने के लिए हिन्दू
नाम रखे हैं। इनमें कइयों के नाम राम, कृष्ण,शिव,दुर्गा
आदि भगवानों पर होतें है जिन्हें संघ के लोग भी सपने
में गैर-हिन्दू नहीं समझ सकते जैसे कि पूर्व राष्ट्रपति
के आर नारायणन जिंदगी भर दलित बन के मलाई खाता
रहा और जब मरने पर ईसाई धर्म के अनुसार दफनाने की प्रक्रिया देखी तो समझ मे आया कि ये क्रिप्टो-क्रिस्चियन है।
देश मे ऐसे बहुत से क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं जो हिन्दू नामों में हिन्दू धर्म पर हमला करके सिर्फ वेटिकन का एजेंडा बढ़ा
रहें हैं...
हम रोजमर्रा की ज़िंदगी मे हर दिन क्रिप्टो-क्रिस्चियनों को देखते हैं पर उन्हें समझ नहीं पाते क्योंकि वे हिन्दू नामों के छद्मावरण में छुपे रहतें हैं। जैसे कि...
राम को काल्पनिक बताने वाली कांग्रेसी नेता अम्बिका
सोनी क्रिप्टो-क्रिस्चियन है।
NDTV का अधिकतर स्टाफ क्रिप्टो-क्रिस्चियन है।
हिन्दू नामों वाले नक्सली जिन्होंने स्वामी लक्ष्मणानन्द
को मारा,वे क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं...
गौरी लंकेश,जो ब्राह्मणों को केरला से बाहर उठा कर
फेंकने का चित्र अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर लगाये थी, क्रिप्टो-क्रिस्चियन थी।
JNU में भारत के टुकड़े करने के नारे लगाने वाले और
फिर उनके ऊपर भारत सरकार द्वारा कार्यवाही को ब्राह्मणवादी अत्याचार बताने वाले वामी नहीं, क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं।
फेसबुक पर ब्राह्मणों को गाली देने वाले, हनुमान को
बंदर, गणेश को हाथी बताने वाले खालिस्तानी सिख,
क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं...
तमिलनाडु में द्रविड़ियन पहचान में छुप कर उत्तर
भारतीयों पर हमला करने वाले क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं।
जिस राज्य ने सबसे अधिक हिंदी गायक दिए उस राज्य
बंगाल में हिंदी का विरोध करने वाले क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं।
अंधश्रद्धा के नाम हिन्दू त्योहारों के खिलाफ एजेंडे चलाने वाला और बकरीद पर निर्दोष जानवरों की बलि और ईस्टर
के दिन मरा हुआ आदमी जीसस जिंदा होने को अंधश्रध्दा
न बोलने वाला दाभोलकर, क्रिप्टो-क्रिस्चियन था...
देवी दुर्गा के वेश्या बोलने वाला केदार मंडल और रात दिन फेसबुक पर ब्राह्मणों के खिलाफ बोलने वाले दिलीप मंडल, वामन मेश्राम क्रिप्टो-क्रिस्चियन...
महिषासुर को अपना पूर्वज बताने वाले जितेंद्र यादव और सुनील जनार्दन यादव जैसे कई यादव सरनेम में छुपे
क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं...
बिना विश्लेषण के देखेंगे तो हिंदुओं के लिए तमाम समस्याएं दिखेंगी वामी, कांग्रेस, खालिस्तानी,नक्सली,दलित आंदोलन, JNU इत्यादि है, पर ये सब समस्याएं symptoms मात्र हैं जिसका मूल है क्रिप्टो-क्रिस्चियन।
भारत में आए दिन ऐसे बहुत से उदाहरण देखने को मिल रहे हैं जिनमें हिंदुओं पर किये जा रहे अत्याचारों पर इन छद्म लोगों द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जाता न हीं कोई विरोध किया जाता है...
मित्रों सतर्क रहें धर्म का मान रखें और उसे अक्षुण बनाये
रखने में संगठन की मदद करें...
#वंदेमातरम्....
भारत की जनता में ये क्रिप्टो-क्रिस्चियन छुपे हुए आस्तीन
के सांप है जो भारत की संस्कृति तथा हिंदुओं के लिये एक अनदेखा खतरा है जिनका मूल उद्देश्य भारत को तथा
इसकी हिन्दू संस्कृति को धीरे धीरे नष्ट करना है..
ग्रीक भाषा मे क्रिप्टो शब्द का अर्थ हुआ छुपा हुआ या
गुप्त क्रिप्टो-क्रिस्चियन का अर्थ हुआ गुप्त ईसाई।इसमें महत्वपूर्ण बात ये है कि क्रिप्टो-क्रिस्चियन कोई गाली या नकारात्मक शब्द नहीं हैं। क्रिप्टो-क्रिस्चियानिटी ईसाई
धर्म की एक संस्थागत प्रैक्टिस है।क्रिप्टो क्रिस्चियनिटी के
मूल सिद्धांत के अंर्तगत क्रिस्चियन जिस देश मे रहतें है
वहाँ वे दिखावे के तौर पर तो उस देश के ईश्वर की पूजा
करते है,वहाँ का धर्म मानतें हैं जो कि उनका छद्मावरण
होता है,पर वास्तव में अंदर से वे ईसाई होते हैं और
निरंतर ईसाई धर्म का प्रचार करते रहतें है..
क्रिप्टो-क्रिस्चियन का सबसे पहला उदाहरण रोमन
सामाज्य में मिलता है जब ईसाईयत ने शुरुवाती दौर में
रोम में अपने पैर रखे थे। तत्काल महान रोमन सम्राट
ट्रॉजन ने ईसाईयत को रोमन संस्कृति के लिए खतरा
समझा और जितने रोमन ईसाई बने थे उनके सामने
प्रस्ताव रखा कि या तो वे ईसाईयत छोड़ें या मृत्यु-दंड
भुगतें। रोमन ईसाईयों ने मृत्यु-दंड से बचने के लिए
ईसाई धर्म छोड़ने का नाटक किया और उसके बाद ऊपर
से वे रोमन देवी देवताओं की पूजा करते रहे,पर अंदर से ईसाईयत को मानते थे। जिस तरह मुसलमान 5-10 प्रतिशत होते हैं होतें है तब उस देश के कानून को मनातें है पर जब 20-30 प्रतिशत होतें हैं तब शरीअत की मांग शुरू होती है, दंगे होतें है। आबादी और अधिक बढ़ने पर गैर-मुसलमानों
की ethnic cleansing शुरू हो जाती है।
पर,क्रिप्टो-क्रिस्चियन,मुसलमानों जैसी हिंसा नहीं करते।
जब क्रिप्टो-क्रिस्चियन 1 प्रतिशत से कम होते है तब वह
उस देश के ईश्वर को अपना कर अपना काम करते रहतें है जैसा कि और जब अधिक संख्या में हो जातें तो उन्ही देवी-देवताओं का अपमान करने लगतें हैं। Hollywood की मशहूर फिल्म Agora(2009) हर हिन्दू को देखनी चाहिए। इसमें दिखाया है कि जब क्रिप्टो-क्रिस्चियन रोम में संख्या में अधिक हुए तब उन्होंने रोमन देवी-देवताओं का अपमान करना शुरू कर दिया। वर्तमान में भारत मे भी क्रिप्टो-क्रिस्चियन ने पकड़ बनानी शुरू की तो यहाँ भी हिन्दू देवी देवताओं,ब्राह्मणों को गाली देने का काम शुरू कर दिया। मतलब, जो काम यूरोप में 2000 साल पहले हुआ वह
भारत मे आज हो रहा है। हाल में प्रोफेसर केदार मंडल
द्वारा देवी दुर्गा को वेश्या कहा जो कि दूसरी सदी के रोम
की याद दिलाता है...
क्रिप्टो-क्रिस्चियन के बहुत से उदाहरण हैं पर सबसे रोचक उदाहरण जापान से है। मिशनिरियों का तथाकथित-संत ज़ेवियर जो भारत आया था वह 1550 में धर्मान्तरण के
लिए जापान गया और उसने कई बौद्धों को ईसाई बनाया। 1643 में जापान के राष्ट्रवादी राजा शोगुन(Shogun) ने ईसाई धर्म का प्रचार जापान की सामाजिक एकता के लिए खतरा समझा। शोगुन ने बल का प्रयोग किया और कई
चर्चो को तोड़ा गया; जीसस-मैरी की मूर्तियां जब्त करके
तोड़ दी गईं बाईबल समेत ईसाई धर्म की कई किताबें खुलेआम जलायीं गईं। जितने जापानियों ने ईसाई धर्म
अपना लिया था उनको प्रताड़ित किया गया,उनकी
बलपूर्वक बुद्ध धर्म मे घर वापसी कराई गई। जिन्होंने मना किया,उनके सर काट दिए गए। कई ईसाईयों ने बौद्ध धर्म
मे घर वापसी का नाटक किया और क्रिप्टो-क्रिस्चियन बने
रहे। जापान में इन क्रिप्टो-क्रिस्चियन को
"काकूरे-क्रिस्चियन" कहा गया...
काकूरे-क्रिस्चियन ने बौद्धों के डर से ईसाई धर्म से संबधित कोई भी किताब रखनी बन्द कर दी। जीसस और मैरी की
पूजा करने के लिए इन्होंने प्रार्थना बनायी जो सुनने में बौद्ध मंत्र लगती पर इसमें बाइबल के शब्द होते थे। ये ईसाई प्रार्थनाएँ काकूरे-क्रिस्चियनों ने एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी मौखिक रूप से हस्तांतरित करनी शुरू कर दी। 1550 से
ले कर अगले 400 सालों तक काकूरे-क्रिस्चियन बुद्ध धर्म
के छद्मावरण में रहे। 20वी शताब्दी में जब जापान औद्योगिकीकरण की तरफ बढ़ा और बौद्धों के धार्मिक कट्टरवाद में कमी आई तो इन काकूरे-क्रिस्चियन बौद्ध
धर्म के मुखौटे से बाहर निकल अपनी ईसाई
पहचान उजागर की...
भारत मे ऐसे बहुत से काकूरे-क्रिस्चियन हैं जो सेक्युलरवाद, वामपंथ और बौद्ध धर्म का मुखौटा पहन कर हमारे बीच हैं। भारत मे ईसाई आबादी आधिकारिक रूप से 2 करोड़ है
और अचंभे की बात नहीं होगी अगर भारत मे 10 करोड़
ईसाई निकलें। अकेले पंजाब में अनुमानित ईसाई आबादी
10 प्रतिशत से ऊपर है। पंजाब के कई ईसाई,सिख धर्म के छद्मावरण में है, पगड़ी पहनतें है,दाड़ी,कृपाण,कड़ा भी
पहनतें हैं पर सिख धर्म को मानते हैं पर ये सभी
गुप्त-ईसाई हैं...
बहुत से क्रिप्टो-क्रिस्चियन आरक्षण लेने के लिए हिन्दू
नाम रखे हैं। इनमें कइयों के नाम राम, कृष्ण,शिव,दुर्गा
आदि भगवानों पर होतें है जिन्हें संघ के लोग भी सपने
में गैर-हिन्दू नहीं समझ सकते जैसे कि पूर्व राष्ट्रपति
के आर नारायणन जिंदगी भर दलित बन के मलाई खाता
रहा और जब मरने पर ईसाई धर्म के अनुसार दफनाने की प्रक्रिया देखी तो समझ मे आया कि ये क्रिप्टो-क्रिस्चियन है।
देश मे ऐसे बहुत से क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं जो हिन्दू नामों में हिन्दू धर्म पर हमला करके सिर्फ वेटिकन का एजेंडा बढ़ा
रहें हैं...
हम रोजमर्रा की ज़िंदगी मे हर दिन क्रिप्टो-क्रिस्चियनों को देखते हैं पर उन्हें समझ नहीं पाते क्योंकि वे हिन्दू नामों के छद्मावरण में छुपे रहतें हैं। जैसे कि...
राम को काल्पनिक बताने वाली कांग्रेसी नेता अम्बिका
सोनी क्रिप्टो-क्रिस्चियन है।
NDTV का अधिकतर स्टाफ क्रिप्टो-क्रिस्चियन है।
हिन्दू नामों वाले नक्सली जिन्होंने स्वामी लक्ष्मणानन्द
को मारा,वे क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं...
गौरी लंकेश,जो ब्राह्मणों को केरला से बाहर उठा कर
फेंकने का चित्र अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर लगाये थी, क्रिप्टो-क्रिस्चियन थी।
JNU में भारत के टुकड़े करने के नारे लगाने वाले और
फिर उनके ऊपर भारत सरकार द्वारा कार्यवाही को ब्राह्मणवादी अत्याचार बताने वाले वामी नहीं, क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं।
फेसबुक पर ब्राह्मणों को गाली देने वाले, हनुमान को
बंदर, गणेश को हाथी बताने वाले खालिस्तानी सिख,
क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं...
तमिलनाडु में द्रविड़ियन पहचान में छुप कर उत्तर
भारतीयों पर हमला करने वाले क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं।
जिस राज्य ने सबसे अधिक हिंदी गायक दिए उस राज्य
बंगाल में हिंदी का विरोध करने वाले क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं।
अंधश्रद्धा के नाम हिन्दू त्योहारों के खिलाफ एजेंडे चलाने वाला और बकरीद पर निर्दोष जानवरों की बलि और ईस्टर
के दिन मरा हुआ आदमी जीसस जिंदा होने को अंधश्रध्दा
न बोलने वाला दाभोलकर, क्रिप्टो-क्रिस्चियन था...
देवी दुर्गा के वेश्या बोलने वाला केदार मंडल और रात दिन फेसबुक पर ब्राह्मणों के खिलाफ बोलने वाले दिलीप मंडल, वामन मेश्राम क्रिप्टो-क्रिस्चियन...
महिषासुर को अपना पूर्वज बताने वाले जितेंद्र यादव और सुनील जनार्दन यादव जैसे कई यादव सरनेम में छुपे
क्रिप्टो-क्रिस्चियन हैं...
बिना विश्लेषण के देखेंगे तो हिंदुओं के लिए तमाम समस्याएं दिखेंगी वामी, कांग्रेस, खालिस्तानी,नक्सली,दलित आंदोलन, JNU इत्यादि है, पर ये सब समस्याएं symptoms मात्र हैं जिसका मूल है क्रिप्टो-क्रिस्चियन।
भारत में आए दिन ऐसे बहुत से उदाहरण देखने को मिल रहे हैं जिनमें हिंदुओं पर किये जा रहे अत्याचारों पर इन छद्म लोगों द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जाता न हीं कोई विरोध किया जाता है...
मित्रों सतर्क रहें धर्म का मान रखें और उसे अक्षुण बनाये
रखने में संगठन की मदद करें...
#वंदेमातरम्....

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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद