ये उस वक्त की तस्वीर है जब शिक्षा के नाम पर मुर्गीखानो की तरह गली-गली गॉव-गॉव में डिग्री कॉलेज, कॉन्वेंट स्कूल नहीं खुले थे, बच्चे अपने बडो से उन्हीं के सानिध्य मे रह कर व्यवाहरिक शिक्षा लेते थे। गुरूकुलो मे गुरूजन राष्ट्र एवं चरित्र निर्माण का पाठ पढाते थे। कोई बेरोजगार नहीं था कोई बोर नहीं होता था। पेड़ को काटना या पर्यावरण को हानि पहुचाना पाप माना जाता था। कौनसा बोद्धिक विकास करती है ये आज शिक्षा जो हम अपने बच्चो नौजवानो को दे रहे हैं। आज की शिक्षा हमे मानसिक रूप से गुलाम व बडे से बडा नौकर बनने की होड़ में शामिल करती है जैसे कि Graduate : सभी प्रकार के सरकारी नौकर। M.B.A. : बहूराष्ट्रीय कंपनीयो (M.N.C) के नौकर। M.B.B.S. : विदेशी उपचार एवं जहर को फैलाने वाले नौकर। L.L.B. : झूठ को सच एवं सच को झूठ साबित करने का प्रशिक्षण। B.Sc, M.Sc (Agriculture) : यूरीया, पेस्टीसाइड फंगिसाइड आदि जहर के समर्थक। B.Tech : बहुराष्ट्रीय कंपनियो के लिए सस्ते मजदूर। B.Ed : मकाले की शिक्षा व्यवस्था को आगे बढाने वाले आदि आदि.. आ...
Ajay karmyogi अजय कर्मयोगी शिक्षा स्वास्थ्य संस्कार और गौ संस्कृति साबरमती अहमदाबाद परंपरा ज्ञान चरित्र स्वदेशी सुखी वैभवशाली व पूर्ण समाधान हेतु gurukul व्यवस्था से सर्वहितकारी व्यवस्था का निर्माण