आज करोना से डरी हुई प्रजा की दुर्दशा और एक अदृश्य जीव के साथ संघर्ष की स्थिति में एक साधारण अदृश्य जीव के साथ कैसे सहयोग से, विना संघर्ष जीवन जीते है । यदि लोगों से पूछें कि इस देह में कितनी जीव होते हैं तो शायद हर व्यक्ति एक जीव को ही मानता है पर इस देह के साथ असंख्य जीव विद्यमान रहते हैं इन जीवो के साथ जीवन जीने की कला या ज्ञान अपनी सनातन परंपरा का हिस्सा था जो इस आधुनिक शिक्षा के माध्यम से नष्ट कर दिया गया है उसी सात्विक जीवन को परिभाषित करता यह लेख जो सात्विक दही बनाने का उपाय बताता है इसका समाधान परंपरागत ज्ञान से संभव है यह परंपरा तभी बचेगी जब आप इस राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान की समझ व समझदारी होगी संयोजक बनने हेतू 7984113987 whatsup 9336919081
जो आप पत्थर के बर्तन देख रहे हैं यह पत्थर पूरे विश्व में सिर्फ जैसलमेर के पास हाबुर गांव में पाया जाता है इसलिए इसे हाबुर का पत्थर कहते हैंइस पत्थर की सबसे खासियत यह है कि इस पत्थर में यदि आप गर्म दूध डाल देंगे तब यह कुछ समय बाद दही जम जाएगा
दरअसल राजस्थान के प्राचीन काल में जैन लोग दूध में जामन डालकर दही नहीं बनाते थे क्योंकि जैन धर्म में यह माना जाता है कि जामन में जीव होता है इसलिए राजस्थान के जैन लोग इसी पत्थर में दूध रख देते थे और वह दूध रात भर में दही जम जाता था
वैज्ञानिक जांच में यह पाया गया कि इस पत्थर में ऐसे सारे तत्व होते हैं यानी लेक्टो एसिड होते हैं जो दूध को दही में बदल देते हैं
सात्विक दही :– दही एक बहुत ही पौष्टिक और मधुर दुग्ध पदार्थ है.इसे जमने में चार से छः घंटे लगते हैं. इसे तत्काल ही प्रयोग कर लेना चाहिये, अन्यथा इसमें एक से दो घंटे के अन्दर ही त्रस जीव उत्पन्न हो जाते हैं. दही में त्रस जीव का मतलब होता है कि इसमें बहुत सूक्ष्म और बहुत ही जल्दी पैदा होने वाले इल्ली सरीखे सफेद जीव उत्पन्न हो जाते हैं.ये सामान्य आँखों से दिखाई भी नहीं देते हैं.जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ती जाती है,वैसे- वैसे दही में खटास भी बढ़ने लगती है. इन्हें देखने के लिए आपको थोड़े से दही को माइक्रोस्कोप के नीचे रखना होगा,तभी आप इन रेंगने वाले जीवों को देख सकेंगे.अतः जब भी आप दही का सेवन करते समय खटास को महसूस करें,तो अब आप समझ ही जायेंगे कि इसका कारण क्या है? दही को कभी भी पुराने दही के जावन के द्वारा नहीं जमाना चाहिये,क्योकि ऐसा दही पहले से ही अभक्ष्य रहता है.इसका मतलब यह है कि उसमे जमते समय भी त्रस जीव रहते ही हैं. दही बनाने के पहले दूध को पांच से 6 घंटे बहुत ही मध्यम ताप पर गर्म किया जाता है यह ताप बना रहे इसके लिए मिट्टी का बर्तन और कंडे का उपयोग सबसे श्रेष्ठ माना गया है जब यह पूरा दूध औट कर लाल हो जाता है अब इसको इस पद्धति से दूध को निम्न वस्तुओं में से किसी एक के द्वारा जमाया जा सकता है - 1. चाँदी का सिक्का 2. नारियल की नरेटी 3. खड़ी लाल मिर्च 4. संगमरमर का टुकड़ा इस तरह जमा दही बहुत ही स्वादिष्ट,रुचिकर और पौष्टिक होता है. चाँदी के सिक्के, मार्बल के छोटे टुकड़े या कोकोनट के बाहरी हार्ड सरफेस का एक छोटा टुकड़ा लेकर थोड़े कुनकुने दूध में दो-तीन नीम्बू की बूँद डालकर रख दें. कोकोनट या नारियल के बाहरी कठोर खोल के एक छोटे टुकड़े को नरेटी कहते हैं.जब वह जम जाये उसमे से इन सबको निकालकर धोकर सुखा कर रख लें और जब चाहे,दही में जामन की जगह डाल कर दही जमा सकते हैं. इसे भी हर हफ्ते बदलते रहे. खड़ी या पूरी लाल मिर्च किसी भी किराने वाले के यहाँ मिल जायेगी.जामन की जगह खड़ी मिर्च को साफ़ करके डाल दें व तीन-चार घंटे बाद दही जमने पर उसे निकाल दें.इस प्रकार जमा दही ही सात्विक दही होता है और इसे दो-तीन घंटे के अंदर ही खा लेना चाहिए. !!


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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद