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डिजिटल जेल सांस्कृतिक जीवन को छोड़ कर अप्राकृतिक–असामाजिक–असांस्कृतिक “वर्चुअल“/”ऑनलाइन” जीवन को अपना ले!!

 




 तेज़ी से बढ़ती इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक फ़ील्ड (EMF) का सीधा सम्बन्ध सांस की बीमारी से है – उस “डिजिटल जेल” से भी जिसमें आपको हमेशा के लिए क़ैद किया जा रहा है!

इस महामारी की आड़ में अनेक षड्यंत्रों को स्थापित किया जा रहा है

आर्थिक जीवन को बर्बाद करने के अलावा लोगों को नक़ली “ऑनलाइन” ज़िन्दगी का आदी बनाना भी है।

“न्यू वर्ल्ड ऑर्डर” का क्रिमिनल गिरोह चाहता है कि जनता अपने रंगा–रंग प्राकृतिक–सामाजिक–सांस्कृतिक जीवन को छोड़ कर अप्राकृतिक–असामाजिक–असांस्कृतिक “वर्चुअल“/”ऑनलाइन” जीवन को अपना ले!!

“लॉकडाउन“, क्वारंटाइन, आइसोलेशन (isolation) के ज़रिए — सामाजिक–आर्थिक जीवन बन्द करके, स्कूल–कॉलेज बन्द करके — जनता को फ़र्ज़ी “वर्चुअल“/”ऑनलाइन” जीवन जीने पर मजबूर किया जा रहा है। 

"हर हाल में टेस्टिंग दोगुना करने का टारगेट दिया गया है."

"कलेक्टर ने शनिवार को सभी अफ़सरों की बैठक लेकर कहा है कि कोरोना मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है."

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हाँ तो भईया समझे?

फ़र्ज़ी बीमारी की बुनियाद है फ़र्ज़ी टेस्टिंग!

फ़र्ज़ी टेस्टिंग बढ़ा दो -- फ़र्ज़ी बीमारी के "मरीज़" बढ़ जाएंगे!

फ़र्ज़ी टेस्टिंग घटा दो -- फ़र्ज़ी बीमारी के "मरीज़" घट जाएंगे!

जब चाहे बढ़ाओ, जब चाहे घटाओ!

जब चाहे "लहर" लाओ!

यही तरीक़ा था "पहली लहर" और "दूसरी लहर" का! 

यही तरीका है बहुप्रचारित "तीसरी लहर" का और यही होगा प्रायोजित चौथी, पांचवी, छटी... "लहरों" का. 

   "लहरों" का उत्पादन तब तक जारी रहेगा जब तक फ़ाशिस्ट "न्यू वर्ल्ड ऑर्डर" पूर्णतः स्थापित नहीं हो जाता और भारत का समूल विनाश नहीं हो जाता!

अब सोच लो क्या करना है.

अपना और अपनी नस्लों का सर्वनाश करवाओगे?

 महाविनाश के लिए इन विश्व के कुछ गिने-चुने एजेंटों क माध्यम से संसार भर के अधिकांश लोगों को मौत के घाट उतरवाने से बचाने में सहयोगी बनेंगे ? अब एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान हम सब को ये समझना पड़ेगा कि बढ़ते हुए इलेक्ट्रो–मैग्नेटिक रेडिएशन का सीधा संबंध है जनता के बीमार पड़ने से – विशेषतः सांस की बीमारी से।

इस तथाकथित “दूसरी लहर” में लोगों को सांस लेने में जो तकलीफ़ हो रही है (जिसे “कोरोना वायरस” के खाते में डाला जा रहा है) उसका सीधा सम्बन्ध तेज़ी से बढ़ती और फैलती इलेक्ट्रो–मैग्नेटिक फील्ड (EMF) से है।
भारत में इस समय 5G telecom technology का ट्रायल चल रहा है जो EMF को खतरनाक स्तर तक बढ़ा चुका है — और अभी और बढ़ाएगा।
5G के ट्रायल से भारत में जगह– जगह पक्षियों के मरने की ख़बरें आ रही हैं और लोग अपने आस पास इलेक्ट्रिक चार्ज को बढ़ता हुआ भी महसूस कर रहे हैं।
झूठी महामारी की आड़ में लगाए “लॉकडाउन” का उद्देश्य पूरे सामाजिक–आर्थिक जीवन को बर्बाद करने के अलावा लोगों को नक़ली “ऑनलाइन” ज़िन्दगी का आदी बनाना भी है।
“न्यू वर्ल्ड ऑर्डर” का क्रिमिनल गिरोह चाहता है कि जनता अपने रंगा–रंग प्राकृतिक–सामाजिक–सांस्कृतिक जीवन को छोड़ कर अप्राकृतिक–असामाजिक–असांस्कृतिक “वर्चुअल“/”ऑनलाइन” जीवन को अपना ले!!
“लॉकडाउन“, क्वारंटाइन, आइसोलेशन (isolation) के ज़रिए — सामाजिक–आर्थिक जीवन बन्द करके, स्कूल–कॉलेज बन्द करके — जनता को फ़र्ज़ी “वर्चुअल“/”ऑनलाइन” जीवन जीने पर मजबूर किया जा रहा है।  




लोग ज़्यादा से ज़्यादा समय अपने “स्मार्ट फ़ोन” और “लैपटॉप” के साथ गुज़ार रहे हैं — मतलब अधिक से अधिक समय बढ़ते हुए EMF में गुज़ार रहे हैं और इस रेडिएशन की वजह से बीमार हो रहे हैं।
5G वायरलेस टेकनॉलजी न केवल भारतीयों को बीमार कर रही है और उनके रंगा–रंग प्राकृतिक–सामाजिक–सांस्कृतिक जीवन को ख़त्म कर रही है
बल्कि उनके लिए एक स्थायी “डिजिटल जेल” भी बना रही है जिसमें वो हमेशा के लिए क़ैद कर दिए जाएंगे।
ये स्थायी “डिजिटल जेल” ही वो “सर्वेलेन्स स्टेट” है जो “न्यू वर्ल्ड आर्डर” का क्रिमिनल गिरोह वजूद में लाना चाहता है।
इस स्थायी “डिजिटल जेल” को “स्मार्ट सिटी” के नाम से भी जाना जाता है।
आपके हाथ में जो “स्मार्ट फ़ोन” है ये आपको इस “डिजिटल जेल” में घुसा चुका है — और इस समय इस “डिजिटल जेल” की दीवारों को ऊंचा करने का काम चल रहा है।
बहुत जल्द इस “डिजिटल जेल” से बच निकलने के सभी रास्ते सील कर दिए जाएंगे!!

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