निज स्वार्थ और हित छोड़ #समग्रता से #सोचिये।
अंग्रेज़ो ने अपना राज स्थापित करने के लिए #सनातन की #कर्तव्य आधारित व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए 1857 के विद्रोह के बाद पहला कानून लाया, 1860 से आई पी सी का बनना शुरू हुआ।
इसके पहले हम सनातनी कानून के हिसाब से चलते थे, जिनमे #अधिकारों से अधिक #कर्तव्यों पर जोर था।
न्यायाधीश, सामाजिक नियम बनाने वाले, शिक्षक, वैद्य जैसे लोग जो समाज के जीवन को तुरंत प्रभावित करने में सक्षम थे उनके लिए सनातन में निशुल्क कार्य करने की व्यवस्था थी, समाज इन्हें भिक्षा, दक्षिणा, मान, टीका के रूप में पारितोषिक देता था, ये लोग समाज के हित में काम करने मजबूर थे, क्योंकि समाज मे बदनामी से बड़ी कोई सज़ा थी ही नहीं, अंग्रेज़ो ने इस व्यवस्था को तोड़ने, #सनातनी #सामाजिक #लीडरशिप को तोड़ने के लिए वजीफा (मानदेय/तनख्वाह) तंत्र स्थापित किया, सेना और पुलिस को दंड के अधिकार दिए।
जबकि सनातन के नियमो में प्रत्यक्ष दंड के प्रावधान बहुत कम थे, हमारे यहां अप्रत्यक्ष दंड के प्रावधान थे।
हम नरक की कढ़ाई से डरने वाली कौम थे, जो धर्म, संस्कारों और अपने रिवाजो पर जान देते थे, हमारे लिए #अधिकारों से ज्यादा #कर्तव्यों की कीमत थी।
#राम की #मर्यादा, #गीता का ज्ञान याद करिये।
फिर समय आया काले अंग्रेजो का, इन्होंने हमारी पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक व्यवस्था भी बदल दी।
जिस धर्म मे तलाक़ नहीं था, उसमे तलाक़ जोड़ा, जिसमे कुटुम्ब की महत्ता थी उसे छिन्न भिन्न किया।
#मुफ्त_शिक्षा, #मुफ्त_इलाज #त्वरित_न्याय
#कर्तव्य पालन करने वाले समाज को निज #अधिकार के लिए लड़ने और न्यायालय में चक्कर काटने वाला बनाया, #कर्तव्यों को दोयम दर्जे का कर दिया।
बस यहीं से शुरु तनख्वाह, धनोपार्जन और भ्रष्टाचार का दौर।
देश का कानून आपको #अधिकार देता है पर कर्तव्य पालन के लिए कोई प्रावधान नहीं करता।
किसी की विपन्नता को देख कोई उसे आश्रय देने की गलती कर दे, तो वह उससे मकान खाली नही करवा सकता, और अगर खाली करवाने की कोशिश भी करे तो #कोर्ट है, 20 साल केस लड़ने के बाद वह कभी किसी की मदद न करेगा।
सरकारी न्याय व्यवस्था ने लोगो को निष्ठुर बनाया है।
जनता की मदद की जवाबदारी सरकार की है, तो फिर भिखारी सड़को पर क्यों?
काले अंग्रेज़ो ने खुद को महत्वपूर्ण बनाये रखने और भ्रष्टाचार से लाभ के लिए, सनातनी व्यवस्था को नष्ट किया।
अपने शहर में घूमिये, आज़ादी के पहले के बने सेठ फलाने की धर्मशाला, धिकाने का तालाब और अस्पताल मिलेंगे पर,
पिछले 70 सालो में किस बड़े व्यापारी ने धर्मशाला, अस्पताल, तालाब या कुएं बनवाये खोजिये?
#CSR के पैसे का उपयोग कहाँ हो रहा है क्या आपको मालूम है?
#सोचें
पिछले 70 सालों में हम कितने मानवीय बचे है?
कितनी बुरी और गलत बातो को हमने इसलिए शिरोधार्य कर लिया क्योंकि हम सरकारी पचड़े में नहीं पड़ना चाहते?
कितने #अमानवीय #पापी और #भ्रष्ट का आप सम्मान करते है?
और कितने सहृदय लोगो को आप मूर्ख समझते है, यह सोचिये।
सोचिये, #आदर्शवादी #मानवतावादी की आपके मन मे क्या जगह है?
अगर आप इन्हें मूर्ख मानते है, तो तय मानिये, आप एक असामाजिक समाज के गठन में शामिल हैं और आप सनातन से विमुख हो रहे हैं और नर्क में गर्म तेल की कढ़ाई की तरफ बढ़ रहे है
अब एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान 7984113987 पर कॉल या 9336919081 whatsapp करें

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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद