आज पूरे देश में सुशांत सिंह राजपूत के हत्या या आत्महत्या पे मीडिया में बवाल मचा हुआ है इसका कारण क्या है...... दूसरी तरफ इन्हीं तथाकथित फिल्मी हीरो के माध्यम से एक नया कल्चर लिव इन रिलेशनशिप हमारे समाज में डाला जा रहा है जिसमें हमारे पढ़े-लिखे नौजवान इसमें फंस कर अपनी जिंदगी तबाह कर रहे हैं धर्म अर्थ काम मोक्ष की चतुर पुरुषार्थ की अवधारणा पर आधारित हमारी सनातन संस्कृति में विवाह को भी एक संस्कार का दर्जा दिया गया है हर जीवो का एक प्राकृतिक जीवन कॉल होता है उस काल में उसे अपनी पीढ़ी के आगे चक्र चलता रहे जिससे अपनी संतानोत्पत्ति करना एक जीवन का महत्वपूर्ण आयाम होता है
पर प्रकृति के इस चक्र को इस आधुनिक शिक्षा मे तहस-नहस कर दियाहै
पिछले 20-25 सालों में देर से विवाह करने/होने का कु-चलन बढ़ा है।
इससे समाज छिन्न होकर विकृत रूप में विवाहेत्तर संबंध और live-in के रूप में सामने आ रहा है।
जैसे कोरोना पहले विदेश में आया, फिर भारत के बड़े शहरों में, फिर छोटे शहर होते हुए गांव गांव तक पहुँच गया है, वैसे ही 'late
marriage' और 'live-in' का चलन और इसका दुष्परिणाम गांव गांव पहुँच गया है।
इनसे पूछो तो कारण ये बताते है कि अभी कैरियर बनाना है, अभी तो जीना सीखा है, अभी और अच्छी नौकरी करनी है, अभी ये या वो करना है..
चूंकि हमारी शिक्षा पद्धति सिर्फ नंबर लाने तक सीमित रह गया है, ज्यादातर
बच्चे को दुनियादारी, समाज, कल्चर आदि का ज्ञान न हम दे पाए न वो ले पाए और
एक बार बच्चे बाहर निकले नही कि...
हालांकि ऐसा सब नही करते, फिर भी प्रतिशत तो बढ़ ही रह है।
कैरियर, नौकरी लोग पहले भी बनाते थे.. विवाह कभी बाधा नहीं बनी, फिर आज
क्यों और कैसे समयोचित विवाह को कैरियर, नौकरी में बाधा कह समाज का विकृत
रूप दिखाया जा रहा है?
अपने आसपास देखिये आपको अविवाहित युवक और युवती बहुमत में मिलेंगे, जो 'over age' है और अभी और इंतज़ार के मूड में है।
मेरा मानना है कि लड़को की शादी 23-26 और लड़कियों की शादी 20-23 के बीच हो जानी चाहिए।
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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद