से करीब 2 साल पूर्व शिक्षा के लिए किया गया यह प्रयास रंग लाया है उस समय ह्यूमन रिसोर्स मंत्रालय पर पार्लियामेंट में लोकसभा टीवी पर मैंने सवाल उठाये थे और यह एक गुलामी का प्रतीक बताया गया था जिसका वीडियो आपको भेज रहा हूं आज अब इसे शिक्षा मंत्रालय नाम रखा गया है
https://m.youtube.com/watch?v=ovLnTapu44w
कृपया ब्लॉग में अपने सुझाव जरूर प्रस्तुत करें क्या इस शिक्षा नीति से भारत की ज्ञान परंपरा गुरुकुल का मार्ग प्रशस्त हो सकता है राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान 9336919081 व्हाट्सएप कॉल 7984113987
भारत की ज्ञान परंपरा बड़ी प्राचीन और श्रेष्ठ रही है इसने पूरे दुनिया को ज्ञान का प्रकाश फैलाया पर दुर्भाग्य इस बात की है कि हमने ज्ञान को कभी पेटेंट नहीं कराया और यूरोप और दुनिया के लुटेरे इन बौद्धिक संपदा ओं को भी लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और हमारे सारे ज्ञान को उन्होंने अपना मोहर लगाकर और झूठे नाम दे दे कर के अपना तिजोरी भर रहे हैं इसका पर्दाफाश करने के लिए एक गणितज्ञ चंद्रकांत राजू ने ₹200000 रुपए इनाम की घोषणा कर दी कि जिस नाम से पाइथागोरस थ्योरम पढ़ाया जा रहा है वह कभी था ही नहीं उसके अस्तित्व को ही इन्होंने चुनौती दे दी है और इनाम की घोषणा भी की है हमारे यहां ज्ञान कभी बेचा नहीं जाता था इस परंपरा के हम पुजारी रहे हैं भारत के कई गणितज्ञ आज भी अपने ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं उसी क्रम में 14 मार्च को पाई दिवस मनाया जाता है , पाई या π एक गणितीय नियतांक है ,जिसका संख्यात्मक मान किसी वृत्त की परिधि और उसके व्यास के अनुपात के बराबर होता है। इसका मान लगभग 3.14159 के बराबर होता है। यह एक अपरिमेय राशि है। पाई सबसे महत्वपूर्ण गणितीय एवं भौतिक नियतांकों में से एक है। गणित, विज्ञान एवं इंजीनियरी के बहुत से सूत्रों में π आता है।https://m.youtube.com/watch?v=ovLnTapu44w
कृपया ब्लॉग में अपने सुझाव जरूर प्रस्तुत करें क्या इस शिक्षा नीति से भारत की ज्ञान परंपरा गुरुकुल का मार्ग प्रशस्त हो सकता है राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान 9336919081 व्हाट्सएप कॉल 7984113987
गीजा की महान पिरामिड का परिमाप 1760 क्यूबिट और ऊंचाई 280 क्यूबिट है, जिसका अनुपात 1760/280 = 62847 (लगभग) आता है जो पाई के मान के लगभग 2 गुणा है। इस अनुपात के आधार पर, माना जाता है कि पिरामिड बनाने वाले π का ज्ञान रखते थे और वृत के गुणधर्मों को निगमित करने वाले पिरामिड जान - बूझकर बनाए।
बहरखैर ,
भारतीय संस्कृति में भी इस नियतांक की बहुत पहले से जानकारी थी , भारतीय वैदिक साहित्य में उल्लेख मिलता है कि π को √10 ≈ 3.1622 लिखते थे। विश्वप्रसिद्ध शुल्बसूत्र में भी इसका विस्तृत उल्लेख है ।आर्यभट्ट के गणितीय परिकल्पना में एक सूत्र मिलता है ,जो दशमलव के पाँच अंकों तक बिलकुल सटीक गणना करता है -
चतुराधिकं शतमष्टगुणं द्वाषष्टिस्तथा सहस्त्राणाम्।
अयुतद्वयस्य विष्कम्भस्य आसन्नौ वृत्तपरिणाहः॥
अर्थात - 100 में चार जोड़ें, आठ से गुणा करें और फिर 62000 जोड़ें। इस नियम से 20000 परिधि के एक वृत्त का व्यास ज्ञात किया जा सकता है।
( (100+4)×8+62000/20000=3.1416 )
इसके अनुसार व्यास और परिधि का अनुपात ((4+100) × 8+ 62000) /20000 = 3.1416 है, जो दशमलव के पाँच अंकों तक बिलकुल सटीक है। इसके अनुसार Circumference और Diameter का अनुपात ( (100+4)×8+62000/20000=3.1416 ) है, जो दशमलव के पाँच अंकों तक बिलकुल सटीक है।
शंकर वर्मन ने सद्रत्नमाला में पाई का मान निम्नलिखित श्लोक में दिया है, जो कटपयादि प्रणाली का उपयोग करके लिखा गया है-
भद्राम्बुद्धिसिद्धजन्मगणितश्रद्धा स्म यद् भूपगी:
= 3.1415926535897932384626433832795 (इकतीस दशमलव स्थानों तक।)
संस्कृत भाषा एक वैज्ञानिक भाषा है इसके हर वैदिक श्लोक का एक महत्व है इन श्लोकों को डिकोड करने के लिए एक सूत्र का इस्तेमाल किया जाता है -
कादि नव, तादि नव, पादि पञ्चक, यद्यशष्टक, क्षः शून्यंम
अर्थात कादि नव आरम्भ होता है क से और 9 अक्षरों के अनुक्रम का प्रतिनिधित्व करता है - क – 1, ख – 2, ग- 3, घ -4, ड.-5, च-6, छ-7, ज-8, झ-9, तादि नव आरम्भ होता है त से और 9 अक्षरों के अनुक्रम का प्रतिनिधित्व करता है - ट- 1, ठ- 2, ड- 3, ढ- 4, ण- 5, त- 6, थ- 7, द- 8, ध- 9, पादि पञ्चक 1 से 5 अंको का प्रतिनिधित्व करता है। प से आरम्भ होकर - प- 1, फ- 2, ब- 3, भ- 4, म- 5, यद्यशष्टक, य से आरम्भ होता है और 8 अक्षरों के अनुक्रम का प्रतिनिधित्व करता है - य- 1, र- 2, ल- 3, व- 4, श- 5, ष- 6, स- 8, ह- 9 ,क्षः शून्यंम अर्थात - क्ष – 0
अब इसी क्रम में ऋग्वेद के 10म मंडल के इस श्लोक को डिकोड कीजिये -
गोपीभाग्य मधुव्रातः श्रुंगशोदधि संधिगः।
खलजीवितखाताव गलहाला रसंधरः ।।
ग-3, प-1, भ- 4, य- 1, म- 5, ध- 9, र-2, थ-6, इस प्रकार ऊपर बताए कोड पद्धति का उपयोग कर पाई का मान क्या होता है -
3.1415926535897932384626433832792…. 32 दशमलव तक। इस श्लोक के तीन अर्थ है। पहला भगवान शिव की स्तुति, दूसरा भगवान कृष्ण की स्तुति और तीसरा पाई का मान 32 दशमलव तक।
#विशेष -
*जय जयजाप्यजयेजयशब्दपरस्तुतितत्परविश्व नुते।*
*झणझणझिंझिमझिंकृतनूपुरझिंजिंतमोहित भूतपते।।*
*नटितनटार्धनटीनटनायकनाटननाटित नाटयरते।*
*जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।*
*महितमहाहवमल्लमतल्लिकवल्लितभल्लिरते*
*विरचितवल्लिकपाल्लिकपल्लिकझिल्लक भिल्लिकवर्गवृते।।*
*श्रुतकृतफुल्लसमुल्लसितारूणतल्लजवल्ल वसल्लिते।*
*जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।*
हिंदी ;संस्कृत पोएटिक नहीं है, ऐसा कुछ बोल रहे थे न, ये संस्कृत है यहाँ शब्द ही नहीं अक्षर भी पोएटिक होते है ।
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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद