वो शिक्षा डिग्री ज्ञान बल प्रतिभा अनुभव पैसा पद प्रतिष्ठा किस काम का जो देश के कुछ काम न आ सके , सम्मानीय प्रतिभा वो है जो देश के उत्थान में देश को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करे ।
आई आई टी सच्चाई भारत केआई आई टी उच्च शिक्षण संस्थानों पर विश्व के अमीर देश एवम् उनकी बहुराष्ट्रीय कम्पनिया भारत की बौद्धिक सम्पदाओं पर डाका खुलेआम डाल रही है ।
अमेरिका की सकल आय का 35% और यूरोपीय यूनियन की सकल आय का 39 % हिस्सा बौद्धिक सम्पदा अधिकारो पर ही आधारित है इसमें सबसे बड़ा योगदान उन भारतीय वैज्ञानिक इंजीनियरों का है जो पढ़ते भारत में है लेकिन अविष्कारों , नावचारो (इन्वेंशन इनोवेशन ) अमेरिका यूरोप जैसे विकसित अमीर देशो के लिए करते है भारत का गरीब किसान मजदूर रात दिन मेहनत करता है जब वो एक माचिस की डिबिया या नमक भी खरीदता है तो उस पर टैक्स देता है इसी टैक्स में से कुछ पैसा आई आई टी जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों को सब्सिडी के नाम पर जाता है परंतु यहाँ से निकलने वाला विधार्थी देश को क्या देता है आइये उसकी समीक्षा करते है ।
आई आई टी कुल सीटे प्रतिवर्ष - 9885 छात्र
चार वर्ष में 4 x 9885 = 39540 छात्र
प्रतिवर्ष छात्र पर पढ़ाई का कुल खर्च - 3.4 लाख रूपये
छात्र द्वारा प्रतिवर्ष देय राशि - 90000 रूपये
प्रतिवर्ष भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि - 2.5 लाख रूपये
(भारतीय कर दाता की मेहनत की कमाई )
प्रतिवर्ष सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि 39540 छात्र x 2.5 लाख रूपये = 988 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष
वित्तीय वर्ष 2015 -2016 में भारत सरकार ने आई आई टी को बजट स्वीकृत किया है -1703.85 करोड़ रूपये
सभी विधार्थी भारत के राष्ट्रिय बैंको से 20 लाख से ज्यादा लोन लेते है वो भी कोलैटरल फ्री लोन ।
Economic Times shows that out of the remittances of $70 billion to India, the remittancess from IITians who go to developed countries is much lower than the remittancess from the Middle East to the state of Kerla .
Most of the Malayalis in the Gulf are blue- coller workers, Not IIT enginneers .
इतना सब करने के बाद कंप्यूटर साइंस ,इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स , मेकेनिकल , मेटलर्जिकल केमिकल प्रोडक्शन इत्यादि क्षेत्र के 98885 विश्वस्तरीय इंजिनियर निकलते है लेकिन भारत को क्या मिला ..?
आई आई टी का कड़वा सत्य
इतने अनुदान के बावजूद 20 वर्षो में (1986-2006) एक भी आई आई टी के छात्र ने भारतीय सेना को सेवा देना उचित नहीं समझ ।
अंतरिक्ष में स्वावलम्बन स्वदेशी तकनिकी के बल पर तिरंगा लहराने वाले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र इसरो में आई आई टी व एन आई टी के 2% छात्र भी कार्यरत नहीं है ।
आई टी के 9885 छात्रो में से केवल 20 छात्र 2013 में भारतीय रक्षा अनुसंधान डी आर डी ओ में कार्यरत हुए ।
भारतीय अनुसंधान डीआरडीओ में 2700 वैज्ञानिको की कमी है ।
दूसरी तरफ आई आई टी के छात्र फिलिप कार्ट ऑनलाइन मेगा स्टोर चला रहे है ।
आई आई टी मद्रास से 7 छात्रो को फ्लिपकार्ट ने नौकरी पर रखा है आन लाइन मार्केटिंग हेतू आइये देखते है उनकी योग्यता क्या है ?
फ्लिपकार्ट
1छात्र कम्प्यूटर साइंस 2 छात्र केमिकल इंजीनियरिंग 1 छात्र मेकेनिकल इंजिनयरिंग 1 छात्र मेटलर्जि , 1 छात्र बायोटेक्नोलॉजी
1 छात्र इंजिनयरिंग फिजिक्स ।
Tavant आई टी सोलुशन सर्विस कम्पनी
आई आई टी मद्रास के 10 छात्रो को नौकरी पर रखा जिसमे एक भी कम्प्यूटर साइंस नहीं था ।
3 छात्र एरोस्पेस , 2 छात्र मेटलर्जी ,1 छात्र इलेक्ट्रिकल ,2 छात्र केमिकल , 1 छात्र मेकेनिकल ,1 छात्र फिजिक्स
आंकड़े आई आई टी मद्रास के है
118 छात्र 2014 में फ्लिपकार्ड कम्पनी में कार्यरत हुए 36 छात्र तो केवल आई आई टी खडगपुर से है जो फ्लिप कार्ड में कार्यरत है ।
इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स , मेकेनिकल , मेटलर्जिकल केमिकल इत्यादि क्षेत्र के 98885 विश्वस्तरीय इंजिनियर आई आई टी से निकलते है लेकिन दुर्भाग्य देखिये उनमे से कुछ विदेशी कम्पनियो की क्रीम पाउडर लिपस्टिक बेच रहे है और बाकी डॉलर कमाने अमीर विकसित देशो की ओर पलायन कर जाते है और भारत में अपने माता पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ जाते है ।
अमेरिका में वैज्ञानिक और इंजिनियर भेजने वाले देशो में भारत शीर्ष पर है ।
नेशनल साइंस फाउंडेशन के नेशनल सेंटर फॉर साइंस एन्ड इंजीनियरिंग इस्टैटिक्स की रिपोर्ट के अनुशार 2003 से 2013 आते आते 85 फीसदी का इजाफा हुवा है । एशिया से अमरिका 29.6 लाख वैज्ञानिक इंजिनियर गए है ।इसमें से 9.5 लोग अकेले भारतीय है ।
भारत का प्रतिभा पलायन (ब्रेन ड्रेन )
आज हमारे देश के अन्दर जितने बेहतरीन तकनीकी संस्थान हैं, जैसे आई आई टी आई आई एम, एम्स आदि, उनमे से जितने अच्छे प्रतिभा हैं वो सब अमेरिका भाग जाते हैं।
हर वो अच्छी प्रतिभा जो कुछ कर सकता है इस देश में रहकर अपने राष्ट्र के लिए, अपने समाज के लिए, वो भारत से अमीर विकसित देशो में भाग जाता है उसके पीछे का कारण है इन संस्थानों में पढने वाले विद्यार्थियों का दिमाग ऐसा सेट कर दिया जाता है कि वो केवल अमेरिका/युरोप की तरफ देखता है ।उनके लिए पहले से एक माहौल बना दिया जाता है, और माहौल क्या बनाया जाता है कि जो प्रोफ़ेसर उनको पढ़ाते हैं वहां वो दिन रात एक ही बात उनके दिमाग में डालते रहते हैं कि "बोलो अमेरिका में कहाँ जाना है" तो वो विद्यार्थी जब पढ़ के तैयार होता है तो उसका एक ही मिशन होता है कि "चलो अमेरिका" | IITs मे जो सिलेबस पढाया जाता है वो विकसित अमीर देशो के हिसाब से तैयार होता है बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के हिसाब से तैयार किया जाता है । कभी ये देश के अंदर इस्तेमाल की कोशिश करें तो 10% से 20% ही इस देश के काम का होगा बाकी 80% अमेरिका/युरोप के हिसाब से होगा ।
इसी को तकनीकी भाषा में आप ब्रेन ड्रेन प्रतिभा पलायन कहते है, मैं उसे भारत की तकनीकी का सत्यानाश मानता हूँ, क्योंकि ये सबसे अच्छा दिमाग हमारे देश में नहीं टिकेगा तब तो हमारी तकनीकी इसी तरह हमेशा पीछे रहती जाएगी ।
आप सीधे समझिये न कि जो विद्यार्थी पढ़कर तैयार हुआ, वही विद्यार्थी अगर भारत में रुके तो क्या-क्या नहीं करेगा अपने दिमाग का इस्तेमाल कर के, लेकिन वो दिमाग अगर यहाँ नहीं रुकेगा, अमेरिका चला जायेगा तो वो जो कुछ करेगा, अमेरिका के लिए करेगा, अमरीकी सरकार के लिए करेगा और हम बेवकूफों की तरह क्या मान के बैठे जाते हैं कि "देखो डॉलर तो आ रहा है", अरे डॉलर जितना आता है उससे ज्यादा तो नुकसान हो जाता है ।
वर्तमान समय में जो डॉलर विदेशो से आ रहा है उसमे सबसे बड़ा योगदान उन लोगो का है जो 10 ,12 वी पास उन भारतीयो का है जो रात दिन मेहनत मजदूरी करके विदेशो से डॉलर भारत भेज रहे है ।
आप बताइए कि इससे खुबसूरत दुष्चक्र क्या होगा कि आपका दुश्मन आपको ही पीट रहा है आपकी ही गोटी से | कभी भी कोई भी विकसित अमीर देश भारत जैसे विकासशील देशो में तकनीकी को विकसित नहीं होने देना चाहता । इस देश के वैज्ञानिक यहाँ रुक जायेंगे, इंजिनियर यहाँ रुक जायेंगे, डॉक्टर यहाँ रुकेंगे, मैनेजर यहाँ रुकेंगे तो भारत में रुक कर कोई ना कोई बड़ा काम करेंगे अमीर देशो की दूकान बन्द हो जायेगी दूसरी तरफ हम फंडामेंटल रिसर्च मे बहुत पीछे चले जाते हैं, जब तक हमारे देश मे बेसिक रिसर्च नहीं होगी तो हम अप्लाइड फील्ड मे कुछ नहीं कर सकते हैं, सिवाए दूसरो के नकल करने के ।
मतलब हमारा नुकसान ही नुकसान और अमीर विकसित देश अमेरिका और युरोप का फायदा ही फायदा ।
सबसे बड़ी बात क्या है, हमारे देश मे सबसे बड़ा स्किल्ड मैंन पावर है चीन के बाद, हमारे पास 65 हज़ार वैज्ञानिक हैं, दुनिया के सबसे ज़्यादा इंजिनियरिंग कॉलेज हमारे देश मे हैं, अमेरिका से 4-5 गुना ज़्यादा इंजिनियरिंग कॉलेज हैं भारत मे, अमेरिका से ज़्यादा हाई-टेक रिसर्च इन्स्टिट्यूट हैं भारत मे, अमेरिका से ज़्यादा मेडिकल कॉलेज हैं भारत मे, हमारे यहाँ पॉलिटेक्निक, ITI की संख्या ज़्यादा है, नॅशनल लॅबोरेटरीस 44 से ज़्यादा हैं जो CSIR के कंट्रोल मे हैं, इतना सब होते हुए भी हम क्यों पीछे हैं ?
आज लाखो रूपये में एक इंजिनियर तैयार किया जाता है इस उम्मीद में कि समय आने पर वो राष्ट्र के काम में लगेगा, देश के काम में लगेगा, राष्ट्र को सहारा देगा, वो अचानक भाग कर विदेश चला जाता है।
समाधान
1.अमेरिका ने और युरोप के देशों ने अपने यहाँ के ब्रेन ड्रेन (प्रतिभा पलायन) को रोकने के लिए तमाम तरह के नियम बनाए हैं और उनके यहाँ अलग अलग देशों में अलग अलग कानून हैं कि कैसे अपने देश की प्रतिभाओं को बाहर जाने से रोका जाये ।
उधर अमेरिका और यूरोप के अधिकांश देशों में ये परंपरा है कि आपको कमाने के लिए अगर विदेश जाना है तो फ़ौज की सर्विस करनी पड़ेगी, सीधा सा मतलब ये है कि आपको बाहर नहीं जाना है और उन्ही देशो में ये गोल्डेन रुल है कि अगर उनके यहाँ बहुतायत में ऐसे लोग होंगे तो ही उनको बाहर जाने देने के लिए अनुमति के बारे में सोचा जायेगा ।
2. जब आई आई टी से निकल कर ये छात्र बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के बांड शाइन कर सकते है तो भारत सरकार से क्यों नहीं ।
उच्च शिक्षण संस्थानों में सब्सिडी उन्ही छात्रो को मिले जो देश में रह कर सेवा देने को तत्पर तैयार हो ।
3. भारत के बैंक एजुकेशन लोन छात्रो को सशर्त प्रदान करे जो छात्र भारत में रह कर कार्य करे उन्हें लोन की अदायगी में छूट प्रदान करे ।
4. आई आई टी जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों का पाठ्यक्रम बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के सुविधा के अनुशार न बने बल्कि पाठ्यक्रम भारत का कल्चर एग्रीकल्चर को आधार मानकर उसमे नैनोटेक्नोलॉजी को केंद्र में रखा जाए ऐसी तकनकी इन संस्थानों से निकले जिससे गावँ को स्वावलम्बन मिले गावँ से शहर की ओर होने वाला पलायन रुके छोटे छोटे संयंत्र बने जिसको कम पूंजी लागत से सरलता और सफलता के साथ संचालित हो ।
भारत सरकार आज अभियान चला रही है मेक इन इण्डिया भारत के प्रधानमंत्री वित्तमंत्री विदेशी पूंजी निवेश को लेकर बड़े चिंतित है यदि देश के सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठे लोग स्वदेशी का चिंतन करे ऐसी नीतिया बनाये जिससे देश से जो प्रतिभा का पलायन हो रहा है वो रुके ।आज देश में पूंजी निवेश नहीं प्रतिभा पलायन को रोकने की आवश्यकता है ब्रेन ड्रेन नहीं रिवर्श ब्रेन की जरूरत है ।आज भारत को मेक इन इण्डिया नहीं डिस्कवर इन इण्डिया की जरूरत है ।
कहते है किसी भी राष्ट्र की नीव उस राष्ट्र के युवाओ की संकल्प शक्ति होती है परंतु डॉलर की लालच में जो टूट जाए वो संकल्प हो ही नहीं सकता ।
विधार्थी साथियो के लिए प्रेरणादायक प्रसंग
जब रमन ने ठुकराये युवक को चुना
प्रसिद्ध वैज्ञानिक भौतिकशाश्त्री सी वि रमन जी को अपने विभाग के लिए योग्य वैज्ञानिक की आवश्यकता थी ।
उन्होंने अखबारो में विज्ञापन दिया पढ़कर बहुत सारे आवेदन आये रमन जी ने उनमे से कुछ का चयन करके साक्षात्कार के लिए बुलाया । साक्षात्कार हुवा इनमे से एक युवक ऐसा था जिसे रमन जी ने साक्षात्कार में अस्वीकार कर दिया था ।थोड़ी देर बाद जब साक्षात्कार समाप्त हो गया वो युवक कार्यालय के आस पास घूम रहा था रमन जी उससे नाराज होते हुए बोले जब मैंने तुम्हे अस्वीकार कर दिया तुम इस पद के अयोग्य हो गए तुम्हे नौकरी यहाँ नहीं मिलने वाली जाओ अपने घर जाओ ।
तब उस युवक ने विनम्रता से कहा सर आप नाराज मत हो , मुझे आने जाने का किराया भूल से अधिक दिया गया है इसलिए मै अतरिक्त कराया वापस करने हेतू लिपिक को ढूंढ रहा था ।
प्रसिद्ध वैज्ञायानिक रमन उसकी बातो को सुनकर विस्मित हुए फिर कुछ सोच कर बोले मैंने तुम्हारा चयन कर लिया है ।तुम चरित्रवान हो ।भौतिक के ज्ञान में तुम जरूर कुछ कमजोर हो जिसे मैं पढ़ाकर दूर कर सकता हूँ परंतु चरित्रवान व्यक्ति पाना कठिन है । वस्तुतः सर्वोच्च पात्रता तो ईमानदारी होती है जो कर्म निष्ठां व समर्पण को जन्म देती है ज्ञान की कमी को अध्धयन से दूर किया जा सकता है परंतु चारित्रिक दुर्बलता संस्थान को हर प्रकार से हानि पहुचाती है ।
चेहरे का क्या है ये वो तो साथ ही चला जाता है वो तो कर्म ही होता है जो किसी को साधारण नाविक के बेटे को कर्मयोगी कलाम बना देता है और किसी को युवाओ का प्रेरणा पुंज भाई राजीव दीक्षित ।
है वही सूरमा इस जग में जो अपनी राह बनाता है कोई चलता है पदचिन्हों पर कोई पद चिन्ह बनाता है ।
हर बड़ा सपना बड़ी हकीकत बनता है अगर सपने को हकीकत करने वालो का संकल्प बड़ा हो जाए ।
युवा साथियो आओ मिलकर व्यक्ति से व्यक्ति , व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र को जोड़ने वाले भारत को भारतीयता के मान्यता के आधार पर स्थापित करे ।
आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए धन्यवाद् और अच्छा लगे तो इसे अग्रेषित कीजिये, आप अगर और भारतीय भाषाएँ जानते हों तो इसे उस भाषा में अनुवादित कीजिये , अपने अपने ब्लॉग पर डालिए, अपने नाम से डालिये मतलब बस इतना ही है की ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये । भारत को मात्र विकसित नहीं विश्वगुरु बनाना है । बस एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान अजय कर्मयोगी 7984113987 /9336919081
स्वदेशी से स्वावलम्बी भारत

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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद