सा विद्या या विमुक्तए के मूल सिद्धांत से भटक कर आज सारी दुनिया भोग और हवस के चरम पर अपना झंडा बुलंद किया हुआ है पर मनुष्य की इच्छाएं अनंत है और इस क्रम में चाइना ने सारी मर्यादा ए तोड़ते हुए प्रकृति की सारी व्यवस्थाओं को ध्वस्त करते हुए सब कुछ इस भोग और हवस के भेंट चढ़ती गई और पूरे दुनिया का यांत्रिक उत्पादन का सिरमौर बनने का एक अंतहीन प्रतियोगिता का शिकार बन गया जिसका परिणाम आज भयावह स्थिति से गुजर रहा है सही जीने का तरीका श्रेष्ठ ज्ञान से ही संभव हैग गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था को पुनः स्थापित किए बिना असंभव है
चीन अपने देश की खबरों को दुनिया से छुपाकर रखना चाहता है। चीन की इंटेसा कंपनी ने एक बेहद सनसनीखेज खुलासा किया है कि कोरोना वायरस से चीन में मरने वालों की संख्या लगभग 45000 है। इसके अलावा डेढ़ लाख से ऊपर लोग कोरोना वायरस से ग्रसित हैं। चीन अभी तक दुनिया से इन खबरों को छुपाता आया है। यद्यपि चीन की इस कंपनी पर चीनी सरकार ने बैन लगा दिया है इसके अलावा चीन की सरकार ने मीडिया और तमाम कंपनियों को इस बात के लिए प्रतिबंधित कर दिया है कि यदि चीन से संबंधित कोई भी खबर लीक हुई तो उस कंपनी को ना सिर्फ बंद कर दिया जाएगा वरन उनकी संपत्ति भी जब्त कर ली जाएगी। चीन के हालात इतने बुरे हो चुके हैं कि शायद ही कोई यकीन कर पाए... अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड कम पड़ गए हैं... डॉक्टरों की और दवाओं की बेहद कमी है। इसके लिए चीन किसी अन्य देश की मदद भी नहीं ले रहा है कि कहीं उसका भेद खुल ना जाए। चीन की जनता इस अत्याचार को सहने के लिए मजबूर है। जगह-जगह इसके मरीज अपने आप गिर कर दम तोड़ रहे हैं पर उनकी मदद को कोई आगे नहीं बढ़ रहा है.. क्योंकि ना तो उनके लिए दवाएं हैं और ना ही सुविधाएं। चीन के आयात निर्यात का व्यापार बिल्कुल ठंडा पड़ गया है। किसी भी देश की एयरलाइंस और यात्री चीन जाने से परहेज कर रहे हैं। ऐसे में चीन अपनी आर्थिक समस्याओं से बहुत अधिक परेशान है पर अकड़बाज़ी में दुनिया वालों में अपनी मजबूत स्थिति का भ्रम बनाये रखना चाहता है। चीन का पालतू कुत्ता पाकिस्तान इस बात को लेकर बेहद परेशान है कि चीन अपने ही परेशानी से घिरा हुआ है ऐसे में उसकी आर्थिक मदद कौन करेगा.... क्योंकि पाकिस्तान अभी भी FATF की ग्रे लिस्ट में बना हुआ है... और दुनिया के तमाम वित्तीय संस्थाओं और देशों से उसकी मदद बंद है। एकमात्र चीन और तुर्की ही उसकी आर्थिक नैया को संभाल सकते थे जो अब खुद आर्थिक समस्याओं में घिर गए हैं.... जबकि मलेशिया का दिमाग भारत ने सही कर दिया है। कुल मिलाकर मुझे ये लग रहा है कि आगामी 4-5 महीने में पाकिस्तान के आर्थिक हालात बद से बदतर होने वाले हैं।
😃😃 चीन के बारे में मेरा मानना है कि जिस देश में नकली माल बनता हो उस देश की अर्थव्यवस्था कभी असली नहीं हो सकती! दूसरी बात सैन्य ताकत की है, डंडे के बल पर राज करने वाला देश हमेशा अपने डंडे को मजबूत बनाये रखता है। दुनियाँ का ध्यान हमेशा डंडे पर रहता है अर्थव्यवस्था पर नहीं, पाकिस्तान, उत्तरकोरिया, पूर्व सोवियत संघ और चीन इसका उदाहरण है। ऐसी सरकारें अपनी हकीकत छुपाये रखती हैं। जनाक्रोश पनपता है और सोवियत संघ वाली नौबत आती है। चीन की ताकत 10 दिन में अस्पताल खड़ा करने की है, ऐसी दुर्लभ ताकत सिर्फ तानाशाही निजाम में होती है। चीन 25 हजार कोरोना पीड़ितों की मेडिकल डेथ का निर्णय ले सकता है, लेकिन इसके दूरगामी प्रभावों का तानाशाह आंकलन नहीं कर पाते और पतन को प्राप्त होते हैं, लीबिया वाले हाल चीन के भी होने हैं। कोरोना से नहीं यह देश भुखमरी से मरने वाला है। मित्र चीन क़े कोई हैं नहीं। मैन्युफैक्चरिंग बैठ गया तो चीन उठ नहीं पायेगा। खेती पर अब और अधिक दबाव होगा। सी फ़ूड से तो लोग आगे भी तौबा करते रहेंगे। आर्मी के खर्च झेलना ही मुश्किल होगा। चीन ने अपनी गरीबी को अनदेखा कर दुनियाँ के गरीब देशों को कर्ज तो दिया लेकिन उसका वसूल हो पाना नामुमकिन है। चीन की बन्द मुट्ठी जो लाख की समझी जा रही थी ज्योंहि खुलनी शुरु हुई तो पता लगना भी शुरू हुआ है कि खाक की है।

Comments
Post a Comment
अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद