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नागरिक संशोधन बिल की आंख खोलने वाली सच्चाई और ज्वलंत प्रश्न जो आज भी प्रासंगिक है

   




 

नागरिकता संसोधन बिल, अखण्ड भारत श्रेष्ठ भारत  और हिंदू राष्ट्र का के सपने को साकार कर पायेगा ? कायदे से तो इस बिल से ईसाई पंथ के अनुयायियों को भी बाहर होना चाहिए था। बिल में शामिल ईसाई पंथ ही एकमात्र वह पंथ है जो न भारत में पैदा हुआ न पला-बढ़ा। इस्लाम भले ही आज आतंक का पर्याय बन गया हो...नागरिकता संसोधन बिल, अखण्ड भारत के सपने को कैसे साकार करेगा ? कायदे से तो इस बिल से ईसाई पंथ के अनुयायियों को बाहर होना चाहिए था। बिल में शामिल ईसाई पंथ ही एकमात्र वह पंथ है जो न भारत में पैदा हुआ न पला-बढ़ा। इस्लाम भले ही आज आतंक का पर्याय बन गया हो  और एक हैवानियत की हदों को पार करता हुआ रक्तपात का नग्न तांडव कर रहा है पर इस रक्तपात की बीज डालने  वाली यहूदी और ईसाई और अब्राह्मिक संस्कृतियों से भी कोई मानवता का भला होने वाला है क्या? यह तो हमारे शिक्षा तंत्र के माध्यम से हमारे माइंड पर कब्जा कर रखे हैं मौत से भी बदतर जिंदगी हर पल रसपान करा रहे हैं  इसलिए अपने बच्चों की सही शिक्षा के लिए इस गुरुकुल अभियान का सहभागी बने
https://m.facebook.com/groups/1083537648465414/?ref=group_browse
  जो लोग पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए मुसलमानों को भारत में शरणार्थी की हैसियत देने की वकालत कर रहे हैं ,उन्हें यह तो बताना ही चाहिए कि उन्होंने पाकिस्तान में, बांग्लादेश में और अन्य मुस्लिम देशों में हिंदुओं को समान नागरिक अधिकार दिए जाने के पक्ष में आज तक कौन से कदम उठाए? आंदोलन किया है? मांग की है ?या चिट्ठी लिखी है ?या देश में इसके पक्ष में कोई…   लिखित वक्तव्य दिया है?
15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान में 20 करोड़ हिंदू थे आज वह एक करोड़ भी नहीं बचे। इनकी हत्या का जिम्मेदार कौन है ?
 भारत के सभी संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के लिये व्यक्ति का भारत का नागरिक होना आवश्यक है किन्तु किस किस को भारत का नागरिक माना जाये इसके लिये भारतीय संविधान के अलावा एक और चोर दरवाज़ा भी बनाया गया जिसे भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 कहते हैं ! जिसमें कई बार चुपके से संशोधन कर विदेशियों को भारत में घुसाने का कार्य भारतीय राजनीतिज्ञों के द्वारा बड़ी शांत गति से चलता रहा है ! इसी क्रम में बतलाया जा रहा है कि नये नागरिकता बिल के तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश से आये हुये हिंदू, जैन, बौद्ध, ईसाई, सिख शरणार्थियों को नागरिकता मिलने में आसानी होगी ! इसके अलावा अब भारत की नागरिकता पाने के लिये 11 साल नहीं बल्कि 6 साल तक देश में रहना अनिवार्य होगा
ऐसी स्थिति में वह दिन दूर नहीं जब वर्ष 2029 के चुनाव में विदेशी मूल के लोग भारत के नागरिक के रूप में भारत की राजनीति में प्रवेश करेंगे और भारत की सत्ता 2034 आते-आते तक विदेशियों के हाथ में चली जायेगी ! यह स्थिति देश के लिये बहुत बड़ा खतरा है , क्या  हम भारत को सही दिशा में ले जा रहे हैं या हम पुन: व्यवस्थित गुलामी की ओर बढ़ रहे हैं ! ?

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