राम मंदिर पर मौत का भय और प्रलोभन से भी धर्म विमुख ना हुए आदरणीय श्री पुरी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती जी
श्री राम_मंदिर_षडयंत्र #ध्यानपूर्वक_पढ़ें जगतगुरु शंकराचार्य पुरीपीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंदसरस्वती जी महाराज : पत्रकार : स्वामीजी एक सवाल उठा था पी.वी.नरसिम्हाराव के समय में कि उन्होंने आपको मारने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र बनाया और उसी समय जो सहयोग नरसिम्हा राव का राम मन्दिर को लेकर था उसमे आपने सहयोग नही किया , इसको लेकर क्या विवाद है ? शंकराचार्य जी : ऐसा है वस्तु स्थिति यह है की जब श्री अयोध्या में जिसको उस समय प्रायः बाबरी मस्जिद कहा जाता था और मैंने सबसे पहले कहा की मंदिर के उसमे लक्षण है , गुम्बद है , मीनारे नही है , इसका मतलब वह मंदिर ही है उसे लांछित मंदिर या विवादस्पद ढांचा कहना चाहिए न कि बाबरी मस्जिद जब ढांचा विद्यमान था रामलला उसी मंदिर में प्रतिष्ठित थे और मै शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया जा चूका था तब नरसिम्हा राव जी के दो दूत , माध्यम मेरे पास वृन्दावन में आए और लगभग ढाई घंटे तक उनमे से एक लगातार बोलते रहे और लगभग ढाई घंटो में उन्होंने इस प्रकार का भाव प्रकट किया जिससे मै लोटपोट हो जाऊ , प्रलोभन के वशीभूत हो जाऊ , तब मैंने देखा की वो थक गए है तब मैंने उनसे कहा कि आप क्या चाहते है , उन्होंने कहा नरसिम्हा राव जी का आपके लिए सन्देश है की आपके प्रति ६५ करोड़ रूपए आप लीजिए और एक सेकेटरी ,सचिव आपको सरकार की और से दिया जाएगा उन रुपयों का उपयोग अयोध्या में मंदिर बनाने में हो पर मैंने कहा जब विवादस्पद ढांचा वहा पर विद्यमान है और वस्तुतः रामलला का जन्म स्थल स्कन्द पूरण के अनुसार वही सिद्ध होता है स्कन्द पूरण में जो राम जन्म भूमि का चित्रण किया गया है उसके आधार पर वही स्थल है जहा उस समय वह ढांचा था ऐसी परिस्थिति में आप मंदिर अतिरिक्त कही बनाएँगे या वही बनाएँगे , तो उसे हम बाबरी मस्जिद ही कहेंगे क्या ? यह मै नरसिम्हा राव जी से उत्तर चाहता हूँ , एकांत की बात है और आप सार्वजानिक रूप से पूछ रहें है तो उन माध्यमो ने मुझ से कहा , कि नरसिम्हा राव जी को यह पता था की आप यह प्रशन कर सकते है तो उन्होंने धेर्य पूर्वक कहा है की चूँकि आप किसी राजनैतिक दल के नही है आप श्री राम मंदिर के नाम पर खड़े होंगे तो मुस्लिम तंत्र जिसे मैंने अनुकूल कर रखा है वो भी राम मंदिर के पक्ष में हो सकता है अतः उस ढांचे को आर्थात जिसे बाबरी मस्जिद कहा जाता है हटाकर के वही राम मंदिर बने ऐसी हमारी भावना है , उसमे आप खड़े हो जाइए ! उसके बाद मैंने कहा मुझे पता है कि यह राजनैतिक चाल है मंदिर,मस्जिद साथ में बनाने की योजना है , उसमे मै निमित्त नही हो सकता , न्याय का ,मै पक्षधर हूँ बाबर बहुत बाद में हुए रामलला लाखो वर्ष पुराने है और वे करोडो अरबो प्राणियों की आस्था के केंद्र है , वहा पर मै मंदिर ही देखना चाहता हूँ और कुछ नही ! इसके बाद कालांतर में ढाचा टुटा जैसा की आप लोगो को पता है तब फिर उनके दूत आए , मै संक्षेप में ही कहना चाहता हूँ , क्योकि आपने कहा मारने की योजना , मरवाने की योजना नरसिम्हा राव ने की तो स्पष्टीकरण की आवश्यकता है की वस्तु स्थिति क्या है ! लगभग १०-२० बार उनके माध्यम मेरे पास भेजे गए , पुरी में वृन्दावन में एवं अन्य स्थलों पर आते रहे , अंतिम चरण में यह हुआ की नरसिम्हा राव ने एक वैष्णव संत को मेरे पास वृन्दावन में भेजा ५-१० कार भी भेजी मुझे दिल्ली लाने के लिए अन्य शंकराचार्य मेरे अतिरिक्त प्रमाणिक शंकराचार्य सब उन दिनों दिल्ली में थे नरसिम्हा राव जी की प्रेरणा से , और मुझसे कहा गया कि नरसिम्हा राव जी यह चाहते है की आप वहा पर आवें और मिलकर के राम मंदिर बनाने के ऊपर विचार करें और यदि आप रामालय ट्रस्ट उस समय बन चूका था नरसिम्हा राव जी की प्रेरणा से उसमे मान्य श्रंगेरी , द्वारका , व् जोशी मठ के शंकराचार्य के अतिरिक्त बहुत से वैष्णवाचार्यो ने भी हस्ताक्षर किया था मैंने मना कर दिया था मुझसे वह वैष्णव संत जी ने कहा की नरसिम्हा राव जी का यह सन्देश है मानते है या नही .... मैंने कहा मै राष्ट्र को धोखा नही दे सकता ,माता-पिता-गुरु और पीठ को कलंकित नही कर सकता मै पूज्य स्वामी श्री करपात्री जी महाराज का कृपा पात्र शिष्य हूँ , मंदिर, मस्जिद दोनों एक साथ बने मै इसका पक्षधर कभी नही हो सकता हस्ताक्षर बिलकुल नही कर सकता और शासन तंत्र आपके हाथ में है , आप जो बनाना चाहते है बनाइए मै रोकने के लिए नही जाता लेकिन मै हस्ताक्षर कथमपि नही करना चाहता उसके बाद मुझसे यह कहा गया की यदि आप हस्ताक्षर करते है तो सोने चांदी से आपका मठ भर दिया जाएगा और आप हस्ताक्षर नही करते है तो धन , मान , और प्राण आपके संकट में पड़ जाएँगे और शासन तंत्र कुछ भी आपके प्रति कदम उठा सकता है ! मैंने इसका उत्तर दिया कि यदि नरसिम्हा राव जी का यही भाव है तो वे पूरी शक्ति लगाकर धन तो मेरे पास है नही हाँ मान अवश्य है और प्राण भी है जीवित व्यक्ति हूँ इसलिए प्राण और प्रतिष्ठा को नष्ट करने में पूरी शक्ति लगा दें मै उनके विरोध में एक शब्द भी नही बोलूँगा और देखता हूँ विजय किसकी होती है , यह घटना है ! उसके बाद बहुत सा प्रयास किया गया , मुझे श्रंगेरी बुलाया गया श्रंगेरी के मान्य शंकराचार्य ने , जोशी मठ और द्वारका मठ के शंकराचार्य को भी बुलाया , कांची जो की प्रतिष्ठित मठ है वहा के आचार्य को भी बुलाया गया अंत में बहुत प्रयास किया गया और यहाँ पर गोवर्धन मठ में श्रंगेरी के शंकराचार्य इस मठ में एक सौ शिष्यों के साथ तीन दिनों तक विद्यमान रहे , मुझसे अनुरोध करते रहे प्रेमपूर्वक की आप हस्ताक्षर कर दीजिए , मैंने कहा संभव नही यह घटना है.... उसके बाद जो प्रक्रिया हुई उससे बिलकुल स्पष्ट हो गया की इस पीठ को नष्ट करने के लिए और मुझे हर तरह से संकट में डालने का केन्द्रीय शासन तंत्र की और से प्रयास हुआ ! उसी सन्दर्भ में प्रयाग में कुम्भ के अवसर पर जब मै प्रयाग से आ गया , पुरी की और था , अन्यत्र मेरी यात्रा का कार्यक्रम बन गया था , रात्रि के बारह बजे चन्द्र स्वामी के शिविर में अयोध्या में हनुमान गढ़ी के जो महंत जी है मान्य ज्ञानदास जी उन्होंने अपने एक युवक लांछित , अवांछित शिष्य को वैष्णव तिलक मिटाकर के पुरी के शंकराचार्य के रूप में ख्यापित किया और दुसरे दिन ही विश्वस्तर पर उस व्यक्ति को पुरी के शंकराचार्य के रूप में प्रतिष्ठित व् ख्यापित किया गया उसके बाद म.प्र.उस समय छतीसगढ़ सहित था के मुख्यमंत्री , जो भी रहे हो पता तो चल ही जाएगा , उनके द्वारा और कांग्रेस के यूथ प्रेसिडेंट बिट्टा के द्वारा और नरसिम्हा राव के एक आदमी जो की आईएस अफसर व् आध्यात्मिक सलाहकार शर्मा जी के द्वारा विश्वस्तर पर उस व्यक्ति को पूरी के शंकराचार्य के रूप में ख्यापित किया ! उस व्यक्ति के द्वारा मेरे अपहरण का पूरा प्रयास भी किया गया यहाँ के फोन पर भी अभद्र चुनोतिया दी गयी , उस के बाद से अब तक नरसिम्हा राव के न रहने पर भी उस व्यक्ति को लांछित व्यक्ति को विश्वस्तर पर आज भी पुरी के शंकराचार्य के रूप में ख्यापित किया जा रहा है , आर्थिक दृष्टि से भी वह व्यक्ति करोडो रूपए कमा रहा है साथ ही विश्वस्तर का षड्यंत्र है , हुर्रियत के नेता उसके अनुगामी और पोषक है , यह बात विश्वस्तर पर विदित है उल्फा जो की प्रतिबंधित है उसके सरगना उसके शिष्य है और आसाम के मुख्यमंत्री उसके शिष्य है वो उसके पक्ष में पुरी में पत्रकार वार्ता कर चुके है , इतना दुस्साहस एक मुख्यमंत्री के द्वारा किया गया है एक कांग्रेसी मुख्यमंत्री के द्वारा , इतना ही नही मै एक संकेत करना चाहता हूँ , क्रिश्चियन तंत्र पूरा उसके साथ सहयोग के समान प्रस्तुत है और मओवादियो को भी उसने अपने अनुकूल कर रखा है ! एक और संकेत , देखीए माघ माह में मै प्रयाग में था , गोवर्धन मठ पुरी के वरिष्ठ शंकराचार्य के नाम से उसका बोर्ड लगा था , मेरे पास कमिश्नर इलाहाबाद प्रयाग , मेला अधिकारी , उप मेला अधिकारी तीनो एक साथ आए मैंने कहा यह सब क्या हो रहा है , तो उन्होंने कहा की आप असली है हम जानते है लेकिन हमारी लाचारी है शासन तंत्र के आगे झुके है , इसका मतलब यही हुआ , इसी प्रकार वहा के एक संसद मेरे पास आए मैंने उनसे कहा की आप लोगो के शासनकाल में यह क्या हो रहा है , लेकिन उन्होंने भी लाचारी व्यक्त की , और एक आजम खां नामक सपा के मंत्री कुम्भ मेला प्रभारी , उस व्यक्ति के यहाँ जाकर भोजन करते थे और सौ से अधिक मुस्लिम सज्जन ..प्रतिष्ठित कहे या अराजक कहे उन व्यक्तियों के बिच बुलाकर उसके साथ गोष्ठी करते थे , इस प्रकार इस पीठ को लज्जित करने का , तिरस्कृत करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है ! मै जब रामजन्म भूमि आदि पर कुछ बोलता हूँ तो केंद्रीय व् प्रांतीय शासन तंत्र द्वारा मेरा वह वक्तव्य प्रतिबंधित कर दिया जाता है और वह धर्म के विरुद्ध , राष्ट्र के विरुद्ध जब बोलता है तो पुरे विश्व में उसका प्रसारण किया जाता है , इस यातना पूर्ण परिस्थिति में मै अपने पद के दायित्व का निर्वाह कर रहा हूँ ! पत्रकार : स्वामी जी आप क्या मानते है एक नकली शंकराचार्य घूम रहा है , जैसा आप बोल रहे है तो सरकार कोई अंकुश नही लगा रही या कोई साजिश है ?? शंकराचार्य जी : जब सरकार के द्वारा खड़ा किया गया है तो सरकार क्यों उसके ऊपर नियंत्रण करे और सबसे बड़ी बात यह है की रामालय ट्रस्ट में मैंने हस्ताक्षर नही किया और मैंने कहा की मै अपने विवेक का परिचय देता हूँ , आप शंकराचार्यों को हस्ताक्षर करने का भाव आया आपने हस्ताक्षर किया मैं आपका विरोध नही करता लेकिन आप नरसिम्हा राव के द्वारा हमारे मठ पर या हम पर कोई अवांछित कदम न उठाए यह आपका पवित्र दायित्व होता है , लेकिन उन शंकराचार्यों ने मिलकर के मुझे तिरस्कृत करने का अभियान चलाया ऐसी परिस्थिति में यह एक विश्व्सतारिय षड्यंत्र समझना चाहिए , अगर उन शंकराचार्यों का हाथ नही था तो वो आज तक बोलते क्यों नही उसके विरोध में , जब वह नकली होकर के कांग्रेस का प्रचार कर रहा है तो जो मान्य जोशी , द्वारका , और श्रंगेरी पीठ के शंकराचार्य अपने को ख्यापित करते है वे क्यों नही कहते की इस अराजक तत्व का निग्रह करना चाहिए ! एक पुलिस इन्स्पेक्टर भी नकली होकर के एक या दो दिन से अधिक नही घूम सकता आपको मालूम है सोनिया जी और आडवाणी जी के दामाद नकली हो कर घूम रहे थे दोनों अरेस्ट कर लिए गए , यह वह भारत है जहा नेताओ के दामाद नकली होकर घुमे तो अरेस्ट कर लिए जाते है और शंकराचार्य का पद जो की पोप जी से व् दलाई लामा जी के पद से भी ऊँचा और प्राचीन है , लेकिन एक व्यक्ति पुरी का नकली शंकराचार्य बन पुरे विश्व से धन लुट रहा है , .अराजकता का परिचय दे रहा है , उस पर ऊँगली उठाने वाला माई का लाल भारत में परिलक्षित न होता हो इससे अधिक देश का विनाश क्या होगा यह देश कितना पतित हो चूका है इसका प्रमाण इससे अधिक क्या होगा जब कोई नकली पोप नही , कोई नकली दलाई लामा नही , लेकिन पुरी पीठ जो सबसे मान्य है क्योकि मै कहना चाहता हूँ , कि भगवान शंकराचार्य जी के प्रथम शिष्य श्री पद्मपादाचार्य जी उनका यह स्थान है , इतना ही नही आपको पता होगा की वैदिक मेथेमेटिक्स यहाँ के १४३ वे शंकराचार्य श्री भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज ने विश्व को दिया और आपको संभवतः पता न हो , भगवान की कृपा से ९ ग्रन्थ मेरे गणित पर है शून्य व् एक को लेकर लगभग ९०० पृष्ठों की सामग्री मैंने गणित पर विश्व को दी है ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी , केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ,दक्षिण कोरिया , पश्चिम कोरिया के व्यक्ति गणित की पहेली सुलझाने मेरे पास आते है , ५ मई १९९९ को विश्व बैंक के अध्यक्ष ने एक अंग्रेज महिला को प्रतिनिधि बनाकर भेजा और विश्व बैंक की जितनी समस्या थी उनका समाधान मुझसे करवाया , जब मैंने समाधान कर दिया तो वह महिला फुट-फुट कर रोने लगी कि भारत को क्या हो गया है कि आप जैसी मेधाशक्ति का उपयोग करके वह विश्व गुरु नही बनना चाहता , उस महिला का नाम मेरे ग्रंथो में लिखा हुआ है और जो यह सयुक्त राष्ट्र संघ है उसने भी हमसे मार्गदर्शन प्राप्त किया तो जिस व्यक्ति की विश्वस्तर पर ख्याति हो उस व्यक्ति को इतनी यातना दी जाती हो और कोई भी शासन तंत्र ऐसे अराजक तत्व के आगे मुह न खोलता हो , कोई अपने दायित्व का निर्वाह न करता हो इससे सिद्ध है कि भारत घोर परतंत्र है , घोर परतंत्र है ! मुगलों के शासन काल में भी , क्रिश्चियनो के शासन काल में भी नकली शंकराचार्य नही था , आज मान्य पीठो को तिरस्कृत करने के लिए नकली शंकराचार्य बनाए जाते है और असली शंकराचार्य जो अपने को मानते है व् कहते है वह किसी राजनैतिक दल का प्रचार करने के लिए ताल ठोककर सामने आते है इससे अधिक देश का पतन क्या हो सकता है !! !!हर हर महादेव !! साभार प्रशांत मिश्रा

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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद