अब्दुल बसित ने सेकुलर लेखकों की पोल ही नहीं खोली धमकी भी दी है भारत मे लंबे समय तक , पाकिस्तान के राजदूत (हाई कमिश्नर ) रहे अब्दुल बसित ने यह कह कर सबको चौंका दिया कि उन्हीने भारतीय पोर्न लेखिका व तथाकथित बुद्धजीवी शोभा डे से पाकिस्तान के नैरेटिव, जम्मू कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की मांग किये जाने को लेकर लिखवाया था।यही नहीं उन्होने यह भी कहा कि उन्होने आतंकवादीयों के पोस्टर बॉय रहे बुरहान बानी के पक्ष में लिखवाने लिखवाने के लिए पैसे दिये थे। अब्दुल बसित पाकिस्तान में केमरे के सामने यह सब कहते पाये गए। अब यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि विदेश सेवा का एक राजनायिक ऐसा क्यों कह रहा है ? भारतीय लेखकों और पत्रकारों की पोल खोलने के लिए उसने अपनी व्यावसायिक प्रतिबद्धता और सरकारी गोपनीयता भंग करके अपनी सेवा शर्तों का उल्लंघन क्यों किया ? और ऐसे समय पर जब पाकिस्तान की विश्व जनमत में बहुत किरकिरी हो रही है तब उन जैसा निष्ठावान पाकिस्तानी अधिकारी अपनीय राजकीय निष्ठा को डाव पर क्यों लगाना चाहेगा? यह तो जगजाहिर है कि पाकिस्तान ने वर्षों से इन लेखकों और पत्रकारों को पैसे देकर पाला है और अंतराष्ट्रीय स्तर पर बुद्धजीवी, लेखक, पत्रकार व सेक्युलर लिबरल के रूप में स्थापित होने में मदद की है। लेकिन आज उस सबका कोई मतलब नही रह गया जब मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 व उसके विशेष राज्य के दर्जे को हटा कर, पाकिस्तान के 'कश्मीर बनेगा पाकिस्तान' का 70 वर्ष का ध्वस्त हो गया है। ऐसा कतई नहीं लगता कि अब्दुल बसित ने कोई गलती से शोभा डे का नाम लिया होगा। बल्कि यह जानबूझ कर उनका नाम उजागर किया गया है जो पीट चुका है । पाकिस्तान के लिए शोभा डे निचले दर्जे की ‘एसेट’(अनुकूल माध्यम) कोई हो ही नहीं सकती थी। जिसकी उपयोगिता उनके लिए समाप्त हो चुकी हो और और उसके माध्यम से अन्य लेखकों और पत्रकारों को भयादोहन (ब्लेक्मैलिंग) किया जा सके। क्योंकि व्यवसायिक पत्रकार के रूप में उसका कोई महत्व नही रह गया था। पाकिस्तान ने शोभा डे की बलि लेकर, अपने अन्य भारतीय एसेट्स बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई, सागरिका घोष, अरुंधति रॉय, शेखर गुप्ता, रविश कुमार , अरफ़ा खातून, प्रणव रॉय, विनोद दुआ, शशि थरूर, मणिशंकर अय्यर, सिद्धू इत्यादि को संदेश भेजा है कि वो उनके प्रयासों से बड़ा क्षुब्ध है। यह ऐसे लोगो को पाकिस्तान की तरफ से विक्षिप्तता में दी गयी धमकी है कि यदि इन लोगो ने कश्मीर की घाटी में आग नही लगवाई और मोदी सरकार के विरुद्ध जनमत नही चलवाया तो अगले ‘शोभा डे’ वे लोग होंगे।उलेखनीय है कि ये वही लोग हैं जो लोकसभा चुनाव के आसपास राष्ट्रवादी लेखकों,विचारकों और पत्रकारों को "भक्त",कहकर चिढ़ाया करते थे। सत्य यही है। बरना अब्दुल बसित जैसा राजनयिक कभी भी ऐसा न करता। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में जिस तरह की राष्ट्र भक्ति का प्रवाह पैदा किया है उसके सामने इन टुच्चे लोगों का कोई उपयोग नहीं है। पाकिस्तान को एक कश्मीर समस्या से ही उम्मीद थी कि भारतीय सरकार को पाकिस्तान के विरुद्ध आगे बढ़ाने से रोक सकती थी। यहाँ उसके लिए भारत में किसकी सरकार हो भाजपा या कांग्रेस में कोई फर्क नहीं पड़ता । 'कश्मीर बनेगा पाकिस्तान' का सपना’ इस रणनीति पर अब तक की सभी सरकारें चलती रही हैं परंतु नरेंद्र मोदी ने भारतीय युवाओं की राष्ट्र भक्ति जाग्रत कर दी है और भारत जैसे बड़े बाजार और उभरती अर्थ व्यवस्था से कोई भी समझदार देश पंगा नहीं ले सकता। पाकिस्तान का सपना भारत के देशद्रोहियों की कलमों पर टिका हुआ था जो अब टूटता नजर आ रहा है। यही सोचकर पाकिस्तान ने अब्दुल बसित के माध्यम से शोभा डे को नेपथ्य में डाल,कर दूसरे कथित सेकुलरों को प्रकारांतर में धमकाया है। देखना होगा कि अब कौन कौन सा लेखक या पत्रकार इस ब्लेकमैलिंग के खेल में शिकार हुआ और कौन अपने को समय और परिस्थिति के अनुरूप राष्ट्र कि मुख्य धारा में आकर अपने को बदलने में कामयाब होगा ?
अब्दुल बसित ने सेकुलर लेखकों की पोल ही नहीं खोली धमकी भी दी है भारत मे लंबे समय तक , पाकिस्तान के राजदूत (हाई कमिश्नर ) रहे अब्दुल बसित ने यह कह कर सबको चौंका दिया कि उन्हीने भारतीय पोर्न लेखिका व तथाकथित बुद्धजीवी शोभा डे से पाकिस्तान के नैरेटिव, जम्मू कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की मांग किये जाने को लेकर लिखवाया था।यही नहीं उन्होने यह भी कहा कि उन्होने आतंकवादीयों के पोस्टर बॉय रहे बुरहान बानी के पक्ष में लिखवाने लिखवाने के लिए पैसे दिये थे। अब्दुल बसित पाकिस्तान में केमरे के सामने यह सब कहते पाये गए। अब यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि विदेश सेवा का एक राजनायिक ऐसा क्यों कह रहा है ? भारतीय लेखकों और पत्रकारों की पोल खोलने के लिए उसने अपनी व्यावसायिक प्रतिबद्धता और सरकारी गोपनीयता भंग करके अपनी सेवा शर्तों का उल्लंघन क्यों किया ? और ऐसे समय पर जब पाकिस्तान की विश्व जनमत में बहुत किरकिरी हो रही है तब उन जैसा निष्ठावान पाकिस्तानी अधिकारी अपनीय राजकीय निष्ठा को डाव पर क्यों लगाना चाहेगा? यह तो जगजाहिर है कि पाकिस्तान ने वर्षों से इन लेखकों और पत्रकारों को पैसे देकर पाला है और अंतराष्ट्रीय स्तर पर बुद्धजीवी, लेखक, पत्रकार व सेक्युलर लिबरल के रूप में स्थापित होने में मदद की है। लेकिन आज उस सबका कोई मतलब नही रह गया जब मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 व उसके विशेष राज्य के दर्जे को हटा कर, पाकिस्तान के 'कश्मीर बनेगा पाकिस्तान' का 70 वर्ष का ध्वस्त हो गया है। ऐसा कतई नहीं लगता कि अब्दुल बसित ने कोई गलती से शोभा डे का नाम लिया होगा। बल्कि यह जानबूझ कर उनका नाम उजागर किया गया है जो पीट चुका है । पाकिस्तान के लिए शोभा डे निचले दर्जे की ‘एसेट’(अनुकूल माध्यम) कोई हो ही नहीं सकती थी। जिसकी उपयोगिता उनके लिए समाप्त हो चुकी हो और और उसके माध्यम से अन्य लेखकों और पत्रकारों को भयादोहन (ब्लेक्मैलिंग) किया जा सके। क्योंकि व्यवसायिक पत्रकार के रूप में उसका कोई महत्व नही रह गया था। पाकिस्तान ने शोभा डे की बलि लेकर, अपने अन्य भारतीय एसेट्स बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई, सागरिका घोष, अरुंधति रॉय, शेखर गुप्ता, रविश कुमार , अरफ़ा खातून, प्रणव रॉय, विनोद दुआ, शशि थरूर, मणिशंकर अय्यर, सिद्धू इत्यादि को संदेश भेजा है कि वो उनके प्रयासों से बड़ा क्षुब्ध है। यह ऐसे लोगो को पाकिस्तान की तरफ से विक्षिप्तता में दी गयी धमकी है कि यदि इन लोगो ने कश्मीर की घाटी में आग नही लगवाई और मोदी सरकार के विरुद्ध जनमत नही चलवाया तो अगले ‘शोभा डे’ वे लोग होंगे।उलेखनीय है कि ये वही लोग हैं जो लोकसभा चुनाव के आसपास राष्ट्रवादी लेखकों,विचारकों और पत्रकारों को "भक्त",कहकर चिढ़ाया करते थे। सत्य यही है। बरना अब्दुल बसित जैसा राजनयिक कभी भी ऐसा न करता। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में जिस तरह की राष्ट्र भक्ति का प्रवाह पैदा किया है उसके सामने इन टुच्चे लोगों का कोई उपयोग नहीं है। पाकिस्तान को एक कश्मीर समस्या से ही उम्मीद थी कि भारतीय सरकार को पाकिस्तान के विरुद्ध आगे बढ़ाने से रोक सकती थी। यहाँ उसके लिए भारत में किसकी सरकार हो भाजपा या कांग्रेस में कोई फर्क नहीं पड़ता । 'कश्मीर बनेगा पाकिस्तान' का सपना’ इस रणनीति पर अब तक की सभी सरकारें चलती रही हैं परंतु नरेंद्र मोदी ने भारतीय युवाओं की राष्ट्र भक्ति जाग्रत कर दी है और भारत जैसे बड़े बाजार और उभरती अर्थ व्यवस्था से कोई भी समझदार देश पंगा नहीं ले सकता। पाकिस्तान का सपना भारत के देशद्रोहियों की कलमों पर टिका हुआ था जो अब टूटता नजर आ रहा है। यही सोचकर पाकिस्तान ने अब्दुल बसित के माध्यम से शोभा डे को नेपथ्य में डाल,कर दूसरे कथित सेकुलरों को प्रकारांतर में धमकाया है। देखना होगा कि अब कौन कौन सा लेखक या पत्रकार इस ब्लेकमैलिंग के खेल में शिकार हुआ और कौन अपने को समय और परिस्थिति के अनुरूप राष्ट्र कि मुख्य धारा में आकर अपने को बदलने में कामयाब होगा ?

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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद