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 शियाटिका
परिचय-
पीठ के रोगों में शियाटिका सबसे आम रोग माना जाता है। यह पीठ का ऐसा तेज दर्द है जो तंत्रिका तंतु की सीध में उठता है। यह शरीर के जांघों, नितंब, पिंडलियों, पैरों के कुछ भागों या कभी-कभी पूरे भागों को प्रभावित करता है

कारण
शियाटिका का रोग तंत्रिका के सिरे पर दबाव पड़ने से उत्पन्न होता है। इस प्रकार का दबाव स्लिप डिस्क या जोड़ों में चोट लगने या खिसकने के कारण होता है। शियाटिका का दर्द ज्यादा भारी वजन उठाने, सही तरीके से न बैठने या फिर बैठे-बैठे से अचानक ही उठ जाने के कारण होता है। टयूमर, मवाद, खून के थक्के या आस-पास की मांसपेशियों में खिंचाव आदि की अवस्था में भी तंत्रिका पर दबाव पड़ सकता है।

इसके अलावा शियाटिका रोग होने के और भी कई कारण हो सकते है जैसे-

रीढ़ की हड्डी के किसी भाग में खराबी आ जाने या हडि्डयों का कोई भाग ऊपर-नीचे खिसक जाने के कारण शियाटिका रोग हो सकता है।
रीढ़ की हड्डी के किसी भाग के पास फोड़ा आदि हो जाने के कारण भी शियाटिका रोग हो जाता है।
रीढ़ की हड्डी के पास के भाग में रसौली या गिल्टी रोग हो जाने के कारण भी शियाटिका रोग हो सकता है।
हडि्डयों में किसी प्रकार से सूजन आ जाने के कारण भी शियाटिका रोग हो सकता है।
स्त्रियों की डिम्बग्रंथि या गर्भाशय में किसी प्रकार का कोई रोग हो जाने के कारण शियाटिका रोग हो सकता है।
मूत्राशय प्रणाली में कोई खराबी आ जाने के कारण भी शियाटिका रोग हो सकता है।
नितम्ब की हड्डी या पेट के नीचे के भाग में किसी प्रकार से सूजन आ जाने के कारण भी शियाटिका रोग हो सकता है।

शियाटिका रोग के कारण रोगी को बहुत तेज दर्द होता है जिसको सहना रोगी के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। रोगी के शरीर में शियाटिका रोग के कारण होने वाला दर्द पीठ के निचले भाग से शुरु होकर नितम्ब तथा टांगों से होता हुआ पैर के तलुवों तक पंहुच जाता है। जिन व्यक्तियों को शियाटिका रोग बार-बार होता है उन व्यक्तियों का दर्द ठंड के मौसम में और भी तेज हो जाता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ठंडे मौसम के कारण शरीर की मांस-पेशियां सिकुड़ जाती हैं।

शियाटिका रोग से पीड़ित व्यक्ति यदि शारीरिक रूप से स्वस्थ भी है तो भी दर्द के कारण उसे बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस रोग के कारण व्यक्ति को उठने-बैठने, चलने-फिरने, गाड़ी चलाने, सोने, करवट लेने, तथा सीढ़ियां चढ़ने में बहुत दिक्कत होती है। कभी-कभी तो रोगी कुछ दूर तक पैदल चल लेता है लेकिन कुछ दूर चलने के बाद ही उसे इस रोग के कारण दर्द और भी तेज हो जाता है तथा रोगी को लगता है कि वह अब एक कदम भी नहीं चल सकता है। कुछ रोगियों को तो सीधे चलने में भी कठिनाई होती है। यदि इस रोग से पीड़ित कोई व्यक्ति लेट भी जाए तो उसे उठने में दिक्कत होती है।

इस रोग के कारण रोगी को ऐसा लगता है कि उसकी टांगे काफी भारी हो चुकी हैं। इस रोग के कारण रोगी को सुबह के समय बिस्तर से उठने का मन नहीं करता है और यदि रोगी को दर्द शुरू हो जाता है तो उसे चलने-फिरने में भी दिक्कत होने लगती है।

बहुत से रोगी ऐसे भी होते हैं, जिनका एक बार उपचार करने के बाद उन्हें दुबारा से शियाटिका रोग नहीं होता है। बहुत से ऐसे रोगी भी होते हैं जिनका एक बार उपचार करने के बाद दुबारा से उन्हें कुछ महीनों या कुछ वर्षों के बाद शियाटिका रोग हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुछ व्यक्ति उठने-बैठने, चलने-फिरने, वजन उठाने तथा किसी कार्य को करने में ध्यान नहीं देते हैं तथा जब कोई व्यक्ति इनमें से कोई भी काम गलत तरीके से करता है तो कुछ समय के बाद उसे यह रोग दुबारा से हो जाता है।

(प्रतिबिम्ब बिन्दु पर दबाव डालकर एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा इलाज करने का चित्र)

एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा शियाटिका रोग का उपचार करने के लिए दिए चित्र के अनुसार रोगी के पैरों में पाए जाने वाले लम्बर, मूत्राशय, गुर्दे, तथा सैक्रम से सम्बन्धित प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर प्रेशर देना चाहिए। इस प्रकार के बिन्दु पैर के तलुवों में, जिस भाग से एड़ी शुरू होती है, उस भाग के आस-पास के क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इस रोग को जल्द ठीक करने के लिए चित्र में दिए गए सारे काले निशान वाले केन्द्र बिन्दुओं पर प्रेशर देना चाहिए। अगर इन भागों को दबाने पर दर्द हो रहा हो तब भी इन बिन्दुओं पर प्रेशर देना चाहिए। इन बिन्दुओं पर प्रेशर अंगूठों के द्वारा देना चाहिए (जैसा कि चित्र में दिखाया गया है)। वैसे तलुवे के ये भाग काफी सख्त होते हैं इसलिए आवश्यक हो तो किसी सख्त रबड़, प्लास्टिक या फिर किसी लकड़ी से बनाये गये गोल मुलायम उपकरण द्वारा चित्र में दिये गए काले बिन्दुओं को देखकर रोगी के पैर के तलुवों में पाए जाने वाले बिन्दुओं पर प्रेशर देना चाहिए।

(प्रतिबिम्ब बिन्दु पर दबाव डालकर एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा इलाज करने का चित्र)

एड़ियों का यह भाग काफी सख्त होता है इसलिए किसी रबड़ या लकड़ी के उपकरण के द्वारा चित्र में दिये गए प्रतिबिम्ब बिन्दुओं को देखकर रोगी के तलुवों पर प्रेशर देना चाहिए। इस प्रकार से प्रेशर देते वक्त यह ध्यान रखना चाहिए कि जो भाग दबाने पर दर्द कर रहा हो वही भाग इस रोग का केन्द्र बिन्दु होता है।

शियाटिका रोग का उपचार करने के लिए पैर के टखने पर एक प्रमुख केन्द्र बिन्दु होता है।

(प्रतिबिम्ब बिन्दु पर दबाव डालकर एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा इलाज करने का चित्र)

टखने पर पाए जाने वाले यह केन्द्र बिन्दु बहुत ही नाजुक होते हैं इसलिए इन केन्द्रों पर चित्र के अनुसार प्रेशर रोगी की सहनशक्ति के हिसाब से देना चाहिए और सबसे अच्छा यह रहता है कि टखने के साथ-साथ टखने के आस-पास पाये जाने वाले सभी केन्द्र बिन्दुओं पर भी दबाव दिया जाए।

(प्रतिबिम्ब बिन्दु पर दबाव डालकर एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा इलाज करने का चित्र)

शियाटिका के दर्द को रोकने के लिए टांगों के निचले भाग, हाथों तथा पैरों के ऊपर के भाग में पाए जाने वाले बिन्दुओं पर प्रेशर देना चाहिए।

(प्रतिबिम्ब बिन्दु पर दबाव डालकर एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा इलाज करने का चित्र)

इस रोग को ठीक करने के लिए इस चित्र के अनुसार हथेलियों के निचले भाग तथा हाथों के अंगूठे तथा पहली अंगुली के पास दबाव देने से दर्द में आराम मिलता है। प्रत्येक बिन्दु पर रोगी की सहनशक्ति के अनुसार कम से कम 2 मिनट तक प्रेशर दे सकते हैं।

(प्रतिबिम्ब बिन्दु पर दबाव डालकर एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा इलाज करने का चित्र)

इस चित्र में दिए गए एक्यूप्रेशर बिन्दु के अनुसार रोगी के शरीर पर एक्यूप्रेशर दबाव देकर शियाटिका के दर्द का उपचार किया जा सकता है। रोगी को अपना इलाज किसी अच्छे एक्यूप्रेशर चिकित्सक की देख-रेख में कराना चाहिए क्योंकि एक्यूप्रेशर चिकित्सक को सही दबाव देने का अनुभव होता है और वह सही तरीके से शियाटिका के दर्द से पीड़ित रोगी का उपचार कर सकता है। इस प्रकार शरीर के भाग पर प्रेशर देने से इस रोग के दर्द से राहत मिल सकती है।

शियाटिका के साथ सहायक प्रतिबिम्ब केन्द्र बिन्दु-

इन सभी दिए गए चित्रों के अनुसार केन्द्र बिन्दुओं पर प्रेशर देने से इस रोग के दर्द से राहत मिल सकती है लेकिन इस रोग के दर्द को दूर करने के लिए इसके कुछ और भी सहायक केन्द्र बिन्दु हैं जो शियाटिका के रोग को दूर करने में सहायक हो सकते हैं।
(प्रतिबिम्ब बिन्दु पर दबाव डालकर एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा इलाज करने का चित्र)

दिए गए चित्र के अनुसार हाथ की हथेलियों पर प्रेशर देने से इस रोग का दर्द काफी कम हो जाता है और रोगी को शियाटिका रोग से काफी हद तक छुटकारा मिल जाता है।

(प्रतिबिम्ब बिन्दु पर दबाव डालकर एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा इलाज करने का चित्र)

दिये गये चित्र के अनुसार रोगी की रीढ़ की हड्डी से थोडा सा हटकर प्रेशर देने से शियाटिका के दर्द में काफी आराम मिलता है। यदि किसी रोगी के इस प्रकार के केन्द्रों पर प्रेशर देने से दर्द बढ़ने लगे तो तुरंत ही इन केन्द्रों पर प्रेशर देना बंद कर देना चाहिए।

आंखों की भौहों के ठीक नीचे के केन्द्र बिन्दु पर अगर प्रेशर दिया जाए तो शियाटिका के रोग से छुटकारा मिल सकता है। इन केन्द्रों पर प्रेशर कुछ सेकेण्ड के लिए देना चाहिए।

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