आइये आज ब्राह्मणों की बात करते है...
नफरत सिर्फ ब्राह्मणों के खिलाफ क्यों फैली, नफरत यादव, सुनार, धोबी, कुम्हार या बाकी जातियों के खिलाफ क्यों नहीं फैली, ये एक वाजिब प्रश्न है...!
सुनिए जरा...
अगर आप यादव से नफरत करेंगे तो उससे दूध लेना बंद कर देंगे; पर फिर भी हिन्दू रहेंगे...
अगर आप सुनार से नफरत करेंगे तो उससे आभूषण बनवाना बंद कर देंगे, पर फिर भी आप हिन्दू रहेंगे...
अगर आप धोबी, कुम्हार से नफरत करेंगे तो कपड़े धुलवाना और बर्तन खरीदना बंद कर देंगे, पर फिर भी आप हिन्दू रहेंगे...
पर, अगर आप ब्राह्मण से नफरत करेंगे तो तो आप सभी धार्मिक रस्मों जैसे कि जन्म, शादी, मृत्यु के लिए उसके पास जाना बंद कर देंगे और और ये सब रस्में आ कर चर्च का पादरी करेगा...
ब्राह्मणों से नफरत करना यानी
anti-brahminism, 2000 साल पुराने "जोशुआ" प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसका एजेंडा पूरे हिंदुस्तान को ईसाई मुल्क बनाना है, हिंदुओं का धर्मान्तरण तब तक नहीं हो सकता जब तक वे ब्राह्मणों के संपर्क में है,
हिन्दू जातियों में ब्राह्मणों के लिए इतनी नफरत बढ़ाओ की वे ब्राह्मणों के पास किसी भी काम के लिए जाना बंद कर दे, और धर्मान्तरण के दरवाजे खुल जाए...
सबसे पहले ईसाई मिशनरी Robert Caldwell ने आर्यन-द्रविड़ियन थ्योरी बनाई ताकि दक्षिण भारतीयों को अलग पहचान देखे धर्मान्तरण किया जाए, जिसमे उत्तर भारतीयों को ब्राह्मण आर्यन दिखाया गया...
इनकी एजेंडा यहां खत्म नहीं हुआ। इसके बाद दूसरे मिशनरी और संस्कृत विद्वान John Muir और मैक्स मुलर ने मनुस्मृति को एडिट किया, इसमें वामपंथियों ने वैसे ही मदद की जैसे कि 26/11 के मुम्बई हमले में भारतीय मुसलमानों ने मदद की...
ब्राह्मण विरोध के चलते अम्बेडकर ने कई हिन्दू जातियों को दलित के नाम से टैग कर दिया जो ब्रिटिश सरकार में डिप्रेस्ड क्लासेज था, मंडल कमीशन के ब्राह्मण विरोधियों ने कई जातियों को पिछड़ा घोषित कर दिया जिनके राजघराने तक चलते थे...
ब्राह्मण विरोध, सनातन विरोध का ही छद्म नाम है, क्योंकि ब्राह्मणवाद, मनुवाद तो बहाना है...!
*असली मकसद सनातन धर्म और हिन्दू को मिटाना है...!*
मेने आज तक कावड़ लेने जाने वालो में नही देखा कोन ब्राह्मण,कोन क्षत्रिय,कोन दलित है वहाँ सब भोले ही भोले होते है
और सिर्फ जय भोले की
मेने आज तक मरण उपरांत सभी को एक ही शमशान घाट पर जाते देखा है वहाँ कोन सा ब्राह्मण है कोन दलित या कोन क्षत्रिय पता नही
किसी के लिये कोई अलग सी व्यवस्था देखी
फुट डालो शासन करो कि नीति
आज हम इतने टूट चुके है कि हम पर ईसाई समाज हावी हो चुका है
जब तक कोई अंग्रेजी न बोले तब तक हमे वो व्यक्ति अज्ञानी ही लगता है हमारी माताएं बहने उनकी औरतो की तरह अर्ध नग्न घूम रही है लिव इन रिलेशनशिप से लेकर के गेर मर्दो के साथ सम्बन्ध बनाए जा रहे है वैसे ही वस्त्र पहने जा रहे है वैसी ही शिक्षा दी जा रही है शराब,सिगरेट से लेकर के वैसा ही खान पान अपनाया जा रहा है
वो लोग हमें बदलने में कोई कसर नही छोड़ रहे है परन्तु हम उसका विरोध नही कर रहे है
सही मायनों में हमारी जड़े कट रही है
संलग्न चित्र आपको यथार्थ का अनुभव कर आएगा कि ब्राह्मण से कटने के बाद आज क्या हाल हुआ है यह एक ज्वलंत तस्वीर है जो भविष्य की भी कहानी कह रही है
!!.जय श्रीराम.!

Comments
Post a Comment
अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद