आइए ! थोड़ा-बहुत जाने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत, अमर बलिदानी स्वo मंगल पांडेय के घर-परिवार की वर्तमान परिस्थिति के बारे मे --
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मंगल पांडेय के वंशज,
मंगल पाण्डे कट्टर ब्राह्मण होने के साथ ही एक समर्पित शिवभक्त भी थे। आज भी उनकी ओर से पूजित शिवलिंग सहसा ही इसका बोध कराता है।
मौजूदा घर के ठीक सामने बने एक छोटे से शिवालय में उक्त शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग की पूजा मंगल पाण्डेय सेना में भर्ती होने से पहले तथा जब तक वे गांव आते रहे हमेशा करते थे। शिव में उनकी अटूट आस्था थी और इसके लिए वे घंटो शिव पूजा भी किया करते थे।
आज ये मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में जरूर है, लेकिन आज भी इस मंदिर में गांव के लोग पूजापाठ करते हैं।
(कुश्ती के शौकीन थे मंगल पाण्डेय)
मंगल पाण्डेय के बारे में बुजुर्गों की यादों को जेहन में समेटे आज भी बुजुर्ग उस प्रसंग को कहते नहीं अघाते।
मंगल के बारे में कुरेदते ही वे मंगल की वीरता का बखान नम आंखों से करने लगते हैं।
बुजुर्ग बताते हैं कि अमर शहीद मंगल पाण्डेय कुश्ती के शौकीन थे और अखार में क्षेत्र में नामी-गिरामी अखाड़ा था। यहां मंगल पाण्डेय कुश्ती लड़ने आया करते थे।
कहा जाता है कि यहीं पर कभी लोरिक-संवरू नामक वीर भी अखाड़े में कुश्ती लड़ते थे और इसी वजह से इस गांव का नाम अखार पड़ गया।
आज भी उनकी यादों को सहेजते हुए युवा क्लब अखार की संयोजक रणजीत कुमार सिंह की देखरेख में अखाड़ा व व्यायामशाला चला रहा है।
अखार निवासी 85 वर्षीय वृद्ध गिरनारी सिंह बताते हैं कि उनके दादा स्व.गोगा सिंह बताते थे कि,
मंगल पाण्डेय पड़ोसी गांव नगवां से अखार में कुश्ती लड़ने आया करते थे।
80 वर्षीय बृज बिहारी सिंह ने बताया कि मंगल पाण्डेय हमारे बाबा के परम मित्र थे। जब भी वे गांव आते उनसे मिले बगैर वापस नहीं जाते थे।
70 वर्षीय संत विलास सिंह ने बताया कि उनके बाबा बसावन सिंह से मंगल पाण्डेय ने कुश्ती के कई गुर भी सीखे थे।
अमर शहीद मंगल पाण्डेय को बलिया व फैजाबाद जिले का निवासी होने को लेकर प्राय: विवाद उठता ही रहा है। हालांकि
अब यदि मंगल पाण्डेय के प्रपौत्र की मानें तो उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ ने मंगल पाण्डेय को नगवा का निवासी होना मान लिया है।
हालांकि पूर्व में नगवां स्थित मंगल पाण्डेय की मूर्ति का लोकार्पण करने पहुंच तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मंच से घोषणा की थी कि हर स्तर से प्रमाणित हो चुका है कि मंगल पाण्डेय मूल रूप से बलिया जिले के नगवा गांव के ही निवासी थे। ऐसे में इस विवाद में कोई दम नहीं है।
जिन्होंने भारत को आजाद कराने के लिए ब्रितानी हुकूमत का डटकर मुकाबला किया। जिन्होंने अपने परिवार की चिंता किए बगैर अंग्रेजों के जुल्म-ओ-सितम सहे। जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपनी पहली शहादत दी। आज अगर वे जिंदा होते तो नि:संदेह आजाद भारत में उनका शीश शर्म से झुक जाता।
आजादी की जंग के पहले शहीद मंगल पाण्डेय के वंशजों के लिए इससे शर्मनाक स्थिति और क्या होगी कि जिस सैनिक ने भारत की आजादी के लिए जंग का पहला शंखनाद किया, आज उनके वंशज उसी सेना से दूर हैं।
प्रस्तुत है मंगल पाण्डेय के परिवार की ऐसी ही दर्द-ए-दास्तां व मंगल पाण्डेय की अनछुए पहलुओं को पेश करती एक रिपोर्ट...’’
आजादी की जंग का वह पहला शहीद, जिसने ब्रितानी बेड़ियों में जकड़ी भारत माता को आजाद कराने के लिए अपनी आहुति दे दी, उसके वंशज आज सेना से दूर हैं।
ऐसा नहीं है कि अमर शहीद मंगल पाण्डेय के वंशज सेना में जाना नहीं चाहते। इस परिवार के युवाओं में सेना में जाने की छटपटाहट तो है, लेकिन भ्रष्टाचार के चरम ने उनकी इन हसरतों पर पानी फेर दिया है।
इतना ही नहीं, मंगल पाण्डेय के नाम पर बना स्मारक भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ा है। घर की दशा दयनीय है। टूटे-फूटे आवास में जिंदगी गुजार रहे मंगल के वंशजों को आज भी किसी रहनुमा की तलाश है।
कौन हैं मंगल पांडेय के वंशज
मंगल पांडेय का पैत्रिक गाँव नगवा (बलिया) स्थित घर, जहाँ आज भी उनके वंशज रहते हैं।
आम तौर पर ये तो सभी जानते हैं कि आजादी की जंग में सेना में रहकर विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले बलिया जिले के नगवां गांव निवासी सुदिष्ट पाण्डेय के पुत्र अमर शहीद मंगल पाण्डेय अविवाहित थे।
लेकिन उनके दो सगे भाई थे।
बड़े भाई नरेंद्र पाण्डेय व छोटे भाई ललित पाण्डेय।
ललित पाण्डेय के दो पुत्र क्रमश: महावीर पाण्डेय व महादेव पाण्डेय हुए। महावीर पाण्डेय के एकमात्र पुत्र थे बरमेश्वर पाण्डेय।
स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में मंगल पाण्डेय से प्रेरित बरमेश्वर भी आजीवन अविवाहित रहते हुए अपना जीवन देश के नाम उत्सर्ग कर दिया।
वहीं महादेव पाण्डेय के दो पुत्र क्रमश: महेश पाण्डेय व सुरेश पाण्डेय। सुरेश पाण्डेय के चार पुत्र क्रमश: विजय कुमार पाण्डेय, अजय कुमार पाण्डेय, नरेंद्र कुमार पाण्डेय और अनिल कुमार पाण्डेय।
इनमें नरेंद्र पाण्डेय सेना में रहे और 17 वर्ष 20 दिन की सेवा के उपरांत पहली मार्च 2001 को सेवानिवृत्त हो गए।
वहीं महेश पाण्डेय के इकलौते पुत्र रघुनाथ पाण्डेय इन दिनों केंद्रीय विद्यालय नैनीताल के प्रधानाचार्य पद पर हैं। इसके साथ ही इनका पूरा कुनबा नैनीताल में ही बस गया है।
बलिया जिले के नगवां गांव में अब रहते हैं मंगल पाण्डेय के प्रपौत्र विजय कुमार पाण्डेय व अजय कुमार पाण्डेय।
विजय 58 साल के बुजुर्ग हैं। इनके दो पुत्र क्रमश: अरविंद कुमार पाण्डेय (30) व विपिन कुमार पाण्डेय (24) हैं।
अजय 50 साल के हैं और इनके दो पुत्र क्रमश अनूप (20) व अनुज (18) हैं।
अनूप बीफार्मा तो अनुज पालिटेक्निक कर बेरोजगारी की दशा में उत्तरांचल के उधमसिंह नगर में खेती कर रहे हैं।
वहीं नरेंद्र पाण्डेय के दो पुत्र क्रमश: शशांक (20) जो बलिया स्थित सतीश चंद्र कॉलेज से बीए फाइनल कर रहे हैं तो दूसरे सौरभ पाण्डेय (13) महर्षि वाल्मिकी बाल विद्यालय काजीपुरा में पढ़ रहे हैं। किसी भी स्थिति में इस राष्ट्र को परम वैभव की तरफ ले जाने संपर्क करें 9336919081

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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद