ब्रिटेन ने भारत की Demography Change करने के लिए कई Non-Hindu Religions को बढ़ावा दिया था जैसे ईसाईयत और इस्लाम, तो Hinduism के ही कई Sects को अलग धर्म के तौर पर स्थापित किया जैसे जैन, बौद्ध और सिख, भारत में पहला मदरसा किसी मौलवी या इमाम ने नहीं बल्कि ब्रिटेन ने खुलवाया था, आज हम जो इस्लाम का प्रसार देखते हैं उसमें सूफी ऑर्डर्स के बाद ब्रिटिशों का सबसे बड़ा योगदान था, ब्रिटेन ने ना ही मात्र इस्लाम को संरक्षण दिया बल्कि उसे बढ़ाने में भी भरपूर योगदान दिया, बहुत बड़ी ऐसी मुसलमान आबादी है जिन्होंने ब्रिटिशकाल में इस्लाम कबूल किया था, जैसे बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल, यूपी, बिहार, सिंध, खैबर, बलूचिस्तान, कश्मीर और पंजाब
नूरिस्तान, चित्राल, हुंजा, कुनार और बादख्शान जैसे हिमालयन क्षेत्रों में मात्र 110 वर्ष पहले ही ब्रिटिशों के संरक्षण में अफगानी अमीर अब्दुल रहमान खान ने पहाड़ी हिंदुओं को तलवार के बल पर इस्लाम मे धर्मांतरित करने का मिशन चलाया था, नूरिस्तान एरिया को आज भी काफिरिस्तान ही कहकर बुलाया जाता है
यह है वारेन हेस्टिंग्स, ब्रिटिश सरकार का गवर्नर जनरल ऑफ बेंगाल। इसमे 1780 में भारत मे सबसे पहला मदरसा क़याम किया था। उस मदरसे का नाम कलकत्ता मदरसा/मोहम्मदन मदरसा इत्यादि था। इस मदरसे का नाम खुद इसने कलकत्ता मोहम्मडन कॉलेज रखा था। इस मदरसे का मकसद Natural Philosophy, अरबी, फ़ारसी, Theology और Islamic Law, Astronomy, Grammar, Logic, Arithmetic, जॉमैट्री यादि सिखाना था। इस मदरसे ने शिक्षा के अलग अलग मोडल जैसे दरसे निजामिया और फिरंग महली पद्धति अपना रखी थी। इसके शुरुआती संचालक का नाम मुल्ला मुजदुद्दीन था लेकिन 1792 में ढंग से मैनेज न कर पाने के कारण उनको हटाकर मोहम्मद इस्माइल को रखा गया। 1819 में ब्रिटिश अफसर कप्तान एरॉन को मदरसे का भार सौंपा गया और 15 अगस्त 1827 में इस मदरसे में पहला इम्तिहान हुआ। 1826 में डॉ ब्रेटन के देख रेख में यहां भारत के पहले मेडिकल क्लास में से एक कि स्थापना हुई। 10 साल तक सफलता से मेडिकल क्लासेज चलने के बाद मदरसे ने अपना अलग मेडिकल स्कूल बनाया जिसका नाम कलकत्ता मेडिकल कॉलेज , 1836 में बना था। इसके बाद यहां अंग्रेज़ी भाषा के अलावा भी बहुत कुछ पढ़ाया गया लेकिन 1947 में मदरसे का सारा लेजा सकने वाला मटेरिअल तब के ईस्ट पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में ले जाया गया। मौलाना आज़ाद ने इसको वापस खुलवाया और आज यह मदरसा आलियाः यूनिवर्सिटी के रूप में बंगाल में कार्यरत है। यहां आर्ट, साइंस, मैनेजमेंट, इंजिनीरिंग, नर्सिंग और इस्लामियत की पढ़ाई होती है।
नूरिस्तान, चित्राल, हुंजा, कुनार और बादख्शान जैसे हिमालयन क्षेत्रों में मात्र 110 वर्ष पहले ही ब्रिटिशों के संरक्षण में अफगानी अमीर अब्दुल रहमान खान ने पहाड़ी हिंदुओं को तलवार के बल पर इस्लाम मे धर्मांतरित करने का मिशन चलाया था, नूरिस्तान एरिया को आज भी काफिरिस्तान ही कहकर बुलाया जाता है
यह है वारेन हेस्टिंग्स, ब्रिटिश सरकार का गवर्नर जनरल ऑफ बेंगाल। इसमे 1780 में भारत मे सबसे पहला मदरसा क़याम किया था। उस मदरसे का नाम कलकत्ता मदरसा/मोहम्मदन मदरसा इत्यादि था। इस मदरसे का नाम खुद इसने कलकत्ता मोहम्मडन कॉलेज रखा था। इस मदरसे का मकसद Natural Philosophy, अरबी, फ़ारसी, Theology और Islamic Law, Astronomy, Grammar, Logic, Arithmetic, जॉमैट्री यादि सिखाना था। इस मदरसे ने शिक्षा के अलग अलग मोडल जैसे दरसे निजामिया और फिरंग महली पद्धति अपना रखी थी। इसके शुरुआती संचालक का नाम मुल्ला मुजदुद्दीन था लेकिन 1792 में ढंग से मैनेज न कर पाने के कारण उनको हटाकर मोहम्मद इस्माइल को रखा गया। 1819 में ब्रिटिश अफसर कप्तान एरॉन को मदरसे का भार सौंपा गया और 15 अगस्त 1827 में इस मदरसे में पहला इम्तिहान हुआ। 1826 में डॉ ब्रेटन के देख रेख में यहां भारत के पहले मेडिकल क्लास में से एक कि स्थापना हुई। 10 साल तक सफलता से मेडिकल क्लासेज चलने के बाद मदरसे ने अपना अलग मेडिकल स्कूल बनाया जिसका नाम कलकत्ता मेडिकल कॉलेज , 1836 में बना था। इसके बाद यहां अंग्रेज़ी भाषा के अलावा भी बहुत कुछ पढ़ाया गया लेकिन 1947 में मदरसे का सारा लेजा सकने वाला मटेरिअल तब के ईस्ट पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में ले जाया गया। मौलाना आज़ाद ने इसको वापस खुलवाया और आज यह मदरसा आलियाः यूनिवर्सिटी के रूप में बंगाल में कार्यरत है। यहां आर्ट, साइंस, मैनेजमेंट, इंजिनीरिंग, नर्सिंग और इस्लामियत की पढ़ाई होती है।

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अजय कर्मयोगी गुरुकुलम अहमदाबाद