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स्वामी विवेकानन्द और रामकृष्ण मिशन, दयानन्द सरस्वती और आर्यसमाज, गुरु गोलवरकर और आरएसएस,डबल श्री और आर्ट ऑफ लिविंग, ब्रह्मकुमारी, गायत्री परिवार, इस्कॉन और आजकल के अग्निवीर जैसे अनेक संगठन हुए और आज भी हैं जो शास्त्र को पूर्णतः नही मानते और उसमे मनमाना बदलाव करते है जबकि सनातन का मतलब ही है जो समय के साथ न बदले और यदि बदल गया तो वो सनातन ही कैसा? पर ये लोग है जो सदैव मनमाना परिवर्तन के पक्षधर रहे हैं, इनमें से सबमे एक कॉमन बात रही है कि ये सब वर्णव्यवस्था को समाप्त करने में पूरी ताकत लगा दिए जिसके कारण इस देश मे धर्म का पतन हो गया। मित्रों सनातन धर्म मे मानव समाज की जो व्यावहारिक व्यवस्था है रही जिसके कारण भारत सदैव धन, बल, ज्ञान से सम्पन्न रहा उसका एकमात्र कारण है कि वर्णधारित कर्म सिंद्धान्त जिसके ऊपर भारत की सम्पूर्ण अर्थशास्त्र, शिक्षा व्यवस्था, रक्षा व्यवस्था, कृषि, गौरक्षा वाणिज्य इत्यादि सब कुछ टिका हुआ था। पर अंग्रेजो ने जब समझ लिया कि लगातार 800 वर्षों तक भारत से लड़ने के बाद भी मुसलमान, भारत को इस्लामिक राष्ट्र नही बना सके तो उन्होंने इसबात पंर शोध करना शुरू किया कि आखिर ऐसी क्या बात है जिसके कारण भारत के संस्कृति को 800 वर्षों में लगातार लड़ने के बाद भी मुसलमान उसका रत्ती भर नुकसान नही कर पाए ? तो उन्होंने अपने शोध में पाया कि इसका एकमात्र कारण वर्ण व्यवस्था और इसपर आधारित पीढ़ियों से कर्म व्यवस्था है। अतः उन्हें ये भी पता था कि इसे सीधे समाप्त नही किया जा सकता फिर उन्होंने अनेक लोगों को जो साधु संत के भेष में थें को बहकवा कर झूठे समानता, एकता, भेदभाव इत्यादि भावनात्मक बातों को लेकर हिन्दू धर्म मे सुधारवाद के नाम पर इन्हें वर्णाश्रम व्यव्स्था को समाप्त करने के लिए खड़ा किया जिसमें आगे चलकर कई सारी कड़ियाँ निकल सामने आई। अगर आप गहराई से छानबीन करेंगे तो इन सबका लिंक सीधे अंग्रेजो से ही मिलेगा। अतः इस आधार पर इस देश मे दो तरह का हिन्दुत्व है एक वो जो इन फर्जी साधु संतों और संगठनों ने खड़ा किया जिनमे मानवो को देह के आधार पर एकता की बात कही और एक वो सन्त आचार्य हैं जो जन्मना वर्णाश्रम व्यवस्था को मानते है जिसका आधार कभी न परिवर्तित होने वाले सनातनशास्त्र है। जिसके रक्षक स्वयं सभी वैष्णवाचार्य और शंकराचार्य है। आज इस देश का दुर्भाग्य यह है कि इन हिन्दुत्व के नाम पर खड़े फर्जी हिन्दू संगठनों, साधुओं, समाजसुधारकों ने इस देश की वैदिक परम्परा को नष्ट करने में कोई कसर नही छोड़ी है और इस देश की शासन व्यवस्था को अंग्रेजो ने दिया जिसको बड़ी ईमानदारी से ये लोग ही चला रहे हैं, इन धूर्त संगठनों ने इस देश के भोले भाले लोगों को मूर्ख बनाकर पिछले सैकड़ो वर्षो में एक ऐसा वर्ग तैयार कर लिया है जो इनके इशारे पर बिना स्वतंत्र चिंतन किये नाचते है, ये धूर्त संगठन वर्षों से हिन्दुओं को पतन के राह पर लेकर जा रहे है और इनके साथ जुड़कर आज का मूर्ख हिन्दू सोचते हैं कि वो धर्म का कार्य कर रहे है। अरे जिस डर के कारण कुरुक्षेत्र में अर्जुन युद्ध करने से मना कर रहा था वो काम तो स्वयं ये सारे संगठन लोगों को बरगलाकर करवा रहे हैं। आज संघ अपने स्वयमसेवकों को श्रीमद्भगवत गीता पढ़ने को नही कहता क्योंकि उसे पता है कि यदि वो वैसा करेगा तो सबसे पहले ये स्वयमसेवक गीता पढ़कर संघ को ही लात मारेंगे। अरे गीता के पहले अध्याय को ही कोई समझ ले ढंग से तो वो स्वामी विवेकानन्द, आरएसएस जैसे संगठनों को सबसे पहले छोड़ेगा, पर हाय रे दुर्भाग्य इन हिन्दूओं को अपने को बस नाम का हिन्दू कहलाने में अच्छा लगता है पर हिन्दू धर्म को अपने आचरण में नही लाना चाहते, ये नाम के साधक है आचरण के नही। जब संघ के प्रभाव में आकर शिखा सूत्र, गायत्री संध्या इत्यादि अपने मूल धर्म से हीन ब्राह्मणों को, जब शंकराचार्यो को धर्म सिखाते देखता हूँ, तब हम जैसा सामान्य सनातनी व्यक्ति ईश्वर के ओर ताकने लगता है और कहता है वाह रे लीलाधर तेरी लीला बड़ी जबरदस्त है।
खैर ये वीडियों सुने और सोचे कि तुम्हारे मस्तिष्क पे किस संगठन या विचारधारा का कब्जा है।


राम
#सनातनी दीपक कुमार केशरी की पोस्ट कोपी

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