कादरखान की चाल
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कादरखान मुंबई के हिरे के कारिगरों के बीच बहुत पोप्युलर थे । कम से कम एक दिन में कोइ ना कोइ कारीगर उसका नाम लेता ही था । कारण था कादरखान की टेढीं चालें । तेढी चाल चलके सामनेवालों को महात करते थे, परेशान करते थे ।
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हिरे में भी कभी टेढी चाल चलनी पडती है । पोलिशिंग के दरम्यान कोइ गांठ ( डुसु ) आ जाती है या हिरेके मूल गठन में ही मूल गठन के अलग अलह ढांचे का मिश्रण (आंतरी का जाल) आ जाता है । ऐसे हिरों के काटने की कोई फिक्स दिशा नही मिलती चाहे ३६० अंश की सभी दिशा में कोशीश करके देख लो और पूरे दिन लगे रहो । हिरा घीसने का नाम ही नही लेता । थक हार कर ऐसे अधुरे हिरे कारिगर मेनेजर को वापस देने जाता है तो मेनेजर और अन्य अनुभवि कारीगर कादरखान की चाल चलने के लिए कहते हैं । कादरखान की चाल से हिरा घीसने लगता है । वो चाल कैसे थी वो तो कारिगर जाने ।
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कादरखान नही रहे लेकिन उनकी चाल उनके पहले भी थी और उनके बाद भी चलती रहेगी । हर फिल्म, टीवी सिरियल और समाज में कादरखान की चालें चलती रहती है । राजनीतिने तो हद कर दी है । कादरखान की चाल ही महत्व की बाबत हो गयी है । सरकार अपने स्वार्थ की खातिर जनता के साथ कादरखान की चालें चलती रहती है । आज कोइ भी नेता हिरो का काम नही करता खादरखान जैसा विलनका काम ही करता है । दानव समाजी विश्व धन माफिया उनके अभियान "न्यु वर्ल्ड ऑर्डर" के लिए धरती के गोले को पोलिश कर रहे हैं । उनके शैतान भगवान को बिना कोइ भगवान की गॉडलेस, साफसुथरी धरती चाहिए ताकि धरती पर अच्छी तरह शैतानियत को चित्रित किया जा सके । उसमें घर्म नाम की गांठ, धर्म से जुडे भगवान धरती की घिसाई को रोक रहे हैं । हिन्दु नाम की गांठ उनको अधिक परेशान करती है । यह गांठ शैतानो की अनुचित घिसाई को रोकती है । उन शैतानोने कादरखान की चाल से अपने हजारों प्रतिनिधि को भारत में हिन्दुत्व की गांठ निकालने के लिए ही बैठाया है । भारतकी कोर्ट को भी खरीद लिया है ताकि हिन्दुत्व को जडमूल से निकालने के लिए इन शैतानों को मदद करे । इनके साथी विविध भगवानो पर जातपात की टिप्पणी से हिन्दुत्व की गांठ को कमजोर बना रहे हैं ।
दानव समाजियों की अनुचित घिसाई से निकला पावडर ( हिन्दु विरोधी जनता ), सरकार और कोर्ट ये सब हिन्दुत्व को मिटाने के लिए कादरखान की चाले चलने लगे हैं । हिन्दु जनता अभी भी जाग नही रही है । कादरखान की चाल को निष्फल करने और उसे मारने के लिए कोइ जीतेन्द्र या धर्मेन्द्र नही आनेवाले हैं, बल्कि पूरा बोलीवूड शक्तिकपूर बनके दानव समाजियों के पक्ष में खडा हो जाएगा।
