#गलत_गर्भाधान_और_देसी_गाय_की_नस्लें_!
पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर अधिक प्रचार-प्रसार के कारण लोगो को देसी-और विदेशी गायों में अंतर तो अच्छे से मालूम हो गया है,लेकिन देसी गाय की नस्लें लगतार ख़राब की जा रही है ,
अब इन अंग्रेज़ो ने और नई चाल-चली है जब से इनको पता चला है की भारतीय लोग देशी गाय और सूअर से विकसित विदेशी गाय (जर्सी ,होलेस्टियन ,फ्रीजियन) मे अंतर समझने लगे है !! तब से इन अंग्रेज़ो ने हमारी देशी गाय की नस्ल को भी बर्बाद करने का नया यड्यंत्र रचा है !
भारत में वर्तमान में लगभग 37 प्रकार की देसी गायों की नस्लें पाई जाती है,जैसे, गिर गाय,साहिवाल,लाल सिंधी,राठी,थरपार्कर,कांक्रेज ,ऐसे कुल 37 प्रकार की देसी गायों की नस्लें है !
अब जब गायों के गर्भाधान का समय आता है,तो प्राकृतिक ढंग यह है कि गाय जिस नस्ल की हो उसी नस्ल के बैल के वीर्य से उसका गर्भाधान होना चाहिए,जैसे गिर नस्ल की गाय है , तो बैल भी गिर नस्ल का होना चाहिए ,साहिवाल नस्ल की गाय है तो बैल भी साहिवाल नस्ल का होना चाहिये !
लेकिन ये क्या कर रहे है कि कृत्रिम गर्भधारण विधि द्वारा विदेशी (जर्सी ,होलेस्टियन ,फ्रीजियन) सांडो का वीर्य लेकर भारतीय गौ माता को इंजेक्शन से ठोका जा रहा है और गर्भवती बनाया जा रहा है !! इसके लिए 80 बैल विदेशो से मंगवाए जा रहे है !
सरकार का एक मंत्रालय है(NDDB), National Dairy Development Board उसमे बैठे अधिकांश मूर्खो के मूर्ख ये काम करने जा रहे है पर इसमें एक आध है ऐसे ही व्यक्ति हैं जो इसका विरोध भी कर रहे हैं पर उनका स्वर्ग बहुत धीमा कर दिया गया है ! सरकार ने तो ये नियम बना डाला है कि सरकारी विभाग में किसानो को कृतिम गर्भाधान के लिए जो वीर्य मिलेगा वो विदेशी बैलों का ही होगा ! जब से कृषि ट्रैक्टरों से होने लगी है भारतीय बैल तो कत्लखाने में कटने जा चुके है !
परिणाम ये हो रहा है पूरी की पूरी भारतीय गाय की नस्ल ही खराब हो रही है ! उसमे विदेशी सूअर से विकसित (जर्सी ,होलेस्टियन ,फ्रीजियन) गायों जैसे अवगुण आ रहे है ,गाय सारा दिन आलसी होकर बैठी रहती है ,ज्यादा चलती फिरती भी नहीं ,तरह तरह की बीमारियाँ उसको लग रही है ,उसके मूत्र मे जो ओषधीय गुण है वो भी खत्म हो रहे है !!
आप खुद सोचिये अगर बैल विदेशी नस्ल का है और गाय भारतीय नस्ल की (गिर,साहिवाल) अदि है और जब इनका गर्भाधान होगा फिर जो आगे नस्ल आयेगी ,वो साहिवाल या गिर नहीं होगी वो विकृत हो जायेगी !
इस प्रकार दूध की मात्रा बढ़ाने के बहाने से बची कुची भारतीय गायों की नस्लों को ख़त्म किया जा रहा है !
दूध की मात्रा बेशक विदेशी गायों की तरह बढ़ भी जाये लेकिन उसका करोगे क्या ?? जहर कम हो या ज्यादा उसका परिणाम एक होता है आपको बीमारियाँ आएंगी ,और आप मरोगे ! ऐसे जहरीले दूध की मात्रा बढ़ा कर आप क्या कर लोगे ??
जिस देशी गौ माता को हम भाव नहीं दे रहे ! हमारी उसी देशी गौ माता को ब्राजील वाले अपने देश लेकर जा रहे है और उसकी संख्या बढ़ाकर 2 लाख डालर ( लगभग 1 करोड़ ) से ज्यादा मे एक गाय बेच रहे है !! और हम अधिक दूध के चक्कर मे विदेशी (जर्सी ,होलेस्टियन ,फ्रीजियन ) A1 केटागिरी का दूध पी रहे है ! 1970 के दशक में ब्राजील 10000 भारतीय गौवंश अपने देश ले गया था आज उनकी संख्या 1 करोड़ 50 लाख को पार कर गई है !
अपनी देसी भारतीय गाय हम लोगो ने या तो क़त्लखानों में काटने के लिए भेज दी ,और जो बची-कुची भारतीय गाय की नस्लें है उसे हम विदेशी बैलों के वीर्य के टीके लगाकर ख़त्म कर रहे है !!
हमारे मूर्ख नीति निर्धारकों ने दूध की मात्रा को गौमाता की उपयोगिता का मापदंड बना दिया। भारतीय संस्कृति का इससे बड़ा अपमान क्या हो सकता था। मित्रो हमने अपनी कमियों को सुधारने की बजाय अपनी गौमाता पर ही कम दूध देने का लांछन लगा दिया। इतिहास गवाह है कि भारत वर्ष में जब तक गौ वास्तव में माता जैसा व्यवहार पाती थी – उसके रख-रखाव, आवास, आहार की उचित व्यवस्था थी, देश में कभी भी दूध का अभाव नहीं रहा। !
राजीव भाई के विडियो पाने के लिए link पर click कर चैनल subscribe करें ..
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पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर अधिक प्रचार-प्रसार के कारण लोगो को देसी-और विदेशी गायों में अंतर तो अच्छे से मालूम हो गया है,लेकिन देसी गाय की नस्लें लगतार ख़राब की जा रही है ,
अब इन अंग्रेज़ो ने और नई चाल-चली है जब से इनको पता चला है की भारतीय लोग देशी गाय और सूअर से विकसित विदेशी गाय (जर्सी ,होलेस्टियन ,फ्रीजियन) मे अंतर समझने लगे है !! तब से इन अंग्रेज़ो ने हमारी देशी गाय की नस्ल को भी बर्बाद करने का नया यड्यंत्र रचा है !
भारत में वर्तमान में लगभग 37 प्रकार की देसी गायों की नस्लें पाई जाती है,जैसे, गिर गाय,साहिवाल,लाल सिंधी,राठी,थरपार्कर,कांक्रेज ,ऐसे कुल 37 प्रकार की देसी गायों की नस्लें है !
अब जब गायों के गर्भाधान का समय आता है,तो प्राकृतिक ढंग यह है कि गाय जिस नस्ल की हो उसी नस्ल के बैल के वीर्य से उसका गर्भाधान होना चाहिए,जैसे गिर नस्ल की गाय है , तो बैल भी गिर नस्ल का होना चाहिए ,साहिवाल नस्ल की गाय है तो बैल भी साहिवाल नस्ल का होना चाहिये !
लेकिन ये क्या कर रहे है कि कृत्रिम गर्भधारण विधि द्वारा विदेशी (जर्सी ,होलेस्टियन ,फ्रीजियन) सांडो का वीर्य लेकर भारतीय गौ माता को इंजेक्शन से ठोका जा रहा है और गर्भवती बनाया जा रहा है !! इसके लिए 80 बैल विदेशो से मंगवाए जा रहे है !
सरकार का एक मंत्रालय है(NDDB), National Dairy Development Board उसमे बैठे अधिकांश मूर्खो के मूर्ख ये काम करने जा रहे है पर इसमें एक आध है ऐसे ही व्यक्ति हैं जो इसका विरोध भी कर रहे हैं पर उनका स्वर्ग बहुत धीमा कर दिया गया है ! सरकार ने तो ये नियम बना डाला है कि सरकारी विभाग में किसानो को कृतिम गर्भाधान के लिए जो वीर्य मिलेगा वो विदेशी बैलों का ही होगा ! जब से कृषि ट्रैक्टरों से होने लगी है भारतीय बैल तो कत्लखाने में कटने जा चुके है !
परिणाम ये हो रहा है पूरी की पूरी भारतीय गाय की नस्ल ही खराब हो रही है ! उसमे विदेशी सूअर से विकसित (जर्सी ,होलेस्टियन ,फ्रीजियन) गायों जैसे अवगुण आ रहे है ,गाय सारा दिन आलसी होकर बैठी रहती है ,ज्यादा चलती फिरती भी नहीं ,तरह तरह की बीमारियाँ उसको लग रही है ,उसके मूत्र मे जो ओषधीय गुण है वो भी खत्म हो रहे है !!
आप खुद सोचिये अगर बैल विदेशी नस्ल का है और गाय भारतीय नस्ल की (गिर,साहिवाल) अदि है और जब इनका गर्भाधान होगा फिर जो आगे नस्ल आयेगी ,वो साहिवाल या गिर नहीं होगी वो विकृत हो जायेगी !
इस प्रकार दूध की मात्रा बढ़ाने के बहाने से बची कुची भारतीय गायों की नस्लों को ख़त्म किया जा रहा है !
दूध की मात्रा बेशक विदेशी गायों की तरह बढ़ भी जाये लेकिन उसका करोगे क्या ?? जहर कम हो या ज्यादा उसका परिणाम एक होता है आपको बीमारियाँ आएंगी ,और आप मरोगे ! ऐसे जहरीले दूध की मात्रा बढ़ा कर आप क्या कर लोगे ??
जिस देशी गौ माता को हम भाव नहीं दे रहे ! हमारी उसी देशी गौ माता को ब्राजील वाले अपने देश लेकर जा रहे है और उसकी संख्या बढ़ाकर 2 लाख डालर ( लगभग 1 करोड़ ) से ज्यादा मे एक गाय बेच रहे है !! और हम अधिक दूध के चक्कर मे विदेशी (जर्सी ,होलेस्टियन ,फ्रीजियन ) A1 केटागिरी का दूध पी रहे है ! 1970 के दशक में ब्राजील 10000 भारतीय गौवंश अपने देश ले गया था आज उनकी संख्या 1 करोड़ 50 लाख को पार कर गई है !
अपनी देसी भारतीय गाय हम लोगो ने या तो क़त्लखानों में काटने के लिए भेज दी ,और जो बची-कुची भारतीय गाय की नस्लें है उसे हम विदेशी बैलों के वीर्य के टीके लगाकर ख़त्म कर रहे है !!
हमारे मूर्ख नीति निर्धारकों ने दूध की मात्रा को गौमाता की उपयोगिता का मापदंड बना दिया। भारतीय संस्कृति का इससे बड़ा अपमान क्या हो सकता था। मित्रो हमने अपनी कमियों को सुधारने की बजाय अपनी गौमाता पर ही कम दूध देने का लांछन लगा दिया। इतिहास गवाह है कि भारत वर्ष में जब तक गौ वास्तव में माता जैसा व्यवहार पाती थी – उसके रख-रखाव, आवास, आहार की उचित व्यवस्था थी, देश में कभी भी दूध का अभाव नहीं रहा। !
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