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धारोष्ण दुध अमृत क्यों है?
  पृष्टतनाव (Surface Tension) और श्यानता (Viscosity)
1. अपां फेनेन नमुचे: शिर इन्द्रोदवर्तय: ।
विश्वा यदजय: स्पृध: ।। RV 8.14.13, AV20.29.3 ,Yaju 19.71
अपां फेनेन (अपाम्‌) जलों को  (फेनेन) फैंट कर फैन बना कर वृद्धि करना |  एक अत्यंत आधुनिक विज्ञान low surface tension का  इस वेद मंत्र का अभिप्राय इस प्रकार होता है. “ इन्द्र  एक विजयी पुरुष जलों की वृद्धि कर के उन में परस्पर स्पर्धा करते हुए (नमुचि) रोगाणु शत्रुओं के सिर काट कर विश्व में उत्कृष्टता को प्राप्त करते हैं.
 2. समुद्रोsसि नभस्वानार्द्रदानु: शम्भूर्मयोभूरति मा वाहि स्वाहा| यजु 18.45अ  
2.मंत्र द्वारा ऐसे जल के समुद्र का वर्णन किया है जो सब ओर से सुख के प्रदान करने वाला होता है.  नभस्वानार्द्रदानु: -नभ्‌ का शाब्दिक अर्थ है टूटना –Killed नभस्वान्‌ का अर्थ हुवा जल जो स्वयं टूट  कर आर्द्रदानु: औरों के प्रति दयाद्र हृदय वाला होता है भौतिक स्तर पर ऐसा जल अधिक  आर्द्रता लिए होता है. Such water develops more wetting property, because it has lower SURFACE TENSION- (a physically measureable property)   | यहां जल के ऐसे स्वरूप का वर्णन है जिस का पृष्ट तनाव बहुत कम हो जाता है । आधुनिक विज्ञान के अनुसारSurface Tension बहुत कम हो जाता है ।    जब जल प्रपातों और भंवर से प्रभावित होता है, जैसे पर्वतीय क्षेत्र में जब गङ्गा का जल प्रपातों और भंवर से प्रभावित होता है, तो उस जल का पृष्ट-तनाव surface tension बहुत कम हो जाता है.
3. द्रवन्न: सर्पिरासुति: प्रत्नो होता वरेण्य: । सहसस्पुत्रो अद्भुत:  ।।RV 2.7.6
  3.(द्रवन्न:) - आहार से उत्पन्न रस ,(सर्पिरासुति: = सर्पिर +असुति: ) - जब मानव शरीर में सर्प के समान तीव्र गति से सरकने वाले द्रव्य होते हैं तब वे, ( असुति: ) -  रोगों को शरीर से बाहर फैंकने वाले  होते हैं, (प्रत्न:)-प्राचीन परम्परा by inheritance ( होता)  – यज्ञादि करने वाले विद्वान जन इस ज्ञान का (वरेण्यं ) - वरण करते हैं | (सहसस्पुत्र:) - माता पिता के स्वच्छ ब्रह्मचार्य युक्त जीवन , उचित आहार और यज्ञादि कर्म पर उन के ब्रह्मचर्य और विद्यादि गुणों से शरीर और बलपूर्ण आत्मा के  ही  रेतस्‌ में तीव्र गति करने वाले शुक्राणु द्वारा सहस्रों अद्भुत उत्तम गुणवान सन्तान  होती है | यह अत्यंत महत्वपूर्ण शारीरिक विज्ञान है जिसे आधुनिक चिकित्सा विज्ञान आहार में HDL fats और कम पृष्टतनाव के द्रव्यों low Surface tension intercellular body fluids के महत्व द्वारा दीर्घायु और मानव स्वास्थ्य से जोड़ कर देखता है | आधुनिक के अनुसार वनस्पतियों की भी बढ़ोतरी और  गुणवत्ता  के लिए कम पृष्टतनाव के द्रव्यों का low Surface tension intercellular body fluids उर्वरकों के द्रव्यों पौधों की जड़ों से (पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षन के विरुद्ध)  उपर चढ़नें का बड़ा महत्व है  |
धारोष्ण दूध का पृष्टतनाव (Surface Tension) साधारणत:  40 के लगभग होता है । इस के परिणाम स्वरूप प्रकृति में उपलब्ध सब पेय पदार्थों में एकमात्र धारोष्ण दूध मानव स्वास्थ्य के लिए सब से अधिक पौष्टिक और लाभकारी  है । इसी लिए धारिष्ण दूध को ‘अमृत कहा । महाभारत में युधिष्ठिर ने यक्ष प्रश्न  ‘अमृतं किम्‌’ का उत्तर दिया था ‘गो पय:’ ।
( डेरी उद्योग  द्वारा  क्रीम निकले दूध  जिसे स्वास्थ्य के लिए लाभदायाक समझा जाता है यह पृष्टतनाव लगभग 60 होता जिस के सेवन से शरीर को सम्भत: कोइ लाभ नहीं  होगा । इस के विपरीत दूध से निकली क्रीम का पृष्टतनाव 40 के लगभग होता है  जो अत्यंत स्वास्थ्यकर होती है । )
4. श्रातं मन्य ऊधनि श्रातं अग्नौ सुशृतं मन्ये तदृतं नवीयः ।
 माध्यन्दिनस्य सवनस्य दध्नः पिबेन्द्र वज्रिन्पुरुकृज्जुषाणः  ।। RV10.179, AV7.72.3
यद्यपि धारोष्ण दुग्ध,  गौ द्वारा स्वयं अपने शरीर में पकाया हुवा है ,  और सब से श्रेष्ठ आहार है, परंतु दोपहर को भोजन में पके दाल  भात इत्यादि के  साथ  दही का सेवन करना चाहिए.

 5.गौरिन्मिमाय सलिलानि तक्षत्येकंपदी द्वीपदी सा चतुष्पदी |
अष्टापदी नवपदी वभूवषी सहस्राक्षरा परमे व्योमन्‌ || RV1.164.41,AV9.10.21 4. (गौरिन्मिमाय सलिलानि तक्षती) गौ अपने शरीर में दूध के  प्रथम बनने वाले रसों अपनी ध्वनी से और विभिन्न प्रकार से उलट पुलट कर बिलोती है ।  इस प्रकार दूध में आधुनिक विज्ञान के अनुसार 9 आवश्यक महत्वपूर्ण तत्व उपस्थित हो जाते हैं।  मानव स्वास्थ्य के लिए यह अत्यावश्यक तत्व  Lysine, Cystine,   Aspartic
Acid, Tyrosine, Valine, Leucine, Arginine and Glutamine  हैं । और गौ से यह पके हुए दूध में , समुद्र समान उधनी से सहस्र धाराओं की वर्षा के समान प्राप्त होते हैं ।

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