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महाशिवरात्रि का पर्व पर हमारी सनातन परंपरा में सामाजिक समरसता का योगदान

 


यादों के झरोखे से ******************
साधु रघुवर दास " यादव "..बस्ती DM आफिस में माली पद पे कार्यरत थे ..!
संत आदमी ..जटा जूट धारी रघुवर दास का गांव में बड़ा सम्मान था ..!
गांव में पुरुब पोखरा के किनारे एक शिव मंदिर रघुवर दास ने अपने निजी खर्चे से अपनी निजी जमीन पे बनवाया था ..!
साप्ताहिक छुट्टी में रघुवर दास गांव आते और मंदिर परिसर की साफ सफाई ...,फूल पत्ती की देखभाल ...लान क्यारी में दिन भर लगे रहते ..!
उनका साथ उनके परिवार के अलावा पूरा यादव बहुल गांव के यादव भी देते थे ..!
शिवरात्रि ...जन्माष्टमी पे विशेष आयोजन गांव के समस्त यादव बंधु रघुवर दास के अगुवाई में करते थे ..! भंडारा भी चलता था ..!
आसपास के अन्य ब्राह्मण बहुल गांवों में ऐसी रौनक न थी ...।
थोड़ी बहुत कंपटीशन पड़ोस के गांव के चौरसिया लोग करते थे ..मगर हमारे गांव की बात ही निराली थी ..!
हर साल राम लीला का आयोजन भी होता था ..!
चूंकि यादव बहुल गांव था ...अतः रामलीला कमेटी में राजिंदर तिवारी और रविन्द्र तिवारी ...दो बाभनो के अलावा सारे पात्र कलाकार और मैनेजमेंट से ले के रुपये पैसे की बेवस्था रामचन्द्र यादव ...हरिराम यादव ..निरंजन यादव और बीसों अन्य यादवों के ही जिम्मे रहता ..! रामलीला का फंड जुटाने यादव लोग दिल्ली लुधियाना तक जाते थे ..!
फिर उन्ही दिनों अयोध्या में शुरू हुआ राममंदिर आंदोलन ..!
गांव के ही निरंजन यादव के नेतृत्व में यादवों की टीम गांव गांव जा के ईंट इकट्ठा करती थी ..!
हम भी साथ जाते थे ..!
फिर उसी समय मंदिर आंदोलन को कुचलने के लिए B P सिंह ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू कर दिया ..!
यादवों को आरक्षण मिल गया ..! अब यादव संविधानिक तौर पे सवर्ण से दलित ...शोषित ..पिछड़े घोषित हो गए ..।।
फिजाओं में यादव उत्पीड़न की कहानियां तैरने लगीं ..!
बच्चा बच्चा बताने लगा के कैसे उसके बाप दादा को बाभनो ने पिछड़ा बना के रखा ..!
गांव में रहने वाले सिर्फ सात घर ब्राह्मण अत्याचारी घोषित किये गए ..!,
150 घर यादवों के उत्पीड़न से तंग आ के चार घर ब्राह्मणों ने गांव छोड़ दिया .! अब वहां सिर्फ तीन घर रह गए ।।
तुरन्त ही साधु रघुवर दास "यादव"के पुत्र रामवीर यादव ने मंदिर परिसर में अपनी चार भैंसें बांध दी।।
मंदिर के भंडार गृह को भैंस की घारी बना लिया ..!
फावड़े से फूल पत्तियां साफ कर के मंदिर परिसर में उपले थापने लगे ...भिटौरे खड़े कर दिए गए ..!   
तब से आज तक रामलीला नही हुई ..!  मंदिर में यादवों ने ताला जड़ दिया ..!
फिर कभी शिवरात्रि और जन्माष्टमी पे कभी कोई आयोजन भी नहीं हुआ  ..!
समय के साथ साथ इस तरह का आचरण बढ़ता गया ।।
मंडल ने सारी सामाजिकता तार तार कर दी ।।
आज सम्पन्न यादवों की संपन्नता देख के ...ओबीसी में शामिल होने की होड़ लग गई है ..!
यादवों के हीे समकक्ष जाट ...,पटेल ...,मराठा जैसे भूमिपति ..क्षत्रप .ओबीसी में शामिल होने के लिए देश को आग लगाने पे तुले हुए हैं ..!
देश की चिंता के बजाय हर हाल में अपने लाभ की चिंता है ..! यादवों द्वारा आरक्षण को जारी रखने के लिए आतंकी गतिविधियों तक का समर्थन किया जा रहा है ..!
वैसे तो ये समय था ओबीसी आरक्षण पे पुनर्विचार का ..!
पर उसके बजाय हम लिंगायत के रूप में एक और विभाजन करने जा रहे हैं ..!
हम सुधरेंगें नहीं ....हम नष्ट होंगे ..!
क्योंकि जो चीज सुधरती नही वो नष्ट हो जाती है ..!
ये प्रकृति का शाश्वत सच है ..
🌷 *शिवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *वैसे तो भगवान शिव का अभिषेक हमेशा करना चाहिए,लेकिन शिवरात्रि का दिन कुछ खास है। यह दिन भगवान शिवजी  का विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। कई ग्रंथों में भी इस बात का वर्णन मिलता है। भगवान शिव का अभिषेक करने पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है मनोकामना पूरी होती है। धर्मसिन्धू के दूसरे परिच्छेद के अनुसार,अगर किसी खास फल की इच्छा हो तो भगवान भोलेनाथ की आराधना इस शिवरात्रि मैं जरूर करनी चाहिए
🌷 *महाशिवरात्रि* 🌷
🙏🏻 *अर्ध रात्रि की पूजा के लिये स्कन्दपुराण में लिखा है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को 'निशिभ्रमन्ति भूतानि शक्तयः शूलभृद यतः । अतस्तस्यां चतुर्दश्यां सत्यां तत्पूजनं भवेत् ॥'  अर्थात् रात्रिके समय भूत, प्रेत, पिशाच, शक्तियाँ और स्वयं शिवजी भ्रमण करते हैं; अतः उस समय इनका पूजन करने से मनुष्य के पाप दूर हो जाते हैं । शिवपुराण में आया है “कालो निशीथो वै प्रोक्तोमध्ययामद्वयं निशि ॥ शिवपूजा विशेषेण तत्काले ऽभीष्टसिद्धिदा ॥ एवं ज्ञात्वा नरः कुर्वन्यथोक्तफलभाग्भवेत्” अर्थात रात के चार प्रहरों में से जो बीच के दो प्रहर हैं, उन्हें निशीधकाल कहा गया हैं | विशेषत: उसी कालमें की हुई भगवान शिव की पूजा अभीष्ट फल को देनेवाली होती है – ऐसा जानकर कर्म करनेवाला मनुष्य यथोक्त फलका भागी होता है |*
🙏🏻 *चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं। अत: ज्योतिष शास्त्रों में इसे परम कल्याणकारी कहा गया है। वैसे तो शिवरात्रि हर महीने में आती है। परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहा गया है। शिवरहस्य में कहा गया है ।*
🌷 *“चतुर्दश्यां तु कृष्णायां फाल्गुने शिवपूजनम्। तामुपोष्य प्रयत्नेन विषयान् परिवर्जयेत।। शिवरात्रि व्रतं नाम सर्वपापप्रणाशनम्।”*
🙏🏻 *शिवपुराण में ईशान संहिता के अनुसार “फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि। शिवलिंगतयोद्भूत: कोटिसूर्यसमप्रभ:॥” अर्थात फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में आदिदेव भगवान शिव करोडों सूर्यों के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए इसलिए इसे महाशिवरात्रि मानते हैं।*
🙏🏻 *शिवपुराण में विद्येश्वर संहिता के अनुसार शिवरात्रि के दिन ब्रह्मा जी तथा विष्णु जी ने अन्यान्य दिव्य उपहारों द्वारा सबसे पहले शिव पूजन किया था जिससे प्रसन्न होकर महेश्वर ने कहा था की “आजका दिन एक महान दिन है | इसमें तुम्हारे द्वारा जो आज मेरी पूजा हुई है, इससे मैं तुम लोगोंपर बहुत प्रसन्न हूँ | इसीकारण यह दिन परम पवित्र और महान – से – महान होगा | आज की यह तिथि ‘महाशिवरात्रि’ के नामसे विख्यात होकर मेरे लिये परम प्रिय होगी | इसके समय में जो मेरे लिंग (निष्कल – अंग – आकृति से रहित निराकार स्वरूप के प्रतीक ) वेर (सकल – साकाररूप के प्रतीक विग्रह) की पूजा करेगा, वह पुरुष जगत की सृष्टि और पालन आदि कार्य भी कर सकता हैं | जो महाशिवरात्रि को दिन-रात

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