मध्यप्रदेश में है स्थितमध्यप्रदेश के छतरपुर जिले से 80 किलोमीटर दूर पर बाजना कस्बे के पास सघन वन में स्थित भीमकुंड एक प्राकृतिक जलस्त्रोत है। इस जलस्त्रोत का पानी बडा ही मीठा और पीने योग्य है। कई वैज्ञानिकों की टीम मिलकर भी इस बात का पता नहीं लगा पायी है कि इस जलकुंड में पानी कहां से आता है लेकिन कई प्रयास के बाद भी इस बात का पता नहीं चल सका। भीमकुंड जहां स्थित है उसके दूर दूर तक कोई नदी, तालाब और कोई पानी का स्त्रोत नहीं है साथ ही जब सूखा पडता है तब भी इस जलकूंड में से एक बूंद भी पानी कम नहीं होता।
महाभारत से जुडी है कथाभीमकुंड बनने की पौराणिक कथा महाभारत काल से जूडी हुयी है। कहा जाता है कि अज्ञातवास के समय पाण्डवों ने अपना बहुत समय इसी क्षेत्र में बिताया था। इसी वन में विचरण के दौरान एक बार जब द्रोपदी को प्यास लगी तो भीम ने बडे वेग से अपनी गदा का जमीन पर प्रहार किया तो वहां इस पाताली कुंड का निर्माण हो गया जिसमें अथाह पानी निकला। भीम के प्रहार के कारण बने इस कुंड का नाम भीम के नाम पर भीमकुंड पडा।
पानी है बेहद साफभीमकुंड का जल बेहद साफ और निर्मल है इसमें बहुत अंदर तक साफ साफ दिखयी देता है। इसके पानी की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है और लोग इसे अपने साथ बोतलों में भी भरकर ले जाते है। यहां आसपास कई गुफायें भी बनी हुयी है जिनके बारे में कहा जाता है कि यहां पर पाण्डव रूके थे। जहां पर भीम ने जमीन पर प्रहार किया था वहां चट्टाने गोल आकार में ही कटी हुयी दिखती है। यहां जोर से बोलने पर आवाज चारों और गुंजती प्रतीत होती है।

डिस्कवरी की टीम भी हुयी फेलकहा जाता है कि साल 2004 में जब सुनामी आयी थी तब इस कुंड में 20 फुट उॅची लहरें उठी थी जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में फैली थी तब इस कुंड की जांच करने के लिये डिस्कवरी की टीम यहां आयी थी। लेकिन कई दिनों के रिसर्च के बाद भी टीम यह पता नहीं लगा पायी की यह कुंड कितना गहरा है और इसमें पानी कहां से आ रहा है। उस समय डिस्कवरी टीम अपने साथ कई अत्याधुनिक उपकरणों के साथ आयी थी लेकिन तो भी उन्हें सफलता नहीं मिली।




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