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दिसंबर यानि क्रिसमस का महीना शुरू हो गया है. दुनिया के सैकड़ों देशों के अरबों लोग जो ईसा को मानतें हैं उन सबकी आस्था का त्योहार 'क्रिसमस' इसी महीने के अंत में आता है. इन सबके साथ हमारा भारत भी ईसा के कथित अनुचरों के सेवा-कार्यों के छलावे से अभिशप्त होकर अलगाव की आंधी में जल रहा है. ऐसे में सेमेटिक परिवार के इस सबसे बड़े सदस्य और उनके लोगों के बारे में प्रारंभिक जानकारी होना हमारे लिये अनिवार्य आवश्यकता है.

इसलिये कल से ईसा, चर्च और बाईबल पर कुछ जानकारीपूर्ण आलेख लिख रहा हूँ. सहेज कर रखियेगा...आगे बहुत काम आयेगा.

आने वाला समय बौद्धिक युद्ध का है..याद रहे..
#मसीही_धर्म_शिक्षा : भाग-३
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'बाईबल' को जानिये
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दो वर्ष पूर्व इसी दिसंबर महीने में मैंने चर्च के एक फादर के साथ 2012 में हुआ अपना एक संवाद यहाँ लिखा था. उस संवाद के दौरान फादर ने जब मुझसे ये कहा था कि ईसा के शरण में आना ही मुक्ति की राह है तो मैंने उनसे पूछा था कि मेरे हिसाब से तो दुनिया में एक भी ईसाई नहीं है जो परमेश्वर के शाप से मुक्त है तो फिर ईसाई होकर मैं अपनी मुक्ति को कैसे कन्फर्म मान लूँ?

फादर बोले, ये आप कैसे कह रहे हो कि हर ईसाई शापित है?

मैंने कहा, ये मैं नहीं आपकी 'बाईबल' कहती है. अगर आप अपनी किताब पढ़ेंगें तो उसकी सबसे आख़िरी किताब "प्रकाशितवाक्य" में लिखा है:-

"I warn everyone who hears the words of the prophecy of this scroll: If anyone adds anything to them, God will add to that person the plagues described in this scroll. And if anyone takes words away from this scroll of prophecy, God will take away from that person any share in the tree of life and in the Holy City, which are described in this scroll." (Revelation, 22:18-19)

यानि, " यदि कोई मनुष्य इन बातों (मतलब बाईबिल के पद) में कुछ बढ़ाये, तो परमेश्वर उन विपत्तियों को जो इस पुस्तक में लिखीं हैं, उस पर बढ़ायेगा और अगर कोई इस पुस्तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के पेड़ और पवित्र नगर में से जिस की चर्चा इस पुस्तक में है, उसका भाग निकाल देगा ".ह

ये बताने के बाद मैंनें फादर से पूछा, ये बात आपकी किताब में लिखी है या नहीं? उन्होंने 'हाँ ' में सर हिलाया तो मैंनें उनको बताया कि पुराने-नियम के यूनानी भाषा में अनुवाद कार्य के बाद बहुत सारी किताबें सामने आ गई थी जिससे ये शंका उत्पन्न हो गई थी कि इनमें से वो कौन सी किताबें हैं जिसे पवित्र-धर्मशास्त्र में शामिल किया जाये. ये समस्या मसीह ईसा के समय भी उपस्थित थी इसलिये उनके कथित (?) सूलीकरण के करीब सत्तर साल बाद इस समस्या को सुलझाने के लिये उस वक़्त के लगभग सौ के करीब 'रब्बी' जेरूसलम के पश्चिमी हिस्से के एक यहूदी धर्मालय "जामनिया" में इकट्ठे हुये थे जहाँ उनके दो दलों के बीच इस विषय पर बहुत भयंकर विवाद हो गया था.

(फादर शायद इस बात से अनभिज्ञ थे सो थोड़े जिज्ञासु दिखे)

ये विवाद था कि बाईबल के पुराने नियम में उन्तालीस (39) पुस्तकों को शामिल की जाये या 46 पुस्तकों को? पहले वाले दल के पास जो सूची थी उसमें उन्तालीस (39) पुस्तकें चिन्हित थीं जिन्हें 'केनन' कहा गया और दूसरे दल की सूची में 46 पुस्तकें चिन्हित थी जिन्हें Deuterocanonical पुस्तकें कहा गया. दोनों दलों के मध्य इस विवाद को सुलझाने की भयंकर चुनौती आ पडी थी पर इस विवाद का निपटारा न तब हो पाया और न आज हो रहा है. जामनिया में हुई सुलह की कोशिशों की भ्रूण-हत्या वहीं पर हो गई.

यानि, पहले दल की माने तो बाईबल में कुल मिलाकर 66 किताबें हैं (39 ओल्ड टेस्टामेंट में और 27 न्यू टेस्टामेंट में) और दूसरे दल वालों की माने तो बाईबल में किताबों की कुल संख्या 73 है (46 ओल्ड टेस्टामेंट में और 27 न्यू टेस्टामेंट में).

अब जब प्रोटेस्टैंट वाले 'बाईबल' छापतें हैं तो उनकी ओर से छपी 'बाईबल' में केवल 66 किताबें ही होती है और रोमन कैथोलिक, एंग्लिकन (एपिस्कोपल) तथा ईस्टर्न orthodox चर्च वाले जो बाईबल छापतें हैं तो उसमें 73 किताबें होतीं हैं.

(ये मसला आज तक चला आ रहा है, इस क्रिसमस में आप भी अपने निकटवर्ती कैथोलिक और प्रोटेस्टैंट चर्चों में जाकर कन्फर्म कर सकतें हैं)

इतना कहने के बाद मैंने उस फादर से कहा,

"इसका अर्थ ये है कि दोनों यानि प्रोटेस्टेंट और रोमन कैथोलिकों में कोई एक तो झूठा है. क्योंकि अगर सच में बाईबल में 73 किताबें ही हैं तो फिर प्रोटेस्टेंट वाले शैतान और शापित हैं क्योंकि उन्होंनें प्रकाशितवाक्य के आदेश (And if anyone takes words away from this scroll of prophecy, God will take away from that person any share in the tree of life and in the Holy City) की अवहेलना की और अगर प्रोटेस्टेंट वाले सही हैं तो फिर रोमन कैथोलिक, एंग्लिकन (एपिस्कोपल) तथा ईस्टर्न orthodox चर्च वाले गलत और शापित हैं क्योंकि उन्होंनें प्रकाशितवाक्य के आदेश (If anyone adds anything to them, God will add to that person the plagues described in this scroll) की अवहेलना करते हुये पवित्र धर्मशास्त्र में 7 किताबें और भी जोड़ दी. तो आप ये तय करके बतायें कि ईसाईयत के इन दो बड़े धडों में कौन शापित है और कौन नहीं है, जहाँ तक मेरा ताअल्लुक है तो मेरी मुक्ति की चिंता आप बाद में कर लेना पहले आपस में इस विवाद का निपटारा कर लो.

जारी ..

#मसीही_धर्म_शिक्षा :
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'बाईबल' को जानिये
'जामनिया' के उस यहूदी धर्मालय में जब पवित्र-शास्त्र के किताबों को लेकर विवाद शुरू हुये तब वहां जो यहूदी धर्मगुरु मौज़ूद थे उन्होंनें भी यही माना कि पुराने-नियम में केवल 39 किताबों को ही शामिल किया जाये. इन विवादों के बीच बाईबिल के संकलन की प्रक्रिया को "केननाइजेशन" नाम दिया गया और आजतक ये प्रक्रिया किसी ने किसी रूप में चल ही रही है. (इसपर अलग से विस्तार से लिखूंगा)

प्रश्न है कि ईसाइयों के पास जब नया-नियम था तो आखिर उन्होंनें पुरातन-नियम को भी क्यों अपना स्वीकार किया?

ईसाइयों ने पुरातन यहूदी धर्मशास्त्र (तनाक) को स्वीकार किया इसकी कई वजहें थी. पहली और सबसे अहम वजह थी "मूल पाप" का सिद्धांत जिसके अनुसार सारी मानवजाति पापी पैदा होती है जो आदम और हव्वा के मूल पाप की वजह से पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और ईसा पर विश्वास ही उस मूल पाप से मुक्ति दिलाती है. अब आदम और हव्वा की कहानी की पुष्टि के लिये पुरातन-नियम पर अवलंबन मसीहियों की अनिवार्यता है क्योंकि आदम और हव्वा की कहानी ओल्ड-टेस्टामेंट के सबसे पहले चैप्टर में है.

दूसरी वजह ये थी कि मसीह ईसा के कई आदेश सीधा-सीधा पुरातन व्यवस्था की ओर देखने के लिये कहती थी, तीसरी वजह ये कि ईसा ने खतना, बप्तिस्मा वगैरह संस्कारों को उसी रूप में जारी रखा जैसी वो यहूदी धर्मशास्त्र में वर्णित थी, चौथी अहम वजह थी कि पुरातन-नियम को छोड़कर मसीही खुद को प्रतिश्रुत भूमि और भावी प्रजा के अधिकार से वंचित नहीं करना चाहते थे और पांचवी और सबसे अंतिम वजह थी कि मसीह धर्मगुरुओं के अनुसार 'ओल्ड-टेस्टामेंट' में 'मसीह ईसा' से संबंधित कई भविष्यवाणियाँ की गईं है.

आज 'ओल्ड-टेस्टामेंट' में कई सारी अ-वैज्ञानिक, अ-कल्पनीय, अ-ऐतिहासिक, क्रूरता और हिंसा का आदेश देने वाली बातें
तथा अश्लील और मानवजाति को शर्मसार करने वाली बातों के सामने आने की वजह से कई ईसाई खुद को ओल्ड-टेस्टामेंट से अलग कर लेतें हैं क्योंकि ओल्ड-टेस्टामेंट की बातों और कंटेट पर जबाब देने की उनकी हिम्मत नहीं होती. 8 September, 1957 को एक पत्रिका "AWAKE" में "5,0000 ERRORS IN THE BIBLE?" शीर्षक से छपे एक आलेख के अनुसार बाईबिल में पचास हज़ार से अधिक वैज्ञानिक गलतियां और विरोधाभासी बातें हैं. बाईबिल के अंदर के कई प्रसंग तो इतने अश्लील हैं कि उन्हें आप अपने घर वालों के सामने पढ़ भी नहीं सकते. शायद इसीलिये जॉर्ज बर्नाड शॉ ने बाईबिल के बारे में कहा था "The Bible is the most dangerous book on earth, keep it under lock and key. Keep the Bible out of your children's reach."

इसके अलावा बाईबल में कई बातें घोर स्त्री विरोधी हैं, कई अध्याय पशु-बलि और उनकी ऊपर क्रूरता का आदेश देती है और कई तथ्य तो ऐसे हैं जो नस्लभेदी और मानवजाति को शर्मिंदा करने वाली है. अजय कर्मयोगी

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